# चुनाव आयोग में आंतरिक कलह पर देशव्यापी बवाल: मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और गिरफ्तारी की मांग को लेकर सड़कों पर उतरा विपक्ष

> चुनाव आयोग के भीतर गंभीर मतभेदों और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार द्वारा कथित तौर पर मनमाने फैसले लेने के विरोध में पूरे देश में विपक्षी दलों ने उग्र प्रदर्शन शुरू कर दिया है, जिसमें उनके इस्तीफे और गिरफ्तारी की मांग की जा रही है।

**Type:** article · **Category:** भारत · **Published:** 2026-09-26 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/national/massive-wave-of-nationwide-protests-erupts-over-alleged-rifts-in-election-commission-opposition-demands-immediate-arrest-of-cec-gy-38874 · **Language:** Hindi
**Tags:** चुनाव आयोग, ज्ञानेश कुमार, कांग्रेस, विरोध प्रदर्शन, संसद मार्ग, लोकसभा चुनाव, राजनीति

मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ और चुनाव आयोग (ECI) के भीतर मचे आंतरिक घमासान को लेकर देश के राजनीतिक गलियारों में एक बड़ा तूफान खड़ा हो गया है। विपक्षी दलों ने चुनाव आयोग के कामकाज पर गंभीर सवाल उठाते हुए देशव्यापी आंदोलन छेड़ दिया है, जिससे दिल्ली के जंतर मंतर से लेकर पटना, शिमला, भुवनेश्वर और कोलकाता की सड़कों पर भारी विरोध प्रदर्शन देखने को मिल रहा है। इस देशव्यापी आंदोलन का मुख्य कारण मीडिया में आई वे रिपोर्टें हैं, जिनमें दावा किया गया है कि निर्वाचन सूची के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) को लेकर चुनाव आयोग के भीतर गंभीर मतभेद थे और दो अन्य चुनाव आयुक्तों ने मुख्य चुनाव आयुक्त के फैसलों पर कई बार लिखित आपत्तियां दर्ज कराई थीं।

 

## दिल्ली के जंतर मंतर पर भारी सुरक्षा और नेताओं की धरपकड़

देश की राजधानी दिल्ली का जंतर मंतर इस बड़े राजनीतिक विरोध प्रदर्शन का मुख्य केंद्र बन गया है। ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) और विभिन्न नागरिक संगठनों के नेतृत्व में सैकड़ों की संख्या में लोग मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और उनकी गिरफ्तारी की मांग को लेकर सड़कों पर उतरे। प्रदर्शनकारियों को नियंत्रित करने के लिए दिल्ली पुलिस ने जंतर मंतर पर भारी सुरक्षा बल तैनात कर रखा था। पुलिस ने बिना अनुमति प्रदर्शन करने का हवाला देते हुए ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) की दिल्ली इकाई की नेता नेहरा बोरा और दिल्ली कांग्रेस के अध्यक्ष देवेंद्र यादव सहित लगभग 40 से 50 प्रदर्शनकारियों को हिरासत में ले लिया।

नई दिल्ली के पुलिस उपायुक्त (DCP) सचिन शर्मा ने स्पष्ट किया कि प्रदर्शनकारियों ने इस आंदोलन के लिए कोई पूर्व अनुमति नहीं ली थी, जिसके कारण पुलिस को उन्हें हिरासत में लेकर वहां से हटाना पड़ा। हिरासत में लिए गए नेताओं और कार्यकर्ताओं को बाद में छोड़ दिया गया। पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने उन आरोपों का भी खंडन किया जिसमें कहा गया था कि ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मियों ने नेम टैग नहीं पहने थे। उन्होंने दावा किया कि मौके पर तैनात सभी जवान अपनी पूरी वर्दी और नेम टैग के साथ उपस्थित थे। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों के साथ किसी भी तरह की हाथापाई या बर्बरता के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए केवल आवश्यक बल का ही उपयोग किया गया था।

