लखीमपुर खीरी के गोला गोकर्णनाथ सावन मेले में कांवड़ियों के इलाज के लिए चिकित्सा सेवा रथ तैनात उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी स्थित छोटी काशी गोला गोकर्णनाथ में सावन मेले के दौरान कांवड़ियों और श्रद्धालुओं की आपातकालीन स्वास्थ्य सुरक्षा के लिए अत्याधुनिक चिकित्सा सेवा रथ रवाना किया गया है। उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी जिले में स्थित प्रसिद्ध धार्मिक स्थल गोला गोकर्णनाथ, जिसे छोटी काशी के रूप में भी जाना जाता है, में पवित्र सावन मेले की तैयारियां और श्रद्धालुओं की व्यवस्थाएं जोर-शोर से चल रही हैं। इस पावन अवसर पर भगवान भोलेनाथ का जलाभिषेक करने के लिए देश के विभिन्न हिस्सों से लाखों शिव भक्त और कांवड़िये यहां पहुंचते हैं। श्रद्धालुओं की लंबी और कठिन पदयात्रा को सुगम बनाने तथा उनके स्वास्थ्य की तत्काल सुरक्षा सुनिश्चित करने के उद्देश्य से एक खास सामाजिक और चिकित्सीय पहल की शुरुआत की गई है। इसके तहत कांवड़ मार्ग पर विशेष सुविधाओं से सुसज्जित एम्बुलेंस सेवा का संचालन शुरू किया गया है, ताकि किसी भी आपात स्थिति में तुरंत उपचार मुहैया कराया जा सके। कांवड़ यात्रा मार्ग पर 24 घंटे गश्त करेगी स्पेशल एम्बुलेंस वरिष्ठ आर्थोपेडिक सर्जन डॉ. कौशल वर्मा ने इस अत्याधुनिक एम्बुलेंस को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया, जिसे चिकित्सा सेवा रथ नाम दिया गया है। यह स्पेशलिटी एम्बुलेंस पूरे सावन मेले की अवधि के दौरान उन मुख्य मार्गों पर निरंतर गश्त करेगी जहां से कांवड़िये और शिव भक्त गुजरते हैं। पैदल चलने वाले श्रद्धालुओं को अक्सर कई तरह की शारीरिक समस्याओं का सामना करना पड़ता है। लंबी दूरी तय करने के कारण पैरों में दर्दनाक छाले पड़ जाना, मांसपेशियों में अचानक खिंचाव आना, अत्यधिक थकान, शरीर में पानी की कमी यानी डिहाइड्रेशन होना और मामूली चोटें लगना आम बात है। इन सभी समस्याओं को ध्यान में रखते हुए यह सेवा रथ हर समय राहत पहुंचाने के लिए तैयार रहेगा। प्राथमिक उपचार से लेकर आपातकालीन सुविधाएं उपलब्ध सनशाइन हॉस्पिटल एंड ट्रामा सेंटर के संचालक डॉ. कौशल वर्मा के अनुसार, दूर-दराज के इलाकों से आने वाले श्रद्धालुओं की सेवा करना एक महान कार्य है। इसी सेवा भावना के साथ इस चिकित्सा रथ को तैयार किया गया है। इसमें प्राथमिक चिकित्सा के लिए जरूरी दवाओं का पूरा स्टॉक मौजूद है। इसके अलावा, अचानक गंभीर स्थिति उत्पन्न होने पर उपयोग में लाए जाने वाले आधुनिक आपातकालीन मेडिकल उपकरण भी इसमें स्थापित किए गए हैं। एम्बुलेंस में चौबीसों घंटे प्रशिक्षित पैरामेडिकल स्टाफ की टीम मौजूद रहेगी जो घटनास्थल पर ही मरीज को प्राथमिक उपचार देने में सक्षम होगी। गंभीर मरीजों को तुरंत अस्पताल पहुंचाने की व्यवस्था यदि कांवड़ यात्रा के दौरान कोई दुर्घटना घटित होती है या किसी श्रद्धालु का स्वास्थ्य अचानक अत्यधिक बिगड़ जाता है, तो यह चिकित्सा सेवा रथ बिना कोई समय गंवाए मरीज को नजदीकी अस्पताल या ट्रामा सेंटर पहुंचाने का काम करेगा। मौके पर ही त्वरित प्राथमिक देखभाल मिलने से गंभीर मरीजों की जान बचाई जा सकेगी और उन्हें सही समय पर उच्च स्तरीय इलाज मिल पाएगा। इस पहल से सावन मेले में आने वाले लाखों शिव भक्तों को एक बड़ा सहारा मिलेगा और उनकी यात्रा अधिक सुरक्षित बन सकेगी। इसका आप पर असर भारत में: सावन माह में कांवड़ यात्रा पर निकलने वाले लाखों श्रद्धालुओं के लिए प्रमुख धार्मिक स्थलों पर मेडिकल सुविधाएं बढ़ाने और त्वरित सहायता उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी। लखीमपुर खीरी में: गोला गोकर्णनाथ सावन मेले के दौरान कांवड़ मार्ग पर 24 घंटे स्पेशलिटी एम्बुलेंस तैनात रहने से श्रद्धालुओं को डिहाइड्रेशन, छाले या चोट लगने पर तुरंत मुफ़्त प्राथमिक इलाज और अस्पताल परिवहन मिलेगा। सवाल-जवाब 1. गोला गोकर्णनाथ सावन मेले में कौन सी विशेष स्वास्थ्य सुविधा शुरू की गई है? मेले में आने वाले कांवड़ियों और श्रद्धालुओं के लिए 'चिकित्सा सेवा रथ' नामक एक अत्याधुनिक स्पेशलिटी एम्बुलेंस सेवा शुरू की गई है। 2. यह एम्बुलेंस सेवा कांवड़ मार्ग पर किस प्रकार सहायता प्रदान करेगी? यह एम्बुलेंस 24 घंटे कांवड़ मार्ग पर गश्त करेगी और पैरों में छाले, डिहाइड्रेशन, चोट या मांसपेशियों में खिंचाव होने पर तुरंत मौके पर ही प्राथमिक उपचार देगी। 3. इस चिकित्सा सेवा रथ की शुरुआत किसने की है? सनशाइन हॉस्पिटल एंड ट्रामा सेंटर के संचालक और वरिष्ठ आर्थोपेडिक सर्जन डॉ. कौशल वर्मा ने इस स्पेशलिटी एम्बुलेंस को रवाना किया है। 4. गंभीर स्थिति होने पर मरीजों के लिए क्या व्यवस्था है? गंभीर रूप से बीमार या दुर्घटनाग्रस्त श्रद्धालुओं को प्राथमिक इलाज देकर बिना समय गंवाए नजदीकी अस्पताल या ट्रामा सेंटर पहुंचाया जाएगा। https://trendkia.com/national/lakhimpur-kheri-ke-gola-gokarannath-savana-mele-men-kanvariyon-ke-ilaja-ke-lie-chikitsa-seva-ratha-tainata-14335 TrendKia — Har trend, sabse pehle.