# नगीना सांसद चंद्रशेखर आजाद पर टिप्पणी मामले में यूट्यूबर अजीत भारती को झटका, पटियाला हाउस कोर्ट ने अग्रिम जमानत याचिका की खारिज

> दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट ने यूट्यूबर अजीत भारती की अग्रिम जमानत याचिका खारिज करते हुए विस्तृत आदेश जारी किया है। अदालत ने टिप्पणी की कि आरोपी के वीडियो में इस्तेमाल भाषा जाति व्यवस्था और श्रेष्ठता के भाव को दर्शाती है।

**Type:** article · **Category:** भारत · **Published:** 2026-09-09 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/national/nagina-mp-chandrashekhar-azad-para-tippani-mamale-men-youtuber-ajit-bharti-ko-jhataka-patiala-house-court-ne-agrima-jamanata-yachi-30274 · **Language:** Hindi
**Tags:** अजीत भारती, पटियाला हाउस कोर्ट, चंद्रशेखर आजाद, अग्रिम जमानत, एससी एसटी एक्ट, यूट्यूबर विवाद, बालकराम बौद्ध, आजाद समाज पार्टी

नई दिल्ली स्थित पटियाला हाउस कोर्ट ने यूट्यूबर अजीत भारती की अग्रिम जमानत याचिका खारिज करने के अपने फैसले पर विस्तृत आदेश जारी कर दिया है। अदालत ने अपने इस विस्तृत लिखित आदेश में स्पष्ट किया है कि आरोपी अजीत भारती द्वारा अपने सोशल मीडिया वीडियो में इस्तेमाल की गई शब्दावली और भाषा में जाति व्यवस्था, जाति के आधार पर शुद्धता की अवधारणा और तथाकथित ऊंची जाति की ओर से निचली जाति पर श्रेष्ठता जताने का भाव साफ तौर पर दिखाई देता है। यह पूरा कानूनी मामला उत्तर प्रदेश के नगीना संसदीय क्षेत्र से सांसद और अनुसूचित जाति समुदाय के प्रमुख नेता चंद्रशेखर आजाद के संबंध में की गई कथित जातिगत टिप्पणी से जुड़ा हुआ है। अदालत ने मामले के शुरुआती तथ्यों पर विचार करते हुए माना कि आरोपी के बयानों में अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम के तहत दंडनीय अपराध के सभी आवश्यक घटक मौजूद हैं। इसी कानूनी निष्कर्ष के आधार पर अदालत ने अग्रिम जमानत की मांग को सिरे से नकार दिया।

 

## जातिगत श्रेष्ठता की सोच पर पटियाला हाउस कोर्ट की सख्त टिप्पणी

पटियाला हाउस कोर्ट के विशेष जज द्वारा जारी विस्तृत आदेश में उस विशिष्ट बयान को प्रमुखता से रेखांकित किया गया है, जिसके कारण यह विवाद उत्पन्न हुआ। वीडियो में कथित तौर पर चंद्रशेखर आजाद को संबोधित करते हुए कहा गया था कि किसी उच्च जाति की महिला से विवाह करने से पहले उन्हें स्वयं को उसके काबिल बनाना चाहिए। इस बयान पर कड़ा ऐतराज जताते हुए अदालत ने अपने आदेश में सवाल उठाया कि यदि अनुसूचित जाति या अनुसूचित जनजाति समुदाय का कोई व्यक्ति अपने समुदाय में विवाह करने के योग्य माना जाता है, तो किसी तथाकथित उच्च जाति की महिला से विवाह करने के लिए उसे किसी अतिरिक्त योग्यता, किसी विशेष शर्त या अलग से काबिल होने की आवश्यकता क्यों होनी चाहिए। अदालत ने रेखांकित किया कि इस प्रकार की बयानबाजी केवल किसी एक व्यक्ति विशेष पर व्यक्तिगत टिप्पणी तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें स्पष्ट रूप से जाति का संदर्भ शामिल है। प्रथम दृष्टया यह टिप्पणी अनुसूचित जाति समुदाय का अपमान करने और जातिगत भेदभाव को बढ़ावा देने वाली प्रतीत होती है।

 

