लगातार सुधारों और घरेलू मांग के दम पर भारतीय अर्थव्यवस्था आठ फीसदी की रफ्तार के बेहद करीब कौटिल्य आर्थिक सम्मेलन में शक्तिकांत दास ने रेखांकित किया कि पिछले एक दशक के नीतिगत सुरक्षा उपायों, डिजिटल प्रगति और वित्तीय स्थिरता के कारण देश वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच भी तेजी से आगे बढ़ रहा है। दुनिया भर में जारी आर्थिक उथल-पुथल के बीच भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूत रफ्तार किसी आकस्मिक घटना का नतीजा नहीं है, बल्कि यह पिछले एक दशक के सोच-समझकर किए गए नीतिगत फैसलों की ठोस बुनियाद पर टिकी है। कौटिल्य आर्थिक सम्मेलन को संबोधित करते हुए भारतीय रिजर्व बैंक के पूर्व गवर्नर और प्रधानमंत्री के प्रधान सचिव-2 शक्तिकांत दास ने स्पष्ट किया कि भारत की विकास दर आठ फीसदी के आंकड़े के बेहद करीब पहुंच चुकी है। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि लगातार लागू किए गए आर्थिक सुधारों, बैंकिंग क्षेत्र के कायाकल्प, महंगाई पर प्रभावी नियंत्रण और राजकोषीय अनुशासन ने मिलकर ऐसा सुरक्षा कवच तैयार किया है, जिसने देश को हर तरह के बाहरी झटकों से बचाया है। आठ फीसदी की वास्तविक वृद्धि और अनुमान से बेहतर प्रदर्शन शक्तिकांत दास ने ताजा आंकड़ों का विश्लेषण पेश करते हुए बताया कि यदि वित्तवर्ष 2025-26 की जुलाई-सितंबर तिमाही से लेकर वित्तवर्ष 2026-27 की अप्रैल-जून तिमाही तक की पूरी अवधि का आकलन किया जाए, तो भारत की वास्तविक जीडीपी वृद्धि आठ फीसदी से भी कुछ अधिक दर्ज होती है। उन्होंने याद दिलाया कि कुछ महीने पहले फाइनेंशियल टाइम्स, लंदन को दिए अपने बयान में भी उन्होंने यही बात कही थी कि देश आठ फीसदी की विकास दर हासिल करने की दहलीज पर खड़ा है। हाल ही में समाप्त हुई जून तिमाही में भारत की जीडीपी 7.8 फीसदी की दर से बढ़ी थी, जिसने बाजार के तमाम शुरुआती अनुमानों को पीछे छोड़ दिया था। उन्होंने इस शानदार प्रदर्शन का मुख्य श्रेय देश के भीतर मजबूत घरेलू मांग और निजी निवेश के लिए बने अनुकूल माहौल को दिया। एक दशक के व्यापक सुधार और टिकाऊ सुरक्षा घेरा सम्मेलन में अपने विचार रखते हुए शक्तिकांत दास ने जोर देकर कहा कि पिछले दस वर्षों में उठाए गए आर्थिक कदम कोई तात्कालिक उपाय नहीं थे। यह एक ऐसी सुविचारित व्यवस्था थी जिसने अर्थव्यवस्था में झटकों को सहने और उनसे बहुत तेजी से बाहर निकलने की आंतरिक क्षमता पैदा की। माल एवं सेवा कर (जीएसटी) के क्रियान्वयन ने पूरे देश को एकल साझा बाजार में बदला, जबकि महंगाई को तय सीमा के भीतर रखने के नीतिगत लक्ष्य ने आम उपभोक्ताओं और निवेशकों दोनों का भरोसा बनाए रखा। इसके साथ ही देश भर में डिजिटल भुगतान का तीव्र विस्तार, बैंकों की वित्तीय सेहत को सुधारने के कड़े कदम और सरकारी स्तर पर वित्तीय अनुशासन बनाए रखने की नीति ने आर्थिक ढांचे को असाधारण मजबूती प्रदान की। मजबूत वित्तीय प्रबंधन और बाहरी क्षेत्र का संतुलन भारतीय रिजर्व बैंक के पूर्व