दुर्गा पूजा से पहले कोलकाता के पुल और चौराहे सतरंगी, अल्पना कला से सजाया गया शहर दुर्गा पूजा की तैयारियों के बीच कोलकाता की सड़कों, चौराहों और पुलों को गुलाबी, नारंगी और पीले रंगों के साथ पारंपरिक अल्पना कला से नया रूप दिया जा रहा है। दुर्गा पूजा के पावन अवसर से पूर्व कोलकाता महानगर में एक अनोखा सौंदर्यीकरण अभियान चलाया जा रहा है, जिसने शहर के आम रास्तों और ओवरब्रिजों का पूरा रूप बदल दिया है। डामर की पारंपरिक काली सड़कों और सामान्य कंक्रीट के ढांचों के स्थान पर अब कई प्रमुख फ्लाईओवरों तथा चौराहों पर चटख गुलाबी, नारंगी और पीले रंगों की छटा बिखर रही है। इस विशेष पहल के तहत न केवल दीवारों और खंभों पर रंगाई की जा रही है, बल्कि जमीन पर बंगाल की पारंपरिक लोककला अल्पना के विशाल और मनमोहक डिजाइन भी उकेरे जा रहे हैं, ताकि पूरे शहर में उत्सव का जीवंत माहौल तैयार किया जा सके। गरियाहाट से लेकर पार्क सर्कस तक बदला स्वरूप इस सजावटी अभियान का सबसे अधिक असर शहर के कुछ बेहद व्यस्त और प्रमुख इलाकों में दिखाई दे रहा है। दक्षिण कोलकाता के प्रसिद्ध गरियाहाट पुल की बाहरी सतहों और हिस्सों को विशेष रूप से गुलाबी, पीले और नारंगी रंगों से रंगा गया है, जिससे यह ढांचा दूर से ही बेहद आकर्षक नजर आता है। इसके अलावा गरिया मोड़ जैसे महत्वपूर्ण जंक्शन और पार्क सर्कस कनेक्टर के निचले हिस्सों में पारंपरिक अल्पना कलाकृतियां बनाई गई हैं। अल्पना वास्तव में बंगाल की सदियों पुरानी समृद्ध लोककला है, जिसे सामान्यतः पूजा-पाठ, मांगलिक अवसरों और त्योहारों के दौरान घरों के आंगन या फर्श पर चाक, चावल के लेप अथवा रंगों से बनाया जाता है। दुर्गा पूजा के दौरान इसका सांस्कृतिक महत्व बहुत गहरा होता है। प्रशासन द्वारा इस पारंपरिक कला को बंद कमरों और चौखटों से बाहर निकालकर सार्वजनिक चौराहों और डामर की सड़कों पर उतारने का प्रयास किया गया है, जिससे महानगर में कदम रखते ही दुर्गा उत्सव का अहसास होने लगे। सांप्रदायिक सौहार्द और एकजुटता का संदेश पश्चिम बंगाल की शहरी विकास मंत्री अग्निमित्रा पॉल ने खुद गरियाहाट पुल पर पहुंचकर वहां चल रहे पेंटिंग और सजावट के कार्यों का बारीकी से निरीक्षण किया। उन्होंने इस पूरी कवायद को केवल एक सजावटी काम मानने के बजाय जनता के विश्वास और आपसी भाईचारे के प्रतीक के तौर पर प्रस्तुत किया। मंत्री ने रेखांकित किया कि पार्क सर्कस क्षेत्र में अल्पना बनाने के कार्य में हिंदू कलाकारों के साथ-साथ अल्पसंख्यक समुदाय के कलाकार भी कंधे से कंधा मिलाकर काम कर रहे हैं। विभिन्न मजहबों और समुदायों के कलाकारों का एक साथ मिलकर शहर की सजावट में जुटना आपसी एकता और सामाजिक सद्भाव का स्पष्ट प्रमाण माना जा रहा है। इस दौरान उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बहुचर्चित संकल्प 'सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास, सबका प्रयास' का उल्लेख करते हुए कहा कि जब समाज के सभी वर्ग मिलकर किसी उत्सव की तैयारी करते हैं, तो विकास और सद्भाव का असली स्वरूप सामने आता है। पार्क सर्कस कनेक्टर के नीचे तैयार की जा रही यह कलाकृति इस संयुक्त प्रयास का केंद्रीय हिस्सा