# महिला सुरक्षा के संकट पर संसद का विशेष सत्र बुलाने की उठी आवाज़, योगिता भयाना ने रखा दो दिन की चर्चा का प्रस्ताव

> प्रेस क्लब ऑफ इंडिया में सामाजिक कार्यकर्ता योगिता भयाना और अधिकार अभी, न्याय अभी संगठन ने महिला सुरक्षा के गंभीर मुद्दों पर संसद का दो दिवसीय विशेष सत्र आयोजित करने का औपचारिक आग्रह किया है।

**Type:** article · **Category:** भारत · **Published:** 2026-10-06 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/national/mahila-suraksha-ke-snkata-para-parliament-ka-vishesha-satra-bulane-ki-uthi-avaza-yogita-bhayana-ne-rakha-do-dina-ki-charcha-ka-pra-44066 · **Language:** Hindi
**Tags:** महिला सुरक्षा, योगिता भयाना, संसद विशेष सत्र, प्रेस क्लब ऑफ इंडिया, दिल्ली विश्वविद्यालय, कानून व्यवस्था

देश में महिलाओं के खिलाफ बढ़ते अपराधों और सुरक्षा से जुड़ी प्रणालीगत खामियों को दूर करने के लिए देश की संसद में एक समर्पित राष्ट्रीय विमर्श की मांग तेज़ हो गई है। 5 अक्टूबर 2026 को राजधानी नई दिल्ली स्थित प्रेस क्लब ऑफ इंडिया में आयोजित एक साझा कार्यक्रम के दौरान पीपुल अगेंस्ट रेप्स इन इंडिया (PARI) की संस्थापक योगिता भयाना तथा अधिकार अभी, न्याय अभी (AANA) संगठन के प्रतिनिधियों ने सरकार और संसद के समक्ष यह बात रखी। उन्होंने देश भर में महिलाओं की सुरक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से संसद का दो दिवसीय विशेष सत्र तुरंत आहूत करने की मांग की, ताकि नीतिगत स्तर पर ठोस बदलाव किए जा सकें।

## युवाओं और छात्रों से मिले सुझावों पर आधारित पहल
संसदीय हस्तक्षेप की यह महत्वपूर्ण पहल सीधे तौर पर ज़मीनी स्तर से मिले अनुभवों और इनपुट्स पर टिकी हुई है। इस औपचारिक मांग को उठाने से पहले योगिता भयाना ने दिल्ली विश्वविद्यालय सहित देश के विभिन्न राज्यों के छात्र-छात्राओं और युवाओं के साथ व्यापक विचार-विमर्श एवं परामर्श प्रक्रिया पूरी की थी। इस संवाद सत्र के दौरान युवा महिलाओं और विद्यार्थियों ने सार्वजनिक स्थलों, शैक्षणिक परिसरों, कार्यस्थलों और ऑनलाइन डिजिटल स्पेस में सुरक्षा को लेकर रोज़मर्रा की चुनौतियों, वास्तविक चिंताओं और व्यावहारिक सुझावों को साझा किया था। इन वास्तविक अनुभवों को इस अभियान की मुख्य बुनियाद बनाया गया है।

छात्रों और छात्राओं से मिले इन सुझावों को उस ज़मीनी अनुभव के साथ जोड़ा गया है, जो पीपुल अगेंस्ट रेप्स इन इंडिया संगठन पिछले सात वर्षों से लगातार हासिल कर रहा है। यह संस्था पिछले सात साल से अपराधों से प्रभावित सर्वाइवर्स, बच्चों, शैक्षणिक संस्थानों, कार्यालयों और विभिन्न सामाजिक समुदायों के बीच निरंतर काम कर रही है। इन ज़मीनी अनुभवों और पिछले सात वर्षों की निरंतर पैरवी से निकले निष्कर्षों को संकलित करके इस राष्ट्रव्यापी मांग पत्र में शामिल किया गया है, ताकि संसद में होने वाली किसी भी चर्चा का आधार वास्तविक परिस्थितियां बन सकें।

## प्रतिक्रियावादी रवैये के बजाय रोकथाम और जवाबदेही पर ज़ोर
प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए योगिता भयाना ने मौजूदा व्यवस्था की कार्यप्रणाली पर कड़े सवाल उठाए और सोच में बुनियादी बदलाव की आवश्यकता जताई। उन्होंने स्पष्ट किया कि महिलाओं की सुरक्षा के संवेदनशील विषय को केवल किसी जघन्य घटना या हिंसा के घटित होने के बाद दी जाने वाली तात्कालिक प्रशासनिक प्रतिक्रिया तक सीमित नहीं रखा जा सकता। उन्होंने कहा कि देश को एक ऐसे समर्पित राष्ट्रीय संसदीय विमर्श की तत्काल आवश्यकता है, जहां महिलाओं की सुरक्षा से जुड़े रोकथाम के उपायों, संस्थागत जवाबदेही, मौजूदा कानूनों एवं नीतियों के प्रभावी क्रियान्वयन और व्यवस्थागत कमियों पर खुली और ईमानदार चर्चा हो सके।

