# मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे सड़क हादसे में माता-पिता की मौत के बाद अनाथ बच्चों को मिला 1.80 करोड़ रुपये का मुआवजा

> मोटर एक्सीडेंट क्लेम्स ट्रिब्यूनल ने साल 2018 में मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे पर जान गंवाने वाले दंपति के बच्चों को 1.80 करोड़ रुपये से अधिक का मुआवजा देने का निर्देश दिया है, जिसमें अदालत ने सुरक्षित दूरी न रखने पर कार चालक की भी लापरवाही दर्ज की.

**Type:** article · **Category:** भारत · **Published:** 2026-10-31 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/national/mumbai-pune-expressway-saraka-hadase-men-mata-pita-ki-mauta-ke-bada-anatha-bachchon-ko-mila-1-80-karora-rupaye-ka-muavaja-53984 · **Language:** Hindi
**Tags:** मुंबई पुणे एक्सप्रेसवे, सड़क दुर्घटना, मुआवजा, ट्रिब्यूनल फैसला, मोटर एक्सीडेंट क्लेम्स ट्रिब्यूनल

मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे पर करीब आठ साल पहले हुए एक भीषण सड़क हादसे में जान गंवाने वाले पति-पत्नी के परिजनों को एक लंबी कानूनी प्रक्रिया के बाद अब राहत मिली है. मोटर एक्सीडेंट क्लेम्स ट्रिब्यूनल ने इस दुर्घटना में अनाथ हुए दो नाबालिग बच्चों और परिवार को 1,80,99,232 रुपये का कुल मुआवजा देने का निर्देश दिया है. यह सड़क दुर्घटना उस समय हुई थी जब तेज रफ्तार से चल रहे ट्रक के चालक ने अचानक ब्रेक लगा दिया था और पीछे से आ रही कार उसमें जा घुसी थी, जिससे एक ही झटके में दोनों बच्चों के सिर से माता-पिता का साया उठ गया था.

## 23 दिसंबर 2018 को एक्सप्रेसवे पर हुआ था दर्दनाक हादसा
यह पूरा मामला 23 दिसंबर 2018 का है, जब अंकित भूपिंदरसिंह चुग अपनी पत्नी संजना और अपने दो नाबालिग बच्चों के साथ मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे के रास्ते कार से सफर कर रहे थे. उसी मार्ग पर आगे एक ट्रक काफी तेज रफ्तार में चल रहा था. यात्रा के दौरान अचानक ट्रक चालक ने बीच सड़क पर ही जोरदार ब्रेक लगा दिए. ट्रक के ठीक पीछे चल रही अंकित की कार की गति भी तेज थी, जिसकी वजह से उन्हें वाहन संभालने या ब्रेक लगाने का पर्याप्त अवसर नहीं मिला. नतीजतन, कार सीधे सामने चल रहे भारी वाहन से जा टकराई.

टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि कार बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई और उसमें सवार अंकित और संजना गंभीर रूप से घायल हो गए. दुर्घटना के तुरंत बाद राहत एवं बचाव कार्य करते हुए दोनों को पनवेल के ग्रामीण अस्पताल पहुंचाया गया. हालांकि, डॉक्टरों के प्रयासों के बावजूद गंभीर चोटों के कारण दोनों ने अस्पताल में इलाज के दौरान दम तोड़ दिया. इस भयावह सड़क हादसे में दोनों नाबालिग बच्चों की जान तो किसी तरह बच गई, लेकिन वे गंभीर रूप से जख्मी हो गए और इतनी छोटी उम्र में उन्हें अपने माता-पिता दोनों को एक साथ खोने का गहरा आघात सहना पड़ा.

