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  "type": "article",
  "title": "मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग पर विपक्ष का दिल्ली में कड़ा रुख, राष्ट्रपति से मिलकर रखीं शिकायतें",
  "summary": "विपक्षी गठबंधन ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को हटाने और मतपत्र से मतदान कराने के लिए राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु को ज्ञापन सौंपा, जबकि मेट्रो पाबंदियों को लेकर केंद्र पर तीखे तंज कसे।",
  "content": "देश की राजधानी में चुनावी निष्पक्षता और मतदान प्रणाली को लेकर सत्ता पक्ष तथा विपक्षी दलों के बीच राजनीतिक टकराव अत्यधिक तेज हो गया है। शुक्रवार के दिन विपक्षी दलों के संयुक्त मोर्चे ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को उनके पद से हटाने की पुरजोर मांग करते हुए एक बड़ा विरोध कार्यक्रम आयोजित किया। संसद परिसर से लेकर विजय चौक तक विरोधी दलों के तमाम प्रमुख नेताओं ने जोरदार तरीके से अपनी आवाज बुलंद की और सीधे तौर पर आरोप लगाया कि चुनावी व्यवस्था में भारी अनियमितताएं हो रही हैं। इस सिलसिले में विपक्षी गठबंधन का एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल राष्ट्रपति भवन पहुंचा, जहां उन्होंने देश की संवैधानिक मुखिया राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु से मुलाकात करके अपना औपचारिक मांग पत्र सौंपा।\n\nसंसद भवन परिसर में मीडिया कर्मियों से चर्चा करते हुए कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने सत्तारूढ़ दल के रवैये की कड़ी आलोचना की। उन्होंने मशहूर हिंदी सिनेमा शोले के खलनायक गब्बर सिंह के बहुचर्चित संवाद का उदाहरण देते हुए कटाक्ष किया कि जो व्यक्ति भयभीत होता है, वह आज अथवा कल जरूर समाप्त होता है। खरगे का स्पष्ट कहना था कि शासन व्यवस्था विपक्ष के बढ़ते जनआंदोलन को देखकर घबरा चुकी है और इसी घबराहट की वजह से मुख्य चुनाव आयुक्त को उनके दायित्व से अलग करने के लिए कतई सहमत नहीं हो रही है।\n\nचुनाव आयोग के भीतर आंतरिक मतभेद का बड़ा दावा\nकांग्रेस अध्यक्ष ने निर्वाचन आयोग के आंतरिक कामकाज पर भी कई गंभीर सवाल खड़े किए। मल्लिकार्जुन खरगे ने दावा किया कि आयोग के दोनों चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी स्वयं मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के कामकाज और फैसलों से पूरी तरह सहमत नहीं थे। उनका कहना था कि दोनों चुनाव आयुक्तों ने ज्ञानेश कुमार के कई निर्णयों को लेकर बार-बार औपचारिक आपत्तियां दर्ज कराई थीं, मगर मुख्य चुनाव आयुक्त ने उन आपत्तियों को स्वीकार करने से साफ मना कर दिया। खरगे ने शासन पर आरोप लगाते हुए कहा कि दो अन्य आयुक्तों की तरफ से उठाए गए सवालों और ऐतराज के बावजूद केंद्र सरकार मुख्य चुनाव आयुक्त पर कोई कार्रवाई नहीं कर रही है और उन्हें हटाने से लगातार बच रही है।\n\nराष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु को सौंपा गया ज्ञापन, रखे गए साक्ष्य के बिंदु\nविपक्षी गठबंधन के तमाम वरिष्ठ प्रतिनिधि मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे के एकसूत्रीय एजेंडे के साथ राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु के समक्ष उपस्थित हुए। नेताओं ने राष्ट्रपति को एक विस्तृत ज्ञापन प्रस्तुत किया जिसमें समूची निर्वाचन प्रणाली पर अपनी गंभीर चिंताएं दर्ज कराई गईं। बैठक समाप्त होने के बाद मल्लिकार्जुन खरगे ने जानकारी दी कि उनका गठबंधन पिछले चार दिनों से लगातार मतों की कथित चोरी के विषय पर आंदोलन चला रहा है। इसी संबंध में राष्ट्रपति को वस्तुस्थिति से अवगत कराने और निष्पक्ष जांच व ठोस कदम उठाने का अनुरोध किया गया।\n\nकांग्रेस अध्यक्ष ने यह भी स्पष्ट किया कि प्रतिनिधिमंडल ने वर्तमान इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन यानी ईवीएम के स्थान पर पारंपरिक बैलेट पेपर के जरिए मतदान कराने की औपचारिक मांग भी राष्ट्रपति के समक्ष रखी है। बातचीत के दौरान राष्ट्रपति ने विपक्ष द्वारा लगाए गए गंभीर आरोपों के संबंध में ठोस प्रमाण प्रस्तुत करने को कहा। खरगे ने बताया कि उनका दल सभी आवश्यक प्रमाणों को संकलित कर रहा है और बहुत जल्द ही उन सभी दस्तावेजों को राष्ट्रपति भवन के सुपुर्द कर दिया जाएगा।