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  "title": "लखीमपुर खीरी हिंसा: सुप्रीम कोर्ट ने खारिज की आशीष मिश्रा की अर्जी, जमानत की शर्तों में ढील से इनकार",
  "summary": "सुप्रीम कोर्ट ने 2021 लखीमपुर खीरी हिंसा मामले के मुख्य आरोपी आशीष मिश्रा की जमानत की शर्तों में ढील की अर्जी खारिज कर दी है। सीजेआई सूर्यकांत की पीठ ने बेटियों के जन्मदिन में शामिल होने की दलील को विचार योग्य नहीं माना।",
  "content": "2021 के लखीमपुर खीरी हिंसा मामले के मुख्य आरोपी आशीष मिश्रा को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। शीर्ष अदालत ने बृहस्पतिवार को उनकी जमानत की शर्तों में और ढील देने की मांग करने वाली अर्जी को खारिज कर दिया। अदालत ने साफ किया कि वर्तमान परिस्थितियों में पाबंदियों को कम करने का कोई ठोस आधार मौजूद नहीं है।\n\nबेटियों के जन्मदिन की दलील भी नहीं आई काम\nप्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की तीन सदस्यीय पीठ के समक्ष इस मामले की सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान आशीष मिश्रा के वकील ने अदालत से आग्रह किया कि कड़े प्रतिबंधों के कारण उनके मुवक्किल अपनी बेटियों के जन्मदिन जैसे बेहद व्यक्तिगत और पारिवारिक आयोजनों में भी शामिल नहीं हो पा रहे हैं। इस तर्क को नकारते हुए पीठ ने स्पष्ट रुख अपनाया। प्रधान न्यायाधीश ने मौखिक टिप्पणी करते हुए कहा, \"फिलहाल इस अनुरोध पर विचार करने का कोई आधार नहीं है। आवेदन खारिज किया जाता है।\"\n\nअदालत का सख्त रुख और जमानत की पाबंदियां\nआशीष मिश्रा इस समय मामले की नियमित सुनवाई का सामना कर रहे हैं। इससे पहले उन्हें कुछ कड़ी शर्तों के साथ राहत दी गई थी, ताकि मुकदमे की निष्पक्ष प्रक्रिया पर कोई असर न पड़े। बचाव पक्ष की ओर से पारिवारिक जिम्मेदारियों और निजी समारोहों का हवाला देकर पाबंदियों को लचीला बनाने का अनुरोध किया गया था। हालांकि, शीर्ष अदालत ने अभियोजन और मामले की गंभीरता को ध्यान में रखते हुए किसी भी तरह की अतिरिक्त ढील देने से स्पष्ट इनकार कर दिया।\n\nतिकुनिया गांव में हुई घटना की पूरी पृष्ठभूमि\nयह पूरा विवाद 3 अक्टूबर, 2021 को उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी जिले के तिकुनिया गांव से जुड़ा हुआ है। उस दिन स्थानीय किसान उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य के क्षेत्र दौरे का विरोध कर रहे थे। प्रदर्शन के दौरान अचानक भड़की हिंसा में कुल आठ लोगों की जान चली गई थी। आरोप है कि एक एसयूवी गाड़ी ने चार किसानों को बेरहमी से कुचल दिया था। इसके बाद मौके पर भड़की हिंसा और झड़प में गाड़ी के चालक, भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के दो कार्यकर्ताओं और एक स्थानीय पत्रकार की मौत हो गई थी। आशीष मिश्रा इस गंभीर आपराधिक मुकदमे में प्रमुख आरोपी के रूप में अदालत का सामना कर रहे हैं।\n\nइसका आप पर असर\nभारत में: यह फैसला यह दर्शाता है कि गंभीर आपराधिक मामलों में आरोपी व्यक्तियों की जमानत शर्तों में ढील केवल अत्यंत ठोस आधारों पर ही मिल सकती है।\n\nउत्तर प्रदेश में: लखीमपुर खीरी हिंसा मामले की न्यायिक प्रक्रिया में सर्वोच्च अदालत का यह सख्त रुख घटना के पीड़ितों और कानूनी कार्रवाई पर नजर रख रहे लोगों के लिए महत्वपूर्ण है।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. सुप्रीम कोर्ट ने आशीष मिश्रा की किस याचिका को खारिज किया?\nअदालत ने उनकी जमानत की शर्तों में और ढील देने की मांग वाली अर्जी को खारिज कर दिया।\n\n2. आशीष मिश्रा के वकील ने जमानत में ढील के लिए क्या तर्क दिया था?\nवकील ने तर्क दिया था कि पाबंदियों के कारण वह अपनी बेटियों के जन्मदिन जैसे पारिवारिक आयोजनों में शामिल नहीं हो पा रहे हैं।\n\n3. प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत ने अर्जी खारिज करते हुए क्या कहा?\nउन्होंने कहा कि फिलहाल इस अनुरोध पर विचार करने का कोई आधार नहीं है और आवेदन खारिज किया जाता है।\n\n4. लखीमपुर खीरी हिंसा की घटना कब हुई थी और कितने लोग मारे गए थे?\nयह घटना 3 अक्टूबर, 2021 को हुई थी, जिसमें चार किसानों सहित कुल आठ लोगों की मौत हुई थी।",
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  "category": "भारत",
  "publishedAt": "2026-08-06",
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    "लखीमपुर खीरी",
    "आशीष मिश्रा",
    "सुप्रीम कोर्ट",
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  "site": "TrendKia"
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