मार्क ज़करबर्ग ने भारत सरकार से मांगी लिखित माफी, देश भर में करोड़ों रुपये के नकली घी और मिलावटी मसालों का भंडाफोड़ मेटा के मुख्य कार्यकारी अधिकारी मार्क ज़करबर्ग ने डीपफेक और कंटेंट मॉडरेशन की चूकों पर भारत सरकार से लिखित माफी मांगी है। वहीं गुजरात, पंजाब और उत्तर प्रदेश में पुलिस ने कार्रवाई करते हुए करोड़ों रुपये के नकली घी और केमिकल युक्त मसालों के गिरोह का पर्दाफाश किया है। सोशल मीडिया दिग्गजों पर नकेल कसने और जनस्वास्थ्य की रक्षा के लिए भारत सरकार ने दो अलग-अलग मोर्चों पर सख्त रुख अख्तियार किया है। एक तरफ जहां मेटा के मुख्य कार्यकारी अधिकारी मार्क ज़करबर्ग ने प्लेटफॉर्म पर डीपफेक वीडियो और कंटेंट मॉडरेशन में हुई गंभीर चूकों के लिए भारत सरकार से औपचारिक लिखित माफी मांगी है, वहीं दूसरी तरफ देश के विभिन्न राज्यों में पुलिस और खाद्य सुरक्षा विभागों ने कार्रवाई करते हुए करोड़ों रुपये के नकली घी और केमिकल युक्त मसालों के गिरोह का भंडाफोड़ किया है। नई दिल्ली में मेटा के चीफ ग्लोबल अफेयर्स ऑफिसर ने सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव से मुलाकात कर ज़करबर्ग का माफीनामा सौंपा। इसके साथ ही गुजरात, पंजाब, उत्तर प्रदेश और तेलंगाना में पुलिस छापों के दौरान भारी मात्रा में जानलेवा रसायनों से तैयार खाद्य सामग्री जब्त की गई है। मेटा की कंटेंट मॉडरेशन में विफलता और मार्क ज़करबर्ग का लिखित माफीनामा मेटा के शीर्ष प्रबंधन ने भारत सरकार के सामने स्वीकार किया है कि प्लेटफॉर्म पर कुछ विशिष्ट प्रकार के हानिकारक कंटेंट को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और पैसे देकर तेजी से प्रमोट करने का काम किया जा रहा था। कंपनी की मॉडरेशन प्रणाली इन विसंगतियों पर समय रहते ध्यान देने में पूरी तरह नाकाम रही। नई दिल्ली स्थित सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय में आयोजित बैठक के दौरान मेटा के चीफ ग्लोबल अफेयर्स ऑफिसर ने केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव को आश्वस्त किया कि भविष्य में कंपनी अपनी सामाजिक और कानूनी जिम्मेदारियों का पूर्ण निष्ठा से पालन करेगी तथा इस प्रकार की गंभीर तकनीकी व मॉडरेशन त्रुटियां दोबारा नहीं दोहराई जाएंगी। मेटा की ओर से यह लिखित स्पष्टीकरण तब आया जब सरकार ने कंपनी के रवैये पर कड़ा ऐतराज जताया था। जंतर-मंतर आंदोलन, पाकिस्तान से संचालित हैंडल और पीएम के वीडियो पर विवाद इस पूरे मामले की पृष्ठभूमि हाल ही में जंतर-मंतर पर हुए छात्र आंदोलन से जुड़ी हुई है। आंदोलन के दौरान सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर हजारों की संख्या में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से तैयार डीपफेक वीडियो प्रसारित किए गए। जांच में सामने आया कि पाकिस्तान से संचालित कई सोशल मीडिया हैंडल्स से भड़काऊ पोस्ट साझा की गईं, जिन्हें फेसबुक, इंस्टाग्राम और व्हाट्सएप पर बेहद तेजी से वायरल किया गया। इन भ्रामक पोस्टों को बूस्ट करने के लिए भारी रकम खर्च की गई थी, लेकिन मेटा के स्वचालित तंत्र ने इस पर कोई त्वरित रोक नहीं लगाई। इसी बीच, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जेन-ज़ी (GenZ) युवाओं के नाम एक विशेष संदेश वाला वीडियो अपने आधिकारिक फेसबुक और इंस्टाग्राम अकाउंट पर पोस्ट किया था। मेटा ने इस वीडियो को फेसबुक से लगभग 5 से 6 घंटे के लिए हटा दिया। सरकार द्वारा कड़ी आपत्ति दर्ज कराए जाने के बाद ही इस वीडियो को पुनः रीस्टोर किया गया। संसदीय समिति का अल्टीमेटम और सेफ हार्बर क्लॉज हटाने की चेतावनी मेटा ने प्रधानमंत्री के वीडियो को हटाए जाने को एक तकनीकी खराबी बताते हुए शुरुआती माफी मांगी थी, लेकिन सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने इस दलील को खारिज कर दिया। मंत्रालय की सख्ती के बाद मेटा के वरिष्ठ अधिकारियों को तलब किया गया। इस विषय पर गठित संसदीय समिति ने कड़ा रुख अपनाते हुए मार्क ज़करबर्ग को अपनी गलतियों को स्वीकार करने और औपचारिक माफी मांगने के लिए 3 दिन की समय सीमा का अल्टीमेटम दिया। समिति ने स्पष्ट किया कि यदि निर्धारित समय सीमा के भीतर माफीनामा पेश नहीं किया जाता, तो भारत सरकार सूचना प्रौद्योगिकी कानून के तहत मेटा को मिलने वाला सेफ हार्बर क्लॉज कानूनी संरक्षण समाप्त कर देगी। सेफ हार्बर क्लॉज हटने का सीधा अर्थ यह होता कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर पोस्ट किए जाने वाले गैर-कानूनी कंटेंट के लिए कंपनी के शीर्ष अधिकारियों के खिलाफ सीधे एफआईआर दर्ज की जा सकेगी। कानूनी खतरे को भांपते हुए बुधवार को अल्टीमेटम खत्म होने से ठीक पहले ज़करबर्ग ने भारत सरकार से लिखित रूप से माफी मांग ली। तकनीकी विशेषज्ञ मंत्री की पूछताछ और मेटा की वित्तीय निर्भरता सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने मेटा के वैश्विक अधिकारियों के साथ हुई बैठक में तीखे सवाल पूछे और कंपनी की दलीलों की गहन समीक्षा की। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IIT) से पढ़े और तकनीकी मामलों के मर्मज्ञ होने के कारण केंद्रीय मंत्री के समक्ष मेटा अधिकारी तकनीकी त्रुटि का बहाना बनाकर नहीं बच सके। इस पूरे घटनाक्रम में भारत के डिजिटल बाजार का आकार भी निर्णायक साबित हुआ। चालू वित्त वर्ष के आंकड़ों के अनुसार, मेटा ने अकेले भारत से 29,300 करोड़ रुपये से अधिक की आमदनी अर्जित की है। इतनी विशाल वित्तीय कमाई और करोड़ों उपयोगकर्ताओं के आधार को देखते हुए मेटा के लिए भारतीय बाजार बेहद महत्वपूर्ण है। दुनिया की सबसे मूल्यवान टेक कंपनियों में शुमार होने के बावजूद मेटा को भारत के कड़े कानूनों और प्रशासनिक दबाव के आगे अपनी गलती माननी पड़ी, जो भारतीय विनियामक व्यवस्था की बढ़ती शक्ति को रेखांकित करता है। गुजरात के कलोल में 1.67 करोड़ रुपये का नकली घी का जखीरा जब्त खाद्य पदार्थों में मिलावट के खिलाफ जारी देशव्यापी अभियान के तहत गुजरात के गांधीनगर जिले के कलोल इलाके में पुलिस ने एक बड़े फर्जीवाड़े का पर्दाफाश किया है। कलोल स्थित एक कारखाने पर छापेमारी के दौरान पुलिस ने 30,000 लीटर नकली घी बरामद किया। जांच में खुलासा हुआ कि यह नकली घी विभिन्न ट्रेडिंग कंपनियों को बेचा जाता था, जो इस पर अपना ब्रांड नेम छापकर शुद्ध देसी घी के रूप में बाजार में सप्लाई करती थीं। छापे के दौरान