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  "title": "कोच्चि की खाड़ी में 26 देशों के नौसैनिकों का महाजुटान, भारत बना अगुवा",
  "summary": "भारतीय नौसेना ने कोच्चि में 26 देशों की नौसेनाओं के साथ चार दिवसीय 'ऑपरेशन सदर्न रेडीनेस 26-2' शुरू किया है, जिसकी कमान फिलहाल भारत के पास है।",
  "content": "केरल के कोच्चि में इन दिनों समंदर के रास्ते ही सुरक्षा और सहयोग की एक बड़ी कहानी लिखी जा रही है। भारतीय नौसेना ने यहां 'ऑपरेशन सदर्न रेडीनेस 26-2' नाम से एक विशेष प्रशिक्षण अभियान शुरू किया है, जिसमें अकेले भारत नहीं बल्कि दुनिया भर के 26 देशों की नौसेनाएं शामिल हो रही हैं। यह पहला मौका है जब भारत की मेजबानी में इतने बड़े पैमाने पर बहुराष्ट्रीय समुद्री प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन हो रहा है।\n\nचार दिन का यह अभियान किसके तहत हो रहा है\n20 जुलाई से शुरू हुआ यह कार्यक्रम 23 जुलाई तक चलेगा। इसे कंबाइंड मैरीटाइम फोर्स यानी CMF के बैनर तले आयोजित किया जा रहा है, जो दुनिया की अलग-अलग नौसेनाओं को साथ लाकर समुद्री सुरक्षा मजबूत करने का काम करता है। भारत के लिए यह मौका खास इसलिए भी है क्योंकि इससे पहले CMF के तहत इतने बड़े स्तर का आयोजन भारतीय धरती पर कभी नहीं हुआ था।\n\nजंगी जहाजों से हटकर, यह ट्रेनिंग है अलग तरह की\nआमतौर पर नौसैनिक अभ्यासों की चर्चा युद्धपोतों, मिसाइलों और समंदर में होने वाले युद्धाभ्यास को लेकर होती है, लेकिन इस बार तस्वीर अलग है। 'ऑपरेशन सदर्न रेडीनेस' दरअसल एक स्किल बढ़ाने वाला प्रोफेशनल प्रोग्राम है, जिसका मकसद नौसैनिक अधिकारियों को समंदर में उभर रहे नए तरह के खतरों से निपटने के लिए तैयार करना है। इस दौरान अलग-अलग देशों के अफसरों को समुद्री कानून की बारीकियां सिखाई जा रही हैं, समंदर में होने वाली गतिविधियों पर नजर रखने की तकनीक बताई जा रही है, आपस में खुफिया जानकारी साझा करने का तरीका समझाया जा रहा है। इसके अलावा नशीले पदार्थों की तस्करी रोकने, समुद्री ठिकानों की हिफाजत करने और ड्रोन जैसे आधुनिक खतरों का मुकाबला करने की ट्रेनिंग भी दी जा रही है।\n\nकोच्चि को क्यों चुना गया\nइस पूरे अभ्यास के लिए कोच्चि को चुना जाना कोई इत्तेफाक नहीं है। यहां मौजूद सदर्न नेवल कमांड भारतीय नौसेना का सबसे बड़ा और अहम प्रशिक्षण केंद्र माना जाता है। यहां मौजूद आधुनिक सिमुलेटर, ट्रेनिंग की सुविधाएं और समुद्री इंफ्रास्ट्रक्चर इतने बड़े अंतरराष्ट्रीय आयोजन के लिए बिल्कुल मुफीद हैं। इसी वजह से 26 देशों के 254 नौसैनिक प्रतिनिधि, 74 प्रशिक्षक और विशेषज्ञ, चार अंतरराष्ट्रीय संगठनों के लोग और समुद्री सुरक्षा से जुड़े कई विशेषज्ञ यहां इकट्ठा हुए हैं।\n\nकमान भारत के हाथ में, यही है असली उपलब्धि\nइस पूरे आयोजन की सबसे बड़ी बात यह है कि यह कंबाइंड टास्क फोर्स 154 यानी CTF-154 के तहत हो रहा है, और इसकी कमान इस वक्त भारतीय नौसेना के पास है। CTF-154 असल में कंबाइंड मैरीटाइम फोर्स की वह यूनिट है जो दुनिया भर की नौसेनाओं को समुद्री सुरक्षा के लिए ट्रेंड करती है। भारत के नेतृत्व में इतना बड़ा प्रशिक्षण कार्यक्रम होना यह साबित करता है कि वैश्विक समुद्री व्यवस्था में नई दिल्ली की भूमिका पहले से कहीं ज्यादा बढ़ चुकी है।