# मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ विपक्ष लाया जन महाभियोग प्रस्ताव, खरगे बोले निष्पक्ष चुनाव की रक्षा के लिए संघर्ष जरूरी

> मल्लिकार्जुन खरगे ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रतीकात्मक जन महाभियोग प्रस्ताव पेश करते हुए मतदाता सूची पुनरीक्षण और निष्पक्ष चुनावी प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाए.

**Type:** article · **Category:** भारत · **Published:** 2026-10-31 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/national/mukhya-chunava-ayukta-ke-khilapha-vipaksha-laya-jana-mahabhiyoga-prastava-kharge-bole-nishpaksha-chunava-ki-raksha-ke-lie-sngharsh-53923 · **Language:** Hindi
**Tags:** मल्लिकार्जुन खरगे, ज्ञानेश कुमार, मीरा कुमार, चुनाव आयोग, महाभियोग प्रस्ताव, मतदाता सूची, कांग्रेस, राजनीति

लोकतांत्रिक मर्यादाओं और निष्पक्ष मतदान प्रणाली की रक्षा का आह्वान करते हुए विपक्ष ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के विरुद्ध एक प्रतीकात्मक जन महाभियोग प्रस्ताव पेश किया है. कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने इस विशेष सभा को संबोधित करते हुए स्पष्ट किया कि यह कदम किसी व्यक्ति विशेष के प्रति दुर्भावना से प्रेरित नहीं है, बल्कि देश की लोकतांत्रिक संस्थाओं की शुचिता को बनाए रखने का एक गंभीर प्रयास है. अपने वक्तव्य में उन्होंने सरदार वल्लभभाई पटेल और पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी जैसी विभूतियों के योगदान का स्मरण करते हुए उन्हें महान राष्ट्र निर्माता बताया और कहा कि देश व संविधान की रक्षा के लिए अनवरत संघर्ष करने का समय आ गया है.

## संस्थागत दुरुपयोग और चुनावी प्रक्रिया पर उठाए सवाल
मल्लिकार्जुन खरगे ने जोर देकर कहा कि मुख्य चुनाव आयुक्त से विपक्ष की कोई व्यक्तिगत शत्रुता नहीं है, किंतु उनसे निष्पक्षता के साथ दायित्व निभाने की अपेक्षा की जाती है. उन्होंने वक्तव्य में यह भी कहा, 
> CEC से हमारा कोई निजी बैर नहीं है. वह निष्पक्ष होकर काम करें.
 केंद्र सरकार पर तीखा प्रहार करते हुए उन्होंने आरोप लगाया कि साल 2014 के बाद से सत्ता में बने रहने के लिए हर संभव हथकंडे अपनाए जा रहे हैं. उन्होंने रेखांकित किया कि पूर्व में केंद्रीय जांच एजेंसियों के जरिए राजनीतिक प्रतिद्वंद्वियों पर दबाव बनाया गया और अब मतदाता सूची के पुनरीक्षण अभियान की आड़ में सुनियोजित ढंग से वोट काटने का प्रयास किया जा रहा है.

## वोट और संस्थाओं से जुड़े आरोपों की लंबी सूची
कांग्रेस अध्यक्ष ने सभा के समक्ष सांसदों के दलबदल, सरकारों को अस्थिर करने, ED और CBI के उपयोग तथा मतदान प्रक्रिया से जुड़े घटनाक्रमों का विस्तार से उल्लेख किया. उन्होंने कहा कि विपक्ष के पास ऐसे सैकड़ों प्रमाण और दृष्टांत मौजूद हैं, जो निर्वाचन प्रक्रिया और संवैधानिक संस्थाओं की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े करते हैं. खरगे ने आरोप लगाया कि SIR यानी मतदाता सूची पुनरीक्षण के माध्यम से अनधिकृत रूप से नागरिकों के नाम मतदाता सूची से हटाए जा रहे हैं. उन्होंने इस पूरी प्रक्रिया के संदर्भ में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के अतिरिक्त प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े किए, जो विपक्ष के राजनीतिक रुख का प्रमुख आधार बने हैं.

