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  "title": "मुख्य चुनाव आयुक्त के 14 फैसलों को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती, रद्द करने की मांग के साथ तीसरी याचिका दाखिल",
  "summary": "सुप्रीम कोर्ट में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के पिछले 10 महीनों में दिए गए 14 आदेशों को रद्द करने की मांग करते हुए तीसरी याचिका दाखिल की गई है। इस बीच विपक्षी दलों ने भी उनके इस्तीफे की मांग तेज कर दी है।",
  "content": "मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के कामकाज और हालिया फैसलों को लेकर कानूनी और राजनीतिक विवाद गहराता जा रहा है। देश की शीर्ष अदालत में उनके खिलाफ एक और नई याचिका दायर की गई है, जो अब तक की तीसरी अर्जी है। इस नई याचिका में पिछले 10 महीनों की अवधि के दौरान मुख्य चुनाव आयुक्त द्वारा जारी किए गए 14 अलग-अलग आदेशों की वैधता पर सवाल खड़े किए गए हैं। याचिकाकर्ता ने इन सभी 14 आदेशों को पूरी तरह निरस्त करने का आग्रह किया है। इसके साथ ही अदालत से यह भी अपील की गई है कि वह स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनावी प्रक्रिया संचालित करने के लिए चुनाव आयोग की शक्तियों के कानूनी दायरे और सीमाओं पर स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी करे।\n\n \n\nसामूहिक निर्णय प्रक्रिया के उल्लंघन का गंभीर आरोप\n\nसुप्रीम कोर्ट में यह नई याचिका प्रिया मिश्रा की ओर से दाखिल की गई है। अर्जी में आरोप लगाया गया है कि चुनाव आयोग में सामूहिक निर्णय लेने की अनिवार्य प्रक्रिया की अनदेखी की गई है। याचिकाकर्ता का कहना है कि संस्थागत नियमों और स्थापित कानूनी प्रक्रियाओं का उल्लंघन करते हुए जितने भी फैसले, आदेश, अधिसूचनाएं और प्रशासनिक निर्देश जारी किए गए हैं, उन सभी को रद्द किया जाना चाहिए। इसके अलावा याचिका में मांग की गई है कि निर्वाचन आयोग को संविधान के अनुच्छेद 324 और आयोग के कामकाज से जुड़े वैधानिक नियमों के तहत ही पूरी तरह सख्त रवैये के साथ नए फैसले लेने का आदेश दिया जाए। उल्लेखनीय है कि इस याचिका से पहले वकील शैलेंद्र मणि त्रिपाठी और सामाजिक कार्यकर्ता राकेश कुमार सिंह की तरफ से भी शीर्ष अदालत में याचिकाएं दायर की जा चुकी हैं।\n\n \n\nविपक्षी गठबंधन की बैठक और 40 दिनों की रणनीति\n\nकानूनी मोर्चे के समानांतर राजनीतिक पटल पर भी मुख्य चुनाव आयुक्त को लेकर माहौल बेहद गर्म है। नई दिल्ली में बीते गुरुवार को विपक्षी गठबंधन की एक अहम बैठक आयोजित की गई, जिसमें एसआईआर और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का मुद्दा सबसे प्रमुख रहा। लगभग 3 घंटे तक चली इस उच्चस्तरीय बैठक में राहुल, सोनिया गांधी, ममता बनर्जी, उमर अब्दुल्ला और सुप्रिया सुले सहित 20 राजनीतिक दलों के नेता उपस्थित रहे। बैठक में विपक्षी मोर्चे को मजबूत करने और आगामी 40 दिनों के लिए एक विस्तृत राजनीतिक रूपरेखा तैयार करने पर विचार-विमर्श हुआ। विपक्षी नेताओं ने निर्वाचन आयोग के खिलाफ व्यापक आंदोलन छेड़ने का भी फैसला किया है। बैठक के दौरान सभी घटक दलों के प्रतिनिधियों ने एक स्वर में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के तत्काल इस्तीफे की मांग उठाई। हालांकि, इस महत्वपूर्ण राजनीतिक बैठक में अखिलेश यादव और अरविंद केजरीवाल मौजूद नहीं रहे।