मानसून सत्र से पहले मोदी आवास पर ढाई घंटे चली मंथन बैठक, एनसीपी सांसदों पर बनी बड़ी रणनीति मानसून सत्र से पहले पीएम मोदी के आवास पर बुधवार रात हुई ढाई घंटे की बैठक में अमित शाह, नितिन नबीन और बीएल संतोष शामिल हुए, जिसमें संगठन विस्तार के साथ एनसीपी शरद पवार गुट के सांसदों का समर्थन जुटाने की रणनीति पर चर्चा हुई। मानसून सत्र शुरू होने से ठीक पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आवास पर बुधवार रात एक अहम बैठक हुई, जो करीब ढाई घंटे तक चली। इस मैराथन मंथन में भाजपा के टॉप नेतृत्व ने संगठन से जुड़े बड़े फैसलों के साथ-साथ संसद में आगे की रणनीति पर भी बात की। बैठक में कौन-कौन रहा मौजूद पीएम मोदी के आवास पर हुई इस उच्च स्तरीय बैठक में गृहमंत्री अमित शाह, भाजपा अध्यक्ष नितिन नबीन और पार्टी के संगठन महामंत्री बीएल संतोष शामिल हुए। इतने लंबे समय तक चली चर्चा से साफ है कि एजेंडे में कई अहम मुद्दे शामिल थे। संगठन की नई टीम और सत्र की तैयारी पर मंथन सूत्रों के अनुसार इस बैठक का मुख्य मकसद भाजपा संगठन की नई टीम की रूपरेखा तय करना था। साथ ही आने वाले मानसून सत्र को लेकर पार्टी की रणनीति पर भी विस्तार से चर्चा हुई। बैठक में संगठन विस्तार, चुनावी राज्यों में प्रचार अभियान की योजना और संभावित मंत्रिमंडल विस्तार जैसे विषय भी एजेंडे में रहे। एनसीपी शरद पवार गुट पर बनी खास रणनीति बैठक में भाजपा नेतृत्व ने एनसीपी के शरद पवार गुट को लेकर भी गहन विचार विमर्श किया। दरअसल एनसीपी सांसद सुप्रिया सुले के हाल के बयान के बाद भाजपा एक खास रणनीति पर काम कर रही है, जिसके तहत पार्टी के सभी आठों सांसदों का समर्थन हासिल करने की कोशिश हो रही है। हालांकि फिलहाल शरद पवार की पार्टी के सभी वरिष्ठ नेताओं को एनडीए में शामिल करने की भाजपा की कोई योजना नहीं है। सूत्रों की मानें तो पिछले कुछ दिनों में शरद पवार की महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री से जो मुलाकात हुई थी, उसमें उन्हें पार्टी की इसी मंशा से अवगत करा दिया गया था। इसके अलावा परिसीमन और महिला आरक्षण जैसे अहम विधेयकों के अलावा अन्य महत्वपूर्ण बिलों पर भी सरकार ने एनसीपी सांसदों के समर्थन का भरोसा लगभग हासिल कर लिया है। सरकार को संख्या और मनोवैज्ञानिक बढ़त का भरोसा पार्टी की रणनीति साफ है, पूरे मानसून सत्र के दौरान अगर एनसीपी शरद पवार गुट के सांसद सरकार के साथ बने रहते हैं तो इससे भाजपा को संख्या बल में सीधा फायदा मिलेगा। इसके साथ ही विपक्ष पर मनोवैज्ञानिक दबाव बनाने में भी सरकार कामयाब होगी। सूत्रों के मुताबिक बैठक में यह भी साफ हो गया कि शरद पवार गुट के सांसद एनडीए की बैठकों में हिस्सा नहीं लेंगे, लेकिन महत्वपूर्ण विधेयकों पर सरकार का साथ जरूर देंगे। इसका आप पर असर इस बैठक के फैसलों का सीधा असर आम जनता तक पहुंचने वाले कई बड़े कानूनों पर पड़ सकता है। • भारत में: अगर मानसून सत्र में महिला आरक्षण और परिसीमन जैसे बिलों पर एनसीपी सांसदों का समर्थन मिलता है, तो इन अहम कानूनों के पास होने की राह आसान हो सकती है, जिसका असर देशभर के मतदाताओं और महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी पर पड़ेगा। • संसद के कामकाज पर: सरकार को संख्या बल में मिलने वाली मजबूती से मानसून सत्र में विधायी कामकाज सुचारू रूप से चलने की संभावना बढ़ जाएगी, जिससे लंबित बिलों पर फैसला जल्दी हो सकता है। सवाल-जवाब 1. यह बैठक कब और कहां हुई? यह बैठक बुधवार रात प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आवास पर हुई। 2. बैठक कितनी देर तक चली? यह उच्च स्तरीय बैठक करीब ढाई घंटे तक चली। 3. बैठक में कौन-कौन शामिल थे? बैठक में गृहमंत्री अमित शाह, भाजपा अध्यक्ष नितिन नबीन और संगठन महामंत्री बीएल संतोष मौजूद थे। 4. इस बैठक का मुख्य मकसद क्या था? बैठक का मकसद भाजपा संगठन की नई टीम की रूपरेखा तैयार करना और मानसून सत्र की तैयारी करना था। 5. एनसीपी को लेकर बैठक में क्या चर्चा हुई? बीजेपी नेतृत्व ने एनसीपी शरद पवार गुट के सभी आठों सांसदों का समर्थन जुटाने की रणनीति पर चर्चा की। 6. क्या शरद पवार गुट एनडीए में शामिल होगा? फिलहाल शरद पवार की पार्टी के सभी वरिष्ठ नेताओं को एनडीए में शामिल करने की कोई योजना नहीं है, हालांकि सांसद अहम बिलों पर समर्थन देंगे। 7. सरकार को इस रणनीति से क्या फायदा होगा? एनसीपी सांसदों के साथ रहने से सरकार को संख्या बल में फायदा मिलेगा और विपक्ष पर मनोवैज्ञानिक दबाव भी बनेगा। 8. सुप्रिया सुले के बयान का इस बैठक से क्या संबंध है? एनसीपी सांसद सुप्रिया सुले के हाल के बयान के बाद ही भाजपा ने आठों सांसदों का समर्थन जुटाने की रणनीति पर काम शुरू किया। https://trendkia.com/national/manasuna-satra-se-pahale-modi-avasa-para-dhai-ghnte-chali-mnthana-baithaka-ncp-sansadon-para-bani-bari-rananiti-8014 TrendKia — Har trend, sabse pehle.