मेट्रो स्टेशन पर शौचालय इस्तेमाल के लिए 5 या 10 रुपये मांगना कितना सही, जानिए क्या कहते हैं नियम देश के कई बड़े शहरों में मेट्रो स्टेशनों पर शौचालय के उपयोग के लिए 5 से 10 रुपये वसूले जाने को लेकर यात्री अक्सर उलझन में रहते हैं, जानिए आधिकारिक व्यवस्था और यात्री अधिकार। देशभर के बड़े शहरों में मेट्रो दैनिक आवागमन का एक अनिवार्य साधन बन चुकी है। दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु, लखनऊ, आगरा, नोएडा और गाजियाबाद जैसे शहरों में लाखों यात्री हर दिन अपने गंतव्य तक पहुंचने के लिए इस आधुनिक परिवहन प्रणाली का उपयोग करते हैं। तेज रफ्तार और जाम से मुक्त इस सफर के बीच स्टेशनों पर मिलने वाली बुनियादी जनसुविधाओं, विशेष रूप से शौचालयों के इस्तेमाल को लेकर यात्रियों में अक्सर असमंजस देखा जाता है। कई स्टेशनों पर वॉशरूम में प्रवेश करने से पहले कर्मचारियों द्वारा 5 रुपये या 10 रुपये की मांग की जाती है, जिससे यह सवाल उठता है कि क्या नियम वाकई इस तरह के भुगतान की अनुमति देते हैं। अनपेड और पेड एरिया में सुविधाओं का विभाजन मेट्रो स्टेशनों की आंतरिक संरचना को दो प्रमुख हिस्सों में बांटा जाता है, अनपेड एरिया और पेड एरिया। टिकट काउंटर, प्रवेश द्वार और सुरक्षा जांच से पहले का हिस्सा अनपेड एरिया कहलाता है, जबकि स्मार्ट कार्ड या क्यूआर कोड स्कैन करके प्रवेश करने के बाद का क्षेत्र पेड एरिया माना जाता है। अधिकांश मेट्रो नेटवर्कों में अनपेड जोन में बने शौचालयों का संचालन बाहरी एजेंसियों या नगर निगमों के सहयोग से 'पे एंड यूज' मॉडल पर किया जाता है। इस हिस्से में साफ-सफाई और रखरखाव के खर्च की भरपाई के लिए निर्धारित शुल्क लिया जाता है। सफर के दौरान मिलने वाली सुविधाएं जब कोई यात्री अपनी यात्रा शुरू करने के लिए सुरक्षा जांच पार कर प्लेटफॉर्म या कॉनकोर्स के पेड एरिया में प्रवेश करता है, तो स्थिति पूरी तरह बदल जाती है। नियमों के तहत टिकटधारक यात्रियों को स्टेशन परिसर के अंदर बुनियादी स्वच्छता सुविधाएं उपलब्ध कराना सेवा का हिस्सा होता है। कई स्टेशनों पर पेड एरिया के अंदर मौजूद शौचालय निशुल्क होते हैं। यदि किसी स्टेशन पर पेड एरिया में अलग से शौचालय की व्यवस्था नहीं है, तो आपात स्थिति में यात्री स्टेशन कंट्रोलर या ग्राउंड स्टाफ से संपर्क करके अनपेड एरिया के वॉशरूम तक जाने की अनुमति मांग सकते हैं। स्वच्छता, सुरक्षा और नागरिक अनुशासन स्टेशनों पर स्वच्छता बनाए रखने के साथ-साथ सुरक्षा का पहलू भी बेहद संवेदनशील रहा है। पूर्व में दिल्ली के इंद्रलोक मेट्रो स्टेशन के महिला शौचालय में एक व्यक्ति का शव संदिग्ध परिस्थितियों में मिलने की घटना सामने आई थी, जहां कमरा अंदर से बंद था। इसके अलावा प्लेटफॉर्म पर खुले में पेशाब करने जैसी अशोभनीय हरकतों के वीडियो भी सामने आ चुके हैं, जिससे अन्य यात्रियों में भारी आक्रोश देखने को मिला था। मेट्रो प्रशासन का स्पष्ट कहना है कि परिसर को स्वच्छ रखना यात्रियों की साझा जिम्मेदारी है और नियमों का उल्लंघन करने या गंदगी फैलाने पर जुर्माने का कड़ा प्रावधान लागू रहता है। इसका आप पर असर मेट्रो स्टेशनों पर शौचालय शुल्क के नियमों की सही जानकारी यात्रियों को अनुचित वसूली से