\n\n \n\nबैठक से गैरहाजिरी पर सत्तापक्ष का तीखा हमला\n\nविपक्षी गठबंधन के इस मंथन के बाद सत्तापक्ष की ओर से भी जोरदार राजनीतिक प्रतिक्रिया सामने आई। भारतीय जनता पार्टी और उसके सहयोगी दलों ने बैठक को लेकर कड़े सवाल उठाए। उत्तर प्रदेश सरकार में सहयोगी मंत्री ओपी राजभर ने सीधे राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए कहा कि उन्हें अपने साथी अखिलेश यादव से पूछना चाहिए कि आखिर ऐसा कौन सा जरूरी काम था जिसके कारण वह इस बैठक में शामिल नहीं हो सके। उन्होंने सवाल उठाया कि जब राज्यसभा का नामांकन दाखिल करने की अंतिम तारीख 6 अक्टूबर तक है, तो एक दिन पहले ही नामांकन करने की इतनी हड़बड़ी क्यों दिखाई गई। दूसरी तरफ केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कांग्रेस नेतृत्व पर तंज कसते हुए कहा कि राहुल गांधी को चाहे जितनी बार भी नए सिरे से पेश करने की कोशिश की जाए, पूरा विपक्षी गठबंधन ही उन्हें अपना निर्विवाद नेता स्वीकार करने को तैयार नहीं दिख रहा है।\n\nइसका आप पर असर\nसुप्रीम कोर्ट में मुख्य चुनाव आयुक्त के फैसलों की न्यायिक समीक्षा से देश की चुनावी व्यवस्था और प्रशासनिक नियमों पर सीधा प्रभाव पड़ेगा।\n\n• भारत में: यदि शीर्ष अदालत चुनाव आयोग के सामूहिक निर्णय लेने की प्रक्रिया पर कड़े दिशानिर्देश तय करती है, तो भविष्य में आयोग के हर नीतिगत आदेश की संवैधानिक जवाबदेही तय होगी। इससे आम नागरिकों का चुनावी निष्पक्षता और लोकतांत्रिक संस्थाओं की पारदर्शिता पर भरोसा मजबूत होगा।\n• चुनाव नियमों पर: 10 महीनों के भीतर जारी 14 आदेशों की कानूनी वैधता पर फैसला आने से कई प्रशासनिक और चुनावी प्रक्रियाओं के लागू होने पर असर पड़ सकता है। यदि ये आदेश रद्द होते हैं तो आयोग को अनुच्छेद 324 के तहत अपनी पूरी प्रक्रिया नए सिरे से संचालित करनी होगी।\n• राजनीतिक सरगर्मी: विपक्षी दलों द्वारा 40 दिनों के आंदोलन के फैसले से राष्ट्रीय स्तर पर राजनीतिक टकराव और विरोध प्रदर्शन देखने को मिल सकते हैं। इससे आने वाले दिनों में चुनाव सुधार और आयोग की भूमिका को लेकर सार्वजनिक बहस और तेज होगी।\n• संसदीय और कानूनी स्थिति: याचिका में उठाए गए सवालों से स्पष्ट होगा कि किसी संवैधानिक पद पर बैठे अधिकारी के व्यक्तिगत और सामूहिक प्रशासनिक अधिकारों का सटीक दायरा क्या है। यह आने वाले समय में अन्य संवैधानिक निकायों के लिए भी एक नजीर का काम करेगा।\n\nऐसा क्यों हुआ\nमुख्य चुनाव आयुक्त के फैसलों के खिलाफ लगातार अदालत का रुख करने और विपक्षी दलों द्वारा इस्तीफे की मांग के पीछे संस्थागत प्रक्रिया और कानूनी अधिकारों को लेकर उठे सवाल हैं।