मानव-वन्यजीव संघर्ष रोकने बहराइच पहुंचे अभिषेक घोषल, वाइल्डलाइफ ट्रस्ट ऑफ इंडिया के जमीनी अभियानों की दी जानकारी वाइल्डलाइफ ट्रस्ट ऑफ इंडिया के प्रमुख अभिषेक घोषल ने बहराइच का दौरा कर वन कर्मियों को निर्देश दिए और 1998 से जारी संस्था के मैदानी रेस्क्यू व संरक्षण कार्यों की विस्तृत जानकारी साझा की। उत्तर प्रदेश के बहराइच जिले में इंसानों और वन्यजीवों के बीच होने वाले आमने-सामने के टकराव को नियंत्रित करने तथा वन्यजीव संरक्षण के उपायों को मजबूत बनाने के उद्देश्य से वाइल्डलाइफ ट्रस्ट ऑफ इंडिया के प्रमुख अभिषेक घोषल ने क्षेत्र का दौरा किया। अपने इस भ्रमण के दौरान उन्होंने वन विभाग के स्थानीय अधिकारियों और मैदानी वन कर्मियों से मुलाकात की तथा उन्हें आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए। इसके साथ ही उन्होंने संस्था द्वारा जंगल और वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए चलाए जा रहे अभियानों की विस्तृत जानकारी भी साझा की। 1998 से प्राकृतिक पर्यावरण और संकटग्रस्त जीवों की सुरक्षा वाइल्डलाइफ ट्रस्ट ऑफ इंडिया के कार्यक्षेत्र की जानकारी देते हुए अभिषेक घोषल ने स्पष्ट किया कि यह भारत की एक अग्रणी गैर-सरकारी संस्था है। वर्ष 1998 में अपनी स्थापना के समय से ही यह संगठन देश के प्राकृतिक पर्यावरण को संवारने और संकटग्रस्त जीवों के संरक्षण में समर्पित भाव से काम कर रहा है। संस्था का मुख्य लक्ष्य पूरे भारत में वन्यजीवों के प्राकृतिक आवासों की बहाली करना, अवैध शिकार पर पूरी तरह से अंकुश लगाना और प्राकृतिक तंत्र को सुरक्षित रखना है। कागजों से इतर जमीन पर काम करता है विशेषज्ञों का नेटवर्क संस्था की कार्यप्रणाली पर बात करते हुए उन्होंने बताया कि वाइल्डलाइफ ट्रस्ट ऑफ इंडिया का काम केवल कागजी दस्तावेजों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि इसकी टीमें वास्तविक जमीनी धरातल पर उतरकर अभियानों को अंजाम देती हैं। इस नेटवर्क में वन्यजीव डॉक्टर, पर्यावरण वैज्ञानिक, विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञ और मुस्तैद फील्ड रेस्क्यू टीमें शामिल हैं। जब भी कोई जीव घायल होता है या भटककर आबादी वाले इलाके में आ जाता है, तो यह आपातकालीन टीम तुरंत मौके पर पहुंचकर उसका रेस्क्यू करती है, उचित चिकित्सीय इलाज प्रदान करती है और फिर सुरक्षित रूप से वापस जंगल में छोड़ देती है। इसके अतिरिक्त, अवैध वन्यजीव व्यापार को रोकने के लिए संस्था सरकारी एजेंसियों को कानूनी सहयोग भी मुहैया कराती है। जंगलों के लिए वरदान और ग्रामीणों को जागरूकता का संबल अभिषेक घोषल ने इस बात पर विशेष बल दिया कि यह संस्था जंगलों और जीवों के लिए किसी वरदान से कम साबित नहीं हुई है। इसका कारण यह है कि संस्था केवल जानवरों की जान नहीं बचाती, बल्कि जंगलों के सीमावर्ती इलाकों में रहने वाले स्थानीय ग्रामीणों को भी अपने संरक्षण अभियानों का हिस्सा बनाती है। बहराइच जैसे संवेदनशीलता से भरे क्षेत्रों में, जहां इंसान और वन्यजीवों का सामना होना एक बड़ी चुनौती है, वहां संस्था की टीमें ग्रामीणों के बीच जाकर उन्हें जागरूक करती हैं। किसी भी आपात परिस्थिति में त्वरित सहायता उपलब्ध कराकर यह संस्था इंसानों और जानवरों के बीच के टकराव को न्यूनतम स्तर पर लाने का काम करती है। इसका आप पर असर भारत में: जंगलों और संकटग्रस्त वन्यजीवों के संरक्षण से संपूर्ण पर्यावरण संतुलन और पारिस्थितिकी तंत्र सुरक्षित रहता है। बहराइच में: जंगल के सीमावर्ती इलाकों में रहने वाले ग्रामीणों को मानव-वन्यजीव टकराव के समय त्वरित सहायता मिलेगी और उनकी सुरक्षा सुनिश्चित होगी। सवाल-जवाब 1. वाइल्डलाइफ ट्रस्ट ऑफ इंडिया (WTI) की स्थापना किस वर्ष हुई थी? वाइल्डलाइफ ट्रस्ट ऑफ इंडिया की स्थापना वर्ष 1998 में हुई थी और यह भारत में प्राकृतिक पर्यावरण व संकटग्रस्त जीवों की रक्षा में लगी एक प्रमुख संस्था है। 2. अभिषेक घोषल ने बहराइच जिले का दौरा क्यों किया? उन्होंने बहराइच में वन्यजीव संरक्षण की स्थिति की समीक्षा करने, मानव-वन्यजीव संघर्ष को रोकने और मैदानी वन कर्मियों को दिशा-निर्देश देने के लिए दौरा किया। 3. WTI की मैदानी टीमें आपातकालीन स्थितियों में कैसे काम करती हैं? संस्था के पास डॉक्टरों, वैज्ञानिकों और रेस्क्यू टीमों का नेटवर्क है जो घायल या भटके हुए जानवरों का मौके पर इलाज कर उन्हें वापस सुरक्षित जंगलों में पहुंचाते हैं। 4. बहराइच जैसे संवेदनशील इलाकों में ग्रामीणों की सुरक्षा के लिए क्या उपाय किए जाते हैं? WTI की टीमें ग्रामीणों को वन्यजीवों के प्रति जागरूक करती हैं और इंसान व जानवर का आमना-सामना होने पर तुरंत राहत और सहायता पहुंचाती हैं। https://trendkia.com/national/manava-vanyajiva-sngharsha-rokane-bahraich-pahunche-abhishek-ghoshal-wildlife-trust-of-india-ke-jamini-abhiyanon-ki-di-janakari-19640 TrendKia — Har trend, sabse pehle.