# मुगलसराय के राम मंदिर तालाब का कायाकल्प करने अकेले उतरे अजय गुप्ता, 25 दिन से जारी है सफाई

> चंदौली जिले के मुगलसराय में राम मंदिर तालाब की बदहाली दूर करने के लिए स्थानीय निवासी अजय गुप्ता पिछले 25 दिनों से अपने दम पर सफाई अभियान चला रहे हैं।

**Type:** article · **Category:** भारत · **Published:** 2026-10-12 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/national/mughalsarai-ke-ram-mandir-talaba-ka-kayakalpa-karane-akele-utare-ajay-gupta-25-dina-se-jari-hai-saphai-46659 · **Language:** Hindi
**Tags:** मुगलसराय, अजय गुप्ता, राम मंदिर तालाब, चंदौली, तालाब सफाई, स्वच्छता अभियान, नगर पालिका

उत्तर प्रदेश के चंदौली जिले में पड़ने वाले मुगलसराय क्षेत्र के राम मंदिर परिसर स्थित ऐतिहासिक तालाब की तस्वीर बदलने के लिए एक स्थानीय नागरिक ने अनोखा बीड़ा उठाया है। इस जलाशय में वर्षों से जमा कचरे, प्लास्टिक और सड़ांध को दूर करने के लिए स्थानीय निवासी अजय गुप्ता बीते लगभग 25 दिनों से निरंतर श्रमदान कर रहे हैं। बिना किसी सरकारी मशीनरी या बड़े संगठनात्मक ढांचे के, अजय अपने व्यक्तिगत संसाधनों और शारीरिक मेहनत के सहारे इस पूरे जलस्रोत को पुनर्जीवित करने में जुटे हुए हैं। इससे पहले वे इलाके के मानसरोवर तालाब के उद्धार के लिए भी ऐसा ही अभियान चला चुके हैं। उनका स्पष्ट मानना है कि सार्वजनिक जलस्रोतों की इस दुर्दशा के पीछे स्थानीय समाज की लापरवाही भी एक बड़ा कारण है, इसलिए केवल पानी से कचरा निकालना ही काफी नहीं होगा, बल्कि नागरिकों को अपनी आदतों में भी बुनियादी सुधार लाना होगा।

## धार्मिक और सामाजिक केंद्र की खोई पहचान लौटाने की कोशिश
मुगलसराय का राम मंदिर तालाब अतीत में आसपास के इलाके के लिए एक बेहद अहम सांस्कृतिक और सामाजिक केंद्र माना जाता था। छठ पूजा जैसे बड़े लोकपर्वों के अवसर पर यहां श्रद्धालुओं का भारी जमावड़ा होता था, और अनेक धार्मिक व सामाजिक अनुष्ठान इसी जलाशय के तट पर आयोजित किए जाते थे। हालांकि समय के थपेड़ों और लगातार उपेक्षा के कारण इसमें कचरे के ढेर लगते चले गए, जिससे पानी सड़ने लगा और पूरा परिसर बदहाल हो गया। जब स्थिति बेहद खराब हो गई, तब अजय गुप्ता ने इस धरोहर को दोबारा स्वच्छ और सुंदर बनाने का संकल्प लिया। अजय ने बताया कि वे बीते करीब 25 दिनों से हर दिन यहां उतरकर कचरा निकालने में लगे हैं। उनका प्राथमिक ध्येय यही है कि जलाशय की हालत सुधरे और आसपास रहने वाले परिवारों को दुर्गंध, मच्छरों और गंदगी से पैदा होने वाली बीमारियों से स्थायी राहत मिल सके।

## गंभीर चोट और बीमारियों के बावजूद नहीं थमा हौसला
तालाब के गहरे, गंदे और गाद भरे पानी की सफाई करना अजय के लिए शारीरिक रूप से बेहद जोखिम भरा साबित हुआ है। इस अभियान के दौरान उन्हें कई विषम परिस्थितियों का सामना करना पड़ा। पानी के भीतर पड़े नुकीले कचरे, टूटे कांच और धातुओं के कारण उनके पैर में गहरी चोट भी लग गई। इतना ही नहीं, दूषित वातावरण और सड़े हुए पानी के संपर्क में रहने की वजह से वे अभियान के दौरान 2 से 3 बार गंभीर रूप से बीमार भी पड़े। इसके बावजूद अजय ने काम नहीं रोका, बल्कि आवश्यक दवाइयां लेकर स्वस्थ होते ही फिर से तालाब में उतर गए। उनका कहना है कि तालाब की तली में मौजूद जहरीला कचरा सफाई को खतरनाक बना देता है, क्योंकि कई हिस्सों में पानी के अंदर तक जाकर भारी गंदगी खींचनी पड़ती है, जिससे कटने-छिलने और त्वचा संक्रमण का खतरा लगातार बना रहता है।

