मयूरभंज के गांव में घुसा रॉयल बंगाल टाइगर, ग्रामीणों ने सूझबूझ से खाली मकान में बंद कर वन विभाग को सौंपा ओडिशा के मयूरभंज जिले के खापरखाई गांव में देर रात पहुंचे रॉयल बंगाल टाइगर को ग्रामीणों ने एक खाली मकान में बंद कर दिया, जिसके बाद वन विभाग की टीम ने सुरक्षित रेस्क्यू किया। ओडिशा के मयूरभंज जिले में उस वक्त भारी दहशत फैल गई जब जंगल से निकलकर एक रॉयल बंगाल टाइगर सीधे इंसानी बस्ती में दाखिल हो गया। यह पूरा वाकया ठाकुरमुंडा रेंज के तहत आने वाले खापरखाई गांव का है, जहां जंगली जानवर के कदम पड़ते ही अफरा-तफरी मच गई। गनीमत यह रही कि इस पूरे घटनाक्रम के दौरान किसी भी ग्रामीण को किसी तरह की शारीरिक चोट नहीं आई। स्थानीय निवासियों के त्वरित फैसले और वन कर्मियों के समय पर चलाए गए बचाव अभियान की बदौलत एक बड़ा संकट टल गया और वन्यजीव को भी सुरक्षित बचा लिया गया। मवेशी बाड़े में आहट और ग्रामीणों की तत्परता इस खतरनाक जानवर की मौजूदगी का आभास इलाके में अचानक नहीं हुआ था, बल्कि यह रॉयल बंगाल टाइगर बीते तीन दिनों से गांव के इर्द-गिर्द जंगलों और झाड़ियों में भटक रहा था। गुरुवार की देर रात शांति के बीच यह शिकारी जानवर सीधे एक ग्रामीण के मवेशी बाड़े के भीतर जा पहुंचा। बाड़े के अंदर से अचानक बाघ के भारी गुर्राने की आवाज गूंजी, जिससे मकान मालिक की नींद खुल गई। अनहोनी की आशंका भांपते ही मकान मालिक ने बाहर निकलकर जोर-जोर से शोर मचाना शुरू कर दिया। चीख-पुकार सुनते ही आसपास के तमाम ग्रामीण लाठी-डंडे और टार्च लेकर घटनास्थल पर जुटने लगे। भारी भीड़ और लगातार हो रहे तेज शोरगुल से बाघ घबरा गया और मवेशियों को नुकसान पहुंचाए बिना बाड़े से बाहर निकलकर पास में मौजूद एक खाली घर में जा छिपा। खाली कमरे में किया बंद, रात भर पहरेदारी बाघ के खाली घर में घुसते ही ग्रामीणों ने घबराने के बजाय असाधारण समझदारी और साहस का परिचय दिया। लोगों ने बिना पल भर गंवाए उस सुनसान मकान के मुख्य दरवाजे की बाहर से कुंडी चढ़ा दी। इस तरह खतरनाक शिकारी को उसी कमरे के भीतर पूरी तरह सुरक्षित बंद कर दिया गया ताकि वह बस्ती में किसी अन्य व्यक्ति या पशु पर हमला न कर सके। इसके तुरंत बाद ग्रामीणों ने पूरे घटनाक्रम की जानकारी स्थानीय वन विभाग के अधिकारियों को दी। सिमिलिपाल टाइगर रिजर्व (STR) के फील्ड डायरेक्टर प्रकाश चंद्र गोगिनेनी ने पुष्टि की कि बाघ पूरी रात उसी सुनसान घर के अंदर बंद रहा। रात भर ग्रामीण सतर्क रहे और सुबह की पहली किरण के साथ ही वन विभाग की विशेषज्ञ टीम पूरे साजो-सामान के साथ मौके पर पहुंच गई। वन विभाग का बचाव अभियान और उपचार की तैयारी शुक्रवार की सुबह खापरखाई गांव में वन विभाग का संयुक्त बचाव दस्ता दाखिल हुआ। वन अधिकारी अजय कुमार साहू ने बताया कि स्थानीय लोगों की मुस्तैदी और सहयोग के चलते बाघ एक कमरे में सीमित था, जिससे टीम को योजना बनाने में काफी आसानी हुई। बचाव दल में एक सहायक वन संरक्षक (ACF), रेंजर्स, फॉरेस्टर और वन रक्षक शामिल थे। इन सभी अधिकारियों और कर्मचारियों ने घंटों की कड़ी मशक्कत और सावधानीपूर्वक रणनीति बनाकर बाघ को सुरक्षित कमरे से बाहर निकाला और पिंजरे में कैद किया। अधिकारियों का प्राथमिक आकलन है कि यह रॉयल बंगाल टाइगर संभवतः किसी बीमारी अथवा शारीरिक कमजोरी की वजह से अपने सामान्य इलाके से भटक कर गांव की तरफ रुख कर गया था। जानवर की स्वास्थ्य जांच और देखरेख के लिए बारीपदा से एक विशेष पशु चिकित्सक को बुलाया गया है, जो उसकी बारीकी से जांच और जरूरी उपचार करेंगे। वन अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि उपचार पूरा होने और शारीरिक रूप से पूरी तरह तंदुरुस्त होने के बाद इस बाघ को दोबारा उसके प्राकृतिक आवास