इसी प्रदर्शन के दौरान भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी-लेनिनवादी) लिबरेशन के महासचिव दीपांकर भट्टाचार्य और वरिष्ठ सामाजिक कार्यकर्ता योगेंद्र यादव को भी पुलिस ने हिरासत में ले लिया। पार्टी ने सोशल मीडिया पर इस कार्रवाई का एक वीडियो साझा करते हुए कहा कि पुलिस की इस दमनकारी नीति और बैरिकेडिंग के बावजूद उनका संघर्ष रुकने वाला नहीं है और लोकतंत्र को बचाने की यह लड़ाई आगे भी जारी रहेगी।

 

## युवा कांग्रेस का अनोखा प्रदर्शन और विपक्ष का कड़ा रुख

दिल्ली में ही भारतीय युवा कांग्रेस (IYC) के कार्यकर्ताओं ने एक बेहद अनोखे और सांकेतिक तरीके से अपना विरोध दर्ज कराया। युवा कांग्रेस के अध्यक्ष उदय भानु चिब के नेतृत्व में सैकड़ों कार्यकर्ता अपने चेहरों पर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के मुखौटे लगाकर और अपने हाथों में भारी लोहे की जंजीरें बांधकर सड़कों पर उतरे। उनका यह प्रदर्शन चुनाव आयोग की कथित पक्षपातपूर्ण कार्यप्रणाली और आयोग के शीर्ष अधिकारियों के बीच आपसी मतभेदों को रेखांकित करने के लिए था।

रायसीना रोड स्थित युवा कांग्रेस के कार्यालय से शुरू हुआ यह मार्च जब निर्वाचन सदन यानी चुनाव आयोग के मुख्यालय की तरफ बढ़ने लगा, तो पुलिस ने सुरक्षा बढ़ा दी। रास्ते में कई जगहों पर बैरिकेड्स लगाए गए थे और प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लेने के लिए बसें भी खड़ी की गई थीं। इसके अलावा, जाने-माने सामाजिक कार्यकर्ता और वकील प्रशांत भूषण ने भी इस मुद्दे पर केंद्र सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने सोशल मीडिया मंच X पर लिखा कि शांतिपूर्ण तरीके से विरोध कर रहे लोगों को रोकना सरकार की हताशा को दर्शाता है। उन्होंने ज्ञानेश कुमार पर गंभीर आरोप लगाते हुए मांग की कि उनके खिलाफ मुकदमा चलाया जाना चाहिए।

 

## पटना और शिमला में पुलिस के साथ तीखी झड़पें

राष्ट्रीय राजधानी से दूर बिहार की राजधानी पटना में भी कांग्रेस कार्यकर्ताओं का गुस्सा फूट पड़ा। देशव्यापी आंदोलन के तहत बिहार कांग्रेस के नेताओं और कार्यकर्ताओं ने पटना की सड़कों पर एक विशाल विरोध मार्च निकाला। जैसे ही यह मार्च मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) के कार्यालय की तरफ बढ़ने लगा, पुलिस ने उन्हें रोकने के लिए बैरिकेड्स लगा दिए। जब प्रदर्शनकारी आगे बढ़ने पर अड़ गए, तो पुलिस को उन्हें तितर-बितर करने के लिए वाटर कैनन (पानी की बौछारों) का इस्तेमाल करना पड़ा। इस दौरान कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने केंद्र की राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) सरकार और मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।

उधर, हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला में भी स्थिति काफी तनावपूर्ण रही। हिमाचल प्रदेश कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने शिमला में स्थित चुनाव आयोग के क्षेत्रीय कार्यालय के बाहर जोरदार प्रदर्शन किया। गुस्साए कार्यकर्ताओं ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का पुतला फूंका और आयोग के नामपट्ट पर कालिख पोत दी। प्रदर्शनकारियों ने आयोग के बोर्ड पर 'चोर आयोग' लिख दिया, जिसके बाद वहां तैनात पुलिसकर्मियों और कार्यकर्ताओं के बीच तीखी नोकझोंक और हाथापाई हुई। इस प्रदर्शन को संबोधित करते हुए हिमाचल प्रदेश के उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री ने BJP और चुनाव आयोग पर सीधा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि BJP चुनावों में 'वोटों की चोरी' करके जीत हासिल कर रही है और इस पूरे खेल में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और उनका आयोग सीधे तौर पर शामिल हैं। उन्होंने दावा किया कि देश के करोड़ों लोगों के नाम मतदाता सूची से जानबूझकर हटा दिए गए ताकि एकतरफा चुनावी नतीजे हासिल किए जा सकें।

