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  "title": "मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे पर अड़ा सीजेपी, 48 घंटे की मोहलत खत्म होते ही आंदोलन की तैयारी",
  "summary": "मतदाता सूचियों से करोड़ों नाम हटाने और एकतरफा कार्यप्रणाली के आरोपों को लेकर कॉकरोच जनता पार्टी ने मुख्य चुनाव आयुक्त से फौरन पद छोड़ने की मांग की है। संगठन ने तय समयसीमा में कदम न उठाने पर जंतर-मंतर सहित देश भर में व्यापक प्रदर्शन की चेतावनी दी है।",
  "content": "देश की चुनावी प्रणाली और निर्वाचन आयोग की कार्यशैली को लेकर एक बार फिर तीखा विवाद खड़ा हो गया है। हालिया खुलासों में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर अपने साथी दोनों चुनाव आयुक्तों की आपत्तियों व विचारों को नजरअंदाज कर मनमाने फैसले लेने के गंभीर आरोप लगे हैं। इस खुलासे के बाद विपक्षी खेमे में भारी नाराजगी देखी जा रही है और आयोग की निष्पक्षता पर सवाल उठने लगे हैं। इसी बीच, पहले नीट पेपर लीक आंदोलन से चर्चा में आई कॉकरोच जनता पार्टी ने सीधे मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए उनके तत्काल इस्तीफे की मांग कर दी है।\n\nसीजेपी का अल्टीमेटम और जंतर-मंतर पर दोबारा धरने की तैयारी\nकॉकरोच जनता पार्टी के संयोजक अभिजीत दिपके ने इस पूरे घटनाक्रम पर सख्त रुख अपनाते हुए ज्ञानेश कुमार को पद से हटने के लिए 48 घंटे की समयसीमा दी है। संगठन का कहना है कि यदि निर्धारित अवधि में मुख्य निर्वाचन आयुक्त ने अपने पद से त्यागपत्र नहीं दिया, तो देश के अलग-अलग हिस्सों में बड़े पैमाने पर आंदोलन छेड़ा जाएगा। इसके बाद दिल्ली स्थित जंतर-मंतर पर दोबारा बड़ा जमावड़ा कर विरोध दर्ज कराया जाएगा। संगठन ने यह भी स्पष्ट किया है कि वे आयोग की मनमानी के खिलाफ चुप बैठने वाले नहीं हैं।\n\n \n\n'इलेक्शन कमीशन ठीक करो' अभियान और तीन प्रमुख शर्तें\nइस पूरे मामले को लेकर संगठन ने सह-संयोजक सौरव दास और प्रवक्ता आशुतोष रांका की मौजूदगी में 'इलेक्शन कमीशन ठीक करो' नाम से एक विस्तृत मुहिम शुरू करने का ऐलान किया है। सीजेपी का आरोप है कि मौजूदा व्यवस्था में आम नागरिकों के मताधिकार पर कुठाराघात किया जा रहा है। अपने आधिकारिक सोशल मीडिया बयान के जरिए संगठन ने प्रशासन के सामने तीन बेहद स्पष्ट मांगें रखी हैं।\n\nसंगठन की पहली मांग यह है कि ज्ञानेश कुमार तुरंत अपने पद से इस्तीफा दें और उनके खिलाफ विधिवत आपराधिक कार्यवाही शुरू की जाए। दूसरी शर्त के तौर पर संगठन ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण अर्थात एसआईआर की मौजूदा प्रक्रिया पर तत्काल रोक लगाने तथा जनवरी 2025 की मतदाता सूची को फिर से बहाल करने को कहा है। इसके अलावा, वर्ष 2023 में पारित मुख्य निर्वाचन आयुक्त और अन्य निर्वाचन आयुक्त (नियुक्ति, सेवा शर्तें एवं कार्यकाल) कानून को पूरी तरह निरस्त कर चुनाव आयोग की स्वायत्तता में बुनियादी सुधार किए जाएं।\n\nमतदाता सूची से 13 करोड़ से अधिक नाम हटाने का गंभीर दावा\nसंगठन ने विभिन्न राज्यों में चलाए गए विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान पर गंभीर आपत्ति दर्ज कराई है। सीजेपी का दावा है कि इस कवायद की आड़ में 30 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों की मतदाता सूचियों से 13 करोड़ से अधिक मतदाताओं के नाम काट दिए गए हैं। संगठन का स्पष्ट कहना है कि किसी भी नागरिक का नाम हटाने का फैसला केवल आयोग के स्तर पर नहीं होना चाहिए, बल्कि नाम हटाने की कानूनी वैधता साबित करने का पूरा दायित्व निर्वाचन आयोग पर होना चाहिए।\n\nअभिजीत दिपके ने राजनीतिक दलों से भी अपनी रणनीति पर पुनर्विचार करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि अगर विपक्षी पार्टियों को वास्तव में लगता है कि चुनाव प्रक्रिया में गड़बड़ी और धांधली हो रही है, तो उन्हें ऐसे चुनावों में हिस्सा लेने से परहेज करना चाहिए। उल्लेखनीय है कि इससे पहले लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने भी वर्ष 2024 के आम चुनाव और विभिन्न विधानसभा चुनावों में धांधली किए जाने का गंभीर आरोप लगाया था। अब नए घटनाक्रमों ने चुनाव आयोग पर जवाबदेही का भारी दबाव बना दिया है।