फोरेंसिक साइंस लेबोरेटरी (FSL) और खाद्य एवं औषधि नियंत्रण विभाग के अधिकारियों की मौजूदगी में 200 लीटर क्षमता वाले 223 बैरल में रखा रिफाइंड पाम ऑयल (RPO) और पीले रंग का रसायन आरएम एन्हांसर जब्त किया गया। इस पूरे संदिग्ध रसायन व पाम ऑयल के जखीरे की बाजार कीमत 1.67 करोड़ रुपये आंकी गई है। जानलेवा रसायनों से निर्माण प्रक्रिया और स्वास्थ्य पर गंभीर दुष्परिणाम पुलिस पूछताछ में कारखाने के मालिक ने स्वीकार किया कि वह घटिया गुणवत्ता वाले रिफाइंड पाम ऑयल में विभिन्न केमिकल्स और वेजिटेबल फैट मिलाकर नकली घी का आधार तैयार करता था। अंतिम उत्पाद का मूल्य बढ़ाने और उसमें असली घी जैसी महक व रंग लाने के लिए वह इसमें आरएम एन्हांसर रसायन और बीटी नेगेटिव नामक उत्पाद मिलाता था। मिलावटखोर बिना किसी ब्रांडिंग के इस रसायनयुक्त तेल को थोक व्यापारियों को बेच देता था, जो आगे इसे शुद्ध घी बताकर उपभोक्ताओं तक पहुंचाते थे। चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार, इस प्रकार के रसायनों और रिफाइंड पाम ऑयल के सेवन से मनुष्यों में हृदय रोग, बैड कोलेस्ट्रॉल का बढ़ना और उच्च रक्तचाप (हाइपरटेंशन) जैसी गंभीर और जानलेवा बीमारियां उत्पन्न हो सकती हैं। आरोपी कारखानेदार दो साल पहले भी इसी तरह के अपराध में पकड़ा गया था, लेकिन अदालत से जमानत मिलने के बाद उसने पुनः गुजरात, पंजाब, राजस्थान और महाराष्ट्र में नकली घी की आपूर्ति का नेटवर्क खड़ा कर लिया। पंजाब, उत्तर प्रदेश और तेलंगाना में मिलावटी मसालों और केमिकल का भंडाफोड़ नकली खाद्य पदार्थों का यह जाल केवल गुजरात तक सीमित नहीं है। बुधवार को पंजाब के लुधियाना में पुलिस ने एक गोदाम पर छापा मारकर 3,000 लीटर नकली घी जब्त किया, जिसकी आपूर्ति अहमदाबाद से की गई थी। उधर उत्तर प्रदेश के कानपुर में खाद्य सुरक्षा विभाग ने नकली मसाले बनाने वाली एक फैक्ट्री पर छापा मारा। वहां से 2,000 किलो मिलावटी हल्दी जब्त की गई, जिसमें असली हल्दी का एक भी कण मौजूद नहीं था। मिलावटखोर टूटे और खराब चावल को पीसकर पाउडर बनाते थे और उसमें घातक केमिकल रंग मिलाकर उसे हल्दी के रूप में बेचते थे। इसके अतिरिक्त, लकड़ी के बुरादे में लाल रंग मिलाकर मिर्च पाउडर और इसी तरह धनिया पाउडर तैयार किया जाता था। अधिकारियों ने यहां से 5,86,000 रुपये कीमत का मिलावटी मसाला स्टॉक जब्त किया। तेलंगाना के हैदराबाद में भी पुलिस ने तीन दुकानों पर छापेमारी कर कपड़ों को रंगने वाली डाई से चमकाए गए लौंग और जीरे की खेप बरामद की। संसदीय रिपोर्ट के चौंकाने वाले आंकड़े और गैर-इरादतन हत्या की धाराएं दैनिक उपयोग की खाद्य सामग्रियों में रसायनों और रंगों की मिलावट एक प्रकार का धीमा जहर देने जैसा अपराध है। संसद में प्रस्तुत की गई आधिकारिक रिपोर्ट के अनुसार, पिछले पांच वर्षों के दौरान देश भर से खाद्य पदार्थों के 8,86,000 सैंपल एकत्र कर जांचे गए थे, जिनमें से 20 प्रतिशत सैंपल मानक पर खरे नहीं उतरे और मिलावटी पाए गए। चिंताजनक बात यह है कि मिलावट के 75 प्रतिशत से अधिक मामलों में अपराधियों पर केवल मामूली आर्थिक जुर्माना लगाकर छोड़ दिया गया, जबकि केवल 3 प्रतिशत मामलों में ही आरोपियों