रक्षा मंत्रालय ने एनसीसी पाठ्यक्रम में किया बड़ा बदलाव, कैडेट्स अब सीखेंगे एथिकल हैकिंग और साइबर सुरक्षा रक्षा मंत्रालय ने एनसीसी के नए सिलेबस में एथिकल हैकिंग, साइबर डिफेंस और डिजिटल फॉरेंसिक जैसे एडवांस्ड कोर्स शामिल किए हैं। इससे लाखों कैडेट्स न केवल देश की डिजिटल सीमाओं की रक्षा करेंगे, बल्कि आईटी और बैंकिंग सेक्टर में शानदार करियर भी बना सकेंगे। नेशनल कैडेट कोर के कैडेट्स की पहचान अब केवल शारीरिक सहनशक्ति, अनुशासित परेड, राइफल ड्रिल और एडवेंचर कैंप्स तक ही सीमित नहीं रहेगी। तकनीक के इस नए दौर में सुरक्षा की चुनौतियां काफी बदल चुकी हैं, और अब देश की संप्रभुता केवल भौगोलिक सीमाओं तक सीमित नहीं है। इंटरनेट और साइबर स्पेस अब एक नया युद्धक्षेत्र बन चुके हैं, जहां अदृश्य खतरे लगातार मंडराते रहते हैं। इसी बदलती वैश्विक और तकनीकी स्थिति को ध्यान में रखते हुए भारत सरकार के रक्षा मंत्रालय ने एनसीसी के पारंपरिक पाठ्यक्रम में एक ऐतिहासिक और क्रांतिकारी बदलाव करने का निर्णय लिया है। इस नई पहल के तहत कैडेट्स को सैन्य अनुशासन के साथ-साथ डिजिटल सीमाओं की रक्षा करने के लिए भी प्रशिक्षित किया जाएगा। डिजिटल युग की चुनौतियों और साइबर खतरों से मुकाबला देश में डिजिटल सेवाओं और इंटरनेट के व्यापक विस्तार के साथ-साथ ऑनलाइन अपराधों का दायरा भी तेजी से बढ़ा है। वर्तमान समय में डेटा चोरी, ऑनलाइन बैंकिंग फ्रॉड, रैनसमवेयर अटैक और सरकारी वेबसाइट्स को हैक करने जैसी घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं। दुश्मन देश और साइबर अपराधी अब पारंपरिक हथियारों के बजाय डिजिटल हमलों के जरिए देश के महत्वपूर्ण इंफ्रास्ट्रक्चर और सुरक्षा तंत्र को नुकसान पहुंचाने की कोशिश में रहते हैं। ऐसी स्थिति में देश के सबसे बड़े और अनुशासित युवा संगठन को साइबर मोर्चे पर तैनात करना समय की मांग बन गया था। इस नए सिलेबस के माध्यम से लाखों कैडेट्स को इंटरनेट स्पेस में होने वाली हर तरह की संदिग्ध गतिविधि की पहचान करने और उससे बचाव करने के तरीके सिखाए जाएंगे। नए पाठ्यक्रम में शामिल तीन मुख्य विषय रक्षा मंत्रालय द्वारा तैयार किया गया यह नया ट्रेनिंग मॉड्यूल व्यावहारिक ज्ञान और सैद्धांतिक सिद्धांतों का एक बेहतरीन मिश्रण है। इसमें तीन प्रमुख एडवांस्ड विषयों को शामिल किया गया है जो कैडेट्स को तकनीकी रूप से सक्षम बनाएंगे • एथिकल हैकिंग: इसके तहत कैडेट्स को नेटवर्क और कंप्यूटर सिस्टम की सुरक्षा कमियों को खोजना सिखाया जाएगा। इसका उद्देश्य असली हैकर्स के हमला करने से पहले ही सुरक्षा खामियों को पहचान कर मजबूत सुरक्षा कवच तैयार करना है। • साइबर डिफेंस: इस विषय के अंतर्गत व्यक्तिगत डेटा की सुरक्षा, मजबूत पासवर्ड बनाने की कला, सुरक्षित इंटरनेट सर्फिंग के नियम और एंटी-वायरस सॉफ्टवेयर का सही उपयोग सिखाया जाएगा ताकि रोजमर्रा के डिजिटल संचालन को पूरी तरह सुरक्षित रखा जा सके। • डिजिटल फॉरेंसिक: यदि कोई ऑनलाइन अपराध घटित होता है, तो डिजिटल साक्ष्य कैसे जुटाए जाते हैं और ऑनलाइन अपराधियों का सुराग कैसे लगाया जाता है, इसकी बुनियादी और व्यावहारिक ट्रेनिंग कैडेट्स को दी जाएगी। आईटी और कॉर्पोरेट सेक्टर में करियर के नए क्षितिज यह