मध्य प्रदेश के बालाघाट में 600 करोड़ रुपये का पोंजी घोटाला, 6 अगस्त तक पुलिस रिमांड पर मुख्य आरोपी सोमेंद्र कंकरायने मध्य प्रदेश के बालाघाट जिले में 600 करोड़ रुपये के डबल मनी स्कैम का भंडाफोड़ हुआ है, जिसमें 12वीं पास मुख्य आरोपी सोमेंद्र कंकरायने और उसके साथियों को 6 अगस्त तक पुलिस रिमांड पर भेजा गया है। मध्य प्रदेश के बालाघाट जिले में करोड़ों रुपये की वित्तीय हेराफेरी का मामला तूल पकड़ता जा रहा है, जहां कथित तौर पर 600 करोड़ रुपये का विशाल पोंजी घोटाला सामने आया है। इस बहुचर्चित डबल मनी स्कैम का मुख्य सूत्रधार 12वीं पास सोमेंद्र कंकरायने बताया जा रहा है, जिसने अपनी टीम के साथ मिलकर भोले-भाले लोगों को कम समय में निवेश की रकम दोगुनी करने का लालच दिया। पुलिस ने इस मामले में गहन जांच शुरू कर दी है और मुख्य आरोपी सहित उसके सहयोगियों को 6 अगस्त तक पुलिस रिमांड पर लिया गया है। यह पूरा मामला साल 2016-17 से लेकर 2022 तक प्रशासन और पुलिस व्यवस्था के सामने बिना किसी रोक-टोक के संचालित होता रहा। अनाज व्यापार से रियल एस्टेट और पोंजी स्कीम की ओर रुझान सोमेंद्र कंकरायने का शुरुआती जीवन सामान्य रहा। उसने 12वीं की पढ़ाई पूरी करने के बाद स्नातक की डिग्री बी. कॉम हासिल करने के लिए बालाघाट का रुख किया था। हालांकि, उसने अपनी पढ़ाई बीच में ही छोड़ दी और अपने गृह गांव बोलेगांव वापस लौट आया। गांव लौटने के बाद उसने अनाज खरीद-बिक्री का कारोबार शुरू किया। इस व्यवसाय में वह स्थानीय किसानों से अनाज खरीदकर उसे अपनी गोदामों में डंप कर लेता था। जब बाजार में उस अनाज की किल्लत पैदा होती या कीमतें अचानक बढ़ जातीं, तब वह उस अनाज को बाजार में बेचकर मोटा मुनाफा कमाता था। अनाज कारोबार में सफलता मिलने के बाद सोमेंद्र का ध्यान रियल एस्टेट क्षेत्र की तरफ गया। उसने माय होम्स नामक कंपनी में निवेश करना शुरू किया। इसके लिए उसने पहले अपनी पैतृक जमीन बेची और प्राप्त राशि को निवेश में लगा दिया। इसके बाद उसने अपने करीबियों और रिश्तेदारों की जमीनों को भी बिकवाकर इसमें लगा दिया। साल 2019 में माय होम कंपनी की ओर से उसे बड़ा वित्तीय झटका लगा, जहां उसके साथ कथित तौर पर धोखाधड़ी हुई। इस नुकसान के बावजूद सोमेंद्र ने अपने कदम पीछे नहीं खींचे, बल्कि उसने लोगों को जाल में फंसाने के लिए एक खोखली पोंजी योजना की नींव रख दी। राजनीतिक गलियारों तक पहुंची घोटाले की आंच इस 600 करोड़ रुपये के वित्तीय घोटाले ने राजनीतिक रूप भी ले लिया है। जनसभाओं के दौरान पूर्व विधायक हिना कावरे ने बीजेपी जिलाध्यक्ष रामकिशोर कावरे पर गंभीर आरोप लगाए थे। उन्होंने मंच से सवाल उठाया था कि बीजेपी नेता ने तो अपना फंसा हुआ पैसा निकाल लिया, लेकिन आम गरीब निवेशकों के पैसों का क्या हुआ? उन्होंने कहा कि अनेक पीड़ित उनके पास अपनी शिकायत लेकर पहुंचे थे, जिनका आरोप था कि सत्ताधारी दल के नेता का पैसा तो वापस मिल गया, मगर उनका पैसा अटक गया। इस सार्वजनिक मंच से लगाए गए आरोपों पर रामकिशोर कावरे की तरफ से कोई जवाब नहीं आया था। वहीं दूसरी ओर, पूर्व सांसद कंकर