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  "title": "मानसून सत्र के पहले दिन नारेबाजी से थमी संसद, NEET पेपर लीक पर भड़का विपक्ष",
  "summary": "संसद के मानसून सत्र के पहले दिन विपक्ष के हंगामे से लोकसभा और राज्यसभा की कार्यवाही बार-बार बाधित हुई. सांसदों ने NEET-UG 2026 पेपर लीक, छात्रों पर पुलिस कार्रवाई और शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग उठाई, जबकि संसद के बाहर भी प्रदर्शनकारियों और पुलिस में टकराव हुआ.",
  "content": "संसद के मानसून सत्र का पहला दिन ही हंगामे की भेंट चढ़ गया. सोमवार को जैसे ही दोनों सदनों की कार्यवाही शुरू हुई, NEET-UG 2026 परीक्षा में पेपर लीक की खबरों ने लोकसभा और राज्यसभा को पूरी तरह अपनी गिरफ्त में ले लिया. विपक्षी सांसद परीक्षा में गड़बड़ियों, आंदोलन कर रहे छात्रों पर हुई पुलिसिया कार्रवाई और शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान से इस्तीफे की मांग को लेकर पूरे दिन आक्रामक नजर आए. इसका असर संसद के भीतर ही नहीं, बाहर भी साफ दिखा, जहां प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच लगातार तनाव की स्थिति बनी रही. पहले ही दिन की यह अफरातफरी बता रही थी कि इस बार का सत्र आसानी से नहीं चलने वाला.\n\nलोकसभा में सुबह से ही टकराव, छह बार टली कार्यवाही\nनिचले सदन में कामकाज सुबह 11 बजे शुरू हुआ, लेकिन विपक्षी सदस्यों ने बैठते ही नारेबाजी शुरू कर दी. प्रश्नकाल के दौरान शोर इतना बढ़ गया कि स्पीकर ओम बिरला को मजबूरन कार्यवाही दोपहर 12 बजे तक टालनी पड़ी. सदन दोबारा जुटा तो हंगामा फिर उसी तेजी से शुरू हो गया, और नतीजा यह रहा कि पूरे दिन में सदन को कुल छह बार स्थगित करना पड़ा. आखिरकार दोपहर करीब तीन बजे उस दिन के लिए पूरा कामकाज रोक दिया गया, बिना किसी ठोस बहस के.\n\nराज्यसभा में खरगे ने सरकार पर साधा निशाना\nऊपरी सदन का हाल भी लोकसभा से जुदा नहीं था. नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने पेपर लीक का मुद्दा उठाते हुए कहा कि इससे लाखों छात्रों का भविष्य दांव पर लगा है. उनका आरोप था कि जंतर-मंतर पर धरना दे रहे छात्रों पर लाठियां बरसाई गईं और सरकार पूरे मामले को दबाने और टालने की कोशिश में लगी है. छात्रों के समर्थन के अलावा विपक्षी सदस्यों ने अयोध्या के राम मंदिर से जुड़े कथित दान घोटाले पर भी सदन में जोरदार नारेबाजी की. उपसभापति हरिवंश ने बार-बार सदस्यों से अपील की कि वे चर्चा का रास्ता अपनाएं और सदन की मर्यादा का ध्यान रखें, मगर शोर थमने का नाम नहीं ले रहा था. नतीजतन राज्यसभा को भी पांच बार स्थगित करने के बाद पूरे दिन के लिए बंद कर दिया गया.\n\nहंगामे के बीच एक विधेयक पास, दूसरा अटका\nइतने हंगामे के बीच भी सरकार ने अपना विधायी एजेंडा पूरी तरह नहीं छोड़ा. केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने सुप्रीम कोर्ट में न्यायाधीशों की संख्या 34 से बढ़ाकर 38 करने के लिए पहले लाए गए अध्यादेश की जगह अब एक विधेयक सदन में पेश कर दिया, जिससे शीर्ष अदालत में लंबित मामलों की सुनवाई तेज होने की उम्मीद जताई जा रही है. इसके विपरीत, वंदे मातरम् के अपमान को दंडनीय अपराध घोषित करने वाला प्रस्तावित विधेयक हंगामे की वजह से राज्यसभा में पेश ही नहीं हो सका और अगले दिन के लिए टल गया.\n\nसंसद भवन के बाहर भी घमासान, बैरिकेड और आंसू गैस\nसंसद के भीतर जो तस्वीर थी, बाहर उससे कम तनावपूर्ण नहीं थी. हजारों की संख्या में प्रदर्शनकारी संसद की तरफ मार्च करने की कोशिश में जुटे, लेकिन पुलिस ने रास्ते में बैरिकेड लगाकर उन्हें आगे बढ़ने से रोक दिया. जब स्थिति बिगड़ने लगी तो सुरक्षा बलों ने भीड़ को हटाने के लिए लाठीचार्ज किया और आंसू गैस के गोले भी छोड़े. एहतियात के तौर पर संसद के कुछ प्रवेश द्वार भी कुछ देर के लिए पूरी तरह बंद रखे गए.\n\nइसका आप पर असर\n• छात्रों के लिए: NEET-UG 2026 पेपर लीक का मुद्दा अभी सुलझा नहीं है, इसलिए मेडिकल प्रवेश परीक्षा से जुड़े लाखों छात्रों और उनके परिवारों को अभी और इंतजार करना पड़ सकता है.\n• आम नागरिकों के लिए: हंगामे में सदन का बहुमूल्य समय बर्बाद हुआ, जिससे जनहित से जुड़े कई अहम विधेयकों पर चर्चा टलती नजर आई.\n• न्याय व्यवस्था पर असर: सुप्रीम कोर्ट में जजों की संख्या 34 से 38 करने वाला विधेयक पेश हो गया है, जिसके पास होने पर लंबित मामलों की सुनवाई में तेजी आ सकती है.\n\nसवाल-जवाब\n\n1. संसद के मानसून सत्र के पहले दिन हंगामा किस मुद्दे पर हुआ?\nविपक्ष ने NEET-UG 2026 परीक्षा के पेपर लीक, छात्रों पर पुलिस कार्रवाई और शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर हंगामा किया.\n\n2. लोकसभा की कार्यवाही कितनी बार स्थगित हुई?\nपूरे दिन में लोकसभा की कार्यवाही छह बार स्थगित हुई और आखिरकार करीब तीन बजे दिन भर के लिए कामकाज खत्म कर दिया गया.\n\n3. राज्यसभा में मल्लिकार्जुन खरगे ने क्या आरोप लगाया?\nउन्होंने कहा कि जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर लाठीचार्ज किया गया और सरकार इस मुद्दे को दबाने की कोशिश कर रही है.\n\n4. हंगामे के बीच कौन सा विधेयक पेश किया गया?\nकानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने सुप्रीम कोर्ट में जजों की संख्या 34 से 38 करने संबंधी अध्यादेश के स्थान पर विधेयक पेश किया.\n\n5. वंदे मातरम् से जुड़े विधेयक का क्या हुआ?\nहंगामे की वजह से वंदे मातरम् के अपमान को दंडनीय अपराध बनाने वाला प्रस्तावित विधेयक राज्यसभा में पेश नहीं हो सका.\n\n6. संसद परिसर के बाहर क्या हुआ?\nहजारों प्रदर्शनकारियों ने संसद की ओर मार्च करने की कोशिश की, जिसे पुलिस ने बैरिकेड लगाकर रोका और बाद में लाठीचार्ज व आंसू गैस का इस्तेमाल किया गया.",
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  "category": "भारत",
  "publishedAt": "2026-07-21",
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    "संसद मानसून सत्र",
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