मक्का किसानों के लिए सितंबर में फॉल आर्मी वर्म का खतरा, विशेषज्ञ प्रमोद कुमार ने दिए बचाव के तरीके सितंबर के दौरान मक्के की फसल पर फॉल आर्मी वर्म के हमले की आशंका बढ़ जाती है। कृषि विशेषज्ञ प्रमोद कुमार ने सही कीटनाशकों के प्रयोग और समय रहते पहचान के कारगर उपाय साझा किए हैं। सितंबर का महीना मक्के की खेती करने वाले किसानों के लिए बेहद संवेदनशील माना जाता है। इस अवधि में मक्के की फसल पर फॉल आर्मी वर्म कीट का प्रकोप तेजी से फैलने की संभावना बनी रहती है। यह हानिकारक कीट पौधे की गोभ यानी सेंट्रल व्होर्ल के भीतर छिपकर बैठता है और नई निकलने वाली कोमल पत्तियों को खाकर नुकसान पहुंचाता है। यदि शुरुआत में ही इस कीट की पहचान न की जा सके, तो यह बहुत कम समय में पूरे खेत की फसल को अपनी चपेट में ले लेता है और पैदावार को भारी नुकसान पहुंचाता है। इसी वजह से कृषि विशेषज्ञों ने किसानों को अपने खेतों की लगातार निगरानी करने और शुरुआती लक्षण दिखाई देते ही तुरंत नियंत्रण के उपाय अपनाने की सलाह दी है। फॉल आर्मी वर्म के लक्षण और पहचान फॉल आर्मी वर्म की सूंडी मक्के के पौधे के सबसे नाजुक हिस्से यानी गोभ के अंदर अपना ठिकाना बनाती है। गोभ में छुपकर यह पत्तियों को कुतरना शुरू कर देती है। जब पौधे की नई पत्तियां बाहर की ओर फैलती हैं, तो उन पर एक सीधी कतार में बने छोटे और बड़े छेद साफ तौर पर दिखाई देते हैं। पत्तियों पर छिद्रों का यह विशेष पैटर्न कीट के प्रकोप का प्रमुख संकेत माना जाता है। इसके साथ ही, गोभ के अंदर सूंडी का मल या बीट जमा हुआ दिखाई देता है। यदि समय पर रोकथाम के कदम न उठाए जाएं, तो यह सूंडी पौधे के दूसरे अंगों को भी चबाकर नष्ट कर देती है। फसल को क्षति से बचाने के लिए किसानों को हफ्ते में कम से कम एक बार खेत का दौरा करके प्रत्येक पौधे की गोभ की जांच करनी चाहिए। कीटनाशक दवाएं और उनके इस्तेमाल की मात्रा कीट नियंत्रण को लेकर कृषि विशेषज्ञ प्रमोद कुमार ने विशेष दिशा-निर्देश जारी किए हैं। उन्होंने बताया कि फॉल आर्मी वर्म पर काबू पाने के लिए इमामेक्टिन बेंजोएट 5% SG एक प्रभावी रसायन है। इस दवा की लगभग 1 ग्राम मात्रा को 2.5 लीटर पानी में घोलकर इस्तेमाल करना चाहिए। एक एकड़ खेत में छिड़काव करने के लिए सामान्यतः 200 लीटर पानी के घोल की जरूरत पड़ती है। इमामेक्टिन बेंजोएट के अलावा किसान क्लोरांट्रानिलिप्रोल 18.5% SC या स्पिनेटोरम 11.7% SC कीटनाशक का उपयोग भी कर सकते हैं। ये दोनों रसायन भी सूंडी को नियंत्रित करने में काफी असरदार साबित होते हैं। छिड़काव करने का सही समय और जरूरी सावधानियां चूंकि फॉल आर्मी वर्म की सूंडी गोभ के गहराई वाले हिस्से में छिपी रहती है, इसलिए छिड़काव करते समय स्प्रे नोजल का रुख सीधे गोभ की तरफ होना बेहद जरूरी है ताकि दवा का घोल सीधे कीट तक पहुंच सके। छिड़काव का कार्य सुबह के समय या फिर देर शाम को करना सबसे ज्यादा फायदेमंद रहता है। इन घंटों के दौरान सूंडी अधिक सक्रिय होकर भोजन करती है, जिससे रासायनिक दवा का प्रभाव सटीक और त्वरित होता है। प्रतिरोधक क्षमता से बचाव और खेत की स्वच्छता केवल रासायनिक दवाओं के बार-बार छिड़काव पर निर्भर रहना इस कीट का स्थायी समाधान