सिमिलिपाल टाइगर रिजर्व में छोड़ दिया जाएगा। इसका आप पर असर जंगली इलाके से सटे ग्रामीण क्षेत्रों में किसी खूंखार जानवर का घुसना स्थानीय सुरक्षा और वन्यजीव प्रबंधन के तौर-तरीकों पर सीधा असर डालता है। • ओडिशा के मयूरभंज में: सिमिलिपाल से लगे गांवों के निवासियों को रात के समय अतिरिक्त सतर्कता बरतने और मवेशी बाड़ों को मजबूत रखने की सलाह दी गई है। वन विभाग के अलर्ट के बाद ठाकुरमुंडा क्षेत्र के लोग बेवजह अंधेरे में बाहर निकलने से बच रहे हैं। • भारत भर के ग्रामीण क्षेत्रों में: वन्यजीवों के मानव बस्तियों में प्रवेश करने पर बिना हिंसा के उन्हें बंद करने का यह उदाहरण लोगों को जागरूक करता है। भीड़ द्वारा जानवर पर हमला करने के बजाय अधिकारियों को बुलाना जानमाल के नुकसान को न्यूनतम करता है। • पशुपालकों के लिए: मवेशियों के बाड़ों में सुरक्षा घेरा मजबूत करने और आपातकालीन सायरन अथवा रोशनी की व्यवस्था रखने की आवश्यकता स्पष्ट होती है। समय रहते आहट सुनने पर ही इस घटना में मवेशियों की जान बच सकी। • वन विभाग और समुदाय सहयोग: वन अधिकारियों और स्थानीय नागरिकों के बीच त्वरित संवाद से किसी भी हिंसक टकराव को टाला जा सकता है। आपातकालीन हेल्पलाइन नंबरों का गांव स्तर पर उपलब्ध होना बचाव कार्य को बेहद आसान बना देता है। ऐसा क्यों हुआ एक खूंखार शिकारी जानवर का अपने घने जंगलों को छोड़कर इंसानी बस्तियों में घुसने के पीछे शारीरिक कमजोरी और बीमारी को प्रमुख वजह माना जा रहा है। • शारीरिक अस्वस्थता: वन अधिकारियों की प्रारंभिक जांच के अनुसार बाघ संभवतः किसी बीमारी या कमजोरी से जूझ रहा था। अस्वस्थ होने के कारण जंगली जानवर प्राकृतिक शिकार करने में असमर्थ होकर आसान भोजन की तलाश में भटक जाते हैं। • शिकार और भोजन की तलाश: गांव के मवेशी बाड़े में घुसने से स्पष्ट है कि जानवर कमजोर स्थिति में आसान मवेशियों की आहट पाकर वहां पहुंचा था। तीन दिनों से आसपास मंडराने के बाद उसने बाड़े का रुख किया था। • प्राकृतिक सीमा से भटकाव: सिमिलिपाल टाइगर रिजर्व की सीमा से भटकने के दौरान रास्ता न मिलने के कारण वह ठाकुरमुंडा रेंज के रिहायशी क्षेत्र में जा घुसा। बीमारी के कारण दिशा का सही अंदाजा न होना भी इसका बड़ा कारण हो सकता है। • विशेषज्ञ जांच प्रक्रिया: बीमारी की सटीक प्रकृति का पता लगाने के लिए बारीपदा से पशु चिकित्सक को बुलाया गया है। विस्तृत चिकित्सीय जांच और रक्त परीक्षण के बाद ही बीमारी के मूल कारणों की आधिकारिक पुष्टि हो सकेगी। सवाल-जवाब 1. यह घटना ओडिशा के किस जिले और गांव में हुई? यह घटना ओडिशा के मयूरभंज जिले की ठाकुरमुंडा रेंज के तहत खापरखाई गांव में घटी। 2. बाघ सबसे पहले गांव में कहां घुसा था? बाघ सबसे पहले गुरुवार देर रात एक ग्रामीण के मवेशी बाड़े में दाखिल हुआ था। 3. ग्रामीणों ने बाघ को काबू करने के लिए क्या तरीका अपनाया? शोर से डरकर जब बाघ पास के खाली घर में घुसा, तो ग्रामीणों ने बाहर से दरवाजा बंद कर कुंडी लगा दी। 4. बाघ के गांव में आने का संभावित कारण क्या बताया गया है? वन अधिकारियों का मानना है कि बाघ संभवतः किसी बीमारी के कारण भटक कर गांव की ओर आ गया था। 5. रेस्क्यू के बाद बाघ की सेहत की जांच कौन कर रहा है? बारीपदा से बुलाए गए विशेष पशु चिकित्सक बाघ के स्वास्थ्य की जांच और इलाज कर रहे हैं। 6. पूरी तरह ठीक होने के बाद बाघ को कहां ले जाया जाएगा? स्वस्थ होने के बाद इस रॉयल बंगाल टाइगर को वापस सिमिलिपाल टाइगर रिजर्व में छोड़ दिया जाएगा। https://trendkia.com/national/mayurbhanj-ke-ganva-men-ghusa-royal-bengal-tiger-graminon-ne-sujhabujha-se-khali-makana-men-bnda-kara-vana-vibhaga-ko-saunpa-38684 TrendKia — Har trend, sabse pehle.