 

## ओडिशा, मेघालय और असम में सड़कों पर उतरा जनसैलाब

ओडिशा में भी कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) के भुवनेश्वर स्थित कार्यालय का घेराव करने की कोशिश की। प्रदेश कांग्रेस कमेटी (OPCC) के अध्यक्ष भक्त चरण दास के नेतृत्व में यह मार्च निकाला गया, लेकिन पुलिस ने उन्हें पहले ही रोक दिया। इस दौरान पुलिस और कार्यकर्ताओं के बीच हिंसक झड़पें भी हुईं, जिसके बाद कई वरिष्ठ नेताओं को हिरासत में ले लिया गया। भक्त चरण दास ने संवाददाताओं से कहा कि मुख्य चुनाव आयुक्त ने 'वोट चोरी' का समर्थन करके एक अक्षम्य अपराध किया है और उन्हें अपने पद पर रहने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है। वहीं, कांग्रेस विधायक दल के नेता राम चंद्र कदम ने कहा कि दो चुनाव आयुक्तों की आपत्तियों ने राहुल गांधी के उस आरोप को पूरी तरह सच साबित कर दिया है जिसमें उन्होंने मतदाता सूची में हेराफेरी की बात कही थी।

मेघालय के शिलांग में भी ऐसी ही तस्वीरें सामने आईं, जहां प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष विंसेंट एच. पाला के नेतृत्व में कांग्रेस भवन से एडिशनल सेक्रेटेरिएट तक एक आक्रोश मार्च निकाला गया। वहां कार्यकर्ताओं ने ज्ञानेश कुमार का पुतला दहन किया। विंसेंट एच. पाला ने आरोप लगाया कि मुख्य चुनाव आयुक्त ने अन्य दो चुनाव आयुक्तों द्वारा पिछले 10 महीनों में उठाई गई कम से कम 14 लिखित आपत्तियों को दरकिनार करते हुए BJP के इशारे पर मनमाने फैसले लिए। उन्होंने केंद्र सरकार द्वारा चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति के कानून में किए गए बदलावों को भी इस साजिश का हिस्सा बताया और पूरे मामले की न्यायिक जांच की मांग की।

असम में कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष गौरव गगोई को पुलिस ने उस समय हिरासत में ले लिया जब वे अपने समर्थकों के साथ गुवाहाटी में मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) के दफ्तर की तरफ मार्च कर रहे थे। पुलिस ने सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए गौरव गोगोई के साथ अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (AICC) के सचिव मनोज चौहान, सेवा दल के अध्यक्ष दीप बयान और असम प्रदेश कांग्रेस कमेटी के महासचिव उदित भानु दास को भी गिरफ्तार कर लिया। कांग्रेस प्रवक्ताओं ने इसे लोकतंत्र की हत्या और विपक्षी आवाजों को दबाने की सरकार की एक और कोशिश करार दिया।

 

## जम्मू और कोलकाता में भी तेज हुआ विरोध का स्वर

जम्मू-कश्मीर के जम्मू में भी माहौल बेहद गर्म रहा, जहां कांग्रेस के राज्यसभा सांसद और अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (AICC) के महासचिव डॉ. सैयद नसीर हुसैन के नेतृत्व में एक विशाल रैली निकाली गई। प्रदर्शनकारी चुनाव आयोग के कार्यालय की तरफ बढ़ने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन सुरक्षा बलों ने भारी बैरिकेडिंग करके उन्हें रोक दिया। इस दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच धक्का-मुक्की हुई, जिसके बाद डॉ. सैयद नसीर हुसैन सहित कई पूर्व मंत्रियों और विधायकों को पुलिस ने हिरासत में ले लिया। हुसैन ने कहा कि आयोग की विश्वसनीयता पूरी तरह समाप्त हो चुकी है और जब तक मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाया नहीं जाता, उनका यह आंदोलन जारी रहेगा।

पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता में भी कांग्रेस का उग्र रूप देखने को मिला। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष सुभंकर Sarkar के नेतृत्व में कार्यकर्ताओं ने कोलकाता विश्वविद्यालय के कॉलेज स्ट्रीट परिसर से स्ट्रैंड रोड स्थित मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) के कार्यालय तक मार्च निकाला। पुलिस ने इस रैली को बीबी गांगुली स्ट्रीट क्रॉसिंग पर ही रोक दिया, जिससे नाराज कार्यकर्ताओं ने वहीं सड़क पर मुख्य चुनाव आयुक्त का पुतला जलाया और सरकार विरोधी नारे लगाए।

 

## अदालतों का दरवाजा और सुप्रीम कोर्ट में याचिका

यह मामला केवल सड़कों तक ही सीमित नहीं है, बल्कि अब कानूनी रूप से भी मुख्य चुनाव आयुक्त की मुश्किलें बढ़ती दिख रही हैं। सुप्रीम कोर्ट में अधिवक्ता शैलेंद्र मणि त्रिपाठी द्वारा एक जनहित याचिका दायर की गई है, जिसमें मांग की गई है कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को किसी भी प्रकार की विशेष आपराधिक प्रतिरक्षा (इम्यूनिटी) नहीं मिलनी चाहिए और उनके खिलाफ एक 'आम आरोपी' की तरह पुलिस जांच, साक्ष्य जुटाने की प्रक्रिया और नियमित मुकदमा चलाया जाना चाहिए। याचिका में आरोप लगाया गया है कि मुख्य चुनाव आयुक्त ने बिना किसी विधायी अधिकार के मतदाता सूची में हेराफेरी की और फॉर्म 6 में बदलाव करने जैसे कई एकतरफा और अवैध फैसले लिए।

याचिका में इस बात का भी उल्लेख किया गया है कि पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची से बहाल किए गए मतदाताओं के नामों को दोबारा हटाने के लिए 16.10 लाख से अधिक अपीलें दायर की गईं, जो एक बड़े स्तर पर मतदाताओं को प्रभावित करने की साजिश का हिस्सा है। इसके अलावा, बॉम्बे हाई कोर्ट में भी एक याचिका दायर की गई है जिसमें महाराष्ट्र में चल रहे स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) पर तुरंत रोक लगाने, हटाए गए मतदाताओं के नामों को वापस जोड़ने और पूरी संशोधन प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करने की मांग की गई है।

 

## राष्ट्रीय स्तर पर विपक्ष के शीर्ष नेताओं के तीखे हमले

इस पूरे विवाद पर कांग्रेस की राष्ट्रीय नेता प्रियंका गांधी वाड्रा ने केरल के वायनाड में पत्रकारों से बात करते हुए BJP के पलटवार को 'कमजोर और बासी कहानी' बताया। उन्होंने दावा किया कि उनके भाई राहुल गांधी ने कई प्रेस कॉन्फ्रेंस में इस बात के पुख्ता सबूत पेश किए हैं कि देश में लगभग 13 करोड़ मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से अवैध तरीके से हटा दिए गए हैं। प्रियंका गांधी वाड्रा ने कहा कि यदि BJP नेतृत्व चुनाव आयोग को प्रभावित करके चुनावों में हस्तक्षेप कर रहा है, तो यह देशद्रोह के समान गंभीर अपराध है।

वहीं, कांग्रेस के संगठन महासचिव के.सी. वेणुगोपाल ने मुख्य चुनाव आयुक्त पर सीधा और गंभीर हमला करते हुए कहा कि ज्ञानेश कुमार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के साथ मिलकर एक 'आपराधिक साजिश' में शामिल हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि यह तिकड़ी देश के लोकतांत्रिक सिद्धांतों और स्थापित प्रक्रियाओं को पूरी तरह नष्ट करने का प्रयास कर रही है, जिसे कांग्रेस पार्टी किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं करेगी।

