लुटियंस दिल्ली के नजदीक बिके देश के सबसे महंगे फ्लैट्स, एक 4 BHK के लिए चुकाए 42 करोड़ एनबीसीसी ने अफ्रीका एवेन्यू स्थित एवेन्यू टावर्स में 213 सुपर लग्जरी फ्लैट्स बेचकर करीब 5,191 करोड़ रुपये जुटाए हैं, जहां सबसे बड़ा फ्लैट 42 करोड़ रुपये में बिका। देश की राजधानी के अति-विशिष्ट राजनयिक क्षेत्र चाणक्यपुरी से सटे इलाके में आलीशान रिहायश की चाहत रखने वाले धनाढ्यों ने दिल खोलकर बोलियां लगाई हैं। सरकारी नवरत्न उपक्रम एनबीसीसी (इंडिया) लिमिटेड द्वारा अफ्रीका एवेन्यू में विकसित एवेन्यू टावर्स के आवासीय परिसरों की हालिया ई-नीलामी ने राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र के रियल एस्टेट बाजार में नए कीर्तिमान स्थापित कर दिए हैं। इस विशेष नीलामी में 4 बेडरूम वाले 213 भव्य अपार्टमेंट 19 करोड़ रुपये से लेकर 42 करोड़ रुपये तक की भारी-भरकम कीमतों पर बिके हैं। कुछ विशिष्ट इकाइयों की दर 89,061 रुपये प्रति वर्ग फुट तक पहुंच गई, जिसने गुरुग्राम और नोएडा के सबसे महंगे गगनचुंबी रिहायशी प्रोजेक्ट्स को भी कड़ी टक्कर दी है। सेंट्रल दिल्ली में पहली बार निजी खरीदारों को मिला मौका अफ्रीका एवेन्यू पर तैयार किया गया यह नया आवासीय परिसर सेंट्रल दिल्ली के उस दुर्लभ भूभाग में स्थित है, जहां दशकों से केवल सरकारी अधिकारियों के बंगले और केंद्रीय कार्यालय ही मौजूद रहे हैं। चाणक्यपुरी जैसी अंतरराष्ट्रीय एंबेसी पट्टी के ठीक बगल में किसी निजी नागरिक के लिए अत्याधुनिक गेटेड कम्युनिटी में फ्लैट खरीदना अब तक असंभव माना जाता था। इसी भौगोलिक विशिष्टता और दुर्लभता के चलते देश के शीर्ष उद्योगपतियों, कॉरपोरेट प्रमुखों और दीर्घकालिक निवेशकों ने इन फ्लैट्स को हासिल करने के लिए आक्रामक बोलियां प्रस्तुत कीं। नीलामी प्रक्रिया में करीब 1,200 बोलीदाताओं ने अपनी किस्मत आजमाई, जिसके चलते सभी इकाइयों की कीमतें आधार मूल्य से काफी ऊपर निकल गईं। एनबीसीसी को मिला 5,191 करोड़ रुपये का रिकॉर्ड राजस्व आवास एवं शहरी मामलों के मंत्रालय के प्रशासनिक नियंत्रण में काम करने वाली नवरत्न सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी एनबीसीसी के इतिहास में यह किसी एकल आवासीय ई-नीलामी से प्राप्त अब तक की सबसे बड़ी धनराशि है। सार्वजनिक उपक्रम ने इस प्रक्रिया के जरिए कुल मिलाकर करीब 5,191 करोड़ रुपये का सकल राजस्व अर्जित किया है। ई-नीलामी के दौरान कुल 8.8 लाख वर्ग फुट के सुपर बिल्ट-अप क्षेत्र वाले अपार्टमेंट्स की बिक्री पूरी की गई। पूरे सौदों की औसत बिक्री दर 59,014 रुपये प्रति वर्ग फुट दर्ज की गई, जो एनबीसीसी द्वारा तय किए गए रिजर्व प्राइस से 21,853 रुपये प्रति वर्ग फुट यानी लगभग 58.8 प्रतिशत अधिक रही। आकार और कीमतों का पूरा ब्योरा इस पूरी बिक्री प्रक्रिया में शुरुआत में 262 फ्लैट्स को शामिल किया गया था, जिनमें से 49 इकाइयों की प्रक्रिया को प्रशासनिक कारणों से निरस्त कर दिया गया। इसके बाद अंतिम रूप से 213 4-BHK फ्लैटों की सफल बिक्री संपन्न हुई। खरीदारों के लिए यह संपूर्ण आवासीय इन्वेंट्री 4,239 वर्ग फुट, 4,339 वर्ग फुट और 4,779 वर्ग फुट के तीन अलग-अलग