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  "title": "लद्दाख से लेकर पश्चिम तक घेराबंदी मजबूत, भारतीय वायुसेना ने स्वदेशी कलपुर्जों से बढ़ाई युद्धक क्षमता",
  "summary": "भारतीय वायुसेना ने विदेशी आपूर्तिकर्ताओं पर अपनी निर्भरता को भारी हद तक घटाते हुए रोजमर्रा के इस्तेमाल वाले 97 प्रतिशत स्पेयर पार्ट्स का निर्माण देश के भीतर ही शुरू कर दिया है। इससे न केवल विदेशी मुद्रा की भारी बचत हुई है, बल्कि लंबी लड़ाइयों के दौरान वायुसेना की ऑपरेशनल तैयारियां भी बेहद पुख्ता हो गई हैं।",
  "content": "भारतीय वायुसेना ने रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की ओर एक बड़ा और ऐतिहासिक कदम बढ़ाते हुए विदेशी सप्लाई चेन पर अपनी पुरानी निर्भरता को काफी हद तक कम कर दिया है। पिछले कुछ वर्षों के दौरान किए गए ठोस प्रयासों के परिणामस्वरूप वायुसेना ने अपने रोजमर्रा के ऑपरेशनल इस्तेमाल में आने वाले लगभग 97 प्रतिशत फाइटर स्पेयर पार्ट्स का निर्माण अब देश के भीतर ही करना शुरू कर दिया है। किसी भी सैन्य बल के लिए युद्ध के दौरान कलपुर्जों की निर्बाध और निरंतर उपलब्धता उसकी कॉम्बैट रेडीनेस यानी युद्धक तैयारी की रीढ़ मानी जाती है, और इस दिशा में यह उपलब्धि वायुसेना की सामरिक ताकत को एक नया आयाम दे रही है।\n\nहवाई अड्डों और विमानों के लिए जरूरी कलपुर्जे अब देश में ही तैयार\nविदेशी कंपनियों और सप्लायरों की मनमानी से मुक्ति पाने के लिए वायुसेना ने कई बेहद महत्वपूर्ण उपकरणों और कलपुर्जों का घरेलू उत्पादन देश की अपनी फैक्टरियों और एमएसएमई के जरिए शुरू कर दिया है। इनमें विमानों की विशेष बैटरियां, इजेक्शन सिस्टम से जुड़े खतरनाक और संवेदनशील एक्सप्लोसिव कंपोनेंट्स, पायलटों के जीवन रक्षक पैराशूट, फाइटर एयरक्राफ्ट के टायर, पावर कार्ट तथा रोजाना की उड़ान के संचालन में काम आने वाले दर्जनों अन्य तकनीकी पार्ट्स शामिल हैं। एक समय ऐसा था जब इन सभी रक्षा जरूरतों के लिए पूरी तरह विदेशों की ओर ताकना पड़ता था, लेकिन स्वदेशीकरण की इस लहर ने देश की वित्तीय स्थिति को भी मजबूती दी है और पिछले पांच सालों के भीतर विदेशी मुद्रा के रूप में पूरे 582 करोड़ रुपए की भारी-भरकम बचत दर्ज की गई है।\n\n62 हजार से अधिक पार्ट्स का घरेलू स्तर पर हो रहा उत्पादन\nविस्तृत आंकड़ों के अनुसार भारतीय वायु सेना के मेंटेनेंस कमांड ने अब तक लगभग 62,300 अलग-अलग स्पेयर पार्ट्स को देश के भीतर ही विकसित और तैयार करने की शानदार क्षमता हासिल कर ली है। पिछले दो फाइनेंशियल ईयर के दौरान इस प्रमुख बल ने घरेलू कैपिटल बजट के खर्च में प्रभावशाली 90 प्रतिशत हिस्सेदारी को सफलतापूर्वक प्राप्त किया है, जो रक्षा मंत्रालय द्वारा तय किए गए मानकों और लक्ष्यों से काफी ऊपर है। इस पूरी यात्रा के संबंध में जानकारी देते हुए वायुसेना के एक अधिकारी ने बताया कि आधुनिक इनोवेशन और निजी क्षेत्र की सक्रिय भागीदारी के जरिए ऑपरेशनल यूनिट्स की जरूरत के 97 प्रतिशत स्पेयर पार्ट्स और डीसेंट्रलाइज्ड फ्लीट की ओवरहॉलिंग के लिए अनिवार्य 93 प्रतिशत कलपुर्जे अब देश में ही बनाए जा रहे हैं।\n\nसुखोई के हाइड्रोलिक बूस्टर और 3D प्रिंटिंग तकनीक का कमाल\nआसमान में किसी भी आकस्मिक परिस्थिति से निपटने और अपनी ऑपरेशनल जरूरतों को सटीक रूप से पूरा करने के लिए वायुसेना ने अपने बेड़े में अत्याधुनिक आकाश मिसाइल सिस्टम और एसएएमएआर सिस्टम जैसे पूरी तरह स्वदेशी हथियारों व रक्षा प्रणालियों को शामिल किया है। वैश्विक स्तर पर जब भी सप्लाई चेन में कोई रुकावट आती है, तो रक्षा उपकरणों के कलपुर्जों का घरेलू उत्पादन ही देश के काम आता है। वायुसेना ने फाइटर विमानों की इजेक्शन सीटों में इस्तेमाल होने वाले 76 प्रकार के एस्केप एयर एक्सप्लोसिव, 207 पावर कार्ट और आठ अलग-अलग किस्म के पायलट पैराशूट का स्वदेशीकरण कर लिया है। इसके अलावा सुखोई-30 विमानों में उपयोग होने वाले हाइड्रोलिक बूस्टर पंप भी अब देश में ही तैयार किए जा रहे हैं। आयातित पुर्जों पर निर्भरता को न्यूनतम स्तर पर लाने के लिए वर्ष 2022 में एक विशेष 3D प्रिंटिंग सुविधा भी शुरू की गई थी, जिसका इस्तेमाल विमानों की मांग के अनुसार तुरंत और जरूरी कलपुर्जे बनाने के लिए किया जा रहा है। इसके साथ ही वायुसेना निजी उद्योगों के साथ मिलकर कई नए इनोवेशन प्रोजेक्ट्स पर भी काम कर रही है ताकि स्वदेशी पुर्जों का बड़े पैमाने पर उत्पादन किया जा सके।