केरल के पूर्व मुख्यमंत्री और राज्य विधानसभा में विपक्ष के नेता पिनाराई विजयन ने भी सोशल मीडिया मंच X पर इस मुद्दे पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने मांग की कि ज्ञानेश कुमार को तुरंत पद से हटाया जाए और स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) की प्रक्रिया पर रोक लगाई जाए। विजयन ने कहा कि मतदान का अधिकार भारत की जनता का मौलिक अधिकार है और इसे BJP या संघ परिवार के राजनीतिक हितों को साधने के लिए इस्तेमाल नहीं किया जा सकता। समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने भी उत्तर प्रदेश के रायबरेली में पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि जिन्होंने भी चुनाव आयोग के भीतर यह गंभीर मतभेद पैदा किए हैं, उन्हें स्वयं ही अपने पदों से इस्तीफा दे देना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग ने जनता से उनका निष्पक्ष चुनाव का अधिकार छीन लिया है।

ओडिशा के पूर्व मुख्यमंत्री और बीजू जनता दल (BJD) के प्रमुख नवीन पटनायक ने भी इस मामले में कड़ा रुख अपनाते हुए मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग की। भुवनेश्वर में विधानसभा के बाहर पत्रकारों से बात करते हुए पटनायक ने कहा कि मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य आयुक्तों के बीच गहरे मतभेदों को देखते हुए ज्ञानेश कुमार को तुरंत पद छोड़ना चाहिए और पूरी संशोधन प्रक्रिया की समीक्षा होनी चाहिए। उन्होंने दावा किया कि ओडिशा में ही इस प्रक्रिया के दौरान लगभग 25 लाख वैध मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से काट दिए गए, जिसका उनकी पार्टी ने शुरू से विरोध किया है।

इसके अलावा, महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) के प्रमुख राज ठाकरे ने भी सोशल मीडिया पर एक पोस्ट लिखकर स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) की प्रक्रिया को तुरंत रद्द करने की मांग की। उन्होंने सभी विपक्षी दलों से अपील की कि वे इस कथित गड़बड़ी की निष्पक्ष जांच के लिए एकजुट हों और भविष्य के सभी चुनाव इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) के बजाय मतपत्रों (बैलेट पेपर) के माध्यम से कराने के लिए एक बड़ा देशव्यापी आंदोलन शुरू करें।

कांग्रेस ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर तंज कसते हुए याद दिलाया कि 1988 में तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने मतदान की न्यूनतम आयु को 21 वर्ष से घटाकर 18 वर्ष किया था ताकि युवा पीढ़ी को सशक्त बनाया जा सके। कांग्रेस ने आरोप लगाया कि जहां एक प्रधानमंत्री ने युवा पीढ़ी को मतदान का अधिकार दिया, वहीं दूसरी तरफ वर्तमान प्रधानमंत्री गुप्त तरीकों से इस अधिकार को छीनने पर तुले हुए हैं।

 

## चुनाव आयोग का बचाव और आंतरिक कार्यप्रणाली

इस चौतरफा हमले और गंभीर आरोपों के बीच भारतीय निर्वाचन आयोग (ECI) ने अपना पक्ष रखते हुए इन आरोपों को सिरे से खारिज किया है। आयोग ने एक आधिकारिक बयान में कहा कि आंतरिक फाइलों और टिप्पणियों को चुनिंदा रूप से पेश करके केवल एकतरफा तस्वीर दिखाई जा रही है, जो कि पूरी तरह भ्रामक है। आयोग ने स्पष्ट किया कि किसी भी लोकतांत्रिक संस्थान में अधिकारियों के बीच मतभेद होना एक सामान्य और स्वस्थ प्रक्रिया का हिस्सा है। आयोग ने यह भी जोर देकर कहा कि स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) सहित सभी अंतिम निर्णय पूरी तरह से सर्वसम्मति से और स्थापित कानूनों के दायरे में रहकर लिए गए हैं, और इसमें किसी भी तरह की प्रक्रियात्मक अनियमितता नहीं की गई है।

हालांकि, आयोग के इस स्पष्टीकरण से विपक्ष संतुष्ट नहीं है। देश के कई पूर्व चुनाव आयुक्तों ने भी इस पर अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने आयोग को सलाह दी है कि वह पारदर्शिता बनाए रखने के लिए उन सभी फैसलों का पूरा विवरण सार्वजनिक करे जो इस दौरान लिए गए थे और यह भी स्पष्ट करे कि क्या उन फैसलों को आयोग के भीतर बहुमत का समर्थन प्राप्त था।

