# मॉस्को में सफाई कर्मी का झांसा देकर तेलंगाना के चार नागरिकों को जबरन सैन्य प्रशिक्षण, स्वदेश वापसी की गुहार

> तेलंगाना के चार भारतीय कामगारों को बगीचा सफाई का लालच देकर रूसी सैन्य शिविर में धकेला गया, जहां जबरन हथियार थमाए जाने के बाद अब परिजनों ने सरकार से बचाव की मांग की है।

**Type:** article · **Category:** भारत · **Published:** 2026-09-30 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/national/moscow-men-saphai-karmi-ka-jhansa-dekara-telangana-ke-chara-nagarikon-ko-jabarana-sainya-prashikshana-svadesha-vapasi-ki-guhara-40333 · **Language:** Hindi
**Tags:** रूस सेना, तेलंगाना, निजामाबाद, कामारेड्डी, भारतीय कामगार, मॉस्को, सैन्य भर्ती घोटाला

आजीविका की तलाश में विदेश गए तेलंगाना के चार भारतीय नागरिक रूस में एक गंभीर संकट में घिर गए हैं। निजामाबाद और कामारेड्डी जिलों से ताल्लुक रखने वाले इन कामगारों को सामान्य नागरिक काम का झांसा देकर कथित तौर पर रूसी सेना के शिविर में ले जाया गया, जहां अब उन्हें जबरन सैन्य अभ्यास कराया जा रहा है। पीड़ित युवकों ने अपने परिवारों को भेजे वीडियो संदेशों और फोन कॉल के माध्यम से अपनी जान को गंभीर खतरा बताते हुए केंद्र सरकार और तेलंगाना प्रशासन से त्वरित हस्तक्षेप कर सुरक्षित वतन वापसी कराने की भावुक अपील की है।

## हेल्पर की नौकरी से लेकर रूसी कैंप तक का सफर
पीड़ितों के पारिवारिक सूत्रों के अनुसार, करीब छह महीने पूर्व निजामाबाद जिले के भुक्या रविंदर, अशोक और मेगावत प्रकाश के साथ कामारेड्डी जिले के निवासी मोहम्मद अफजल खान विदेश में बेहतर आमदनी की उम्मीद लेकर रवाना हुए थे। इन सभी ने एक भर्ती एजेंट को प्रति व्यक्ति 3 लाख रुपये का भुगतान किया था और हेल्पर के पद पर काम करने के लिए मॉस्को पहुंचे थे। वहां लगभग छह महीने तक काम करने के उपरांत उनकी नौकरी की मियाद समाप्त हो गई और उनके सामने आजीविका का गंभीर संकट खड़ा हो गया।

नया काम तलाशने के दौरान युवकों की नजर एक सार्वजनिक वॉल पोस्टर पर पड़ी। इस विज्ञापन में रूसी सेना के एक कैंप में गार्डन क्लीनर यानी बगीचे की साफ-सफाई के काम के लिए प्रति माह 2 लाख रुपये के आकर्षक वेतन का प्रस्ताव दिया गया था। बेरोजगार हो चुके चारों युवकों ने पोस्टर पर दर्ज संपर्क नंबर पर बात की, जहां मौजूद एजेंट ने सैन्य शिविर में सफाईकर्मी के पद की पुष्टि करते हुए उन्हें वहां जाने का भरोसा दिलाया।

## 12 घंटे का सफर और जंगल के बीच सैन्य शिविर
एजेंट के निर्देशों पर भरोसा करके जब यह चारों युवक बताए गए स्थान पर पहुंचे, तो हालात पूरी तरह बदल गए। कामगारों का कहना है कि सैन्य वाहनों में बैठाकर उन्हें लगभग 12 घंटे तक घुमाया गया और अंततः एक घने जंगली इलाके में स्थित कैंप में ले जाकर छोड़ दिया गया। वहां उन्हें बुनियादी भोजन तक ठीक से उपलब्ध नहीं कराया जा रहा था और कुछ ही समय बाद उन्हें साफ-सफाई के काम के बजाय हथियार थमा दिए गए।