आकारों में उपलब्ध कराई गई थी। • 4,239 वर्ग फुट के फ्लैट: इस सबसे छोटे आकार की इकाइयां 19 करोड़ रुपये से लेकर 28 करोड़ रुपये के बीच बिकीं, जिनका अधिकतम भाव 70,000 रुपये प्रति वर्ग फुट तक दर्ज किया गया। • 4,339 वर्ग फुट के फ्लैट: मध्यम आकार के ये अपार्टमेंट 19.5 करोड़ रुपये से 32 करोड़ रुपये के दायरे में बिके, और इनकी अधिकतम दर 75,000 रुपये प्रति वर्ग फुट तक पहुंची। • 4,779 वर्ग फुट के फ्लैट: सबसे बड़े आकार और टॉवर की सबसे बेहतरीन लोकेशन पर मौजूद इन फ्लैट्स के लिए सबसे तीखी होड़ मची। ये इकाइयां 24 करोड़ रुपये से 42 करोड़ रुपये तक बिकीं, जिसमें कुछ चुनिंदा यूनिट्स का भाव 89,000 रुपये प्रति वर्ग फुट के स्तर को पार कर गया। सट्टेबाजों पर रोक और वास्तविक खरीदारों का दबदबा संपत्ति बाजार के जानकारों के मुताबिक, सेंट्रल दिल्ली के इस हिस्से में निजी स्वामित्व वाले लग्जरी फ्लैट्स, आधुनिक क्लब हाउस और सुरक्षित गेटेड कम्युनिटी का भारी अभाव रहा है। जब इतने विशिष्ट पड़ोस में जमीन या मकान का मालिकाना हक मिलता है, तो कीमतें अभूतपूर्व प्रीमियम हासिल करती हैं। इसके अलावा परियोजना में एक महत्वपूर्ण शर्त यह जोड़ी गई थी कि जब तक खरीदार को फ्लैट का वास्तविक कब्जा नहीं मिल जाता, तब तक वह इसे किसी अन्य को दोबारा नहीं बेच सकता। कब्जे से पूर्व री-सेल पर लगे इस कड़े प्रतिबंध ने बाजार के अल्पकालिक सट्टेबाजों और मुनाफाखोरों को नीलामी से दूर रखा, जिसके कारण केवल वास्तविक अंतिम उपयोगकर्ताओं और गंभीर लंबी अवधि के निवेशकों ने ही बोली लगाई। सरकारी पुनर्विकास योजनाओं में खर्च होगी यह भारी रकम एनबीसीसी ने स्पष्ट किया है कि आवासीय संपत्तियों की इस नीलामी से हासिल हुई 5,191 करोड़ रुपये की बड़ी रकम को दिल्ली में चल रही कई केंद्रीय सरकारी पुनर्विकास परियोजनाओं के आंशिक वित्तपोषण में लगाया जाएगा। इस व्यापक अर्बन रिन्यूअल अभियान का मुख्य लक्ष्य राष्ट्रीय राजधानी में स्थित पुरानी और जर्जर सरकारी कॉलोनियों की जमीन का इष्टतम वाणिज्यिक व आवासीय उपयोग सुनिश्चित करना है। इस रीडेवलपमेंट कार्यक्रम के तहत नौरोजी नगर, सरोजिनी नगर, नेताजी नगर, त्यागराज नगर और कस्तूरबा नगर सहित कई प्रमुख कॉलोनियों की कायापलट की जा रही है, जिससे केंद्र सरकार के कर्मियों के लिए आधुनिक आवासीय परिसरों का निर्माण तेज गति से पूरा किया जा सके। इसका आप पर असर सेंट्रल दिल्ली में रिकॉर्ड दरों पर बिके इन लग्जरी फ्लैट्स से राष्ट्रीय राजधानी के प्राइम रियल एस्टेट और सरकारी बुनियादी ढांचे पर सीधा असर पड़ेगा। • भारत में: सार्वजनिक उपक्रमों द्वारा सरकारी जमीन के मुद्रीकरण का यह सफल मॉडल देश भर के बड़े शहरों में भविष्य की शहरी पुनर्विकास योजनाओं के लिए मानक तय करेगा। इससे अन्य राज्यों में भी पुरानी बस्तियों के पुनर्विकास के लिए भारी बजट जुटाने में मदद मिलेगी। • दिल्ली में: नीलामी से मिले 5,191 करोड़ रुपये से सरोजिनी नगर, नौरोजी नगर और नेताजी नगर जैसी प्रमुख सरकारी कॉलोनियों का कायाकल्प तेजी से पूरा हो सकेगा। इससे दिल्ली में रह रहे सरकारी कर्मचारियों के लिए आधुनिक आवासीय परिसरों और चौड़ी सड़कों