इस मांग के तहत संसद में लगातार पूरे दो दिन तक केवल महिला सुरक्षा के एजेंडे पर केंद्रित विमर्श का प्रारूप तैयार करने की वकालत की गई है। इस सत्र में युवा नागरिकों, सर्वाइवर-सपोर्ट से जुड़े संगठनों, नागरिक समाज और संबंधित हितधारकों द्वारा उठाए गए मुद्दों को मुख्य एजेंडे में शामिल करने की मांग की गई है। इस पूरी पहल का मुख्य लक्ष्य व्यवस्था को घटना-केंद्रित प्रतिक्रिया से हटाकर पूर्व-रोकथाम की ओर ले जाना, छिटपुट घटनाओं के बजाय व्यापक नीतिगत सुधारों को अपनाना और केवल औपचारिक जागरूकता अभियानों से आगे बढ़कर मापने योग्य सख्त जवाबदेही स्थापित करना है।

## औपचारिक मांग पत्र के ज़रिये ठोस कार्ययोजना का आग्रह
आयोजन के दौरान संबंधित अधिकारियों और संसद के लिए एक औपचारिक लेटर ऑफ डिमांड भी जारी किया गया। इस पत्र के माध्यम से संबंधित प्राधिकारियों और संसदीय नेतृत्व से अपील की गई कि वे निर्धारित संवैधानिक और संसदीय प्रक्रियाओं का पालन करते हुए महिला सुरक्षा पर दो दिवसीय विशेष सत्र बुलाने की दिशा में जल्द से जल्द विचार करें और आवश्यक कदम उठाएं।

योगिता भयाना और अधिकार अभी, न्याय अभी संगठन ने ज़ोर देकर कहा कि उनका यह कदम केवल एक और पारंपरिक परिचर्चा कराने तक सीमित नहीं है। इसका वास्तविक मकसद एक तय समयसीमा के भीतर राष्ट्रीय स्तर पर सार्थक संवाद स्थापित करना है, जिससे ठोस नीतिगत सिफारिशें, मज़बूत जवाबदेही तंत्र और ज़मीन पर लागू होने वाले प्रभावी उपाय हासिल किए जा सकें। इस अभियान का स्पष्ट संदेश है कि महिला सुरक्षा के लिए दो दिन का राष्ट्रीय संवाद और तत्काल कार्रवाई अब समय की सबसे बड़ी मांग है।

## इसका आप पर असर
महिला सुरक्षा पर संसद का विशेष सत्र आहूत किए जाने की यह मांग सीधे तौर पर कानून व्यवस्था, सार्वजनिक स्थलों की जवाबदेही और महिलाओं की सुरक्षा नीतियों के क्रियान्वयन से जुड़ी है।

- **राष्ट्रीय स्तर पर:** यदि सरकार इस मांग को स्वीकार करते हुए संसद का विशेष सत्र बुलाती है, तो देश भर में महिला सुरक्षा कानूनों के सख्त क्रियान्वयन और प्रशासनिक जवाबदेही पर नए नियम बन सकते हैं। इससे शैक्षणिक संस्थानों और कार्यस्थलों पर सुरक्षा प्रोटोकॉल को अनिवार्य और अधिक प्रभावी बनाने का मार्ग प्रशस्त होगा।
- **नई दिल्ली में:** दिल्ली विश्वविद्यालय के छात्रों के सुझावों से जुड़ी यह पहल राजधानी के शैक्षणिक परिसरों और सार्वजनिक परिवहन में महिलाओं की सुरक्षा व्यवस्था को तत्काल सख्त करने की मांग करती है। स्थानीय स्तर पर पुलिस गश्त, सुरक्षित परिवहन और महिला छात्रावासों के आसपास निगरानी तंत्र को और अधिक पुख्ता करने के प्रयास तेज़ हो सकते हैं।
- **छात्रों और कामकाजी महिलाओं के लिए:** यह पहल सार्वजनिक स्थानों और डिजिटल प्लेटफॉर्म पर उत्पीड़न के खिलाफ कड़े कदम उठाने की वकालत करती है। यदि इन सुझावों पर संसद में मुहर लगती है, तो शिकायत निवारण तंत्र अधिक तेज़, पारदर्शी और जवाबदेह बन सकेगा।
- **नागरिक समाज और सर्वाइवर्स के लिए:** इस कदम का उद्देश्य अपराध पीड़ितों को कानूनी और सामाजिक सहायता दिलाने की प्रक्रिया को सुगम बनाना है। इससे कानूनी प्रक्रियाओं में होने वाली देरी पर लगाम लगाने और पीड़ितों को समयबद्ध न्याय दिलाने में मदद मिल सकती है।

