मतदाता सूची के विशेष पुनरीक्षण पर संग्राम: किरेन रिजिजू का आरोप, संवैधानिक संस्थाओं को निशाना बना रहा विपक्ष संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने मतदाता सूची पुनरीक्षण को लेकर हो रहे विरोध प्रदर्शनों को सुनियोजित साजिश करार दिया है। उन्होंने कहा कि चुनावी हार से हताश विपक्षी समूह न्यायपालिका, चुनाव आयोग और देश की छवि पर लगातार हमले कर रहे हैं। मतदाता सूची के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन यानी SIR को लेकर दिल्ली और मुंबई की सड़कों पर सियासी हलचल तेज हो गई है। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग के बीच केंद्रीय संसदीय कार्य और अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री किरेन रिजिजू ने विपक्षी दलों के रुख पर कड़ा एतराज जताया है। रिजिजू के अनुसार, लगातार चुनावी पराजय का सामना कर रहे विपक्षी दल हताशा में आकर लोकतांत्रिक मर्यादाओं और संवैधानिक ढांचे को कमजोर करने के एजेंडे पर काम कर रहे हैं। तीन स्तरों पर काम कर रहे विपक्षी समूह केंद्रीय मंत्री ने दावा किया कि विपक्षी खेमे ने संस्थाओं को निशाना बनाने के लिए सुनियोजित तरीके से अलग-अलग समूह तैयार किए हैं। इन समूहों का मकसद विभिन्न मोर्चों पर अविश्वास पैदा करना है। उनके मुताबिक, एक समूह पूरी तरह से न्यायिक व्यवस्था पर सवाल खड़े करने में लगा हुआ है, जबकि दूसरा समूह संवैधानिक और जांच एजेंसियों की निष्पक्षता को संदिग्ध बनाने का प्रयास कर रहा है। वहीं तीसरा समूह अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भ्रामक सूचनाएं फैलाकर राष्ट्र के विकास की रफ्तार में बाधा डालने की कोशिश में सक्रिय है। न्यायिक व्यवस्था को लेकर रिजिजू ने विस्तार से बताते हुए कहा कि इस विशेष समूह में जाने-माने चेहरे, वरिष्ठ वकील और वामपंथी विचारधारा से जुड़े कार्यकर्ता शामिल हैं। उनका रुख यह रहता है कि जब भी सुप्रीम कोर्ट या हाई कोर्ट से राष्ट्रहित से जुड़ा कोई सकारात्मक निर्णय आता है, तो वे तुरंत उसे लोकतांत्रिक सिद्धांतों और न्यायिक स्वतंत्रता के खिलाफ बताने लगते हैं। उनका आरोप है कि ऐसे फैसले सरकार को राजनीतिक लाभ पहुंचाने वाले माने जाने लगते हैं और इसी आधार पर जजों को व्यक्तिगत रूप से भी निशाना बनाया जा रहा है। चुनाव आयोग और जांच एजेंसियों पर सवाल उठाने की रणनीति संसदीय कार्य मंत्री ने जोर देकर कहा कि दूसरा समूह भारत के चुनाव आयोग के साथ-साथ ईडी और सीबीआई जैसी स्वतंत्र जांच एजेंसियों की प्रतिष्ठा धूमिल करने में जुटा है। इन संस्थाओं के मूल स्वरूप और उनकी कार्यशैली पर लगातार संदेह जताकर जनता के मन में यह धारणा बनाने की कोशिश की जा रही है कि उनके अच्छे कदमों पर भी सवाल उठाए जाएं। इस संगठित प्रचार तंत्र का सीधा लक्ष्य देश की महत्वपूर्ण प्रशासनिक और संवैधानिक इकाइयों पर से जनता का भरोसा खत्म करना है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भ्रामक प्रचार और जीडीपी के आंकड़ों पर संशय तीसरे समूह के बारे में बात करते हुए किरेन रिजिजू ने कहा कि यह धड़ा युवाओं के भीतर भय और असंतोष का माहौल बनाने के लिए गलत सूचनाओं का सहारा लेता है। ऐसे लोग विदेशों में जाकर भारत-विरोधी तत्वों से संपर्क साधते हैं और वहां से समर्थन जुटाते हैं। इसके बाद वे देश के जीडीपी के आंकड़ों, आर्थिक वृद्धि और लोकतांत्रिक प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर अविश्वास जताने की कोशिश करते हैं। मंत्री के मुताबिक, यह तीनतरफा हमला भारत की आंतरिक स्थिरता को नुकसान पहुंचाने के इरादे से किया जा रहा है। मतदाता सूची पुनरीक्षण विवाद पर रिजिजू का रुख स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन को लेकर उठ रहे सवालों पर केंद्रीय मंत्री ने स्पष्ट किया कि यदि किसी वास्तविक मतदाता का नाम सूची से हटता है, तो उसके लिए तय प्रशासनिक प्रक्रियाएं मौजूद हैं। सामान्य स्थिति में नागरिक अधिकारियों से संपर्क करते हैं और दस्तावेजों के जरिए नाम जोड़ने के उपलब्ध कानूनी विकल्पों का प्रयोग करते हैं। रिजिजू ने आरोप लगाया कि बिना किसी पुख्ता दस्तावेज के अचानक विरोध प्रदर्शन शुरू कर देना और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर संदेह जताना, विदेशों में मौजूद तत्वों के इशारे पर रची गई योजना का हिस्सा प्रतीत होता है। प्रधानमंत्री की विदेश यात्राओं और विपक्ष की बयानबाजी पर टिप्पणी राहुल गांधी के नेतृत्व वाले विपक्षी मोर्चे द्वारा विदेशी नेताओं के साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मुलाकातों पर की गई टीका-टिप्पणी पर भी रिजिजू ने अपनी राय रखी। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री इन राजनीतिक छींटाकशी से अप्रभावित रहते हैं, परंतु केंद्रीय मंत्रिमंडल के सदस्य विपक्ष के नेता के इस आचरण से असहज हैं। उन्होंने कहा कि संसद में विपक्ष के नेता जैसे महत्वपूर्ण संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति को गरिमा के अनुरूप व्यवहार करना चाहिए, जबकि उनका वर्तमान आचरण उस पद की मर्यादा के विपरीत नजर आता है। इसका आप पर असर मतदाता सूची के विशेष पुनरीक्षण और राजनीतिक खींचतान के बीच आम नागरिकों के लिए मतदाता सूची में नाम दर्ज रखने की प्रक्रिया समझना जरूरी है। • मतदाताओं के लिए: यदि आपका नाम मतदाता सूची से गायब है, तो घबराने की जगह आधिकारिक चुनाव कार्यालय में फॉर्म भरकर दस्तावेज जमा करें। समय रहते नाम की पुष्टि करने से आगामी चुनावों में मतदान का अधिकार सुरक्षित रहेगा। • जागरूकता और सत्यापन: निर्वाचन आयोग की वेबसाइट या बीएलओ के जरिए अपने नाम की स्थिति तुरंत जांचें। किसी भी राजनीतिक बयानबाजी के भ्रम में आए बिना आवश्यक कागजी सुधार खुद करवाएं। • संवैधानिक मर्यादा: संस्थाओं पर उठ रहे सवालों के दौर में कानूनी प्रक्रियाओं पर नजर बनाए रखना नागरिकों के लिए महत्वपूर्ण है। नियमों की सही जानकारी होने से किसी भी गलत अफवाह से बचा जा सकता है। • युवा नागरिकों पर प्रभाव: पहली बार मतदान करने वाले युवा ऑनलाइन माध्यम से अपना पंजीकरण कराएं। सही समय पर आवेदन करने से नाम छूटने की नौबत नहीं आएगी। ऐसा क्यों हुआ यह राजनीतिक टकराव मतदाता सूची के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन यानी SIR के विरोध में दिल्ली और मुंबई में हुए प्रदर्शनों और मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग के बाद सामने आया है। • तात्कालिक कारण: दिल्ली और मुंबई में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर विपक्षी दलों ने बड़े पैमाने पर प्रदर्शन किए, जिसके जवाब में सरकार के वरिष्ठ मंत्री ने यह बयान दिया। • राजनीतिक पृष्ठभूमि: केंद्रीय मंत्री के अनुसार बार-बार की चुनावी हार से उपजी निराशा के चलते विपक्षी दलों ने संस्थाओं पर सुनियोजित सवाल खड़े करने का रास्ता चुना है। • संस्थागत विवाद: सुप्रीम कोर्ट के निर्णयों, चुनाव आयोग की प्रक्रियाओं और जांच एजेंसियों की कार्यप्रणाली को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच लंबे समय से खींचतान चल रही है। सवाल-जवाब 1. विपक्षी दल किस मुद्दे को लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं? विपक्षी दल मतदाता सूची के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन यानी SIR के विरोध में प्रदर्शन कर रहे हैं और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं। 2. किरेन रिजिजू ने विपक्ष पर क्या मुख्य आरोप लगाए? उन्होंने आरोप लगाया कि चुनावी हार से हताश विपक्ष न्यायपालिका, चुनाव आयोग और देश के आर्थिक आंकड़ों को बदनाम करने की साजिश रच रहा है। 3. रिजिजू के अनुसार मतदाता सूची से नाम कटने पर क्या करना चाहिए? उनका कहना है कि वास्तविक मतदाताओं को बिना दस्तावेज हंगामा करने के बजाय उपलब्ध प्रशासनिक तरीकों से अधिकारियों को आवेदन देना चाहिए। 4. राहुल गांधी पर केंद्रीय मंत्री ने क्या टिप्पणी की? उन्होंने कहा कि विदेशी नेताओं से प्रधानमंत्री की मुलाकातों पर विपक्ष के नेता का मजाक उड़ाना उनके संवैधानिक पद की गरिमा के अनुरूप नहीं है। https://trendkia.com/national/matadata-suchi-ke-vishesha-punarikshana-para-sngrama-kiren-rijiju-ka-aropa-snvaidhanika-snsthaon-ko-nishana-bana-raha-vipaksha-42835 TrendKia — Har trend, sabse pehle.