## प्रतीकात्मक संसदीय प्रक्रिया और नागरिक सहभागिता
इस महत्वपूर्ण कार्यक्रम की अध्यक्षता पूर्व लोकसभा अध्यक्ष मीरा कुमार ने की. उन्होंने सभा को संबोधित करते हुए जानकारी दी कि यह पूरा आयोजन मुख्य चुनाव आयुक्त के विरुद्ध एक प्रतीकात्मक महाभियोग प्रस्ताव के रूप में आयोजित किया गया है. इसकी संरचना पूर्णतः संसदीय परंपराओं और कार्यप्रणाली के अनुरूप तैयार की गई है, जिसमें विधिवत प्रस्ताव प्रस्तुत करने और पक्ष-विपक्ष की दलीलों को रखने की व्यवस्था की गई है.

मीरा कुमार ने बताया कि इस विशेष मंच पर केवल राजनीतिक दलों के प्रमुख नेता ही एकत्र नहीं हुए हैं, बल्कि मतदाता सूची पुनरीक्षण प्रक्रिया के कारण प्रभावित हुए आम नागरिक और सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि भी इसमें सम्मिलित हुए हैं. इस जन पहल का मूल उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि मतदाता सूची के पुनरीक्षण के दौरान आम जनमानस को जिन व्यावहारिक समस्याओं और कठिनाइयों का सामना करना पड़ा है, उनके वास्तविक अनुभवों को सार्वजनिक रूप से देश के समक्ष प्रस्तुत किया जा सके.

## युवा पीढ़ी की आकांक्षाएं और लोकतांत्रिक संकल्प
अपने अध्यक्षीय संबोधन में मीरा कुमार ने देश की नई पीढ़ी का विशेष रूप से उल्लेख किया. उन्होंने कहा कि Gen-Z यानी युवा पीढ़ी वर्तमान में विपक्ष और लोकतांत्रिक पहलों की ओर अत्यंत आशा भरी दृष्टि से देख रही है. उन्होंने लोकतांत्रिक अधिकारों और मताधिकार की सुरक्षा के लिए एकजुट होकर निरंतर संघर्ष करने का संकल्प दोहराया. उन्होंने उपस्थित जनसमूह को प्रेरित करते हुए कहा कि संविधान और आम नागरिक के वोट के अधिकार की रक्षा के लिए जो संकल्प लिया गया है, उसे पूर्ण निष्ठा के साथ अंजाम तक पहुंचाना प्रत्येक जागरूक नागरिक और प्रतिनिधि का कर्तव्य है.

## इसका आप पर असर
इस प्रतीकात्मक जन महाभियोग और मतदाता सूची पुनरीक्षण पर उठाए गए सवालों का सीधा प्रभाव आम नागरिकों के मताधिकार की जागरूकता पर पड़ता है.

- **मतदाता सूची की जांच:** मतदाता सूची में नाम कटने या त्रुटियों के आरोपों के बीच नागरिकों को अपने मतदान केंद्र और ऑनलाइन पोर्टल पर समय रहते नाम सत्यापित करना होगा. यदि पुनरीक्षण के दौरान नाम हट गया है, तो निर्धारित समय सीमा के भीतर फार्म भरकर नाम दोबारा जुड़वाना जरूरी है.
- **चुनावी प्रक्रिया पर निगरानी:** इस राजनीतिक अभियान से आम मतदाताओं में अपने अधिकारों और मतदान पर्ची को लेकर सजगता बढ़ेगी. किसी भी प्रकार की गड़बड़ी दिखने पर नागरिक सीधे चुनाव अधिकारियों या हेल्पलाइन पर शिकायत दर्ज करा सकते हैं.
- **नागरिक समाज की सक्रियता:** सामाजिक संगठनों और प्रभावित लोगों के मंच पर आने से स्थानीय स्तर पर बूथ सत्यापन में मदद मिलेगी. स्थानीय मतदाता अपने क्षेत्र के बूथ लेवल अधिकारियों से मिलकर सूची की शुद्धता सुनिश्चित कर सकते हैं.
- **युवा मतदाताओं की सहभागिता:** नए और युवा मतदाताओं के पंजीकरण व सूची में नाम दर्ज कराने की प्रक्रिया पर विशेष ध्यान केंद्रित होगा. युवाओं को समय पर वोटर कार्ड और पहचान पत्र की औपचारिकताएं पूरी करनी चाहिए.

