लेफ्टिनेंट जनरल शमशेर सिंह विर्क बने नए उपसेना प्रमुख, सेना की क्षमता विकास का संभालेंगे जिम्मा लेफ्टिनेंट जनरल शमशेर सिंह विर्क ने भारतीय सेना में क्षमता विकास और सस्टेनेंस के उपसेना प्रमुख के रूप में पदभार ग्रहण कर लिया है। भारतीय थल सेना के शीर्ष नेतृत्व स्तर पर एक बड़ा संगठनात्मक बदलाव देखने को मिला है। लेफ्टिनेंट जनरल शमशेर सिंह विर्क ने औपचारिक रूप से उपसेना प्रमुख (क्षमता विकास एवं सस्टेनेंस) का पदभार संभाल लिया है। उन्होंने 1 अक्टूबर से इस अहम पद की बागडोर संभाली। इस नई और बड़ी जिम्मेदारी से ठीक पहले वह देश के पश्चिमी मोर्चे पर एक सैन्य कोर के कमांडर के तौर पर तैनात थे और वहां सामरिक अभियानों का कुशल संचालन कर रहे थे। क्षमता विस्तार और साजो-सामान की देखरेख इस नवनियुक्त दायित्व के अंतर्गत लेफ्टिनेंट जनरल विर्क सेना के आधुनिक साजो-सामान, तकनीकी क्षमता विस्तार और उसे निरंतर गतिशील बनाए रखने से जुड़ी तमाम परियोजनाओं के सीधे प्रभारी होंगे। वर्तमान में तेजी से करवट लेते वैश्विक तथा क्षेत्रीय रक्षा परिदृश्य को ध्यान में रखते हुए बलों की युद्धक क्षमताओं को धारदार बनाना उनकी प्राथमिकता का प्रमुख हिस्सा रहेगा। आधुनिक हथियारों, रसद आपूर्ति और समग्र सुरक्षा तंत्र को लगातार चाक-चौबंद रखना इस पद की कार्यप्रणाली का मुख्य आधार है। वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों की सेवानिवृत्ति इस महत्वपूर्ण नियुक्ति से एक रोज पूर्व बुधवार को भारतीय सेना के कई वरिष्ठ सैन्य अधिकारी अपनी दीर्घकालिक पेशेवर सेवाएं पूरी करने के बाद सेवानिवृत्त हुए। सेना प्रमुख जनरल धीरज सेठ ने सेवानिवृत्त हुए इन सैन्य कर्मियों को भावभीनी एवं औपचारिक विदाई दी। सेना प्रमुख ने देश रक्षा के प्रति इन अधिकारियों के अनुकरणीय समर्पण और निस्वार्थ निष्ठा की भूरि-भूरि प्रशंसा की। सैन्य नेतृत्व ने इस तथ्य को रेखांकित किया कि सेवानिवृत्त सैन्य दिग्गजों का योगदान केवल युद्ध के मैदान तक ही सीमित नहीं रहा है। उनके व्यापक तजुर्बे, अनुशासित जीवन मूल्यों और रणनीतिक ज्ञान का लाभ भविष्य में भी राष्ट्र निर्माण की विभिन्न दिशाओं में मिलता रहेगा। सेना प्रमुख ने विदा हो रहे कर्मियों की सेवाओं को सशस्त्र बलों की समृद्ध विरासत का अभिन्न अंग करार दिया और उनके आगामी जीवन के सफर के लिए शुभकामनाएं व्यक्त कीं। इस घटनाक्रम के साथ एक ओर जहां नई पीढ़ी को कमान सौंपी गई, वहीं दशकों तक सीमा पर डटे रहने वाले अधिकारियों का सम्मानपूर्वक अभिनंदन किया गया। एकीकृत रक्षा स्टाफ और अग्रिम चौकियों की समीक्षा सशस्त्र बलों के भीतर चल रहे अन्य महत्वपूर्ण घटनाक्रमों के क्रम में सेना प्रमुख जनरल धीरज सेठ और भारतीय सेना के समस्त रैंकों ने मुख्यालय एकीकृत रक्षा स्टाफ के 26वें स्थापना दिवस पर शुभकामनाएं प्रेषित कीं। इस विशेष दिन पर तीनों सेनाओं के बीच बेहतर तालमेल और एकीकृत रक्षा ढांचे को सुदृढ़ बनाने में इस मुख्यालय की उत्कृष्ट भूमिका के प्रति आभार प्रकट किया गया। भारतीय थल सेना सीमाओं पर अपनी निगरानी व्यवस्था को लगातार कड़ा कर रही है। पिछले हफ्ते सेनाध्यक्ष जनरल धीरज सेठ ने केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर में तैनात चिनार कोर के अग्रिम इलाकों का सघन दौरा किया था। वहां जमीनी हकीकत परखने के लिए उन्होंने नियंत्रण रेखा के पास और भीतरी क्षेत्रों की समग्र सुरक्षा समीक्षा की तथा अग्रिम मोर्चे पर मुस्तैद जवानों से सीधा संवाद स्थापित किया। ऑपरेशन दृष्टि 2026 और आतंकवाद विरोधी रणनीति घाटी में अपने प्रवास के दौरान सेनाध्यक्ष ने तंगधार सेक्टर में संचालित ‘ऑपरेशन दृष्टि 2026’ की प्रगति और तैयारियों का भी बारीकी से मुआयना किया। उनका यह अहम दौरा ‘जय से विजय’ की प्रेरणादायी भावना पर केंद्रित रहा, जिसका मूल उद्देश्य हर सैनिक के कल्याण और अभियानगत तत्परता के बीच सशक्त सामंजस्य बनाना है। उत्तरी कमान के अधीन आने वाले चिनार कोर क्षेत्र में स्थानीय फील्ड कमांडरों ने सेना प्रमुख को सीमा पार से मिलने वाली चुनौतियों और सुरक्षा उपायों से अवगत कराया। इस दौरान एलओसी पर सख्त चौकसी बरतने, तकनीकी निगरानी और अंदरूनी इलाकों में सक्रिय आतंकवाद विरोधी अभियानों की रणनीतिक रूपरेखा भी उनके समक्ष प्रस्तुत की गई। इसका आप पर असर सेना के शीर्ष स्तर पर क्षमता विकास की जिम्मेदारी नए नेतृत्व को सौंपे जाने से रक्षा आधुनिकीकरण और सीमा सुरक्षा व्यवस्था में तेजी आने की उम्मीद है। • राष्ट्रीय सुरक्षा स्तर पर: सैन्य आधुनिकीकरण और नए हथियारों की खरीद प्रक्रिया को अधिक गति मिलेगी। इससे तीनों सेनाओं के संयुक्त अभियानों और सीमावर्ती रसद व्यवस्था में सुधार होगा। • अग्रिम सीमाओं पर: नियंत्रण रेखा और आंतरिक सुरक्षा ग्रिड में तकनीकी निगरानी उपकरणों की तैनाती मजबूत होगी। इससे आतंकवाद रोधी अभियानों में तैनात सैनिकों की सुरक्षा और अभियानगत क्षमता में वृद्धि होगी। • रक्षा आपूर्ति तंत्र: स्वदेशी और आधुनिक सैन्य उपकरणों की आपूर्ति श्रृंखला अधिक व्यवस्थित होगी। इससे लंबे समय तक चलने वाले अभियानों में संसाधनों की उपलब्धता सुगम बनेगी। • सैनिक कल्याण: अग्रिम मोर्चों पर तैनात जवानों को आधुनिक उपकरण और बेहतर रसद सहायता मिलेगी। इससे विषम परिस्थितियों में कार्य कर रहे सैनिकों का मनोबल और दक्षता बढ़ेगी। ऐसा क्यों हुआ यह प्रशासनिक और नेतृत्व बदलाव नियमित संगठनात्मक फेरबदल और आगामी रक्षा चुनौतियों के अनुरूप क्षमता विस्तार की प्राथमिकताओं के चलते हुआ है। • नियमित सेवानिवृत्ति: वरिष्ठ अधिकारियों का सेवाकाल बुधवार को पूरा होने के कारण शीर्ष स्तर पर पद रिक्त हुए। इसी क्रम में नए अधिकारियों को रणनीतिक कमान सौंपने की प्रक्रिया पूरी की गई। • आधुनिकीकरण की आवश्यकता: बदलती सामरिक चुनौतियों को देखते हुए पश्चिमी और उत्तरी मोर्चों के अनुभवी कमांडरों को योजना निर्माण में शामिल किया गया। कोर स्तर पर कमान संभाल चुके अधिकारी जमीनी जरूरतों को नीतिगत स्तर पर लागू कर सकते हैं। • एकीकृत रक्षा व्यवस्था: तीनों सेनाओं के बीच संयुक्त क्षमताओं और साजो-सामान के कुशल प्रबंधन पर विशेष जोर दिया जा रहा है। इसी दृष्टिकोण के तहत क्षमता विकास और सस्टेनेंस विंग को रणनीतिक नेतृत्व दिया गया है। सवाल-जवाब 1. लेफ्टिनेंट जनरल शमशेर सिंह विर्क को सेना में कौन सा नया पद मिला है? उन्होंने 1 अक्टूबर को भारतीय सेना में उपसेना प्रमुख (क्षमता विकास एवं सस्टेनेंस) का पदभार संभाला है। 2. इस पद पर आने से पहले लेफ्टिनेंट जनरल विर्क कहां तैनात थे? वह देश के पश्चिमी मोर्चे पर एक कोर कमांडर के रूप में अपनी जिम्मेदारी निभा रहे थे। 3. सेना प्रमुख जनरल धीरज सेठ ने हाल ही में किस क्षेत्र का दौरा किया था? उन्होंने जम्मू-कश्मीर में नियंत्रण रेखा और चिनार कोर के अग्रिम इलाकों का दौरा कर सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लिया था। 4. तंगधार सेक्टर में सेना प्रमुख ने किस अभियान की समीक्षा की? सेनाध्यक्ष ने तंगधार में ‘ऑपरेशन दृष्टि 2026’ की प्रगति और परिचालन तैयारियों का जायजा लिया था। https://trendkia.com/national/lt-general-shamsher-singh-virk-bane-nae-upasena-pramukha-sena-ki-kshamata-vikasa-ka-snbhalenge-jimma-41141 TrendKia — 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