का निर्माण सुगम होगा। • संपत्ति खरीदारों के लिए: कब्जे से पहले री-सेल पर पाबंदी ने स्पष्ट कर दिया है कि प्रीमियम आवासीय सेगमेंट में सट्टेबाजी के बजाय वास्तविक खरीदारों को प्राथमिकता दी जाएगी। नए प्रोजेक्ट्स में निवेश करने वालों को अब लंबी अवधि के लिए पूंजी रोककर रखनी होगी। • बाजार दरों पर: 89,000 रुपये प्रति वर्ग फुट तक पहुंचे भाव लुटियंस और सेंट्रल दिल्ली के आसपास के निजी रिहायशी इलाकों में सर्किल रेट और बाजार कीमतों को ऊपर खींच सकते हैं। इससे आसपास के क्षेत्रों में किराये और जमीन की कीमतों में भी तेजी देखी जा सकती है। ऐसा क्यों हुआ सेंट्रल दिल्ली में फ्लैट्स की इतनी भारी कीमतों के पीछे दुर्लभ भौगोलिक स्थिति और सरकारी भूमि पर निजी आवास का दशकों बाद खुला अवसर मुख्य कारण रहा। • सीमित जमीन और अत्यधिक मांग: चाणक्यपुरी और अफ्रीका एवेन्यू के आसपास निजी आवासीय सोसायटियों की लगभग पूर्ण अनुपस्थिति ने इन 213 फ्लैट्स के लिए खरीदारों के बीच तीव्र प्रतिस्पर्धा पैदा की। इस इलाके में पहले कभी निजी खरीदारों को गेटेड बहुमंजिला परिसर में घर खरीदने का विकल्प नहीं मिला था। • सट्टेबाजी पर कानूनी रोक: परियोजना की शर्तों के अनुसार पजेशन मिलने तक फ्लैट्स की री-सेल पर कड़ा प्रतिबंध लगाया गया था। इस नीति ने केवल वास्तविक संपन्न परिवारों और लंबी अवधि के निवेशकों को ही नीलामी में टिकने दिया, जिससे कृत्रिम उछाल के बजाय वास्तविक मूल्य बोली में दिखा। • आक्रामक बोली प्रक्रिया: ई-नीलामी में करीब 1,200 बोलीदाताओं ने हिस्सा लिया, जिसके चलते औसत बिक्री दर आरक्षित मूल्य से 58.8 प्रतिशत तक चढ़ गई। सबसे बड़े और बेहतर लोकेशन वाले 4,779 वर्ग फुट के फ्लैट्स पर सबसे ज्यादा प्रतिस्पर्धा देखने को मिली। सवाल-जवाब 1. एनबीसीसी के ये लग्जरी फ्लैट्स दिल्ली में किस जगह स्थित हैं? ये लग्जरी फ्लैट्स सेंट्रल दिल्ली में चाणक्यपुरी के नजदीक अफ्रीका एवेन्यू स्थित एवेन्यू टावर्स परिसर में बनाए गए हैं। 2. इस ई-नीलामी में फ्लैट्स किस कीमत पर बिके हैं? इस नीलामी में 4 बेडरूम वाले 213 फ्लैट्स 19 करोड़ रुपये से लेकर 42 करोड़ रुपये के बीच बिके हैं। 3. नीलामी में सबसे ऊंची दर क्या दर्ज की गई? सबसे बड़े 4,779 वर्ग फुट के फ्लैट्स के लिए सर्वाधिक बोली 89,061 रुपये प्रति वर्ग फुट तक पहुंच गई। 4. एनबीसीसी को इस नीलामी से कुल कितना राजस्व हासिल हुआ? एनबीसीसी को 213 फ्लैटों की बिक्री से कुल करीब 5,191 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त हुआ है। 5. नीलामी से मिली राशि का उपयोग किस काम में किया जाएगा? इस राशि का इस्तेमाल दिल्ली की सरकारी कॉलोनियों जैसे सरोजिनी नगर, नौरोजी नगर और नेताजी नगर के पुनर्विकास में किया जाएगा। 6. सट्टेबाजों को रोकने के लिए नीलामी में क्या नियम बनाया गया था? नियम के तहत जब तक खरीदारों को फ्लैट का कब्जा नहीं मिल जाता, तब तक वे इसे किसी अन्य को दोबारा नहीं बेच सकते हैं। https://trendkia.com/national/lutyens-delhi-ke-najadika-bike-desha-ke-sabase-mahnge-phlaitsa-eka-4-bhk-ke-lie-chukae-42-karora-54232 TrendKia — Har trend, sabse pehle.