## सुरक्षा उपकरणों की सीमाएं और व्यक्तिगत संकल्प
जलस्रोत की सफाई के दौरान सुरक्षा साधन जुटाना और उनका उपयोग करना भी एक पेचीदा चुनौती बन गया। अजय ने स्पष्ट किया कि पानी के भीतर उतरकर भारी शारीरिक श्रम करते समय सुरक्षात्मक मास्क पहनना बेहद मुश्किल होता है, क्योंकि भारी सांस फूलने पर मास्क के अंदर दम घुटने जैसी असहजता महसूस होने लगती है। सुरक्षा साधनों की इस सीमित उपलब्धता और शारीरिक कष्टों के बाद भी उनके संकल्प में कोई कमी नहीं आई है। अजय का कहना है कि जब उन्होंने राम मंदिर तालाब को उसका मूल स्वरूप लौटाने की शपथ ली है, तो वे हर बाधा को पार करते हुए इस लक्ष्य को पूरा करने के लिए लगातार पसीना बहाते रहेंगे।

## प्रशासन से खाली हाथ, फिर भी सकारात्मक रुख बरकरार
शुरुआती चरण में अजय ने इस विशाल कार्य को व्यवस्थित रूप से करने के लिए स्थानीय नगर पालिका से भी संपर्क साधा था और संसाधनों के लिए मदद की गुहार लगाई थी। हालांकि नगर पालिका की ओर से उन्हें कोई अपेक्षित सहयोग अथवा प्रशासनिक संसाधन नहीं मिल सके। प्रशासनिक सहायता न मिलने के बाद भी अजय निराश नहीं हुए और उन्होंने पूरी तरह से अपने निजी संसाधनों और जेब के खर्च से सफाई का सिलसिला चालू रखा। वे सोशल मीडिया पर वीडियो साझा करके आम जनता से भी समाजसेवा के इस नेक कार्य के लिए एक-एक रुपये का स्वैच्छिक आर्थिक सहयोग देने की अपील करते हैं, ताकि अभियान के छोटे-मोटे खर्चे निकाले जा सकें।

अजय ने यह भी स्पष्ट किया कि उनका यह प्रयास किसी व्यक्ति विशेष, अधिकारी अथवा प्रशासनिक संस्था के विरोध में नहीं है। जो भी नागरिक उनके इस कार्य में थोड़ा-बहुत हाथ बंटाते हैं, वे उनके प्रति दिल से आभार प्रकट करते हैं। उन्होंने देखा है कि कई लोग तालाब पर सफाई में प्रत्यक्ष हाथ बंटाने पहुंचते हैं, जबकि बहुत से लोग सिर्फ उनके काम का वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर अपलोड करके चले जाते हैं। अजय इसे भी नकारात्मक नजरिए से नहीं देखते। उनका मानना है कि यदि किसी के वीडियो बनाने से समाज के अन्य लोग प्रेरित होते हैं और स्वच्छता को लेकर जनमानस में जागरूकता फैलती है, तो यह भी अभियान की एक बड़ी उपलब्धि है।

## कचरा न फेंकने की अपील और सामूहिक जिम्मेदारी का आह्वान
अजय गुप्ता ने तालाब के आसपास रहने वाले स्थानीय निवासियों और दुकानदारों से पुरजोर अपील की है कि वे जलाशय को कूड़ेदान न समझें और इसमें कचरा डालना पूरी तरह बंद करें। उनका कहना है कि यदि उनके दिन-रात पसीना बहाने के बाद भी लोग पुरानी आदत के तहत तालाब में प्लास्टिक और कूड़ा फेंकते रहेंगे, तो इस पूरे श्रमदान का कोई दीर्घकालिक फायदा समाज को नहीं मिल पाएगा। अजय के अनुसार अपने मोहल्ले, गांव और शहर को साफ-सुथरा रखना हर नागरिक की साझी नैतिक जिम्मेदारी है। कोई भी अकेला व्यक्ति पूरे इलाके का कायाकल्प नहीं कर सकता जब तक कि स्थानीय समाज अपनी सोच और तौर-तरीकों में बदलाव न लाए।