को सजा मिल सकी। कानूनी ढिलाई के कारण मिलावटखोरों का दुस्साहस बढ़ता रहा है। इस स्थिति को बदलते हुए हैदराबाद पुलिस ने मिसाल कायम की है और मिलावटखोरों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता के तहत गैर-इरादतन हत्या का मामला दर्ज किया है। इस गैर-जमानती धारा के तहत आरोपियों को आसानी से जमानत नहीं मिल सकेगी। खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने और अपराधियों में कानून का डर पैदा करने के लिए देश के अन्य राज्यों को भी इसी तरह के सख्त कानूनी कदम उठाने की आवश्यकता है। इसका आप पर असर भारत में: सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर भ्रामक और डीपफेक कंटेंट के खिलाफ सरकार की सख्ती से यूजर्स को सुरक्षित डिजिटल माहौल मिलेगा, जबकि मिलावटखोरों पर कड़ी कानूनी कार्रवाई से खाद्य सुरक्षा मजबूत होगी। दैनिक जीवन में: बाजार से घी, हल्दी, मिर्च और जीरा खरीदते समय ब्रांड और गुणवत्ता की जांच करना आवश्यक है, क्योंकि सस्ते और मिलावटी उत्पाद हृदय रोग और उच्च रक्तचाप जैसी गंभीर बीमारियों का कारण बन सकते हैं। सवाल-जवाब 1. मार्क ज़करबर्ग ने भारत सरकार से माफी क्यों मांगी? मेटा के सीईओ मार्क ज़करबर्ग ने प्लेटफॉर्म पर बाल यौन शोषण सामग्री, डीपफेक वीडियो और कंटेंट मॉडरेशन में हुई गंभीर चूकों के कारण भारत सरकार से लिखित माफी मांगी। 2. मेटा के खिलाफ सरकार ने किस कानून के तहत कार्रवाई की चेतावनी दी थी? संसदीय समिति ने अल्टीमेटम दिया था कि यदि मार्क ज़करबर्ग माफी नहीं मांगते हैं, तो मेटा को मिलने वाला सेफ हार्बर क्लॉज का कानूनी संरक्षण खत्म कर दिया जाएगा, जिससे कंपनी के अधिकारियों पर सीधे एफआईआर दर्ज की जा सकेगी। 3. गुजरात के कलोल में पुलिस ने नकली घी के मामले में क्या बरामद किया? पुलिस ने कलोल में 30 हजार लीटर नकली घी, 200 लीटर क्षमता वाले 223 बैरल रिफाइंड पाम ऑयल और आरएम एन्हांसर नामक केमिकल जब्त किया, जिसकी कुल कीमत 1.67 करोड़ रुपये है। 4. कानपुर में मसालों की मिलावट में किन चीजों का इस्तेमाल किया जा रहा था? कानपुर में खराब गुणवत्ता वाले चावल के आटे में केमिकल रंग मिलाकर नकली हल्दी बनाई जा रही थी, जबकि लाल रंग से रंगे लकड़ी के बुरादे का उपयोग मिर्च और धनिया पाउडर बनाने में किया जा रहा था। 5. देश में खाद्य पदार्थों में मिलावट की स्थिति पर संसदीय रिपोर्ट क्या कहती है? संसदीय रिपोर्ट के अनुसार पिछले 5 वर्षों में लिए गए 8,86,000 खाद्य नमूनों में से 20 प्रतिशत मिलावटी पाए गए, जिनमें 75 प्रतिशत से अधिक मामलों में केवल जुर्माना लगाया गया और सिर्फ 3 प्रतिशत मामलों में सजा हुई। 6. हैदराबाद पुलिस ने मिलावटखोरों के खिलाफ क्या अनोखा कानूनी कदम उठाया है? हैदराबाद पुलिस ने खाद्य पदार्थों में मिलावट करने वाले अपराधियों के खिलाफ गैर-इरादतन हत्या का मामला दर्ज किया है, जिससे आरोपियों को आसानी से जमानत न मिल सके और सख्त सजा हो सके। https://trendkia.com/national/mark-zuckerberg-ne-bharata-sarakara-se-mangi-likhita-maphi-desha-bhara-men-karoron-rupaye-ke-nakali-ghi-aura-milavati-masalon-ka-b-14408 TrendKia — Har trend, sabse pehle.