बचाती है और यात्रा के दौरान जरूरी सहूलियत देती है। • शुल्क का नियम: अनपेड एरिया में बने शौचालयों में नगर निगम या ठेकेदार 5 से 10 रुपये का शुल्क ले सकते हैं। पेड एरिया के अंदर टिकट धारक यात्रियों के लिए यह सुविधा आमतौर पर निशुल्क होती है। • आपातकालीन स्थिति: यदि प्लेटफॉर्म या पेड क्षेत्र में शौचालय नहीं है तो यात्री स्टेशन मास्टर से मदद ले सकते हैं। कर्मचारी आपको बिना दोबारा टिकट काटे सुविधा तक पहुंचाने में सहयोग करते हैं। • गंदगी पर जुर्माना: स्टेशन परिसर या प्लेटफॉर्म पर खुले में गंदगी फैलाने पर सख्त कानूनी कार्रवाई हो सकती है। पकड़े जाने पर भारी आर्थिक जुर्माना और चालान भुगतना पड़ सकता है। • शिकायत निवारण: यदि कोई कर्मचारी तय नियमों के विपरीत अवैध वसूली करता है तो यात्री शिकायत दर्ज कर सकते हैं। इसके लिए स्टेशन के कस्टमर केयर काउंटर या हेल्पलाइन नंबर का उपयोग किया जा सकता है। ऐसा क्यों हुआ मेट्रो स्टेशनों पर शौचालय शुल्क और नियमों को लेकर समय-समय पर विवाद और असमंजस की स्थिति उत्पन्न होती रही है। इसका मुख्य कारण स्टेशनों का संरचनात्मक ढांचा और बाहरी एजेंसियों द्वारा किया जाने वाला रखरखाव है। • अलग-अलग जोन की व्यवस्था: अनपेड क्षेत्र आम जनता के लिए खुला रहता है इसलिए वहां व्यावसायिक पे-एंड-यूज मॉडल लागू किया जाता है। पेड एरिया केवल वैध यात्रियों के लिए आरक्षित होता है जहां सुविधाएं टिकट का हिस्सा मानी जाती हैं। • रखरखाव और स्वच्छता की लागत: अत्यधिक भीड़ वाले स्टेशनों पर सफाई कर्मचारियों और पानी की निरंतर आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए एजेंसियां न्यूनतम शुल्क वसूलती हैं। बिना शुल्क के कई सार्वजनिक शौचालयों में गंदगी की गंभीर समस्या पैदा हो जाती है। • सुरक्षा और अनुशासन की चुनौतियां: बंद शौचालयों में संदिग्ध गतिविधियों और प्लेटफॉर्म पर अशोभनीय आचरण की घटनाओं ने निगरानी बढ़ाने पर मजबूर किया है। इंद्रलोक स्टेशन जैसी अप्रिय घटनाओं के बाद परिसरों में जांच और नियमों को अधिक कड़ा किया गया है। सवाल-जवाब 1. क्या मेट्रो स्टेशन पर शौचालय का उपयोग करने के लिए 5 या 10 रुपये देना जरूरी है? यदि शौचालय स्टेशन के अनपेड एरिया में है तो वहां तय शुल्क देना पड़ सकता है। हालांकि पेड एरिया के अंदर मौजूद शौचालय आमतौर पर वैध टिकटधारकों के लिए निशुल्क होते हैं। 2. अगर प्लेटफॉर्म पर शौचालय न हो तो यात्री क्या करें? यात्री स्टेशन कंट्रोलर या कस्टमर केयर स्टाफ से संपर्क करके अनपेड एरिया के शौचालय का उपयोग करने का अनुरोध कर सकते हैं। 3. मेट्रो परिसर या प्लेटफॉर्म पर खुले में पेशाब करने पर क्या कार्रवाई होती है? मेट्रो परिसर में गंदगी फैलाना या खुले में पेशाब करना दंडनीय अपराध है, जिसके लिए मौके पर ही भारी जुर्माना लगाया जा सकता है। 4. क्या अवैध वसूली की शिकायत स्टेशन पर की जा सकती है? हां, यदि कोई कर्मचारी अनधिकृत पैसे मांगता है तो स्टेशन के कस्टमर केयर काउंटर पर लिखित शिकायत दर्ज कराई जा सकती है। https://trendkia.com/national/metro-steshana-para-shauchalaya-istemala-ke-lie-5-ya-10-rupaye-mangana-kitana-sahi-janie-kya-kahate-hain-niyama-37812 TrendKia — Har trend, sabse pehle.