मानसून की विदाई के साथ बढ़ेगी आफत, उत्तर प्रदेश, बिहार और पश्चिम बंगाल में भारी बारिश और तूफान की चेतावनी दक्षिण-पश्चिम मानसून की वापसी की तैयारियों के बीच देश के कई राज्यों में मौसम का मिजाज बदलने वाला है, जहां भारी बारिश, वज्रपात और तेज हवाओं का दौर देखने को मिलेगा। भारत में दक्षिण-पश्चिम मानसून अब धीरे-धीरे अपनी विदाई की ओर कदम बढ़ा रहा है, लेकिन जाते-जाते भी इसके तेवर ठंडे पड़ते नहीं दिख रहे हैं। देश के कई हिस्सों में इस समय विदाई की तैयारी के बीच भी जोरदार बारिश और आंधी-तूफान की परिस्थितियां बनी हुई हैं। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, 19 सितंबर से पश्चिमी राजस्थान के कुछ इलाकों से दक्षिण-पश्चिम मानसून की वापसी शुरू होने के लिए वायुमंडलीय परिस्थितियां पूरी तरह से अनुकूल होती जा रही हैं। एक तरफ जहां देश के कुछ हिस्सों से मानसूनी हवाएं पीछे हट रही हैं, वहीं दूसरी तरफ अंडमान सागर और उससे सटे क्षेत्रों में 19 सितंबर की शाम तक एक नया निम्न दबाव का क्षेत्र विकसित होने की प्रबल संभावना है। इस नए मौसमी तंत्र के प्रभाव से भारत के पूर्वी तटीय इलाकों और मध्य भारत के मौसम में आने वाले दिनों में भारी उथल-पुथल देखने को मिल सकती है। इसके कारण मध्य प्रदेश, बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल, ओडिशा और पूर्वोत्तर भारत के कई राज्यों में झमाझम बारिश होने के आसार हैं, जबकि कुछ क्षेत्रों में अत्यधिक भारी वर्षा और आकाशीय बिजली गिरने की चेतावनी भी दी गई है। देश के विभिन्न हिस्सों में बीते 24 घंटों का मौसम और नए तंत्र का प्रभाव मौसम विज्ञान विभाग (IMD) से प्राप्त आंकड़ों के अनुसार, 18 सितंबर की सुबह तक समाप्त हुए पिछले 24 घंटों के दौरान देश के कई राज्यों में मानसून ने अपनी जबरदस्त सक्रियता दिखाई है। इस अवधि में पूर्वी राजस्थान, सौराष्ट्र, गुजरात के विभिन्न हिस्सों, बिहार और सिक्किम में अत्यंत भारी बारिश दर्ज की गई है। इसके अतिरिक्त, असम, गंगा के मैदानी इलाकों वाले पश्चिम बंगाल, ओडिशा, झारखंड, मध्य प्रदेश, मराठवाड़ा, तेलंगाना, दक्षिणी आंतरिक कर्नाटक और तमिलनाडु में भी कई जगहों पर भारी बारिश दर्ज की गई है। 19 सितंबर को मौसम का मिजाज कई तरह के बदलावों से होकर गुजरेगा। जहां एक ओर दिल्ली और एनसीआर के क्षेत्रों में मौसम शुष्क बने रहने की संभावना है, वहीं राजस्थान के पश्चिमी हिस्सों से मानसून की विदाई की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी। इस बीच मध्य प्रदेश में गरज-चमक के साथ बारिश की गतिविधियां जारी रहेंगी, जबकि बिहार और पश्चिम बंगाल में बादलों की आवाजाही के साथ वर्षा का दौर फिर से तेज होने की उम्मीद है। महाराष्ट्र और दक्षिण भारत के कुछ राज्यों में हवाओं की गति 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच सकती है, जिसके झोंके कुछ समय के लिए 60 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार भी पकड़ सकते हैं। दिल्ली एनसीआर और हरियाणा में मौसम का हाल देश की राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली और आसपास के एनसीआर क्षेत्रों में 19 सितंबर को मौसम देश के अन्य राज्यों के मुकाबले काफी शांत रहने की उम्मीद जताई गई है। दिल्ली और आसपास के शहरों में आसमान मुख्य रूप से साफ रहेगा या फिर आंशिक रूप से बादल छाए रह सकते हैं। हालांकि, IMD के पूर्वानुमान के अनुसार, हरियाणा, चंडीगढ़ और दिल्ली के कुछ हिस्सों में 19 और 20 सितंबर के दौरान गरज-चमक के साथ हल्की बौछारें पड़ने और बिजली गिरने की छिटपुट घटनाएं हो सकती हैं। दिल्ली, नोएडा, गाजियाबाद, गुरुग्राम और फरीदाबाद जैसे प्रमुख शहरों में दिन के समय अधिकतम तापमान 33 से 35 डिग्री सेल्सियस के बीच बने रहने का अनुमान है, जबकि रात के समय न्यूनतम तापमान 24 से 26 डिग्री सेल्सियस के आसपास दर्ज किया जा सकता है। आने वाले दिनों में मानसून की क्रमिक वापसी के साथ ही राजधानी क्षेत्र में बारिश की संभावनाओं में और भी अधिक गिरावट दर्ज की जाएगी। उत्तर प्रदेश में मौसम का मिजाज और किसानों के लिए सलाह उत्तर प्रदेश के तमाम हिस्सों में भी 19 सितंबर को मौसम में हलचल देखने को मिलेगी। मौसम विभाग ने विशेष रूप से पूर्वी उत्तर प्रदेश के जिलों में 19 और 20 सितंबर को आंधी-तूफान, बिजली कड़कने और कुछ स्थानों पर बारिश की आशंका जताई है। राज्य की राजधानी लखनऊ के साथ-साथ वाराणसी, गोरखपुर, प्रयागराज, कानपुर, आजमगढ़ और उनके निकटवर्ती क्षेत्रों में घने बादल छाने और तेज बौछारें पड़ने की संभावना है। इसके अलावा, पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कुछ इलाकों में भी गरज-चमक के साथ स्थानीय स्तर पर वर्षा हो सकती है। राज्य के अधिकांश शहरों में तापमान 32 से 34 डिग्री सेल्सियस के आसपास रहने का अनुमान है। इस बदलते मौसम को देखते हुए कृषि क्षेत्र के लिए विशेष सतर्कता बरतने को कहा गया है। खेतों में जिन किसानों की फसलें कटाई के लिए तैयार खड़ी हैं या पक चुकी हैं, उन्हें जलभराव से बचने के लिए खेतों से पानी की समय पर निकासी सुनिश्चित करने की सलाह दी गई है। इसके साथ ही, तेज आंधी के दौरान लोगों को खुले मैदानों में जाने से बचने का आग्रह किया गया है। बिहार में मूसलाधार बारिश और सुरक्षा की चेतावनी बिहार में मानसूनी गतिविधियां थमने का नाम नहीं ले रही हैं और 19 सितंबर को भी यहां वर्षा का दौर जारी रहने वाला है। मौसम विभाग ने राज्य में 19 से 24 सितंबर तक लगातार विभिन्न स्थानों पर बारिश होने का अनुमान व्यक्त किया है। इससे पहले 18 सितंबर को भी बिहार के कई हिस्सों में भारी से अत्यंत भारी बारिश दर्ज की गई थी, जिससे आम जनजीवन प्रभावित हुआ है। राजधानी पटना समेत गया, मुजफ्फरपुर, भागलपुर, पूर्णिया, दरभंगा और कटिहार में आसमान में काले बादल छाए रहेंगे और कई दौर की तेज बारिश हो सकती है। इन क्षेत्रों में बिजली गिरने की भी गंभीर आशंका जताई गई