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  "type": "article",
  "title": "मानसून में दुधारू मवेशियों पर संक्रामक बीमारियों का साया, पशुपालन विभाग ने जारी की टीकाकरण और दवाओं की सलाह",
  "summary": "बरसात और अत्यधिक नमी के दौरान गाय, भैंस, भेड़ और बकरियों में घातक संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है। पशुपालन विभाग ने गलघोटू से बचाव के लिए समय पर टीके लगवाने और बाड़ों में कीटनाशक छिड़काव की हिदायत दी है।",
  "content": "बरसात का मौसम उमस और गर्मी से इंसानों को राहत जरूर दिलाता है, लेकिन ग्रामीण और डेयरी क्षेत्र से जुड़े मवेशी पालकों के सामने नई चुनौतियां खड़ी कर देता है। लगातार वर्षा और वातावरण में मौजूद भारी नमी के कारण दुधारू पशुओं के साथ छोटे मवेशियों में संक्रामक रोगों का फैलाव काफी तेज हो जाता है। गाय, भैंस, भेड़ और बकरियों जैसे उपयोगी पशु इस मौसमी बदलाव के दौरान तरह-तरह के बैक्टीरिया तथा परजीवी हमलों की चपेट में आ जाते हैं, जिससे उनकी सेहत और उत्पादन क्षमता पर सीधा असर पड़ता है।\n\nशुरुआती लक्षणों की अनदेखी पड़ सकती है भारी\nपशुपालन विभाग के संयुक्त निदेशक डॉ. गंगा सहाय मीणा ने इस मौसम को लेकर चेतावनी दी है कि बारिश के दिनों में कई घातक छूत की बीमारियां तेजी से सक्रिय होती हैं। मवेशियों में रोग के प्रारंभिक संकेतों को भांपना और तत्काल चिकित्सकीय कदम उठाना बेहद जरूरी होता है। यदि पशुपालक इन लक्षणों को मामूली समझकर नजरअंदाज करते हैं या इलाज में देरी करते हैं, तो मवेशी की स्थिति काफी नाजुक हो सकती है। ऐसी लापरवाही कई बार पशु की जान जाने और किसान को बड़ा आर्थिक नुकसान होने का कारण बन जाती है।\n\nगलघोटू से बचाव के लिए तत्काल लगवाएं टीका\nगोवंश और भैंस वंश में बरसात के दिनों में गलघोटू रोग का संक्रमण फैलने की सबसे अधिक आशंका बनी रहती है। डॉ. गंगा सहाय मीणा ने पशुपालकों से आग्रह किया है कि वे अपने बड़े मवेशियों को इस जानलेवा बीमारी से सुरक्षित रखने के लिए अविलंब टीकाकरण करवाएं। जिन पशुपालकों ने अब तक अपने पशुओं को गलघोटू का टीका नहीं लगवाया है, वे तुरंत अपने निकटतम सरकारी पशु चिकित्सा संस्थान से संपर्क करें। समय पर कराया गया प्रिवेंटिव वैक्सीनेशन पशुओं की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाकर उन्हें गंभीर संक्रमण के खतरे से बाहर रखता है।\n\nभेड़-बकरियों में परजीवी नियंत्रण और कृमिनाशक दवा\nडॉ. मीणा के अनुसार केवल बड़े दुधारू पशु ही नहीं, बल्कि भेड़ और बकरियां भी बारिश के मौसम में गंभीर संक्रमणों का शिकार हो सकती हैं। छोटे पशुओं की हिफाजत के लिए भी नियमित टीकाकरण उतना ही आवश्यक है। इसके अतिरिक्त, बरसात के दौरान पशुओं के पेट और आंतों में आंतरिक परजीवियों का हमला बढ़ जाता है। इस आंतरिक संक्रमण को रोकने के लिए पशुओं को तय समय पर कृमिनाशक दवा पिलाई जानी चाहिए, ताकि उनके पाचन तंत्र और सामान्य स्वास्थ्य पर बुरा असर न पड़े।\n\nजू और कलीली की रोकथाम के लिए बाड़ों में छिड़काव\nछोटे मवेशियों की त्वचा पर चिपकने वाले जू और कलीली जैसे बाहरी परजीवी भी कई गंभीर बीमारियां फैलाते हैं। इन बाह्य परजीवियों के प्रकोप से बाड़े को मुक्त रखने के लिए पशुपालन विभाग ने पशु आवासों में साइपरमेथ्रिन का स्प्रे करवाने का सुझाव दिया है। इस कीटनाशक घोल के उचित छिड़काव से बाड़े में मौजूद परजीवियों को नष्ट करने में खासी मदद मिलती है। हालांकि डॉ. मीणा ने यह भी स्पष्ट किया है कि साइपरमेथ्रिन का उपयोग मनमाने ढंग से करने के बजाय पशुपालन विभाग या पशु चिकित्सक के सटीक दिशा-निर्देशों के अनुसार ही किया जाना चाहिए।\n\nघरेलू नुस्खों में वक्त गंवाने के बजाय डॉक्टर से मिलें\nपशुपालन विभाग ने सभी मवेशी पालकों को स्पष्ट संदेश दिया है कि यदि किसी पशु में अस्वस्थता, सुस्ती या संक्रमण का कोई भी लक्षण दिखे, तो घरेलू उपचारों के सहारे बैठकर बहुमूल्य समय बर्बाद न करें। बीमार जानवर को अविलंब अपने क्षेत्र के नजदीकी पशु चिकित्सा केंद्र ले जाएं अथवा वहां के चिकित्सा प्रभारी से मार्गदर्शन प्राप्त करें। समय रहते सटीक जांच, उचित चिकित्सकीय देखभाल और नियमित टीकाकरण करवाकर ही पशुधन को गंभीर संकट से बचाया जा सकता है और किसी भी अप्रिय हानि को टाला जा सकता है।