\n\nअब समंदर में ड्रोन और साइबर हमले भी बड़ा खतरा\nसमुद्री सुरक्षा की चुनौतियां अब पहले जैसी सीधी-सादी नहीं रहीं। सिर्फ समुद्री डकैती की बात करना अब काफी नहीं है। हथियारों और नशीले पदार्थों की तस्करी, इंसानों की तस्करी, गैरकानूनी मछली पकड़ना, ड्रोन के जरिए हमले और साइबर अटैक जैसी नई चुनौतियां तेजी से सिर उठा रही हैं। हिंद महासागर दुनिया के सबसे व्यस्त और अहम समुद्री रास्तों में गिना जाता है, जहां से भारी मात्रा में वैश्विक कारोबार और ऊर्जा की सप्लाई गुजरती है। इस वजह से यहां की सुरक्षा अब सिर्फ किसी एक इलाके की नहीं, बल्कि पूरी दुनिया की जरूरत बन चुकी है। 'ऑपरेशन सदर्न रेडीनेस' के जरिए भारत यही संदेश देने की कोशिश कर रहा है कि आने वाले समय के समुद्री खतरों का सामना अकेले नहीं, बल्कि मिलजुलकर ही किया जा सकता है।\n\nपहले भी दुनिया के साथ मिलकर अभ्यास करता रहा है भारत\nयह पहला मौका नहीं जब भारत ने दूसरे देशों की नौसेनाओं के साथ हाथ मिलाया हो। पिछले कुछ सालों में मिलान, मालाबार, वरुणा, SIMBEX और AUSINDEX जैसे कई बड़े नौसैनिक अभ्यासों के जरिए भारत मित्र देशों के साथ अपनी साझेदारी बढ़ा चुका है। इसके अलावा हिंद महासागर क्षेत्र में क्षमता निर्माण और ट्रेनिंग को लेकर भी भारत लगातार सक्रिय भूमिका निभा रहा है।\n\nअब सिर्फ अपनी सीमा की सुरक्षा तक सीमित नहीं भारत\nयह पूरा अभ्यास इस बात का संकेत है कि भारतीय नौसेना का काम अब सिर्फ अपनी समुद्री सीमाओं की रखवाली तक सीमित नहीं रहा। भारत अब मित्र देशों की नौसेनाओं को ट्रेनिंग देने, अपना अनुभव बांटने और पूरे क्षेत्र की सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने वाले एक अहम साझेदार के तौर पर उभर रहा है। दुनिया भर में बदलते हालात के बीच समंदर अब नई रणनीतिक होड़ का अखाड़ा बनते जा रहे हैं, और ऐसे वक्त में कोच्चि से शुरू हुआ यह अभियान भारत की समुद्री रणनीति और वैश्विक असर, दोनों के लिहाज से एक अहम कदम माना जा रहा है।\n\nइसका आप पर असर\n• भारत में: यह अभ्यास दिखाता है कि भारत हिंद महासागर की सुरक्षा में एक बड़ी वैश्विक भूमिका निभाने लगा है, जिससे देश की कूटनीतिक और सामरिक साख मजबूत होती है।\n• केरल के कोच्चि में: चार दिन तक चलने वाले इस आयोजन से शहर में 26 देशों के नौसैनिक प्रतिनिधियों की मौजूदगी बढ़ेगी, जिससे स्थानीय सुरक्षा तैनाती और यातायात व्यवस्था पर असर पड़ सकता है।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. ऑपरेशन सदर्न रेडीनेस 26-2 क्या है?\nयह भारतीय नौसेना द्वारा कोच्चि में शुरू किया गया एक चार दिवसीय बहुराष्ट्रीय समुद्री प्रशिक्षण अभियान है, जिसमें 26 देशों की नौसेनाएं हिस्सा ले रही हैं।\n\n2. यह अभ्यास कब से कब तक चलेगा?\nयह 20 जुलाई से 23 जुलाई तक चलेगा।\n\n3. इसमें कितने लोग हिस्सा ले रहे हैं?\n26 देशों के 254 नौसैनिक प्रतिनिधि, 74 प्रशिक्षक व विशेषज्ञ, चार अंतरराष्ट्रीय संगठनों के प्रतिनिधि और कई अन्य विशेषज्ञ इसमें शामिल हैं।\n\n4. इस अभ्यास की कमान किसके पास है?\nयह कंबाइंड टास्क फोर्स-154 यानी CTF-154 के तहत हो रहा है, जिसकी कमान फिलहाल भारतीय नौसेना के पास है।\n\n5. कोच्चि को इस आयोजन के लिए क्यों चुना गया?\nकोच्चि स्थित सदर्न नेवल कमांड भारतीय नौसेना का प्रमुख प्रशिक्षण केंद्र है, जहां आधुनिक सिमुलेटर और समुद्री इंफ्रास्ट्रक्चर मौजूद है।\n\n6. इस ट्रेनिंग में क्या सिखाया जा रहा है?\nसमुद्री कानून, निगरानी तकनीक, खुफिया जानकारी साझा करना, तस्करी रोकना, ठिकानों की सुरक्षा और ड्रोन जैसे खतरों से निपटने की ट्रेनिंग दी जा रही है।",
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  "category": "भारत",
  "publishedAt": "2026-07-22",
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