महत्वपूर्ण पहल न केवल देश की डिजिटल सुरक्षा को मजबूत करेगी, बल्कि एनसीसी कैडेट्स के अपने करियर के लिए भी एक बड़ा वरदान साबित होगी। वर्तमान समय में आईटी, बैंकिंग, वित्तीय संस्थानों और निजी कॉर्पोरेट सेक्टर में साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों की भारी मांग है। एनसीसी के दौरान एथिकल हैकिंग और डिजिटल फॉरेंसिक का व्यावहारिक अनुभव प्राप्त करने के बाद, इन कैडेट्स को आईटी कंपनियों, सुरक्षा एजेंसियों और रक्षा क्षेत्र में नौकरियों के दौरान विशेष प्राथमिकता और बेहतरीन अवसर प्राप्त होंगे। ग्रामीण इलाकों में डिजिटल अवेयरनेस और जन सेवा एनसीसी कैडेट्स हमेशा से ही समाज सेवा, आपदा प्रबंधन और नागरिक सहायता कार्यों में अग्रिम पंक्ति में खड़े रहे हैं। साइबर सुरक्षा की नई ट्रेनिंग प्राप्त करने के बाद ये कैडेट्स आम जनता को ऑनलाइन फ्रॉड, वित्तीय ठगी और साइबर अपराधों से बचाने में सक्रिय भूमिका निभाएंगे। विशेष रूप से ग्रामीण इलाकों और छोटे शहरों में, जहां लोग डिजिटल सुरक्षा के प्रति कम जागरूक हैं, वहां ये कैडेट्स जागरूकता शिविर आयोजित करके लोगों को सुरक्षित ऑनलाइन आदतों के प्रति शिक्षित करेंगे। इसका आप पर असर भारत में: नेशनल कैडेट कोर के सिलेबस में बदलाव से देश भर में डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर की सुरक्षा मजबूत होगी और ऑनलाइन अपराधों पर अंकुश लगाने में मदद मिलेगी। छात्रों और युवाओं के लिए: एथिकल हैकिंग और डिजिटल फॉरेंसिक की ट्रेनिंग पाने वाले एनसीसी कैडेट्स को आईटी, बैंकिंग और सुरक्षा एजेंसियों में नौकरियों में सीधी प्राथमिकता मिलेगी। सवाल-जवाब 1. एनसीसी के नए पाठ्यक्रम में कौन-कौन से विषय शामिल किए गए हैं? रक्षा मंत्रालय ने एनसीसी के नए सिलेबस में एथिकल हैकिंग, साइबर डिफेंस और डिजिटल फॉरेंसिक जैसे तीन प्रमुख विषय शामिल किए हैं। 2. एनसीसी कैडेट्स को साइबर सुरक्षा सिखाने का मुख्य उद्देश्य क्या है? बढ़ती डेटा चोरी, बैंकिंग फ्रॉड और साइबर हमलों से देश के डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर की रक्षा के लिए युवाओं को साइबर वॉरियर के रूप में तैयार करना इसका मुख्य उद्देश्य है। 3. कैडेट्स को एथिकल हैकिंग मॉड्यूल में क्या सिखाया जाएगा? इसके अंतर्गत कैडेट्स को नेटवर्क और कंप्यूटर सिस्टम की सुरक्षा कमियों को पहचानना सिखाया जाएगा ताकि असली हैकर्स के हमले से पहले सुरक्षा कवच तैयार किया जा सके। 4. क्या साइबर ट्रेनिंग से कैडेट्स को नौकरी पाने में मदद मिलेगी? हां, एथिकल हैकिंग और फॉरेंसिक के प्रैक्टिकल ज्ञान से कैडेट्स को आईटी कंपनियों, बैंकिंग, रक्षा क्षेत्र और सुरक्षा एजेंसियों की नौकरियों में विशेष प्राथमिकता मिलेगी। 5. कैडेट्स आम नागरिकों को साइबर अपराधों से बचाने में कैसे योगदान देंगे? एनसीसी कैडेट्स छोटे शहरों और ग्रामीण इलाकों में जागरूकता शिविर आयोजित करके आम जनता को सुरक्षित ऑनलाइन लेनदेन और फ्रॉड से बचाव के प्रति शिक्षित करेंगे। https://trendkia.com/national/ministry-of-defence-ne-ncc-pathyakrama-men-kiya-bara-badalava-kaidetsa-aba-sikhenge-ethikala-haikinga-aura-saibara-suraksha-12114 TrendKia — Har trend, sabse pehle.