# मालेगांव में टीपू के समर्थन वाले नारों पर गरमाई सियासत, विजय वडेट्टीवार के बयान से आमने-सामने आए दल

> महाराष्ट्र के मालेगांव में एक विरोध प्रदर्शन के दौरान लगे नारों और कांग्रेस नेता विजय वडेट्टीवार के बयान के बाद राजनीतिक घमासान मच गया है, जिस पर बीजेपी और शिवसेना ने तीखी प्रतिक्रिया दी है।

**Type:** article · **Category:** भारत · **Published:** 2026-10-17 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/national/maleganva-men-tipu-ke-samarthana-vale-naron-para-garamai-siyasata-vijay-vadettiwar-ke-bayana-se-amane-samane-ae-dala-48696 · **Language:** Hindi
**Tags:** मालेगांव, टीपू सुल्तान, विजय वडेट्टीवार, शिवसेना, बीजेपी, महाराष्ट्र राजनीति

महाराष्ट्र के मालेगांव शहर में हाल ही में निकाले गए एक विरोध मार्च के दौरान कथित तौर पर लगाए गए नारों को लेकर राजनीतिक गलियारों में भारी हलचल मच गई है। यह प्रदर्शन मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर आयोजित किया गया था, लेकिन इस दौरान उठे मुद्दों ने एक नया और बड़ा सियासी विवाद खड़ा कर दिया है। प्रदर्शन के बीच कुछ लोगों द्वारा कथित रूप से टीपू सुल्तान के समर्थन में नारेबाज़ी किए जाने की बात सामने आई, जिसके बाद राज्य की राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया है। इस पूरे घटनाक्रम ने सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तनाव को और अधिक बढ़ा दिया है।

 

## तस्वीर से शुरू हुआ था विवाद

मालेगांव में इस सुलगते विवाद की जड़ें डिप्टी मेयर शाने हिंद के कार्यालय में टीपू सुल्तान की तस्वीर लगाए जाने के फैसले से जुड़ी हुई हैं। इसी पृष्ठभूमि में संविधान बचाओ समिति के बैनर तले एक मार्च निकाला गया था। इस विरोध प्रदर्शन की अगुवाई डिप्टी मेयर शाने हिंद के साथ-साथ समाजवादी पार्टी के शहर अध्यक्ष और नगरसेवक मुस्तकीम डिग्निटी ने की थी। आरोप है कि इसी मार्च के दौरान प्रदर्शनकारियों के एक वर्ग ने टीपू सुल्तान के हक में नारे लगाए और कथित तौर पर ‘हमें आजादी चाहिए, टीपू जैसी आजादी’ तथा ‘टीपू वाली आजादी’ जैसी बातें कहीं। इन नारों के गूंजते ही मामला और ज्यादा संवेदनशील हो गया।

 

## समाजवादी पार्टी और कांग्रेस का पक्ष

मामला तूल पकड़ने के बाद समाजवादी पार्टी के नेता मुस्तकीम डिग्निटी ने सामने आकर अपना पक्ष रखा और विरोधियों पर निशाना साधा। उनका कहना था कि जिन लोगों ने टीपू सुल्तान के इतिहास का अध्ययन नहीं किया है, वे उनके व्यक्तित्व और योगदान से पूरी तरह अनजान हैं। इसके साथ ही, महाराष्ट्र कांग्रेस के वरिष्ठ नेता विजय वडेट्टीवार ने इस पूरे विवाद में कूदते हुए टीपू सुल्तान का बचाव किया। नागपुर में मीडियाकर्मियों से बातचीत के दौरान उन्होंने तीखा सवाल उठाते हुए कहा कि क्या टीपू सुल्तान वाकई कोई देशद्रोही था? उन्होंने दावा किया कि इतिहास को गलत ढंग से पेश किया गया है।

 

## विजय वडेट्टीवार का बयान और सफाई

कांग्रेस नेता विजय वडेट्टीवार ने अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए कहा कि हर व्यक्ति अपनी पसंद और समझ के अनुसार आजादी की परिभाषा तय करता है, लेकिन मौजूदा देश के माहौल में इस तरह के सवाल उठना स्वाभाविक है कि क्या हम आज भी एक लोकतांत्रिक व्यवस्था में जी रहे हैं। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उन्हें इस बात की कोई जानकारी नहीं है कि प्रदर्शन के दौरान वास्तव में क्या बोला गया था। हालांकि, उन्होंने जोर देकर कहा कि महज किसी आंदोलन में भाग लेने या किसी की तस्वीर अपने कार्यालय या दीवारों पर लगाने भर से किसी को भी राष्ट्रद्रोही या नक्सली करार देना बिल्कुल गलत है। उनके अनुसार, अगर लोग इतिहास के पन्नों को पलटकर देखेंगे तो उन्हें सच्चाई का अंदाजा अपने आप हो जाएगा।