बनी हुई है। चमकीले रंगों के प्रयोग पर उठे सुरक्षा के सवाल शहर को भव्य और कलात्मक रूप देने के इस कदम की जहां आम नागरिक और कला प्रेमी खूब सराहना कर रहे हैं, वहीं इसके व्यावहारिक पहलुओं को लेकर चर्चाएं भी शुरू हो गई हैं। कुछ लोगों और जानकारों ने सड़कों की सतह पर बहुत अधिक चमकीले रंगों के इस्तेमाल को लेकर अपनी चिंताएं व्यक्त की हैं। उनका तर्क है कि तेज गुलाबी, नारंगी और पीला रंग दिन की धूप या रात की कृत्रिम रोशनी में चमक पैदा कर सकता है, जिससे तेज गति से वाहन चलाने वाले चालकों का ध्यान भटकने का खतरा रहता है। सड़क सुरक्षा के मानकों के नजरिए से देखें तो तेज रंगों के कारण सड़क पर बने लेन डिवाइडर, जेब्रा क्रॉसिंग और अन्य जरूरी यातायात संकेतों को पहचानने में चालकों को असुविधा हो सकती है। हालांकि इस संबंध में कोई आधिकारिक तकनीकी सुरक्षा आकलन सामने नहीं आया है, फिर भी जानकारों का मानना है कि त्योहार की सजावट के बीच यह सुनिश्चित करना बेहद अहम है कि यातायात की सुगमता और चालकों की दृष्टि सुरक्षा पर कोई प्रतिकूल असर न पड़े। रेड रोड और हुगली नदी के घाटों तक पहुंचा अभियान शहरी विकास मंत्री अग्निमित्रा पॉल के अनुसार यह सौंदर्यीकरण अभियान केवल एक या दो पुलों तक सीमित नहीं है। शहर के सबसे प्रतिष्ठित और चौड़े मार्गों में शामिल रेड रोड पर भी इसी तरह की कलात्मक रंगाई और सजावट का काम किया गया है। इसके साथ ही दुर्गा पूजा के दौरान मां दुर्गा की प्रतिमाओं के विसर्जन और पूजा अनुष्ठानों के मुख्य केंद्र रहने वाले हुगली नदी के प्रमुख गंगा घाटों को भी नए सिरे से संवारा जा रहा है। आमतौर पर दुर्गा पूजा के दौरान कोलकाता की पहचान भव्य और विशाल पूजा पंडालों की अनूठी थीम से होती है। लेकिन इस बार पंडालों के साथ-साथ सरकारी स्तर पर शहर के प्रमुख पुलों, ऐतिहासिक रास्तों, चौराहों और नदी तटों को पारंपरिक कला तथा चटख रंगों से सजाकर एक नया प्रयोग किया गया है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि आम जनता, राहगीर और वाहन चालक इस नए कलात्मक बदलाव को लंबे समय में किस रूप में स्वीकार करते हैं। इसका आप पर असर कोलकाता की सड़कों और ओवरब्रिजों पर हुए इस बदलाव से स्थानीय यात्रियों और त्योहार के दौरान शहर घूमने वालों पर सीधा असर पड़ेगा। • कोलकाता में: शहर के प्रमुख चौराहों और पुलों पर बदले हुए रंगों के कारण आवागमन के दौरान दृश्य अनुभव पूरी तरह बदल गया है। गरियाहाट, गरिया मोड़ और पार्क सर्कस से गुजरने वाले वाहन चालकों को सड़क पर बने नए डिजाइनों के बीच वाहन चलाते समय अतिरिक्त सावधानी रखनी होगी। • यातायात सतर्कता: सड़कों पर चटख गुलाबी, नारंगी और पीले रंगों के प्रयोग से कुछ चालकों की नजरें भटक सकती हैं। रात के समय या तेज धूप में गाड़ी चलाते समय लेन संकेतों और जेब्रा क्रॉसिंग को ध्यान से देखकर ही वाहन की गति नियंत्रित रखें। • त्योहारी दर्शनार्थी: दुर्गा पूजा पर पंडाल घूमने निकलने वाले पैदल यात्रियों और पर्यटकों को सड़कों पर पारंपरिक अल्पना कला के अनोखे दृश्य देखने को मिलेंगे। लोग इन सजाए गए चौराहों और गंगा घाटों पर फोटोग्राफी के लिए रुक सकते हैं, जिससे कुछ स्थानों