जब इन भारतीय युवकों ने वहां के अधिकारियों के समक्ष कड़ा ऐतराज जताया और स्पष्ट किया कि उनका अनुबंध केवल बगीचे की सफाई के लिए था न कि युद्ध अथवा सेना में सेवा देने के लिए, तो उनकी बात सुनने के बजाय उनके साथ मारपीट की गई। शारीरिक प्रताड़ना देकर उन्हें जबरन हथियारों का संचालन और कठिन मिलिट्री ट्रेनिंग लेने पर मजबूर किया गया।

## यूक्रेन मोर्चे पर तैनाती की आशंका और परिजनों की गुहार
रूसी कैंप से भेजे गए फोन कॉल और रिकॉर्ड किए गए वीडियो संदेशों में इन युवकों ने बेहद डरावनी स्थिति बयां की है। उनका कहना है कि प्रशिक्षण सत्र पूरा होते ही उन्हें यूक्रेन सीमा के अग्रिम मोर्चे पर भेजने की तैयारी की जा रही है। युवकों ने आशंका जताई है कि युद्ध क्षेत्र में धकेले जाने पर उनकी जान जा सकती है, जिसके चलते वे बेहद डरे हुए हैं और उन्होंने तत्काल राजनयिक मदद मांगी है।

इस दर्दनाक खुलासे के बाद भारत में उनके परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। पीड़ित अफजल खान के पिता अब्बास खान, उनकी पत्नी और बेटे ने भारत सरकार तथा तेलंगाना के शीर्ष अधिकारियों से व्यक्तिगत रूप से आगे आकर रूसी प्रशासन से संपर्क साधने की मार्मिक अपील की है। वहीं रूस के शिविर में फंसे अशोक की ओर से भी लगातार सहायता की पुकार भेजी जा रही है। यूक्रेन के साथ जारी संघर्ष के बीच कई अन्य भारतीयों को भी झूठे वादों के सहारे अग्रिम मोर्चे पर झोंके जाने के मामले पहले भी सामने आते रहे हैं, जिससे इन चारों परिवारों की चिंताएं चरम पर पहुंच गई हैं।

## इसका आप पर असर
यह घटना विदेश में रोजगार की तलाश करने वाले भारतीय कामगारों के लिए अत्यंत गंभीर चेतावनी है।

- **भारत में:** विदेश में अनधिकृत एजेंटों या विज्ञापनों के जरिए जाने वाले कामगारों के लिए कागजात और कार्य प्रकृति की कठोर जांच बेहद जरूरी है। संदिग्ध विदेशी विज्ञापनों और अनाधिकृत भर्ती एजेंटों पर भरोसा करने से गंभीर कानूनी और जानलेवा संकट पैदा हो सकता है।
- **तेलंगाना में:** राज्य के ग्रामीण इलाकों से खाड़ी अथवा यूरोपीय देशों में काम की तलाश में जाने वाले युवाओं के परिजनों में गहरा डर पैदा हो गया है। स्थानीय परिवारों को अपने रिश्तेदारों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए तुरंत स्थानीय पुलिस और राज्य के एनआरआई विभाग से संपर्क साधना पड़ रहा है।
- **विदेशी नौकरियों के नियम:** विदेश मंत्रालय के आधिकारिक ई-माइग्रेट पोर्टल के बाहर किसी भी नौकरी के प्रस्ताव को स्वीकार करना खतरनाक साबित हो सकता है। किसी भी अनुबंध पर हस्ताक्षर करने से पहले भारतीय दूतावास या पंजीकृत सरकारी एजेंसियों से सत्यापन करवाना अनिवार्य है।
- **वित्तीय जोखिम:** प्रत्येक कामगार द्वारा चुकाए गए 3 लाख रुपये और कथित 2 लाख रुपये मासिक वेतन का वादा पूरी तरह धोखाधड़ी साबित हुआ है। ऐसे भ्रामक प्रस्तावों के झांसे में आने पर जीवन भर की जमा पूंजी गंवाने के साथ-साथ जान का जोखिम भी बन जाता है।

