मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग पर अड़ी सीजेपी, 2 अक्टूबर से देशव्यापी आंदोलन की चेतावनी मतदाता सूची से 13 करोड़ नाम हटाने का आरोप लगाते हुए कॉकरोच जनता पार्टी ने मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग की है और मांग पूरी न होने पर 2 अक्टूबर से राष्ट्रव्यापी प्रदर्शन की घोषणा की है। विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर प्रक्रिया को लेकर निर्वाचन आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं। कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) की ओर से मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे के लिए दिया गया 48 घंटे का अल्टीमेटम शनिवार को समाप्त हो रहा है। पार्टी ने स्पष्ट कर दिया है कि यदि शनिवार तक ज्ञानेश कुमार अपने पद से इस्तीफा नहीं देते हैं, तो 2 अक्टूबर यानी गांधी जयंती के दिन से पूरे देश में व्यापक स्तर पर विरोध प्रदर्शन शुरू किया जाएगा। इस ऐलान के बाद राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली स्थित जंतर-मंतर पर कार्यकर्ताओं और युवाओं का जुटना शुरू हो गया है, जिसका वीडियो भी साझा करते हुए पार्टी ने आगामी आंदोलन की पूरी रूपरेखा तैयार होने का संकेत दिया है। मतदाता सूची से बड़े पैमाने पर नाम हटाने का गंभीर आरोप एसआईआर की पूरी कवायद पर गंभीर सवाल खड़े करते हुए सीजेपी के मुख्य संयोजक अभिजीत दीपके और सह-संयोजक सौरव दास व आशुतोष रांका ने चौंकाने वाले आंकड़े सामने रखे हैं। पार्टी पदाधिकारियों का दावा है कि इस पुनरीक्षण अभियान के दौरान 30 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की प्रारूप मतदाता सूचियों में से 13 करोड़ से भी अधिक वैध मतदाताओं के नाम मनमाने तरीके से हटा दिए गए। संगठन ने निर्वाचन आयोग से जवाब मांगा है कि हर एक नाम को हटाने के लिए किस कानूनी और प्रशासनिक प्रक्रिया का पालन किया गया। पार्टी का कहना है कि वोटर लिस्ट से किसी भी नागरिक का नाम काटा जाना पूरी तरह से पारदर्शी, कानूनी और समीक्षा योग्य प्रक्रिया के तहत होना चाहिए, ताकि लोकतांत्रिक व्यवस्था में किसी भी वैध नागरिक का मताधिकार न छीना जा सके। सीजेपी की मुख्य मांगें और न्यायिक जांच की अपील मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के तत्काल इस्तीफे के अलावा कॉकरोच जनता पार्टी ने कई महत्वपूर्ण मांगें निर्वाचन आयोग और सरकार के समक्ष रखी हैं। पार्टी की प्रमुख मांगों में एसआईआर प्रक्रिया के दौरान लिए गए सभी प्रशासनिक निर्णयों की निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच कराना शामिल है। इसके अलावा, संगठन ने मांग की है कि प्रारूप सूची से नाम हटाने की वर्तमान प्रक्रिया पर तुरंत रोक लगाई जाए और जमीनी सत्यापन पूरा होने तक जनवरी 2025 की पुरानी मतदाता सूची को ही बहाल रखा जाए। सीजेपी ने इस पूरी प्रक्रिया से संबंधित सभी डिजिटल और दस्तावेजी रिकॉर्ड उच्च न्यायालय या किसी स्वतंत्र न्यायिक समिति को सौंपने की भी अपील की है, जिससे किसी भी तरह की गड़बड़ी की निष्पक्ष पड़ताल संभव हो सके। नियुक्ति कानून 2023 को रद्द करने का प्रस्ताव संगठन ने केवल वर्तमान विवाद तक ही अपनी मांगें सीमित नहीं रखी हैं, बल्कि चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली में बुनियादी सुधारों की बात भी उठाई है। सीजेपी ने मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्तों के चयन और नियुक्ति से संबंधित 2023 के कानून को पूरी तरह निरस्त करने की मांग की है। पार्टी का तर्क है कि चुनाव आयोग जैसी संवैधानिक संस्था की निष्पक्षता बनाए रखने के लिए एक ऐसी पारदर्शी चयन प्रणाली स्थापित की जानी चाहिए, जिसमें नागरिक समाज की भी सक्रिय और व्यापक भागीदारी सुनिश्चित हो। अभिजीत दीपके ने X पर लिखा कि सत्ता के खिलाफ उठने वाली असहमतियों पर तुरंत कार्रवाई की जाती है, जबकि महिलाओं की सुरक्षा जैसे गंभीर मुद्दों पर पुलिस वैसी तत्परता नहीं दिखाती। विपक्ष और एनडीए के भीतर से भी उठती आवाजें चुनाव आयोग की कार्यशैली को लेकर केवल गैर-संसदीय संगठन ही मुखर नहीं हैं, बल्कि मुख्यधारा की राजनीति में भी इसको लेकर खींचतान तेज हो गई है। कांग्रेस पार्टी ने निर्वाचन आयोग के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए दिल्ली सहित देश के कई बड़े शहरों में चुनाव आयोग के दफ्तरों के बाहर जोरदार विरोध प्रदर्शन किया है। वहीं दूसरी ओर, केंद्र में सत्तारूढ़ राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के सहयोगी दल के नेता चिराग पासवान ने भी इस मामले में अपनी राय रखी है। उन्होंने कहा था कि अगर मुख्य चुनाव आयुक्त पर इतने गंभीर आरोप लगाए जा रहे हैं, तो उन्हें खुद आगे आकर जनता के सामने अपना रुख स्पष्ट करना चाहिए। राजनैतिक हलकों में बढ़ रही इस हलचल के बीच 2 अक्टूबर की तारीख बेहद अहम मानी जा रही है। इसका आप पर असर इस विवाद और संभावित आंदोलन का सीधा असर आम नागरिकों की मतदाता पहचान और चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता पर पड़ सकता है। • मतदाता सूची में नाम की जांच: यदि मतदाता सूची से नाम हटने के दावे सही पाए जाते हैं, तो आम नागरिकों को आगामी चुनावों से पहले अपनी प्रविष्टि की दोबारा पुष्टि करनी होगी। प्रत्येक नागरिक को चुनाव आयोग के पोर्टल या बीएलओ के माध्यम से अपना नाम सत्यापित कर लेना चाहिए। • चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता: यदि इस मामले में न्यायिक जांच या समीक्षा बैठाई जाती है, तो चुनाव आयोग की कार्यशैली और डेटा प्रबंधन में कड़े नियम लागू हो सकते हैं। इससे नागरिकों के मताधिकार की सुरक्षा को लेकर स्पष्ट दिशा-निर्देश तय होंगे। • राजधानी में आवाजाही पर प्रभाव: 2 अक्टूबर को जंतर-मंतर और केंद्रीय दिल्ली के प्रमुख इलाकों में प्रदर्शनकारियों के जुटने से यातायात बाधित हो सकता है। दिल्ली में रहने वाले या यात्रा करने वाले लोगों को उस दिन रूट डायवर्जन का सामना करना पड़ सकता है। • राजनीतिक और प्रशासनिक सतर्कता: आयोग द्वारा जनवरी 2025 की सूची बहाल करने की मांग पर यदि विचार होता है, तो नए मतदाताओं के पंजीकरण और पुराने नामों के मिलान की प्रक्रिया फिर से शुरू हो सकती है। इससे हाल ही में जोड़े गए या हटाए गए नामों की स्थिति बदल सकती है। ऐसा क्यों हुआ यह राजनीतिक और सामाजिक गतिरोध विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के दौरान 13 करोड़ से अधिक नामों को मतदाता सूची से हटाए जाने के आरोपों के बाद पैदा हुआ है। • एसआईआर प्रक्रिया में अनियमितता के आरोप: कॉकरोच जनता पार्टी के संयोजकों का दावा है कि 30 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में बिना पारदर्शी प्रक्रिया के करोड़ों वैध मतदाताओं के नाम प्रारूप सूची से बाहर कर दिए गए। इसी आधार पर संगठन ने मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग की है। • संस्थागत स्वायत्तता पर राजनीतिक बहस: चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति से जुड़े 2023 के कानून और आयोग की कार्यप्रणाली पर विपक्षी दलों व नागरिक संगठनों द्वारा लंबे समय से सवाल उठाए जा रहे थे। इस पृष्ठभूमि ने इस विवाद को और बड़ा बना दिया। • सत्तारूढ़ और विपक्षी दलों की प्रतिक्रिया: कांग्रेस द्वारा किए गए विरोध प्रदर्शनों और एनडीए सहयोगी चिराग पासवान द्वारा मुख्य चुनाव आयुक्त को सामने आकर जवाब देने के बयान ने इस मुद्दे पर सार्वजनिक दबाव बढ़ा दिया है। सवाल-जवाब 1. कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) ने मुख्य चुनाव आयुक्त से क्या मांग की है? सीजेपी ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और एसआईआर प्रक्रिया की स्वतंत्र जांच की मांग की है। 2. सीजेपी का अल्टीमेटम कब समाप्त हो रहा है? सीजेपी द्वारा दिया गया 48 घंटे का अल्टीमेटम शनिवार को समाप्त हो रहा है। 3. मांग पूरी न होने पर सीजेपी ने क्या योजना बनाई है? पार्टी ने घोषणा की है कि यदि इस्तीफा नहीं दिया गया तो 2 अक्टूबर से देशव्यापी आंदोलन शुरू किया जाएगा। 4. एसआईआर प्रक्रिया को लेकर सीजेपी ने क्या आरोप लगाए हैं? पार्टी का आरोप है कि 30 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में प्रारूप मतदाता सूची से 13 करोड़ से अधिक वैध नाम हटा दिए गए हैं। 5. चिराग पासवान ने इस मामले पर क्या प्रतिक्रिया दी थी? चिराग पासवान ने कहा था कि यदि मुख्य चुनाव आयुक्त पर आरोप लग रहे हैं तो उन्हें सामने आकर अपना पक्ष रखना चाहिए। 6. सीजेपी ने चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति को लेकर क्या मांग रखी है? संगठन ने चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति से संबंधित 2023 के कानून को रद्द कर पारदर्शी व्यवस्था बनाने की मांग की है। https://trendkia.com/national/mukhya-chunava-ayukta-gyanesh-kumar-ke-istiphe-ki-manga-para-ari-cjp-2-aktubara-se-deshavyapi-andolana-ki-chetavani-38836 TrendKia — Har trend, sabse pehle.