मुंजारे ने भी इस घोटाले में राजनीतिक संरक्षण का मुद्दा उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि जब सोमेंद्र कंकरायने को पहली बार गिरफ्तार कर जेल भेजा गया था, तब बीजेपी नेता रमेश भटेरे उससे जेल में मुलाकात करने जाते थे और उसके लिए भोजन पहुंचाते थे। कंकर मुंजारे ने पूर्व मंत्री गौरीशंकर बिसेन और रामकिशोर कावरे पर भी गंभीर आरोप मढ़ते हुए कहा कि रमेश भटेरे द्वारा सोमेंद्र कंकरायने को इस गैरकानूनी कारोबार को चलाने के लिए लगातार संरक्षण प्रदान किया जा रहा था। सहयोगियों का प्रवेश और अव्यावहारिक योजनाओं का जाल साल 2019 के बाद सोमेंद्र कंकरायने के साथ हेमराज आमाडारे और अजय तिड़के जैसे सहयोगी जुड़े। शुरुआत में हेमराज उसके लिए काम करता था। सोमेंद्र ने शुरुआत में 1 साल में जमा राशि को दोगुना करने का वादा करके लोगों को आकर्षित किया था। कुछ समय बाद हेमराज आमाडारे ने योजना की शर्तें बदल दीं और महज 9 महीने में रकम दोगुनी करने का नया दांव चला। जब घोटाले की पोल खुलने की स्थिति बनने लगी, तब तीसरे साथी अजय तिड़के ने और भी लुभावना दावा करते हुए सिर्फ 3 महीने में पैसा डबल करने की योजना बाजार में उतार दी। अत्यधिक रिटर्न देने के इन फर्जी दावों के कारण योजना का खोखलापन सामने आने लगा। जब निवेशकों को उनके पैसे मिलने बंद हुए, तो बड़ी रकम लगाने वाले रसूखदार लोगों ने अपने पैसे की वसूली के लिए आपराधिक तत्वों और गुंडों का सहारा लेना शुरू कर दिया। क्षेत्र में यह जनचर्चा भी जोर-शोर से फैली कि एक प्रभावशाली राजनेता ने सोमेंद्र को लगभग एक हफ्ते तक अपने कब्जे में अगवा करके रखा और अपने 2 करोड़ रुपये के शुरुआती निवेश के बदले 4 करोड़ रुपये की वसूली कर ली। पोंजी मॉडल का भंडाफोड़ और एसपी आदित्य मिश्रा का बयान योजना के शुरुआती चरण में आरोपियों ने कुछ शुरुआती निवेशकों को रकम दोगुनी करके लौटाई थी, जिससे लोगों में भरोसा कायम हो सके। हालांकि, उनके पास ऐसा कोई वैध या व्यावसायिक निवेश ढांचा नहीं था जो इतनी तेजी से रिटर्न दे सके। पुलिस अधीक्षक आदित्य मिश्रा ने स्पष्ट किया था कि यह एक पूरी तरह से खोखली पोंजी स्कीम थी। इसमें किसी नए निवेशक से मिली रकम का इस्तेमाल पुराने निवेशकों का भुगतान करने में किया जाता था। कई बार झांसे में आए पुराने निवेशक अपना दोगुना हुआ पैसा भी दोबारा इसी स्कीम में लगा देते थे। जब नए निवेशकों का आना कम हो गया और देनदारियों का बोझ बढ़ गया, तो यह पूरा ढांचा ध्वस्त हो गया। 17 मई को पुलिस ने सोमेंद्र और उसके साथियों को गिरफ्तार कर बड्स एक्ट 2019 (अनियमित जमा योजनाएं प्रतिबंध कानून) के तहत मामला दर्ज किया। इसके बाद 27 जुलाई 2022 को सोमेंद्र को अदालत से जमानत मिल गई थी। वर्तमान में पुलिस ने उसे दोबारा हिरासत में लिया है और अदालत ने आरोपियों को 6 अगस्त तक पुलिस रिमांड पर सौंप दिया है। एसआईटी द्वारा करोड़ों की संपत्ति और चेकों की जब्ती मामले की गंभीरता को देखते हुए गठित विशेष जांच दल (एसआईटी) ने आरोपियों के ठिकानों पर छापेमारी कर बड़े पैमाने पर दस्तावेज जब्त किए हैं। एसआईटी द्वारा