है। लगातार होने वाली इस बारिश के कारण शहरों के निचले इलाकों में गंभीर जलभराव की स्थिति उत्पन्न हो सकती है, जिससे सड़क यातायात और दैनिक आवागमन बाधित होने की पूरी संभावना है। ग्रामीण क्षेत्रों में खेतों में पानी जमा होने से फसलों को नुकसान पहुंचने का खतरा बढ़ गया है। सुरक्षा के लिहाज से लोगों को आंधी और बिजली कड़कने के दौरान पेड़ों के नीचे शरण न लेने तथा खुले स्थानों से दूर रहने की सख्त हिदायत दी गई है। झारखंड में वज्रपात की आशंका और नदियों के जलस्तर पर नजर झारखंड में भी 19 सितंबर को मानसून पूरी तरह से सक्रिय मोड में रहेगा। मौसम विभाग के अनुसार, राज्य में 19 से 23 सितंबर के दौरान अधिकांश जिलों में आंधी-तूफान के साथ बारिश होने और आकाशीय बिजली गिरने की प्रबल आशंका बनी हुई है। रांची, जमशेदपुर, धनबाद, बोकारो, गिरिडीह, हजारीबाग और देवघर जैसे शहरों में मौसम के तेवर तल्ख रह सकते हैं। इसके अलावा राज्य के सभी 24 जिलों में बारिश को लेकर चेतावनी जारी की गई है, जहां 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलने का अनुमान है। रांची और खूंटी जैसे जिलों में भी मौसम में बड़ा बदलाव देखा जाएगा। पिछले दिनों हुई भारी बारिश के बाद अगले कुछ दिनों तक रुक-रुक कर होने वाली यह वर्षा निचले क्षेत्रों में बाढ़ जैसी स्थिति पैदा कर सकती है। ग्रामीण इलाकों में स्थानीय नदी-नालों का जलस्तर तेजी से बढ़ सकता है, जिससे लोगों को सुरक्षित दूरी बनाए रखने के लिए कहा गया है। विशेषकर वज्रपात के समय खेतों में काम करने वाले किसानों, खुले मैदानों में मौजूद लोगों और जलाशयों के पास जाने वालों को विशेष सावधानी बरतनी होगी। पश्चिम बंगाल और सिक्किम में मानसूनी बारिश का नया दौर पश्चिम बंगाल में 19 सितंबर से मानसूनी गतिविधियां एक बार फिर से जोर पकड़ने की ओर अग्रसर हैं। गंगा के मैदानी क्षेत्रों में बसे पश्चिम बंगाल के जिलों में 19-20 सितंबर और उसके बाद फिर से 23-24 सितंबर को व्यापक रूप से बारिश होने की संभावना जताई गई है। कोलकाता, हावड़ा, हुगली, मालदा, मुर्शिदाबाद और उत्तर 24 परगना जैसे सघन आबादी वाले जिलों में आसमान में बादल छाए रहने और मध्यम से तेज बारिश होने की उम्मीद है। वहीं, उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल के जिलों में भी 19 सितंबर को वर्षा की प्रबल संभावना व्यक्त की गई है, जिसके अंतर्गत दार्जिलिंग, जलपाईगुड़ी और अन्य पहाड़ी क्षेत्रों में स्थानीय स्तर पर मौसम काफी सक्रिय रहेगा। सिक्किम में भी मौसम विभाग ने भारी बारिश की चेतावनी जारी की है, जिससे पर्वतीय इलाकों में भूस्खलन का खतरा बढ़ सकता है और यात्रियों को सावधानी बरतने की आवश्यकता होगी। इसका आप पर असर इस मौसमी बदलाव के कारण देश के कई हिस्सों में दैनिक जीवन और कृषि गतिविधियों पर गहरा असर पड़ेगा। • किसानों पर प्रभाव: उत्तर प्रदेश और बिहार के ग्रामीण इलाकों में खड़ी फसलों को नुकसान से बचाने के लिए खेतों में जल निकासी