गवर्नर ने रेखांकित किया कि भारत के बाहरी व्यापार और वित्तीय क्षेत्र का सतर्क प्रबंधन विकास के सबसे भरोसेमंद स्तंभों में तब्दील हो चुका है। देश ने अपने निर्यात में विविधता लाकर पारंपरिक बाजारों पर निर्भरता कम की है और कई प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं के साथ मुक्त व्यापार समझौते संपन्न किए हैं। इसके अलावा सेवा निर्यात में लगातार दर्ज होने वाला अधिशेष और विदेशों में रहने वाले भारतीयों द्वारा देश में भेजा जाने वाला निरंतर धन बाहरी क्षेत्र के संतुलन को स्थिर बनाए हुए हैं। उन्होंने कहा कि इन मजबूत बुनियादों के कारण ही वैश्विक अनिश्चितताओं का घरेलू अर्थव्यवस्था पर कोई बड़ा नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ा है। एआई क्रांति और भविष्य के विकास के नए रास्ते शक्तिकांत दास के मुताबिक भारत अपने विकास के एक बेहद महत्वपूर्ण मोड़ पर खड़ा है, जहां ऊंची आर्थिक वृद्धि को बरकरार रखने के लिए कृत्रिम मेधा यानी एआई क्रांति की शक्ति को पूरी तरह अपनाना अनिवार्य होगा। उन्होंने बताया कि भारत की एआई रणनीति दो प्रमुख स्तंभों पर आधारित है। पहला स्तंभ देश के भीतर ही मूल एआई मॉडल विकसित करना, उच्च क्षमता वाली कंप्यूटिंग अवसंरचना तैयार करना, सेमीकंडक्टर निर्माण को बढ़ावा देना और एक जीवंत नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र में भारी निवेश करना है। इसके साथ ही उन्होंने वित्तीय क्षेत्र के अगले दौर के विस्तार पर बात करते हुए कहा कि बुनियादी ढांचा परियोजनाओं को गति देने के लिए दीर्घकालीन पूंजी की उपलब्धता जरूरी है। इसके लिए कॉरपोरेट बॉण्ड बाजार, पेंशन एवं बीमा कोष, शहरी निकायों के वित्तपोषण और नए वित्तीय विकल्पों को और परिपक्व बनाना होगा। इसके समानांतर राष्ट्रीय ग्रीन हाइड्रोजन मिशन, इलेक्ट्रिक परिवहन, स्वच्छ ऊर्जा, टिकाऊ कृषि और चक्रीय अर्थव्यवस्था के जरिए सतत विकास को आगे बढ़ाते हुए साल 2047 तक विकसित राष्ट्र बनने के लक्ष्य को साकार करना भारत की सर्वोच्च प्राथमिकता है। इसका आप पर असर मजबूत आर्थिक विकास दर और वित्तीय स्थिरता का सीधा फायदा देश के आम नागरिकों और कारोबारियों को सुरक्षित बाजार माहौल के रूप में मिलता है। • भारत में: तेजी से बढ़ती जीडीपी देश भर में नए रोजगार के अवसर पैदा करने और बुनियादी ढांचे के विस्तार को गति देती है। आम नागरिकों के लिए स्थिर महंगाई दर और डिजिटल भुगतान का दायरा रोजमर्रा के खर्चों और वित्तीय लेन-देन को आसान बनाता है। • घरेलू उद्योगों के लिए: मजबूत घरेलू मांग और आसान वित्तीय प्रवाह के चलते स्थानीय विनिर्माण और सेवा क्षेत्र में नए निवेश के रास्ते खुलते हैं। कारोबारी अपनी विस्तार योजनाओं के लिए बॉण्ड बाजार और दीर्घावधि पूंजी का लाभ उठाने की योजना बना सकते हैं। • निवेशकों और बचतकर्ताओं के लिए: सुधरे हुए बैंकिंग क्षेत्र और अनुशासित राजकोषीय नीतियों से वित्तीय संस्थानों में जमा पूंजी की सुरक्षा बढ़ती है। शेयर बाजारों