\n\nराहुल गांधी और ममता बनर्जी ने साझा किया राष्ट्रपति भवन का अनुभव\nलोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने भी राष्ट्रपति के साथ हुई इस उच्चस्तरीय चर्चा के संदर्भ में अपनी बात रखी। उन्होंने स्पष्ट किया कि राष्ट्रपति ने विपक्षी प्रतिनिधिमंडल की बातों को सिरे से दरकिनार नहीं किया, बल्कि पूरे मामले को ध्यानपूर्वक सुना और उठाए गए बिंदुओं के समर्थन में आवश्यक दस्तावेज तथा सबूत पेश करने के लिए कहा। राहुल गांधी ने वर्ष 2024 के आम चुनाव का विशेष उल्लेख करते हुए दावा किया कि उस दौरान भी बड़े पैमाने पर मतों की हेराफेरी की गई थी। उन्होंने भरोसा जताया कि विपक्ष अपने तमाम साक्ष्य राष्ट्रपति को प्रस्तुत करेगा और राष्ट्रपति ने भी इस पूरे विषय पर विचार करने तथा आवश्यक कदमों की संभावना तलाशने की बात कही है।\n\nपश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भी बैठक के बाद मीडिया से बातचीत में सकारात्मक संकेत दिए। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति का रुख बहुत संवेदनशील और सकारात्मक दिखाई दिया, जिन्होंने ज्ञापन स्वीकार करने के उपरांत पूरे घटनाक्रम के विवरण और सबूतों की समीक्षा करने का भरोसा दिलाया। ममता बनर्जी के अनुसार, संविधान के सर्वोच्च संरक्षक के रूप में लोकतांत्रिक मर्यादाओं की रक्षा करना राष्ट्रपति की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि इंडिया गठबंधन इस पूरे मुद्दे पर पूरी मजबूती और एकजुटता के साथ खड़ा है।\n\nदिल्ली में मेट्रो स्टेशनों पर लगी रोक पर कांग्रेस का प्रहार\nविरोध प्रदर्शन के दौरान दिल्ली में सार्वजनिक परिवहन और खासकर मेट्रो परिचालन पर लागू किए गए प्रतिबंधों को लेकर भी विपक्षी नेताओं ने केंद्र पर सीधा निशाना साधा। नेताओं का आरोप था कि जनविरोध को कुचलने के लिए सामान्य नागरिकों की आवाजाही को जबरन बाधित किया जा रहा है। कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने कई मेट्रो स्टेशनों को बंद किए जाने पर कड़ा ऐतराज जताते हुए इसे सरकार का डर और कायरता करार दिया।\n\nउधर कांग्रेस सांसद रंजीत रंजन ने भी प्रशासनिक पाबंदियों पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की। उन्होंने कहा कि शहर भर के 57 मेट्रो स्टेशनों को बंद कर दिया गया है, जिसके कारण अपने काम पर निकलने वाले आम कामकाजी लोगों को भारी असुविधा का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने इसे पूरी तरह से विधि-व्यवस्था का संकट और प्रशासनिक विफलता करार दिया।\n\nविजय चौक पर दिग्गज विपक्षी मुख्यमंत्रियों और नेताओं का महाजमावड़ा\nराष्ट्रपति भवन जाने से पूर्व विपक्षी गठबंधन के तमाम बड़े नेता दिल्ली के विजय चौक पर एकजुट हुए थे। वहां एकत्रित नेताओं ने मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और निष्पक्ष चुनाव की मांग दोहराई। इस जोरदार विरोध प्रदर्शन में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, राहुल गांधी तथा प्रियंका गांधी वाड्रा प्रमुखता से शामिल रहे।\n\nइसके अलावा गैर-भाजपा शासित राज्यों के मुख्यमंत्री भी अपने पूरे दल-बल के साथ इस मार्च का हिस्सा बने। इनमें पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला और हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू प्रमुख थे। साथ ही कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार, अभिषेक बनर्जी, भूपेश बघेल और कुमारी सैलजा सहित कई अन्य वरिष्ठ सांसदों और राजनेताओं ने भी विजय चौक पर अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई।\n\nइसका आप पर असर\nइस बड़े राजनीतिक गतिरोध और विरोध प्रदर्शन का सीधा असर राष्ट्रीय राजनीति और दिल्ली के दैनिक जनजीवन दोनों पर पड़ा है।\n\n• राष्ट्रीय स्तर पर: निर्वाचन प्रक्रिया की विश्वसनीयता और मतदान मशीनों की जगह बैलेट पेपर की मांग को लेकर राजनीतिक विमर्श फिर से तेज हो गया है। विपक्षी दल इसे लेकर कानूनी और संवैधानिक स्तर पर अपनी लड़ाई को और आगे बढ़ाने की तैयारी में हैं।