## व्यवस्थित प्रशासनिक मदद और जनप्रतिनिधियों के दखल की दरकार
राम मंदिर तालाब पर सामने आ रही सुरक्षा और स्वच्छता से जुड़ी जटिलताओं को देखते हुए स्थानीय प्रशासन, नगर पालिका और वार्ड प्रतिनिधियों की सक्रिय भागीदारी की भारी आवश्यकता महसूस की जा रही है। यदि अजय के इस साहसिक प्रयास को प्रशासन की तरफ से औपचारिक कचरा निस्तारण वाहन, पेशेवर सुरक्षा किट और तकनीकी मदद मुहैया करा दी जाए, तो यह अभियान कहीं अधिक तेजी से अपने मुकाम तक पहुंच सकता है। मुगलसराय की यह पहल एक साधारण नागरिक के असाधारण जज्बे की मिसाल जरूर है, परंतु सार्वजनिक जलस्रोतों का संरक्षण सामूहिक जवाबदेही से ही टिकाऊ बन सकता है। अब यह स्थानीय रहवासियों और क्षेत्र के जिम्मेदार अधिकारियों का दायित्व है कि वे इस पहल को आगे बढ़ाएं और तालाब को दोबारा गंदा होने से रोकें।

## इसका आप पर असर
मुगलसराय के राम मंदिर तालाब की सफाई से आसपास के इलाके में स्वच्छता और जनस्वास्थ्य पर सीधा सकारात्मक असर पड़ सकता है।

- **भारत में:** यह पहल देश भर के नागरिकों को यह संदेश देती है कि स्थानीय जलस्रोतों के संरक्षण के लिए केवल प्रशासन के भरोसे रहने के बजाय जनभागीदारी जरूरी है। ऐसे व्यक्तिगत प्रयास अन्य शहरों में भी उपेक्षित तालाबों और पोखरों के पुनरुद्धार की प्रेरणा बन सकते हैं।
- **मुगलसराय में:** तालाब से गंदगी हटने से आसपास रहने वाले परिवारों को बदबू, मच्छरों के प्रकोप और मौसमी बीमारियों से सीधी राहत मिलेगी। इसके अलावा आगामी छठ पूजा और धार्मिक आयोजनों के दौरान श्रद्धालुओं को पूजा-अर्चना के लिए एक स्वच्छ और सुरक्षित परिसर उपलब्ध हो सकेगा।
- **स्थानीय नागरिकों के लिए:** क्षेत्र के दुकानदारों और रहवासियों को अपने कूड़ा निस्तारण के तरीकों को सुधारना होगा ताकि साफ किया गया जलाशय फिर से दूषित न हो। लोगों को तालाब में कचरा फेंकने से बचकर इस सार्वजनिक स्थल की स्वच्छता बनाए रखने में सहयोग करना होगा।
- **प्रशासनिक स्तर पर:** इस अभियान ने नगर पालिका और स्थानीय जनप्रतिनिधियों का ध्यान उपेक्षित जलस्रोतों की ओर खींचा है। यदि स्थानीय निकाय इसे नियमित रखरखाव और कचरा प्रबंधन से जोड़ता है, तो इलाके की पर्यावरण स्थिति में स्थायी सुधार आ सकता है।

## ऐसा क्यों हुआ
मुगलसराय के राम मंदिर तालाब की बदहाली वर्षों की जन-लापरवाही और प्रशासनिक उपेक्षा का मिलाजुला परिणाम है, जिसे दूर करने के लिए अजय गुप्ता को आगे आना पड़ा।