की तुरंत व्यवस्था करनी होगी। ऐसा न करने पर जलभराव से फसलें सड़ सकती हैं। • यातायात में बाधा: पटना, कोलकाता और रांची जैसे बड़े शहरों में निचले इलाकों में पानी भरने से भारी ट्रैफिक जाम लग सकता है। यात्रियों को अपनी यात्रा की योजना मौसम देखकर ही बनानी चाहिए। • सुरक्षा उपाय: बिजली गिरने की घटनाओं को देखते हुए ग्रामीण और खुले क्षेत्रों में काम करने वाले लोगों को पेड़ों के नीचे खड़े होने से बचना होगा। अपनी सुरक्षा के लिए केवल पक्के मकानों में ही शरण लें। • तापमान में गिरावट: मानसून की आखिरी बारिश के चलते उत्तर भारत और मध्य भारत के तापमान में गिरावट आएगी। इससे लोगों को उमस भरी गर्मी से बड़ी राहत मिलेगी। ऐसा क्यों हुआ यह मौसम परिवर्तन पश्चिमी राजस्थान से मानसून की वापसी और अंडमान सागर में बनने वाले नए वायुमंडलीय दबाव प्रणाली के कारण हो रहा है। • मानसून का पीछे हटना: पश्चिमी राजस्थान में शुष्क हवाओं के सक्रिय होने के कारण 19 सितंबर से मानसून की आधिकारिक वापसी की शुरुआत हो रही है। यह हर साल सितंबर के मध्य में होने वाली एक सामान्य प्रक्रिया है। • नया निम्न दबाव क्षेत्र: अंडमान सागर में 19 सितंबर की शाम तक एक नया लो-प्रेशर एरिया बनने जा रहा है। यह समुद्री तंत्र मध्य और पूर्वी भारत की ओर प्रचुर मात्रा में नमी खींचेगा, जिससे बारिश फिर से तेज हो जाएगी। • हवाओं की गति में बदलाव: दक्षिण भारत और महाराष्ट्र के ऊपर मजबूत पश्चिमी हवाओं के प्रवाह के चलते तटीय क्षेत्रों में 60 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चल रही हैं। सवाल-जवाब 1. राजस्थान से मानसून की वापसी कब शुरू हो रही है? मौसम विज्ञान विभाग के अनुसार, 19 सितंबर से पश्चिमी राजस्थान के कुछ हिस्सों से दक्षिण-पश्चिम मानसून की वापसी शुरू होने के लिए परिस्थितियां अनुकूल हैं। 2. अंडमान सागर में बनने वाले नए मौसमी तंत्र का क्या असर होगा? अंडमान सागर में 19 सितंबर की शाम तक एक नया निम्न दबाव क्षेत्र बनने की संभावना है, जिससे पूर्वी तट और मध्य भारत में भारी बारिश और तेज हवाएं चलेंगी। 3. दिल्ली-एनसीआर में 19 सितंबर को मौसम कैसा रहेगा? दिल्ली-एनसीआर में मौसम मुख्यतः शुष्क रहेगा और आसमान साफ या आंशिक रूप से बादल छाए रहने का अनुमान है, जहां दिन का तापमान 33 से 35 डिग्री के बीच रहेगा। 4. उत्तर प्रदेश के किसानों को मौसम विभाग ने क्या सलाह दी है? मौसम विभाग ने किसानों को खेतों में खड़ी फसलों को नुकसान से बचाने के लिए उचित जल निकासी की व्यवस्था करने की सलाह दी है। 5. बिहार और झारखंड में बारिश कब तक जारी रहने की उम्मीद है? बिहार में 19 से 24 सितंबर तक और झारखंड में 19 से 23 सितंबर तक गरज-चमक के साथ रुक-रुक कर बारिश होने का अनुमान है। https://trendkia.com/national/manasuna-ki-vidai-ke-satha-barhegi-aphata-up-bihar-aura-bengal-men-bhari-barisha-aura-tuphana-ki-chetavani-33238 TrendKia — Har trend, sabse pehle.