जब्त की गई सामग्रियों की सूची इस प्रकार है • 122 भू-खंडों की रजिस्ट्री: लगभग 18 करोड़ 61 लाख रुपये मूल्य की कुल 122 जमीनों के मूल दस्तावेज। • 617 चेक: कुल 14 करोड़ 82 लाख 24 हजार 291 रुपये मूल्य के 617 वित्तीय चेक। • निवेशक रजिस्टर: 20 बड़े रजिस्टर जिनमें हजारों निवेशकों के नाम और उनके द्वारा जमा की गई राशियों का ब्योरा दर्ज है। • अन्य दस्तावेज: कई भूमि ऋण पुस्तिकाएं, पावर ऑफ अटॉर्नी के पत्र और लगभग 1500 कोरे चेक। पीड़ितों की दास्तान और हेल्पडेस्क के माध्यम से कार्रवाई इस धोखाधड़ी का शिकार हुए अधिकांश लोग बालाघाट और उसके आसपास के दो पड़ोसी जिलों के निवासी हैं। जल्दी अमीर बनने और डबल मनी के लालच में आकर कई किसानों ने अपनी कृषि भूमि बेच दी, तो कई परिवारों ने अपने सोने-चांदी के गहने तक गिरवी रख दिए। पुलिस प्रशासन ने पीड़ितों को राहत देने और उनके दावों के सत्यापन के लिए एक समर्पित हेल्पडेस्क की शुरुआत की है। हेल्पडेस्क के माध्यम से प्रतिदिन निवेशकों की सूचियां जारी की जा रही हैं और उन्हें व्यक्तिगत रूप से बुलाकर दस्तावेजों की जांच की जा रही है। पीड़ितों का कहना है कि उन्होंने स्थानीय एजेंटों के जरिए पैसा लगाया था, इसलिए पुलिस को उन दलालों और एजेंटों पर भी सख्त कार्रवाई करनी चाहिए। इसका आप पर असर • भारत में: पोंजी या डबल मनी जैसी अनधिकृत योजनाओं में निवेश करने से पहले कंपनी का पंजीकरण और बड्स एक्ट 2019 के नियमों की जांच करना वित्तीय सुरक्षा के लिए बेहद जरूरी है। • बालाघाट (मध्य प्रदेश) में: फर्जी एजेंटों या डबल मनी स्कीम में डूबे पैसे के दावों के लिए स्थानीय पुलिस द्वारा शुरू किए गए हेल्पडेस्क पर जाकर तुरंत भौतिक सत्यापन कराएं। सवाल-जवाब 1. बालाघाट डबल मनी घोटाले की कुल अनुमानित राशि कितनी है? बालाघाट पुलिस के अनुसार, इस डबल मनी पोंजी घोटाले का कुल आकार लगभग 600 करोड़ रुपये का है। 2. इस पोंजी घोटाले का मुख्य मास्टरमाइंड कौन है? इस घोटाले का मुख्य मास्टरमाइंड 12वीं पास सोमेंद्र कंकरायने है, जिसने बोलेगांव से अपना कारोबार शुरू किया था। 3. जांच के दौरान एसआईटी ने आरोपी के पास से क्या-क्या सामान जब्त किया है? एसआईटी ने 18.61 करोड़ रुपये की 122 जमीनों की रजिस्ट्री, 14.82 करोड़ रुपये के 617 चेक, 20 रजिस्टर, भूमि ऋण पुस्तिकाएं, पावर ऑफ अटॉर्नी और लगभग 1500 कोरे चेक जब्त किए हैं। 4. समय के साथ पैसे दोगुने करने की योजना की शर्तों में क्या बदलाव आए? शुरुआत में सोमेंद्र ने 1 साल में पैसा दोगुना करने का वादा किया, जिसे बाद में हेमराज ने बदलकर 9 महीने और अजय तिड़के ने 3 महीने कर दिया था। 5. पीड़ित निवेशकों के लिए बालाघाट पुलिस क्या कदम उठा रही है? बालाघाट पुलिस ने एक डबल मनी हेल्पडेस्क शुरू किया है, जहां सूची जारी करके निवेशकों के दावों और दस्तावेजों का भौतिक सत्यापन किया जा रहा है। https://trendkia.com/national/madhya-pradesh-ke-balaghat-men-600-karora-rupaye-ka-ponji-ghotala-6-agasta-taka-pulisa-rimanda-para-mukhya-aropi-somendra-kankaray-13902 TrendKia — Har trend, sabse pehle.