## लापरवाही के अनुपात पर ट्रिब्यूनल का अहम फैसला
इस दुर्घटना से जुड़े दावों और दोनों पक्षों की कानूनी दलीलों की लंबी सुनवाई पूरी होने के बाद मोटर एक्सीडेंट क्लेम्स ट्रिब्यूनल की सदस्य गौरी कावडिकर ने 29 अक्टूबर को अपना अंतिम फैसला सुनाया. ट्रिब्यूनल ने इस मामले में दोनों चालकों की भूमिका का विस्तृत मूल्यांकन किया. अदालत ने स्पष्ट रूप से रेखांकित किया कि राजमार्गों पर गाड़ी चलाते समय आगे चल रहे वाहन से उचित और सुरक्षित दूरी बनाए रखना पीछे चल रहे चालक का प्राथमिक कर्तव्य है ताकि आपातकालीन स्थिति में वाहन को नियंत्रित किया जा सके.

ट्रिब्यूनल ने अपने आदेश में यह टिप्पणी भी दर्ज की कि केवल आगे वाले वाहन द्वारा अचानक ब्रेक लगाए जाने के आधार पर ही पीछे वाले वाहन चालक को पूरी तरह दोषी नहीं ठहराया जा सकता. फिर भी, उपलब्ध साक्ष्यों को देखते हुए यह पाया गया कि यदि कार चला रहे अंकित ने आगे चल रहे ट्रक से पर्याप्त फासला रखा होता और गति को उचित सीमा में नियंत्रित किया होता, तो इस भीषण टक्कर को टाला जा सकता था. इन्हीं तथ्यों के आधार पर अदालत ने दुर्घटना के लिए कार चालक अंकित को 70 प्रतिशत और ट्रक चालक को लापरवाही से गाड़ी चलाने व अचानक ब्रेक लगाने के लिए 30 प्रतिशत जिम्मेदार माना.

## कमाई और आर्थिक नुकसान के आधार पर तय हुई राशि
मुआवजे की रकम निर्धारित करते समय ट्रिब्यूनल ने दोनों मृतकों के कामकाजी करियर और उनके वित्तीय योगदान को मुख्य आधार बनाया. अंकित चुग डेल इंटरनेशनल सर्विसेज में सीनियर डिलीवरी स्पेशलिस्ट के रूप में कार्यरत थे, जबकि उनकी पत्नी संजना एक स्कूल में सेवाएं दे रही थीं. दोनों की असामयिक मृत्यु से दोनों बच्चों और परिवार को हुए अपूरणीय आर्थिक तथा व्यक्तिगत नुकसान का गहन आकलन किया गया.

इसके बाद ट्रिब्यूनल ने संजना की मृत्यु के एवज में 92,53,500 रुपये और अंकित चुग की मृत्यु के लिए 88,45,732 रुपये की राशि तय की. इन दोनों राशियों को मिलाकर ट्रिब्यूनल ने कुल 1,80,99,232 रुपये का समग्र मुआवजा पीड़ित पक्ष को प्रदान करने का आदेश पारित किया, जिससे अनाथ हुए बच्चों के भविष्य और लालन-पालन को आर्थिक संबल मिल सके.

## इसका आप पर असर
यह फैसला एक्सप्रेसवे और राजमार्गों पर सुरक्षित ड्राइविंग दूरी बनाए रखने के कानूनी और वित्तीय दायित्वों को रेखांकित करता है.