\n\nरूस और पश्चिम के विमानों के लिए स्वदेशी कलपुर्जों पर जोर\nयह भी एक सच्चाई है कि भारतीय वायुसेना के पास अभी भी विदेशी मूल के विमानों का एक बहुत बड़ा बेड़ा मौजूद है, जिसके संचालन के लिए बाहरी स्रोतों से मंगाए जाने वाले स्पेयर पार्ट्स, एग्रीगेट्स, इंजनों, एवियोनिक्स और विशेष रिपेयरिंग सपोर्ट की लगातार आवश्यकता बनी रहती है। इस इन्वेंट्री में सुखोई-30एमकेआई, मिग-29, एमआई-17 हेलीकॉप्टर और एएन-32 ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट जैसे रूसी मूल के बेहतरीन प्लेटफॉर्म शामिल हैं, साथ ही फ्रांस की तकनीक से बने मिराज-2000 और राफेल फाइटर जेट्स तथा अन्य विदेशी मूल के सिस्टम भी इसका हिस्सा हैं।\n\nरूस-यूक्रेन युद्ध से मिले सबक और भविष्य की रणनीतिक तैयारियां\nसुखोई-30एमकेआई भारतीय वायुसेना के सबसे प्रमुख और ताकतवर फाइटर एयरक्राफ्ट्स में से एक बना हुआ है, जिसके लिए निरंतर कलपुर्जों की मांग बनी रहती है। वायुसेना ने वर्ष 2026 तक की अवधि के लिए भी इस विमान के स्पेयर पार्ट्स की खरीद से जुड़े कई महत्वपूर्ण टेंडर जारी किए हैं। हाल ही में छिड़े रूस-यूक्रेन संघर्ष ने इस बात को उजागर कर दिया कि अहम पुर्जों के लिए विदेशी सप्लाई चेन पर बहुत ज्यादा निर्भर रहना कितना बड़ा जोखिम साबित हो सकता है। इस संघर्ष के कारण मरम्मत और ओवरहॉलिंग के लिए एयरो-इंजन, जरूरी एवियोनिक्स और खास हथियारों जैसे बड़े कलपुर्जों को विदेश भेजने की प्रक्रिया में काफी बाधाएं आईं। इन सभी चुनौतियों का माकूल जवाब देने के लिए वायुसेना ने रूस निर्मित विमानों, इंजनों, एवियोनिक्स और इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर सिस्टम की उम्र बढ़ाने, उनकी मरम्मत करने और उनकी ओवरहॉलिंग के लिए विशेष प्रोजेक्ट्स शुरू किए हैं। इसके तहत वायुसेना रूस में बने स्पेयर पार्ट्स को भारत में ही बनाने और उनकी मरम्मत करने के लिए रूसी कंपनियों के साथ-साथ भारतीय घरेलू उद्योगों के साथ मिलकर पूरी मुस्तैदी से काम कर रही है।\n\nइसका आप पर असर\nभारत में: रक्षा उपकरणों के स्वदेशी निर्माण से देश के रक्षा बजट पर विदेशी मुद्रा का दबाव कम होता है और राष्ट्र की दीर्घकालिक युद्धक तैयारियां मजबूत होती हैं।\n\nवायुसेना के संदर्भ में: वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला बाधित होने की स्थिति में भी लड़ाकू विमानों और सैन्य उपकरणों की मरम्मत व संचालन बिना किसी रुकावट के जारी रह सकेगा।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. भारतीय वायुसेना ने रोजमर्रा के इस्तेमाल वाले कितने प्रतिशत स्पेयर पार्ट्स को स्वदेशी बना लिया है?\nभारतीय वायुसेना ने अपने रोजमर्रा के ऑपरेशनल इस्तेमाल वाले 97 प्रतिशत फाइटर स्पेयर पार्ट्स को देश के भीतर ही स्वदेशी रूप से बनाना शुरू कर दिया है।\n\n2. स्वदेशीकरण के कारण पिछले पांच वर्षों में कितनी विदेशी मुद्रा की बचत हुई है?\nविदेशी सप्लायरों पर निर्भरता कम होने से पिछले पांच वर्षों के दौरान विदेशी मुद्रा के रूप में 582 करोड़ रुपए की बचत हुई है।\n\n3. भारतीय वायु सेना के मेंटेनेंस कमांड ने कितने स्पेयर पार्ट्स देश में बनाने की क्षमता हासिल की है?\nमेंटेनेंस कमांड ने लगभग 62,300 स्पेयर पार्ट्स को देश में ही बनाने की क्षमता हासिल कर ली है।\n\n4. सुखोई-30एमकेआई विमानों के लिए कौन सा मुख्य पुर्जा अब देश में तैयार किया जा रहा है?\nसुखोई-30 विमानों में इस्तेमाल होने वाले हाइड्रोलिक बूस्टर पंप का स्वदेशीकरण कर लिया गया है और उन्हें देश में ही तैयार किया जा रहा है।",
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  "category": "भारत",
  "publishedAt": "2026-08-24",
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    "स्वदेशी रक्षा उपकरण",
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