नहीं है। लगातार एक ही तरह के कीटनाशक का इस्तेमाल करने से कीटों के भीतर उस रसायन के प्रति प्रतिरोधक क्षमता विकसित हो जाती है। इस स्थिति से बचने के लिए किसानों को अलग-अलग समूह वाली दवाओं को अदल-बदलकर इस्तेमाल करने का सुझाव दिया जाता है। इसके अतिरिक्त, खेत में उगे खरपतवार को नियमित रूप से नष्ट करते रहना चाहिए और पिछली फसल के अवशेषों को खेत से हटा देना चाहिए ताकि कीटों के छिपने और पनपने की जगह खत्म हो सके। इसका आप पर असर फॉल आर्मी वर्म के सही और समय पर नियंत्रण से मक्का उत्पादकों को सीधा आर्थिक लाभ मिलता है। • भारत में किसानों के लिए: समय पर रोकथाम करने से प्रति एकड़ मक्के की पैदावार सुरक्षित रहती है और फसल खराब होने का वित्तीय नुकसान बचता है। • उपभोक्ताओं और बाजार के लिए: मक्के की फसल सुरक्षित रहने से बाजार में अनाज और पशु आहार की आपूर्ति स्थिर बनी रहती है, जिससे कीमतें नियंत्रित रहती हैं। • दवाइयों के इस्तेमाल पर: कीट की शुरुआती पहचान से कीटनाशकों का अत्यधिक और बेफिजूल इस्तेमाल रुकता है, जिससे खेती की लागत कम होती है। • फसल प्रबंधन: सही समय पर सुबह या शाम को घोल का छिड़काव करने से कीट तुरंत नियंत्रित होता है और अगली फसल चक्र में भी जोखिम घटता है। ऐसा क्यों हुआ सितंबर माह में मौसम में बदलाव और उच्च नमी के कारण मक्के के खेतों में फॉल आर्मी वर्म कीट के पनपने की अनुकूल परिस्थितियां बनती हैं। • मौसम और आर्द्रता: सितंबर के दौरान बनने वाला गर्म और नम वातावरण इस कीट के प्रजनन और सूंडी के तेजी से विकास में सहायक होता है। • पौधे का विकास चरण: मक्के के पौधे जब गोभ बनने की अवस्था में होते हैं, तब कीट की सूंडी को छुपने और कोमल पत्तियां खाने के लिए सही जगह मिलती है। • कीटनाशक प्रतिरोध: लगातार एक ही रासायनिक समूह की दवा का छिड़काव करने से कीटों में दवाओं के प्रति प्रतिरोधक क्षमता पैदा हो जाती है। • खेतों में स्वच्छता की कमी: पुराने फसल अवशेषों और खेत के आसपास उगे खरपतवार से कीटों को आश्रय मिलता है, जिससे उनका संक्रमण तेजी से फैलता है। सवाल-जवाब 1. मक्के की फसल में फॉल आर्मी वर्म का खतरा किस महीने में अधिक होता है? सितंबर के महीने में तापमान और नमी के कारण इस कीट का प्रकोप काफी बढ़ जाता है। 2. फॉल आर्मी वर्म के हमले के मुख्य लक्षण क्या हैं? पत्तियों पर सीधी कतार में छेद दिखाई देना और पौधे की गोभ के अंदर सूंडी का मल मिलना इसके प्रमुख लक्षण हैं। 3. विशेषज्ञ प्रमोद कुमार ने किस दवा की सिफारिश की है? उन्होंने इमामेक्टिन बेंजोएट 5% SG की 1 ग्राम मात्रा को 2.5 लीटर पानी में मिलाकर प्रयोग करने की सलाह दी है। 4. एक एकड़ मक्के के खेत के लिए कितना दवा घोल आवश्यक है? एक एकड़ फसल के लिए लगभग 200 लीटर पानी का घोल तैयार करके छिड़काव करना पड़ता है। 5. कीटनाशक का छिड़काव किस समय करना सबसे बेहतर होता है? सुबह के समय या देर शाम को छिड़काव करना सबसे असरदार होता है क्योंकि इस दौरान सूंडी अधिक सक्रिय रहती है। https://trendkia.com/national/makka-kisanon-ke-lie-sitnbara-men-phola-armi-varma-ka-khatara-visheshajna-pramod-kumar-ne-die-bachava-ke-tarike-32652 TrendKia — Har trend, sabse pehle.