\n\n• सीधा कारण: याचिकाकर्ता प्रिया मिश्रा ने आरोप लगाया है कि मुख्य चुनाव आयुक्त ने पिछले 10 महीनों में 14 महत्वपूर्ण आदेश जारी करते समय सामूहिक निर्णय लेने की स्थापित और अनिवार्य प्रक्रिया की अनदेखी की। इसके कारण इन फैसलों की संवैधानिक वैधता पर सवाल खड़े हो गए हैं।\n• संविधान के अनुच्छेद 324 का हवाला: याचिका में रेखांकित किया गया है कि निर्वाचन आयोग को अपने सभी निर्णय संविधान के अनुच्छेद 324 और वैधानिक नियमों के अनुरूप ही लेने चाहिए। सामूहिक सहमति के बिना फैसले लिए जाने को संस्था के तय नियमों का उल्लंघन माना गया है।\n• लगातार कानूनी आपत्तियां: यह मामला पहली बार अदालत नहीं पहुंचा है, बल्कि इससे पहले वकील शैलेंद्र मणि त्रिपाठी और सामाजिक कार्यकर्ता राकेश कुमार सिंह भी याचिकाएं लगा चुके हैं। याचिकाओं के इस सिलसिले से यह स्पष्ट है कि हालिया प्रशासनिक फैसलों को लेकर कानूनी हलकों में असंतोष बढ़ रहा था।\n• राजनीतिक टकराव और एसआईआर मुद्दा: विपक्षी दलों की 3 घंटे चली बैठक में एसआईआर को लेकर उपजे विवाद और आयोग के रवैये को लेकर असंतोष व्यक्त किया गया। सभी प्रमुख नेताओं ने मिलकर मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग उठाई और आंदोलन का खाका तैयार किया।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. सुप्रीम कोर्ट में मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ दायर नई याचिका में क्या मांग की गई है?\nयाचिका में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार द्वारा पिछले 10 महीनों में जारी किए गए 14 आदेशों को रद्द करने और स्वतंत्र एवं निष्पक्ष चुनाव के लिए आयोग की शक्तियों की सीमाएं तय करने की मांग की गई है।\n\n2. यह याचिका किसने दाखिल की है?\nयह तीसरी याचिका प्रिया मिश्रा की ओर से दाखिल की गई है। इससे पहले शैलेंद्र मणि त्रिपाठी और राकेश कुमार सिंह ने भी याचिकाएं दायर की थीं।\n\n3. याचिका में मुख्य चुनाव आयुक्त पर मुख्य रूप से क्या आरोप लगाया गया है?\nयाचिका में आरोप लगाया गया है कि अनिवार्य सामूहिक निर्णय प्रक्रिया का उल्लंघन करके मनमाने तरीके से फैसले और कार्यकारी निर्देश जारी किए गए।\n\n4. नई दिल्ली में हुई विपक्षी गठबंधन की बैठक में क्या फैसला लिया गया?\n20 राजनीतिक दलों की 3 घंटे तक चली इस बैठक में मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग की गई और चुनाव आयोग के खिलाफ अगले 40 दिनों का राजनीतिक रोडमैप व आंदोलन तय किया गया।\n\n5. विपक्षी बैठक में कौन से प्रमुख नेता शामिल नहीं हुए?\nइस महत्वपूर्ण बैठक में अखिलेश यादव और अरविंद केजरीवाल शामिल नहीं हुए, जिस पर सत्तापक्ष ने सवाल उठाए हैं।\n\n6. ओपी राजभर ने अखिलेश यादव की गैरमौजूदगी पर क्या सवाल उठाया?\nओपी राजभर ने सवाल किया कि जब राज्यसभा नामांकन की अंतिम तारीख 6 अक्टूबर है, तो अखिलेश यादव बैठक छोड़कर नामांकन करने में इतनी जल्दी क्यों दिखा रहे थे।",
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  "category": "भारत",
  "publishedAt": "2026-10-01",
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