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  "title": "मतदाता सूची पुनरीक्षण और सॉफ्टवेयर पर उठे सवाल, मल्लिकार्जुन खरगे ने मतपत्र से चुनाव कराने पर दिया जोर",
  "summary": "कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने मतदाता सूची पुनरीक्षण प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी का आरोप लगाते हुए मुख्य निर्वाचन आयुक्त के इस्तीफे और मतपत्र से मतदान की मांग उठाई है।",
  "content": "मतदाता सूचियों की शुद्धता और चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता को लेकर राजनीतिक घमासान तेज हो गया है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने 26 अक्टूबर को केंद्र सरकार और निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनावी प्रक्रिया में गड़बड़ियों के कई मामले सामने आने के बाद भी केंद्र सरकार मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार का बचाव कर रही है। इसके साथ ही उन्होंने विपक्षी गठबंधन ‘इंडिया’ की ओर से दिल्ली के रामलीला मैदान में 1 नवंबर को होने वाली महारैली में नागरिकों से बढ़-चढ़कर भाग लेने का आह्वान किया।\n\nसॉफ्टवेयर पर जानकारी छुपाने का आरोप\nकांग्रेस अध्यक्ष ने सोशल मीडिया मंच X पर अपनी बात रखते हुए मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) की निष्पक्षता पर सवाल उठाए। उनका कहना था कि जब एसआईआर प्रक्रिया में उपयोग में लाए जा रहे सॉफ्टवेयर के संबंध में सूचना का अधिकार (आरटीआई) के तहत विवरण मांगा गया, तब निर्वाचन आयोग ने ‘ट्रेड सीक्रेट्स’ का तर्क देकर जानकारी साझा करने से मना कर दिया। उन्होंने कहा कि चुनावी प्रक्रियाओं में इस्तेमाल होने वाले तकनीकी साधनों को सार्वजनिक जांच से दूर रखना कई आशंकाओं को जन्म देता है।\n\nउत्तर प्रदेश में मतदाता आवेदनों की विसंगतियां\nउत्तर प्रदेश के चुनावी आंकड़ों का हवाला देते हुए मल्लिकार्जुन खरगे ने रेखांकित किया कि राज्य में मतदाता पंजीकरण से जुड़े 16.18 लाख ‘फॉर्म-6’ आवेदनों का विवरण सार्वजनिक पटल पर नहीं रखा गया। इसके अलावा, पीलीभीत जिले का विशेष उल्लेख करते हुए उन्होंने बताया कि वहां 10,470 मतदाता रिकॉर्ड्स में गंभीर अनियमितताएं पाई गई हैं। खरगे के अनुसार, इन खुलासों के सामने आने के बाद ही अधिकारियों को समूचे उत्तर प्रदेश में फॉर्म-6, फॉर्म-7 और फॉर्म-8 की गहन जांच के निर्देश जारी करने के लिए बाध्य होना पड़ा है।\n\nविपक्षी गठबंधन की तीन मुख्य मांगें और मतपत्र की वकालत\nसत्तारूढ़ दल और चुनाव संस्था के बीच साठगांठ का आरोप लगाते हुए कांग्रेस अध्यक्ष ने विपक्षी मोर्चे की तीन स्पष्ट मांगें सामने रखीं। पहली मांग के तहत उन्होंने मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और निर्वाचन आयुक्तों के चयन व संरक्षण से जुड़े 2023 के कानून को निरस्त करने पर जोर दिया। इसके अलावा, उन्होंने वर्तमान एसआईआर प्रक्रिया को तुरंत रोकने तथा कथित तौर पर गलत तरीके से हटाए गए वास्तविक मतदाताओं के नाम सूची में दोबारा शामिल करने की बात कही। मल्लिकार्जुन खरगे ने इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) के स्थान पर पुराने मतपत्रों के जरिए चुनाव कराने की जोरदार वकालत की। उन्होंने कहा कि यह केवल वोट बचाने की लड़ाई नहीं, संविधान और लोकतंत्र बचाने का जनसंघर्ष है।\n\nइसका आप पर असर\nमतदाता सूचियों और चुनाव प्रक्रिया पर उठे इन सवालों का सीधा असर आम नागरिकों के मताधिकार पर पड़ता है।