और म्यूचुअल फंडों में लंबे समय के लिए पूंजी लगाने वाले निवेशकों को स्थिर विकास का प्रतिफल मिल सकता है। • पर्यावरण एवं हरित बदलाव के लिए: राष्ट्रीय ग्रीन हाइड्रोजन मिशन और इलेक्ट्रिक परिवहन पर जोर से आने वाले वर्षों में स्वच्छ ऊर्जा से जुड़े नए क्षेत्रों में काम के अवसर पैदा होंगे। आम नागरिक भी हरित ऊर्जा और टिकाऊ जीवनशैली से जुड़े सरकारी प्रोत्साहनों का लाभ ले सकते हैं। ऐसा क्यों हुआ यह आर्थिक मजबूती किसी एक नीति के कारण नहीं, बल्कि पिछले एक दशक में व्यवस्थित रूप से लागू किए गए व्यापक संरचनात्मक सुधारों और वित्तीय सुरक्षा उपायों के तालमेल से संभव हुई है। • संरचनात्मक सुधारों की श्रृंखला: वस्तु एवं सेवा कर के लागू होने से बिखरी हुई कर व्यवस्था एक मंच पर आई और अंतरराज्यीय व्यापार की बाधाएं दूर हुईं। इसके साथ ही लचीले मुद्रास्फीति लक्ष्यीकरण ने कीमतों में अचानक आने वाले उछाल को रोककर वित्तीय अनुशासन बनाए रखा। • बैंकिंग प्रणाली का शुद्धिकरण: बैंकिंग क्षेत्र के फंसे कर्जों को निपटाने और वित्तीय नियमों को कड़ा करने से बैंकों की ऋण देने की क्षमता फिर से बहाल हुई। इसने औद्योगिक क्षेत्र और बुनियादी ढांचा परियोजनाओं को संकट के दौर में भी वित्तीय ऑक्सीजन उपलब्ध कराई। • डिजिटल भुगतान और बाहरी व्यापार प्रबंधन: डिजिटल वित्तीय नेटवर्क के विस्तार ने लेन-देन की लागत को कम किया और अर्थव्यवस्था की गति बढ़ाई। दूसरी तरफ, निर्यात विविधीकरण, मुक्त व्यापार समझौतों और विदेशी प्रेषण ने वैश्विक व्यापार के उतार-चढ़ाव से भारत का बचाव किया। सवाल-जवाब 1. शक्तिकांत दास के अनुसार भारत की वास्तविक जीडीपी वृद्धि दर कितनी दर्ज हुई है? वित्तवर्ष 2025-26 की जुलाई-सितंबर तिमाही से वित्तवर्ष 2026-27 की अप्रैल-जून तिमाही की अवधि के दौरान भारत की वास्तविक जीडीपी वृद्धि आठ फीसदी से कुछ अधिक रही है। 2. जून तिमाही में भारत की अर्थव्यवस्था ने कैसा प्रदर्शन किया था? जून तिमाही में भारत की जीडीपी विकास दर 7.8 फीसदी रही थी, जो बाजार विश्लेषकों के शुरुआती अनुमानों से बेहतर थी। 3. आर्थिक विकास को सुरक्षित बनाने में किन प्रमुख कदमों ने भूमिका निभाई? जीएसटी लागू करना, महंगाई नियंत्रण का लक्ष्य, बैंकिंग सुधार, डिजिटल भुगतान का विस्तार और राजकोषीय अनुशासन ने मिलकर विकास को सुरक्षा दी। 4. भविष्य की वृद्धि के लिए भारत की एआई रणनीति किन बातों पर केंद्रित है? यह रणनीति घरेलू एआई मॉडल, उच्च क्षमता वाली कंप्यूटिंग, सेमीकंडक्टर निर्माण और नवाचार तंत्र में निवेश बढ़ाने पर केंद्रित है। 5. भारत ने अपने विकास के लिए कौन सा दीर्घकालिक लक्ष्य तय किया है? सुधारों की गति को लगातार बनाए रखते हुए देश ने साल 2047 तक विकसित राष्ट्र बनने का व्यापक लक्ष्य तय किया है। https://trendkia.com/national/lagatara-sudharon-aura-gharelu-manga-ke-dama-para-indian-economy-atha-phisadi-ki-raphtara-ke-behada-kariba-42868 TrendKia — Har trend, sabse pehle.