## ऐसा क्यों हुआ
विपक्ष द्वारा मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ यह प्रतीकात्मक जन महाभियोग प्रस्ताव मतदाता सूची पुनरीक्षण प्रक्रिया को लेकर उपजे व्यापक राजनीतिक असंतोष और निष्पक्षता पर लगे आरोपों के कारण आयोजित किया गया.

- **मतदाता सूची पुनरीक्षण पर आरोप:** विपक्ष का दावा है कि SIR प्रक्रिया के माध्यम से वैध मतदाताओं के नाम अवैध तरीके से मतदाता सूची से हटाए जा रहे हैं. इन शिकायतों को व्यापक स्तर पर रेखांकित करने के लिए विपक्ष ने इस सार्वजनिक मंच का सहारा लिया.
- **संस्थागत निष्पक्षता की मांग:** विपक्षी दलों का तर्क है कि 2014 के बाद से केंद्रीय एजेंसियों और संवैधानिक संस्थाओं की स्वायत्तता प्रभावित हुई है. इसी पृष्ठभूमि में मुख्य चुनाव आयुक्त की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए निष्पक्ष आचरण की मांग रखी गई.
- **संसदीय तर्ज पर जन दबाव:** संसद के औपचारिक महाभियोग से अलग, नागरिक समाज और प्रभावित लोगों को साथ जोड़कर एक समानांतर प्रतीकात्मक प्रक्रिया के जरिए जनता के बीच अपनी बात पहुंचाने की रणनीति बनाई गई.

## सवाल-जवाब

### 1. विपक्ष ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ क्या कदम उठाया है?
विपक्ष ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ संसदीय प्रक्रिया की तर्ज पर एक प्रतीकात्मक जन महाभियोग प्रस्ताव पेश किया है.

### 2. मल्लिकार्जुन खरगे ने अपने संबोधन में किन प्रमुख नेताओं का उल्लेख किया?
मल्लिकार्जुन खरगे ने सरदार वल्लभभाई पटेल और पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी का उल्लेख करते हुए उन्हें महान राष्ट्र निर्माता बताया.

### 3. खरगे ने मुख्य चुनाव आयुक्त और चुनावी प्रक्रिया को लेकर क्या आरोप लगाए?
खरगे ने कहा कि सीईसी से कोई निजी बैर नहीं है, लेकिन आरोप लगाया कि SIR के जरिए गैरकानूनी तरीके से मतदाताओं के नाम हटाए जा रहे हैं.

### 4. इस कार्यक्रम की अध्यक्षता किसने की और इसमें कौन-कौन शामिल हुए?
इस कार्यक्रम की अध्यक्षता पूर्व लोकसभा स्पीकर मीरा कुमार ने की, जिसमें राजनीतिक दलों के नेताओं के अलावा SIR से प्रभावित लोग और सिविल सोसाइटी के प्रतिनिधि शामिल हुए.

### 5. मीरा कुमार ने युवा पीढ़ी को लेकर क्या कहा?
मीरा कुमार ने कहा कि Gen-Z यानी नई पीढ़ी विपक्ष की ओर बड़ी उम्मीद से देख रही है और सभी को मताधिकार की रक्षा के लिए एकजुट होना होगा.

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