\n\nइसका आप पर असर\nइस विवाद का सीधा असर देश की मतदाता सूचियों और चुनावी प्रक्रिया पर पड़ सकता है।\n\n• भारत में: यदि आयोग एसआईआर प्रक्रिया पर रोक लगाता है, तो जनवरी 2025 की पुरानी मतदाता सूची दोबारा लागू हो सकती है। आम नागरिकों को चाहिए कि वे वोटर पोर्टल पर अपने नाम और विवरण की समय-समय पर जांच करते रहें ताकि मताधिकार सुरक्षित रहे।\n• दिल्ली में: जंतर-मंतर पर प्रस्तावित प्रदर्शन से मध्य दिल्ली के लुटियंस जोन में यातायात व्यवस्था प्रभावित हो सकती है। ऐसे में नई दिल्ली इलाके में सफर करने वाले दैनिक यात्रियों को अतिरिक्त समय लेकर चलना होगा।\n• मतदाताओं के लिए: 30 राज्यों में 13 करोड़ नाम हटाए जाने के दावों के बीच हर नागरिक के लिए अपने मत पहचान पत्र की सक्रियता जांचना जरूरी हो गया है। अगर किसी का नाम अनुचित रूप से कट गया है, तो उसे तत्काल दावा आपत्ति दर्ज करानी होगी।\n• राजनीतिक असर: यदि विपक्षी दल सीजेपी की सलाह मानकर चुनावों से दूरी बनाते हैं, तो चुनावी प्रतिस्पर्धा के समीकरण बदल सकते हैं। इससे आगामी चुनावों में राजनीतिक दलों की भागीदारी और जनसमर्थन पर गहरा असर पड़ेगा।\n\nऐसा क्यों हुआ\nयह विवाद मुख्य चुनाव आयुक्त द्वारा साथी आयुक्तों की राय नजरअंदाज करने की खबरों और मतदाता सूचियों से व्यापक स्तर पर नाम हटाए जाने के आरोपों के बाद भड़का है।\n\n• आयुक्तों की असहमति को दरकिनार करना: मीडिया रिपोर्टों में दावा किया गया कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने दो अन्य चुनाव आयुक्तों की औपचारिक आपत्तियों और सुझावों को नजरअंदाज करते हुए एकतरफा निर्णय लिए। इसी आंतरिक खींचतान के बाहर आने से आयोग की निर्णय प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े हुए।\n• एसआईआर प्रक्रिया में बड़े पैमाने पर नाम कटना: विशेष गहन पुनरीक्षण के तहत 30 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में 13 करोड़ से अधिक मतदाताओं के नाम हटाए जाने का दावा सामने आया है। इस भारी कटौती ने नागरिक संगठनों को चुनावी प्रणाली में गड़बड़ी की आशंका जताने के लिए प्रेरित किया।\n• नियुक्ति संबंधी कानून का विरोध: वर्ष 2023 में बने चुनाव आयुक्त नियुक्ति कानून को लेकर पहले से ही संस्थागत स्वतंत्रता पर बहस चल रही थी। आलोचकों का मानना है कि इस कानून ने आयोग के प्रशासनिक संतुलन को कमजोर किया, जिसे वापस लेने की मांग अब मुखर हो गई है।\n• विपक्ष के पुराने धांधली के आरोप: लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी द्वारा 2024 के लोकसभा और विधानसभा चुनावों में गड़बड़ी के पहले लगाए गए आरोपों ने इस नए विवाद को और अधिक राजनीतिक हवा दी है।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) ने मुख्य चुनाव आयुक्त को क्या अल्टीमेटम दिया है?\nसीजेपी ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार से 48 घंटे के भीतर पद से इस्तीफा देने की मांग की है और ऐसा न करने पर देशव्यापी प्रदर्शन की चेतावनी दी है।\n\n2. मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर क्या आरोप लगे हैं?\nउन पर दो चुनाव आयुक्तों की आपत्तियों और राय को दरकिनार कर मनमाने ढंग से फैसले लेने के गंभीर आरोप लगे हैं।\n\n3. सीजेपी की तीन प्रमुख मांगें क्या हैं?\nज्ञानेश कुमार का इस्तीफा व आपराधिक जांच, एसआईआर प्रक्रिया रोककर जनवरी 2025 की मतदाता सूची बहाल करना, और 2023 के चुनाव आयुक्त कानून को रद्द करना।\n\n4. मतदाता सूची से कितने नाम हटाए जाने का दावा किया गया है?\nसीजेपी का दावा है कि विशेष गहन पुनरीक्षण के दौरान 30 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों से 13 करोड़ से अधिक नाम हटाए गए हैं।\n\n5. इस प्रेस वार्ता में सीजेपी के कौन से प्रमुख नेता शामिल थे?\nइस दौरान संगठन के संयोजक अभिजीत दिपके, सह-संयोजक सौरव दास और प्रवक्ता आशुतोष रांका मौजूद थे।",
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  "category": "भारत",
  "publishedAt": "2026-09-25",
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