\n• दिल्ली में: विरोध प्रदर्शन के चलते दिल्ली मेट्रो के दर्जनों स्टेशनों पर आवाजाही रोके जाने से हजारों दैनिक यात्रियों को भारी असुविधा झेलनी पड़ी। मध्य और लुटियंस दिल्ली के प्रमुख मार्गों पर सुरक्षा व्यवस्था कड़ी रहने से आम नागरिकों के सफर का समय काफी बढ़ गया।\n• मतदाताओं के लिए: चुनावी धांधली के दावों और ईवीएम पर उठे सवालों के बीच मतदाता सूचियों और मतदान पारदर्शिता को लेकर जागरूकता बढ़ सकती है। नागरिक यह नजर बनाए रख सकते हैं कि चुनाव आयोग और राष्ट्रपति इस मांग पत्र पर आगे क्या कदम उठाते हैं।\n• राजनीतिक समीकरणों पर: गैर-भाजपा शासित राज्यों के मुख्यमंत्रियों की एक मंच पर उपस्थिति विपक्षी गठबंधन की एकजुटता को दर्शाती है। आने वाले दिनों में संसद और सड़क दोनों जगह इस मुद्दे पर टकराव और गहराने के संकेत हैं।\n\nऐसा क्यों हुआ\nयह राजनीतिक टकराव मुख्य चुनाव आयुक्त की कार्यप्रणाली और मतदान प्रक्रिया में कथित धांधली को लेकर विपक्ष के लंबे असंतोष का परिणाम है। विपक्षी दलों का आरोप है कि आयोग के भीतर आंतरिक मतभेदों की अनदेखी की जा रही है और चुनावी शुचिता से समझौता हुआ है।\n\n• मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ असंतोष: विपक्षी नेताओं का आरोप है कि ज्ञानेश कुमार के निर्णयों पर साथी आयुक्तों ने ऐतराज जताया था, लेकिन उन आपत्तियों को दरकिनार कर दिया गया। इसी कारण विपक्ष सीधे उनके इस्तीफे की मांग कर रहा है।\n• मतगणना और प्रक्रिया पर सवाल: विपक्षी गठबंधन पिछले चार दिनों से मतों की हेराफेरी के आरोपों पर आंदोलन कर रहा है और 2024 के लोकसभा चुनाव को लेकर भी संशय जता रहा है। इसी पृष्ठभूमि में इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन के बजाय बैलेट पेपर से मतदान कराने की मांग उठाई गई।\n• राष्ट्रपति से हस्तक्षेप की उम्मीद: संवैधानिक संस्थाओं से सुनवाई न होने का दावा करते हुए प्रतिनिधिमंडल ने संविधान की संरक्षक राष्ट्रपति से सीधे हस्तक्षेप की गुहार लगाई। राष्ट्रपति ने आरोपों पर विचार करने से पहले औपचारिक प्रमाण पेश करने का निर्देश दिया है।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. विपक्षी दलों ने दिल्ली में किसके इस्तीफे की मांग को लेकर प्रदर्शन किया?\nविपक्षी गठबंधन ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर विरोध प्रदर्शन किया।\n\n2. कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने किस फिल्म के डायलॉग का हवाला दिया?\nखरगे ने फिल्म शोले के गब्बर सिंह वाले डायलॉग 'जो डर गया, वो मर गया' का हवाला देते हुए सरकार पर निशाना साधा।\n\n3. खरगे ने अन्य दो चुनाव आयुक्तों के बारे में क्या दावा किया?\nखरगे ने दावा किया कि दोनों चुनाव आयुक्तों सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने ज्ञानेश कुमार के फैसलों पर आपत्तियां जताई थीं, जिन्हें स्वीकार नहीं किया गया।\n\n4. विपक्षी प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात के बाद राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने क्या कहा?\nराष्ट्रपति ने विपक्ष की शिकायतें सुनने के बाद वोट चोरी और गड़बड़ी के आरोपों के समर्थन में ठोस सबूत पेश करने को कहा।\n\n5. विपक्ष ने ईवीएम के संबंध में राष्ट्रपति के सामने क्या मांग रखी?\nविपक्ष ने इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन की जगह दोबारा मतपत्र यानी बैलेट पेपर से चुनाव कराने की मांग रखी।\n\n6. दिल्ली मेट्रो स्टेशनों के बंद होने पर प्रियंका गांधी ने क्या टिप्पणी की?\nप्रियंका गांधी वाड्रा ने स्टेशनों पर लगी पाबंदियों को सरकार का डर, कायरता और भय करार दिया।\n\n7. रंजीत रंजन के अनुसार कितने मेट्रो स्टेशन बंद किए गए थे?\nकांग्रेस सांसद रंजीत रंजन ने दावा किया कि प्रदर्शन के दौरान 57 मेट्रो स्टेशन बंद किए जा रहे थे।\n\n8. विजय चौक के प्रदर्शन में कौन-कौन से मुख्यमंत्री शामिल हुए?\nप्रदर्शन में पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला और हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू शामिल हुए।",
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  "category": "भारत",
  "publishedAt": "2026-10-09",
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