## ऐसा क्यों हुआ
यह संकट धोखाधड़ी वाले विदेशी भर्ती नेटवर्क और युद्धग्रस्त क्षेत्र में अनधिकृत कार्य प्रस्तावों पर भरोसा करने के कारण उत्पन्न हुआ।

- **रोजगार समाप्त होना:** छह महीने काम करने के बाद पूर्व निर्धारित हेल्पर की नौकरी खत्म हो गई, जिससे कामगारों के पास आमदनी का कोई जरिया नहीं बचा। इस मजबूरी के चलते उन्होंने रूसी भाषा और नियमों की जानकारी न होने के बावजूद वॉल पोस्टर पर भरोसा कर लिया।
- **भ्रामक विज्ञापन:** एजेंटों ने 2 लाख रुपये मासिक वेतन के साथ मिलिट्री कैंप में केवल गार्डन सफाई का झूठा वादा किया था। वास्तविकता छिपाकर युवाओं को सीधे सैन्य नियंत्रण वाले इलाके में पहुंचा दिया गया।
- **जबरन सैन्य भर्ती का चलन:** यूक्रेन युद्ध के बीच विदेशी कामगारों को सामान्य कार्यों का झांसा देकर सैन्य ठिकानों पर ले जाकर हथियार थमाने और शारीरिक प्रताड़ना देकर मोर्चे पर भेजने की घटनाएं सामने आती रही हैं। इस मामले में भी आपत्ति जताने पर युवकों की पिटाई कर उन्हें जबरन ट्रेनिंग में धकेल दिया गया।
- **जांच और प्रत्यावर्तन प्रक्रिया:** पीड़ितों के परिवारों द्वारा सरकार से गुहार लगाने के बाद अब आधिकारिक राजनयिक स्तर पर हस्तक्षेप और सुरक्षित वापसी की प्रक्रिया ही एकमात्र समाधान है। ऐसे मामलों में विदेशी दूतावासों और सरकारों के साथ बातचीत के जरिए ही भारतीय नागरिकों की रिहाई संभव हो पाती है।

## सवाल-जवाब

### 1. रूस में फंसे चारों युवक मूल रूप से कहां के निवासी हैं?
इनमें से तीन युवक भुक्या रविंदर, अशोक और मेगावत प्रकाश तेलंगाना के निजामाबाद जिले के हैं, जबकि मोहम्मद अफजल खान कामारेड्डी जिले के रहने वाले हैं।

### 2. ये युवक रूस किस काम के लिए और कितने खर्च पर गए थे?
वे लगभग छह महीने पहले एक एजेंट को प्रति व्यक्ति 3 लाख रुपये देकर हेल्पर की नौकरी करने मॉस्को गए थे।

### 3. वे सैन्य शिविर तक कैसे पहुंचे?
पुरानी नौकरी खत्म होने पर उन्होंने एक पोस्टर देखा जिसमें कैंप में गार्डन क्लीनर की नौकरी के लिए 2 लाख रुपये वेतन देने की बात कही गई थी, जिसके बाद एजेंट ने उन्हें वहां भेज दिया।

### 4. सैन्य कैंप में पहुंचने के बाद उनके साथ क्या हुआ?
उन्हें 12 घंटे गाड़ी में घुमाकर जंगल के कैंप में छोड़ा गया, खाना ठीक से नहीं दिया गया और सफाई के बदले हथियार थमाकर जबरन मिलिट्री ट्रेनिंग दी गई।

### 5. विरोध करने पर रूसी कैंप में क्या प्रतिक्रिया मिली?
जब युवकों ने स्पष्ट किया कि वे केवल बगीचे की सफाई के लिए आए हैं, तो अधिकारियों ने उनकी पिटाई की और जबरदस्ती हथियारों की ट्रेनिंग दी।

### 6. युवकों और उनके परिवारों की सबसे बड़ी चिंता क्या है?
ट्रेनिंग पूरी होने के बाद उन्हें यूक्रेन सीमा के अग्रिम मोर्चे पर भेजे जाने का डर है, जिससे उनकी जान को सीधा खतरा हो सकता है।

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