पर पैदल भीड़ बढ़ सकती है। • सार्वजनिक व्यवस्था: हुगली नदी के घाटों और रेड रोड के नवीनीकरण से विसर्जन और आयोजनों में शामिल होने वालों को साफ-सुथरी सुविधाएं मिलेंगी। नागरिक नगर निगम और यातायात पुलिस के दिशा-निर्देशों का पालन कर व्यवस्था बनाए रखने में सहयोग कर सकते हैं। ऐसा क्यों हुआ कोलकाता में सड़कों, पुलों और चौराहों को चटख रंगों तथा अल्पना कला से सजाने के पीछे दुर्गा पूजा उत्सव की तैयारियां और सार्वजनिक स्थानों का सौंदर्यीकरण मुख्य कारण हैं। • उत्सव का माहौल तैयार करना: दुर्गा पूजा बंगाल का सबसे बड़ा त्योहार है, जिसके स्वागत के लिए शहर भर में व्यापक स्तर पर सफाई और सौंदर्यीकरण किया जाता है। प्रशासन ने इस बार पारंपरिक पंडालों से परे जाकर सार्वजनिक ओवरब्रिजों और मुख्य चौराहों को भी उत्सव के रंगों में रंगने का निर्णय लिया। • सांस्कृतिक विरासत का प्रदर्शन: अल्पना बंगाल की एक प्रमुख पारंपरिक लोककला है, जिसे सामान्य तौर पर शुभ अवसरों पर जमीन पर बनाया जाता है। इसे सड़कों और चौराहों पर उकेरकर आम जनता और पर्यटकों के बीच राज्य की सांस्कृतिक पहचान को प्रदर्शित करने का प्रयास किया गया है। • सामुदायिक सद्भाव का प्रयास: पार्क सर्कस कनेक्टर के नीचे हिंदू और अल्पसंख्यक कलाकारों ने मिलकर काम किया है। इस संयुक्त पहल का उद्देश्य त्योहार के बहाने समाज के विभिन्न वर्गों के बीच आपसी सहयोग और सौहार्द का संदेश प्रसारित करना है। • पर्यटन और नदी तटों का विकास: रेड रोड और हुगली नदी के गंगा घाटों पर बड़ी संख्या में पूजा अनुष्ठान और विसर्जन होते हैं। इन प्रमुख स्थलों को पहले से सजाकर प्रशासन शहर की समग्र छवि को सुधारने का प्रयास कर रहा है। सवाल-जवाब 1. कोलकाता की सड़कों और पुलों को किन रंगों से रंगा जा रहा है? कोलकाता में सड़कों, चौराहों और पुलों की सतहों को गुलाबी, नारंगी और पीले रंगों से सजाया जा रहा है। 2. किन प्रमुख स्थानों पर अल्पना कला बनाई गई है? पार्क सर्कस कनेक्टर के निचले हिस्से और गरिया मोड़ जैसे मुख्य चौराहों पर पारंपरिक अल्पना कला के बड़े डिजाइन बनाए गए हैं। 3. गरियाहाट पुल पर चल रहे कार्य का निरीक्षण किसने किया? पश्चिम बंगाल की शहरी विकास मंत्री अग्निमित्रा पॉल ने गरियाहाट पुल पर पहुंचकर चल रहे पेंटिंग कार्य का निरीक्षण किया। 4. सड़कों पर चटख रंगों के प्रयोग को लेकर क्या चिंता जताई गई है? कुछ लोगों का मानना है कि सड़क पर बहुत अधिक तेज और चमकीले रंग वाहन चालकों का ध्यान भटका सकते हैं, जिससे सुरक्षा प्रभावित हो सकती है। 5. पार्क सर्कस में कलाकृति निर्माण के जरिए क्या संदेश दिया गया? पार्क सर्कस में हिंदू और अल्पसंख्यक समुदाय के कलाकारों ने साथ मिलकर काम किया, जिसे आपसी भाईचारे और सद्भाव के संदेश के रूप में रेखांकित किया गया। 6. पुलों के अलावा शहर में और किन जगहों का सौंदर्यीकरण किया जा रहा है? पुलों के अलावा रेड रोड और हुगली नदी के गंगा घाटों को भी दुर्गा पूजा से पहले सजाया और संवारा जा रहा है। https://trendkia.com/national/kolkata-ke-pula-aura-chaurahe-satarngi-alpona-kala-se-sajaya-gaya-shahara-46981 TrendKia — Har trend, sabse pehle.