इस बीच, कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके ने विपक्षी दलों को एक अनूठी सलाह दी है। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि यदि विपक्ष को लगता है कि चुनावों में धांधली हो रही है, तो उन्हें इन चुनावों में भाग लेना बंद कर देना चाहिए, क्योंकि चुनावी प्रक्रिया का हिस्सा बनकर वे केवल इस धांधली को वैधता प्रदान कर रहे हैं। हालांकि, तृणमूल कांग्रेस के वरिष्ठ नेता डेरेक ओ'ब्रायन ने इस विचार का कड़ा विरोध किया। ओ'ब्रायन ने X पर लिखा कि यदि विपक्ष चुनावों का बहिष्कार करता है, तो इसका सीधा लाभ BJP को मिलेगा जो सभी सीटें जीतकर संविधान को बदलने और अपने कथित अपराधों को कानूनी रूप देने का प्रयास करेगी। उन्होंने कहा कि जमीनी स्तर पर अपनी जान की परवाह किए बिना लड़ रहे लाखों कार्यकर्ताओं के साथ यह विश्वासघात होगा, इसलिए लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा के लिए चुनावों में भाग लेना और निष्पक्षता के लिए लड़ना दोनों ही समान रूप से जरूरी है।

## इसका आप पर असर
इस बड़े राजनीतिक विवाद का सीधा असर देश के आम मतदाताओं और उनके लोकतांत्रिक अधिकारों पर पड़ेगा।

- **मतदाता सूची की जांच:** पाठकों को अपनी स्थानीय मतदाता सूची में अपना नाम तुरंत सत्यापित कर लेना चाहिए। स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के तहत बड़े पैमाने पर नाम हटाए जाने के आरोपों के कारण आपका नाम कटने का खतरा हो सकता है।

- **आगामी विधानसभा चुनाव:** महाराष्ट्र और अन्य राज्यों में होने वाले आगामी चुनावों की निष्पक्षता पर इस विवाद का गहरा साया रहेगा। मतदाता पहचान पत्र और पंजीकरण संबंधी नियमों में किसी भी संभावित बदलाव पर नजर रखना जरूरी है।

- **दस्तावेजों की तैयारी:** जेजे क्लस्टर और अनधिकृत कॉलोनियों में रहने वाले लोगों को अपने पते और पहचान के पुख्ता दस्तावेज तैयार रखने चाहिए। मतदाता सूची में नाम बनाए रखने के लिए सख्त सत्यापन प्रक्रियाओं का सामना करना पड़ सकता है।

## सवाल-जवाब

### 1. विपक्षी दल मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रदर्शन क्यों कर रहे हैं?
विपक्ष का आरोप है कि मुख्य चुनाव आयुक्त ने अन्य दो चुनाव आयुक्तों की आपत्तियों को दरकिनार कर मतदाता सूची के संशोधन (SIR) में मनमाने फैसले लिए और लाखों वैध मतदाताओं के नाम हटा दिए।

### 2. चुनाव आयोग के भीतर क्या मतभेद सामने आए हैं?
रिपोर्टों के अनुसार, चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में मुख्य चुनाव आयुक्त के निर्णयों पर कम से कम 14 बार लिखित असहमति और आपत्तियां जताई थीं।

### 3. सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका में क्या मांग की गई है?
याचिका में मांग की गई है कि मुख्य चुनाव आयुक्त को मिलने वाली आपराधिक प्रतिरक्षा हटाई जाए और मतदाता सूची में अवैध बदलाव करने के लिए उनके खिलाफ एक सामान्य आरोपी की तरह जांच और मुकदमा चलाया जाए।

### 4. इस पूरे मामले पर भारतीय निर्वाचन आयोग (ECI) का क्या रुख है?
ईसीआई ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि आंतरिक फाइलों की टिप्पणियों को चुनिंदा रूप से पेश किया जा रहा है। आयोग ने कहा कि मतभेद सामान्य हैं और सभी अंतिम निर्णय सर्वसम्मति से लिए गए थे।

---
_TrendKia — Har trend, sabse pehle.. Machine-readable view; canonical HTML at the URL above._