\n\n• भारत में: देश भर के मतदाताओं के लिए यह जरूरी हो जाता है कि वे निर्वाचन आयोग की आधिकारिक वेबसाइट या ऐप पर अपनी प्रविष्टि समय रहते जांचें। किसी भी विसंगति या नाम कटने की स्थिति में समय रहते सुधार हेतु आवेदन करना चाहिए ताकि मतदान के दिन परेशानी न हो।\n• उत्तर प्रदेश में: राज्य में फॉर्म-6, 7 और 8 की जारी जांच के बीच नए और मौजूदा मतदाताओं को अपने विवरण की दोबारा पुष्टि कर लेनी चाहिए। पीलीभीत सहित राज्य के अन्य जिलों में रहने वाले लोग स्थानीय चुनाव कार्यालय से अपने मतदाता पर्ची स्टेटस की जानकारी ले सकते हैं।\n• चुनावी बहस: ईवीएम बनाम मतपत्र और आरटीआई नियमों की पारदर्शिता को लेकर राजनीतिक आंदोलन तेज हो सकता है। इससे आगामी चुनावों में प्रशासनिक निगरानी और राजनीतिक दलों के बूथ प्रबंधन में सख्ती देखने को मिलेगी।\n• नागरिक सतर्कता: निर्वाचन आयोग के नियमों और सूची पुनरीक्षण अभियानों के दौरान राजनीतिक दलों की आपत्तियों पर ध्यान देना जरूरी है। मतदाता जागरूकता अभियानों से आम लोगों को अपने पंजीकरण अधिकारों की अधिक स्पष्टता मिलेगी।\n\nऐसा क्यों हुआ\nकांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे द्वारा यह तीखा रुख मतदाता सूची पुनरीक्षण प्रक्रिया में सामने आई कथित खामियों और अपारदर्शिता के चलते अपनाया गया है।\n\n• सॉफ्टवेयर विवरण पर रोक: मुख्य विवाद तब पैदा हुआ जब विशेष गहन पुनरीक्षण प्रक्रिया में प्रयुक्त सॉफ्टवेयर की आरटीआई द्वारा मांगी गई जानकारी को निर्वाचन आयोग ने व्यापारिक गोपनीयता बताकर देने से मना कर दिया। इस फैसले ने विपक्षी दलों के मन में तकनीकी पारदर्शिता को लेकर संदेह पैदा किया।\n• उत्तर प्रदेश में दर्ज विसंगतियां: उत्तर प्रदेश में 16.18 लाख फॉर्म-6 आवेदनों के आंकड़े सार्वजनिक न होने और पीलीभीत में 10,470 मतदाता प्रविष्टियों में त्रुटियां मिलने से विवाद गहरा गया। इन खामियों की वजह से प्रशासनिक स्तर पर सभी प्रमुख मतदाता फॉर्मों की राज्यव्यापी जांच शुरू करनी पड़ी।\n• नियुक्ति कानून पर मतभेद: विपक्षी दल मुख्य निर्वाचन आयुक्त की नियुक्ति और सुरक्षा से जुड़े 2023 के कानून का लगातार विरोध कर रहे हैं। विपक्ष का मानना है कि इस व्यवस्था से संस्थागत स्वतंत्रता प्रभावित हुई है, जिसके चलते वे वर्तमान नेतृत्व के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. मल्लिकार्जुन खरगे ने निर्वाचन आयोग को लेकर क्या मुख्य आरोप लगाए हैं?\nउन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार मुख्य निर्वाचन आयुक्त का बचाव कर रही है और आयोग ने मतदाता सूची पुनरीक्षण सॉफ्टवेयर की आरटीआई जानकारी ट्रेड सीक्रेट्स का हवाला देकर रोक दी।\n\n2. उत्तर प्रदेश से जुड़े किन आंकड़ों का उल्लेख किया गया है?\nखरगे ने दावा किया कि उत्तर प्रदेश में 16.18 लाख फॉर्म-6 आवेदनों का ब्योरा सार्वजनिक नहीं किया गया और पीलीभीत में 10,470 मतदाता रिकॉर्ड्स में विसंगतियां मिलीं।\n\n3. विपक्षी गठबंधन ‘इंडिया’ की प्रमुख मांगें क्या हैं?\nगठबंधन मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे, 2023 के संबंधित कानून को रद्द करने, मतदाता सूची पुनरीक्षण रोकने और मतपत्रों से मतदान कराने की मांग कर रहा है।\n\n4. विपक्षी गठबंधन की आगामी रैली कब और कहां आयोजित होगी?\n‘इंडिया’ गठबंधन की यह रैली 1 नवंबर को दिल्ली के ऐतिहासिक रामलीला मैदान में प्रस्तावित है।",
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  "category": "भारत",
  "publishedAt": "2026-10-26",
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