- **कचरे का अनियंत्रित जमाव:** आसपास के रहवासियों और श्रद्धालुओं द्वारा बिना सोचे-समझे प्लास्टिक और पूजा सामग्री फेंके जाने से तालाब में गंदगी की परतें जमती चली गईं। ठोस अपशिष्ट प्रबंधन की व्यवस्था न होने के कारण यह जलस्रोत धीरे-धीरे दूषित नाले जैसा बन गया।
- **नगर पालिका से सहयोग की कमी:** स्थानीय नगर पालिका से संसाधन और मदद मांगने के बावजूद अपेक्षित सहायता नहीं मिली, जिसके चलते स्थिति लगातार बिगड़ती रही। औपचारिक तंत्र के सक्रिय न होने के कारण जलाशय की नियमित डी-सिल्टिंग और सफाई का काम वर्षों तक ठप रहा।
- **मानसरोवर तालाब का पिछला अनुभव:** इससे पहले मानसरोवर तालाब की सफाई में काम कर चुके अजय गुप्ता ने राम मंदिर तालाब की दुर्दशा देखकर इसे निजी स्तर पर साफ करने का निर्णय लिया। जलस्रोतों को बचाने के उनके व्यक्तिगत संकल्प ने ही उन्हें चोटों और बीमारियों के बावजूद इस 25 दिनी अभियान में डटे रहने की प्रेरणा दी।

## सवाल-जवाब

### 1. अजय गुप्ता मुगलसराय में किस तालाब की सफाई कर रहे हैं?
वे मुगलसराय स्थित राम मंदिर के तालाब की सफाई कर रहे हैं।

### 2. यह सफाई अभियान कितने दिनों से चल रहा है?
अजय गुप्ता पिछले करीब 25 दिनों से लगातार इस तालाब की सफाई में जुटे हुए हैं।

### 3. क्या इस अभियान से पहले अजय ने किसी अन्य तालाब की सफाई की थी?
हां, राम मंदिर तालाब से पहले उन्होंने इलाके के मानसरोवर तालाब की सफाई का काम भी किया था।

### 4. सफाई के दौरान अजय गुप्ता को किन शारीरिक समस्याओं का सामना करना पड़ा?
काम करते समय उनके पैर में चोट लगी और वे अभियान के दौरान 2 से 3 बार बीमार भी पड़े।

### 5. क्या इस काम में स्थानीय नगर पालिका से कोई मदद मिली?
नहीं, नगर पालिका से मदद मांगने के बावजूद उन्हें कोई अपेक्षित सहयोग नहीं मिला और वे अपने निजी संसाधनों से काम कर रहे हैं।

### 6. अजय गुप्ता लोगों से एक-एक रुपये की मदद की अपील क्यों कर रहे हैं?
वे समाजसेवा के इस सफाई कार्य और जरूरी खर्चों को आगे बढ़ाने के लिए वीडियो के माध्यम से एक-एक रुपये का स्वैच्छिक सहयोग मांगते हैं।

### 7. अजय गुप्ता ने स्थानीय नागरिकों से क्या अपील की है?
उन्होंने लोगों से अपील की है कि वे तालाब में कचरा न फेंकें और सार्वजनिक स्थानों को साफ रखने की जिम्मेदारी समझें।

## प्रेरणा और सबक
अजय गुप्ता का यह एकला प्रयास दिखाता है कि मजबूत इच्छाशक्ति और नागरिक जिम्मेदारी के बल पर अकेला व्यक्ति भी समाज में बड़ा बदलाव ला सकता है।

- **बहाने बनाने के बजाय पहल करना:** सरकारी तंत्र की मदद न मिलने पर निराश बैठने के बजाय अपने निजी संसाधनों से काम शुरू करके उन्होंने साबित किया कि बदलाव की शुरुआत खुद से होती है।
- **मुश्किलों के आगे न झुकना:** सफाई के दौरान पैर में चोट लगने और 2 से 3 बार बीमार पड़ने के बाद भी वे पीछे नहीं हटे, जो दृढ़ निश्चय की मिसाल पेश करता है।
- **सकारात्मक दृष्टिकोण बनाए रखना:** जो लोग केवल वीडियो बनाकर चले जाते हैं, उनके प्रति भी कोई दुर्भावना न रखते हुए इसे जागरूकता फैलाने का माध्यम मानना उच्च सोच को दर्शाता है।
- **सामूहिक भागीदारी को बढ़ावा देना:** एक-एक रुपये के छोटे सहयोग की अपील कर उन्होंने यह सिखाया कि समाजसेवा में बड़ा बजट नहीं, बल्कि आम लोगों का जुड़ाव सबसे महत्वपूर्ण होता है।

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