## ऐसा क्यों हुआ
यह मांग देश में महिलाओं की सुरक्षा को लेकर बढ़ती चिंताओं और मौजूदा प्रशासनिक प्रतिक्रियाओं की सीमाओं के बीच उठाई गई है। सामाजिक कार्यकर्ताओं का मानना है कि केवल घटनाओं के बाद की जाने वाली कार्रवाई प्रणालीगत सुधारों के लिए पर्याप्त नहीं है।

- **छात्रों के साथ परामर्श:** दिल्ली विश्वविद्यालय और विभिन्न राज्यों के युवाओं के साथ विचार-विमर्श के दौरान यह बात सामने आई कि युवतियों को परिसरों, कार्यस्थलों और डिजिटल माध्यमों पर लगातार असुरक्षा का सामना करना पड़ता है। छात्रों द्वारा साझा की गई इन्हीं वास्तविक चिंताओं ने इस मांग को जन्म दिया।
- **सात वर्षों का ज़मीनी अनुभव:** पीपुल अगेंस्ट रेप्स इन इंडिया संगठन पिछले सात वर्षों से सर्वाइवर्स, बच्चों और समुदायों के बीच लगातार काम कर रहा है। इस दीर्घकालिक कार्य के दौरान सामने आई प्रणालीगत खामियों ने यह स्पष्ट किया कि स्थायी समाधान के लिए संसद स्तर पर नीतिगत हस्तक्षेप आवश्यक है।
- **प्रतिक्रियावादी रवैये पर सवाल:** अक्सर अपराध की किसी बड़ी घटना के बाद ही प्रशासन हरकत में आता है, जबकि कार्यकर्ताओं का मानना है कि व्यवस्था को पूर्व-रोकथाम, प्रभावी कानून क्रियान्वयन और सख्त जवाबदेही की दिशा में काम करने की ज़रूरत है।
- **अगला कदम:** आयोजकों ने औपचारिक लेटर ऑफ डिमांड प्रस्तुत कर दिया है, और अब यह संबंधित अधिकारियों तथा संसद पर निर्भर है कि वे संवैधानिक प्रक्रियाओं के तहत इस मांग पर क्या निर्णय लेते हैं।

## सवाल-जवाब

### 1. प्रेस क्लब ऑफ इंडिया में संसद के विशेष सत्र की मांग किसने रखी?
यह मांग 5 अक्टूबर 2026 को पीपुल अगेंस्ट रेप्स इन इंडिया (PARI) की संस्थापक योगिता भयाना और अधिकार अभी, न्याय अभी (AANA) संगठन द्वारा संयुक्त रूप से रखी गई।

### 2. संसद के विशेष सत्र के लिए कितने दिनों की मांग की गई है?
महिला सुरक्षा से जुड़े गंभीर मुद्दों पर केंद्रित और विस्तृत चर्चा के लिए पूरे दो दिवसीय विशेष सत्र के आयोजन की मांग की गई है।

### 3. इस मांग के पीछे मुख्य ज़मीनी आधार क्या है?
यह मांग दिल्ली विश्वविद्यालय और विभिन्न राज्यों के छात्रों से मिले इनपुट्स तथा PARI के पिछले सात वर्षों के ज़मीनी अनुभवों और सिफारिशों पर आधारित है।

### 4. प्रेस कॉन्फ्रेंस में किस प्रकार का मांग पत्र प्रस्तुत किया गया?
कार्यक्रम के दौरान एक औपचारिक लेटर ऑफ डिमांड प्रस्तुत किया गया, जिसमें संवैधानिक प्रक्रियाओं के तहत दो दिवसीय विशेष सत्र बुलाने का आग्रह किया गया है।

### 5. इस पहल का मुख्य उद्देश्य क्या बताया गया है?
इसका उद्देश्य चर्चा को घटना के बाद प्रतिक्रिया देने के बजाय रोकथाम, प्रणालीगत सुधार और मापने योग्य जवाबदेही की ओर मोड़ना है।

---
_TrendKia — Har trend, sabse pehle.. Machine-readable view; canonical HTML at the URL above._