\n\nइसका आप पर असर\nबरसात के मौसम में पशुओं की उचित देखभाल और समय पर टीकाकरण कराकर किसान अपने पशुधन की जान बचाने के साथ बड़े आर्थिक नुकसान से बच सकते हैं।\n\n• टीकाकरण समय सीमा: अपने नजदीकी सरकारी पशु चिकित्सा केंद्र पर जाकर तुरंत गलघोटू का टीका लगवाएं। समय पर टीका लग जाने से पशुओं में जानलेवा संक्रामक बीमारियों के फैलने की संभावना न के बराबर रह जाती है।\n• आंतरिक परजीवियों से सुरक्षा: भेड़, बकरियों और दुधारू मवेशियों को डॉक्टर की सलाह से तुरंत कृमिनाशक दवा पिलाएं। पेट के कीड़े खत्म होने से पशुओं का पाचन दुरुस्त रहता है और दूध उत्पादन में गिरावट नहीं आती।\n• बाड़े की सुरक्षा: पशु आवास में नमी और गंदगी जमा न होने दें तथा बाह्य परजीवियों के खात्मे के लिए साइपरमेथ्रिन का छिड़काव कराएं। इस स्प्रे का इस्तेमाल केवल पशु चिकित्सक द्वारा सुझाई गई निर्धारित मात्रा के अनुसार ही करें।\n• इलाज में तत्परता: पशु में बुखार, सुस्ती या सांस लेने में परेशानी दिखने पर घरेलू नुस्खों में समय गंवाए बिना सीधे पशु अस्पताल ले जाएं। समय पर मिलने वाला औपचारिक उपचार गंभीर स्थिति को टालने और पशु की जान बचाने में कारगर होता है।\n\nऐसा क्यों हुआ\nमानसून के दौरान वातावरण में उच्च आर्द्रता और लगातार जलजमाव के चलते हानिकारक बैक्टीरिया और परजीवी तेजी से पनपते हैं, जो पशुओं के इम्यून सिस्टम को कमजोर कर उन्हें गंभीर रूप से बीमार कर देते हैं।\n\n• नमी और संक्रामक रोग: अत्यधिक नमी और वर्षा के कारण बाड़ों में रोगाणुओं और बैक्टीरिया का प्रसार काफी तेज हो जाता है। यही परिस्थितियां गायों और भैंसों में गलघोटू जैसी तीव्र संक्रामक बीमारियों के फैलने की मुख्य वजह बनती हैं।\n• परजीवियों का तीव्र विस्तार: बारिश के मौसम में गीली जमीन और घास के जरिए पेट के कीड़े और त्वचा पर जू व कलीली तेजी से बढ़ते हैं। ये बाह्य और आंतरिक परजीवी मवेशियों के शरीर से पोषक तत्व सोखकर उन्हें गंभीर रोगों का शिकार बना देते हैं।\n• इलाज में विलंब: कई पशुपालक शुरुआती लक्षणों को नजरअंदाज कर पारंपरिक या घरेलू उपायों में समय नष्ट कर देते हैं। समय पर पेशेवर जांच और टीके न मिलने के कारण मवेशी की हालत बिगड़ जाती है और पशुहानि हो जाती है।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. बरसात के मौसम में गाय और भैंसों को किस प्रमुख बीमारी से बचाने के लिए टीका लगवाने की अपील की गई है?\nबरसात के दिनों में गाय और भैंस वंश को गलघोटू बीमारी के संक्रमण से बचाने के लिए तुरंत टीकाकरण करवाने की अपील की गई है।\n\n2. छोटे मवेशियों जैसे भेड़ और बकरियों को परजीवियों से बचाने के लिए क्या उपाय सुझाया गया है?\nछोटे पशुओं को आंतरिक परजीवी संक्रमण से बचाने के लिए कृमिनाशक दवा पिलाने और समय पर टीका लगवाने की सलाह दी गई है।\n\n3. पशु बाड़ों में जू और कलीली की रोकथाम के लिए किस दवा के छिड़काव की सिफारिश की गई है?\nजू और कलीली जैसे बाहरी परजीवियों के खात्मे के लिए पशुपालकों को बाड़े में साइपरमेथ्रिन का स्प्रे करवाने का सुझाव दिया गया है।\n\n4. साइपरमेथ्रिन स्प्रे का इस्तेमाल करते समय क्या सावधानी रखनी जरूरी है?\nइस कीटनाशक स्प्रे का इस्तेमाल हमेशा पशुपालन विभाग या पशु चिकित्सा विशेषज्ञ की सलाह और निर्देशों के अनुसार ही किया जाना चाहिए।\n\n5. पशु के बीमार पड़ने पर पशुपालकों को क्या नहीं करना चाहिए?\nबीमारी के लक्षण दिखाई देने पर घरेलू उपचार में समय नहीं गंवाना चाहिए, बल्कि तुरंत नजदीकी पशु चिकित्सा संस्था से संपर्क करना चाहिए।",
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  "category": "भारत",
  "publishedAt": "2026-09-20",
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