 

## सत्ता पक्ष का कड़ा विरोध

कांग्रेस नेता के इस बचाव के बाद भारतीय जनता पार्टी और शिवसेना (शिंदे गुट) के नेता खासे नाराज नजर आए और उन्होंने खुलकर विरोध दर्ज कराया। शिवसेना की प्रमुख नेता शाइना एनसी ने टीपू सुल्तान को किसी भी रूप में स्वतंत्रता सेनानी मानने से साफ इनकार कर दिया और उन्हें एक खलनायक करार दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि इस ऐतिहासिक शख्सियत ने देश को नुकसान पहुंचाया और अत्याचार किए। इसके अलावा, उन्होंने कांग्रेस पार्टी पर भी कड़ा प्रहार किया और आरोप लगाया कि पार्टी ऐसे लोगों को एक सक्षम प्रशासक और औपनिवेशिक शासन के खिलाफ लड़ने वाले नायक के रूप में पेश करने का प्रयास कर रही है, जो जनता के हित में नहीं है।

## इसका आप पर असर
यह राजनीतिक विवाद सीधे तौर पर आम नागरिकों के दैनिक जीवन या वित्त को प्रभावित नहीं करता है, लेकिन राज्य में वैचारिक तनाव को जरूर बढ़ा सकता है।

- **महाराष्ट्र में:** मालेगांव और आसपास के क्षेत्रों में राजनीतिक दलों के बीच तनाव बढ़ने से कानून-व्यवस्था और स्थानीय प्रशासन पर अतिरिक्त सतर्कता बरतने का दबाव रहेगा।

- **भारत में:** इस तरह की वैचारिक और ऐतिहासिक शख्सियतों से जुड़ी बहसें राष्ट्रीय स्तर पर राजनीतिक बयानबाज़ी और ध्रुवीकरण को बढ़ावा देती हैं।

## ऐसा क्यों हुआ
यह विवाद चुनाव आयोग के एक शीर्ष अधिकारी के इस्तीफे की मांग को लेकर निकाले गए मार्च के दौरान लगे अनियोजित नारों और उसके बाद नेताओं की ओर से दिए गए बयानों के कारण उपजा है।

- **विवाद की शुरुआत:** स्थानीय निकाय कार्यालय में एक ऐतिहासिक चित्र लगाए जाने से राजनीतिक असंतोष की नींव पड़ी थी।

- **नारों का असर:** विरोध प्रदर्शन के दौरान अप्रत्याशित और विवादास्पद नारों के गूंजने से पूरा मामला स्थानीय मुद्दे से राष्ट्रीय बहस में बदल गया।

- **नेताओं की प्रतिक्रिया:** विपक्षी नेता द्वारा बचाव में दिए गए बयानों ने सत्ताधारी गठबंधन के नेताओं को आक्रामक होने का पूरा मौका दे दिया।

## सवाल-जवाब

### 1. मालेगांव में विरोध मार्च क्यों निकाला गया था?
यह विरोध मार्च मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर निकाला गया था।

### 2. मालेगांव में विवाद की शुरुआत कैसे हुई थी?
विवाद की शुरुआत डिप्टी मेयर शाने हिंद के कार्यालय में टीपू सुल्तान की तस्वीर लगाए जाने के बाद हुई थी।

### 3. मालेगांव मार्च का नेतृत्व किसने किया था?
इस मार्च का नेतृत्व डिप्टी मेयर शाने हिंद और समाजवादी पार्टी के शहर अध्यक्ष मुस्तकीम डिग्निटी ने किया था।

### 4. विजय वडेट्टीवार ने किस पार्टी के नेता हैं?
विजय वडेट्टीवार महाराष्ट्र कांग्रेस के नेता हैं।

### 5. शिवसेना नेता शाइना एनसी ने टीपू सुल्तान के बारे में क्या कहा?
शाइना एनसी ने उन्हें स्वतंत्रता सेनानी मानने से इनकार करते हुए एक विलेन करार दिया।

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