- **भारत में:** यदि आप किसी राष्ट्रीय राजमार्ग या एक्सप्रेसवे पर वाहन चला रहे हैं, तो आगे चल रही गाड़ी से पर्याप्त दूरी रखना अनिवार्य है. ऐसा न करने पर किसी दुर्घटना की स्थिति में अदालत पीछे वाले चालक को भी कानूनी रूप से अधिक जिम्मेदार मान सकती है.
- **मुआवजे के संदर्भ में:** मोटर एक्सीडेंट क्लेम्स ट्रिब्यूनल ने पीड़ित बच्चों के भविष्य के लिए 1.80 करोड़ रुपये से अधिक की राशि मंजूर की है. यह राशि दोनों कामकाजी अभिभावकों के वेतन और सेवा रिकॉर्ड के आधार पर तय की गई है.
- **सड़क सुरक्षा दायित्व:** आगे चल रहे भारी वाहनों द्वारा अचानक ब्रेक लगाए जाने पर संभलने का समय तभी मिल सकता है जब वाहन निर्धारित गति सीमा में हो. तेज गति और टेलगेटिंग की स्थिति में जान और बीमा दोनों का भारी नुकसान हो सकता है.
- **कानूनी परिणाम:** सड़क हादसे में लापरवाही पाए जाने पर ट्रिब्यूनल दोनों चालकों के बीच जिम्मेदारी का अनुपात तय करता है. इस मामले में कार चालक पर 70 प्रतिशत और ट्रक चालक पर 30 प्रतिशत लापरवाही दर्ज की गई.

## ऐसा क्यों हुआ
यह दुर्घटना तेज गति, अचानक ब्रेक लगाने और पीछे चल रहे वाहन द्वारा सुरक्षित दूरी न रखने के सम्मिलित कारणों से हुई थी.

- **सीधा कारण:** एक्सप्रेसवे पर आगे चल रहे ट्रक चालक ने अचानक जोरदार ब्रेक लगा दिए थे. ठीक पीछे तेज गति से आ रही कार को रुकने का समय नहीं मिला और वह सीधे ट्रक में जा घुसी.
- **असुरक्षित दूरी:** कार चालक आगे चल रहे भारी वाहन से उचित सुरक्षा फासला बनाए रखने में विफल रहा. पर्याप्त दूरी न होने के कारण आपातकालीन ब्रेक लगाने पर भी कार की टक्कर नहीं टल सकी.
- **गति का प्रभाव:** ट्रिब्यूनल के अनुसार दोनों वाहन तेज गति में थे, जिससे चालक का वाहन पर नियंत्रण सीमित हो गया. अधिक गति ने टक्कर के प्रभाव को अत्यधिक घातक बना दिया.
- **लापरवाही का निर्धारण:** ट्रिब्यूनल ने पाया कि दोनों पक्षों की ओर से यातायात नियमों की अनदेखी हुई थी. इसी वजह से अदालत ने कार चालक को 70 प्रतिशत और ट्रक चालक को 30 प्रतिशत जिम्मेदार ठहराया.

## सवाल-जवाब

### 1. यह सड़क दुर्घटना कब और कहां हुई थी?
यह दुर्घटना 23 दिसंबर 2018 को मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे पर हुई थी.

### 2. हादसे में किन लोगों की जान गई थी?
इस भीषण टक्कर में अंकित भूपिंदरसिंह चुग और उनकी पत्नी संजना की मौत हो गई थी, जबकि उनके दो बच्चे घायल हुए थे.

### 3. ट्रिब्यूनल ने कुल कितना मुआवजा देने का आदेश दिया है?
मोटर एक्सीडेंट क्लेम्स ट्रिब्यूनल ने कुल 1,80,99,232 रुपये का मुआवजा देने का आदेश जारी किया है.

### 4. ट्रिब्यूनल ने दोनों चालकों पर लापरवाही का क्या अनुपात तय किया?
ट्रिब्यूनल ने कार चालक अंकित को 70 प्रतिशत और ट्रक चालक को 30 प्रतिशत जिम्मेदार माना है.

### 5. अदालत ने कार चालक को दुर्घटना के लिए अधिक जिम्मेदार क्यों माना?
अदालत ने पाया कि अंकित ने आगे चल रहे वाहन से सुरक्षित दूरी नहीं रखी थी और रफ्तार पर पर्याप्त नियंत्रण नहीं था.

### 6. मृतक दंपति किस कार्यक्षेत्र में कार्यरत थे?
अंकित चुग डेल इंटरनेशनल सर्विसेज में सीनियर डिलीवरी स्पेशलिस्ट थे और संजना एक स्कूल में कार्यरत थीं.

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