## बचाव पक्ष के तर्क और अदालत में रखी गई दलीलें

अदालत में अग्रिम जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान अजीत भारती की ओर से उपस्थित वरिष्ठ अधिवक्ताओं की कानूनी टीम ने याचिकाकर्ता के बचाव में कई तर्क पेश किए। बचाव पक्ष की दलील थी कि वीडियो में कही गई बातों को पूरी बातचीत के संदर्भ से अलग करके नहीं देखा जाना चाहिए। वकीलों ने दावा किया कि यह पूरी चर्चा केवल एक काल्पनिक स्थिति पर आधारित थी और इसका उद्देश्य किसी वास्तविक व्यक्ति या पहचाने गए समुदाय को आहत करना नहीं था। इसके अतिरिक्त, बचाव पक्ष ने यह तर्क भी दिया कि शिकायतकर्ता घटना के समय प्रत्यक्ष रूप से मौके पर उपस्थित नहीं था और न ही उसे व्यक्तिगत रूप से कोई शारीरिक या मानसिक धमकी दी गई थी। वकीलों ने कोर्ट से आग्रह किया कि मामले की गंभीरता को समझने के लिए वीडियो की पूरी और बिना किसी संपादन के तैयार की गई रिकॉर्डिंग का अवलोकन किया जाना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि गिरफ्तारी से पूर्व के इस नाजुक मोड़ पर संदर्भ से कटे हुए अंशों के आधार पर आरोपी के विरुद्ध प्रतिकूल धारणा नहीं बनाई जानी चाहिए।

 

## अदालत का रुख और बचाव पक्ष की दलीलों की अस्वीकृति

पटियाला हाउस कोर्ट ने बचाव पक्ष द्वारा प्रस्तुत तर्कों को इस शुरुआती चरण पर स्वीकार करने से स्पष्ट इनकार कर दिया। अदालत ने अपने आदेश में महत्वपूर्ण अवलोकन करते हुए कहा कि कथित वीडियो में जातिसूचक शब्दों और जातिगत संदर्भों का प्रयोग किसी आकस्मिक बहस, अप्रत्याशित विवाद या अचानक उत्पन्न हुए झगड़े के दौरान नहीं किया गया था। इसके विपरीत, आरोपी ने अपने जवाब के मुख्य आधार के रूप में ही जातिगत संदर्भ को केंद्र में रखा था। कोर्ट ने कहा कि जब जाति को जानबूझकर उत्तर का मुख्य बिंदु बनाया जाता है, तो इसे महज एक अनजाने में निकला शब्द नहीं माना जा सकता। यही कारण रहा कि अदालत ने प्रथम दृष्टया आरोपी के बयानों को अनुसूचित जाति समुदाय के सार्वजनिक अपमान से संबंधित धारा के दायरे में माना।

 

## एससी एसटी एक्ट की धारा 18 और अग्रिम जमानत पर वैधानिक रोक

पटियाला हाउस कोर्ट ने अग्रिम जमानत याचिका खारिज करने के अपने मुख्य कानूनी आधार की व्याख्या करते हुए एससी/एसटी एक्ट की धारा 18 का उल्लेख किया। अदालत ने स्पष्ट किया कि जब किसी मामले में शुरुआती साक्ष्यों और तथ्यों के आधार पर एससी/एसटी एक्ट की धारा 3(1)(r) के तहत अपराध का बनना प्रथम दृष्टया सिद्ध होता दिखाई देता है, तो इस विशेष अधिनियम की धारा 18 के तहत अग्रिम जमानत देने पर पूर्ण वैधानिक रोक लागू हो जाती है। धारा 3(1)(r) मुख्य रूप से किसी अनुसूचित जाति या अनुसूचित जनजाति के सदस्य को जनसमक्ष जानबूझकर अपमानित करने या डराने-धमकाने के अपराध से संबंधित है। कानून के इस सख्त प्रावधान के कारण अदालत के पास आरोपी को अग्रिम जमानत की राहत प्रदान करने का कोई कानूनी विकल्प शेष नहीं रह जाता। अदालत ने माना कि वैधानिक रोक के लागू होने के कारण ही याचिका को खारिज किया जाना न्यायसंगत है।

 

## एफ आई आर की पृष्ठभूमि और आजाद समाज पार्टी की शिकायत

यह पूरा कानूनी विवाद अजीत भारती के यूट्यूब चैनल पर प्रसारित हुए एक वीडियो से उत्पन्न हुआ है, जिसका शीर्षक 'SB79: Reservation Hatao Andolan Nautanki & More | Saptahik Bakaiti' था। इस वीडियो को लेकर आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) के दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष बालकराम बौद्ध द्वारा दिल्ली पुलिस में एक औपचारिक शिकायत दर्ज कराई गई थी। दर्ज की गई एफआईआर के अनुसार, आरोप लगाया गया है कि उक्त वीडियो में जाति पर आधारित अपमानजनक शब्दावली का इस्तेमाल किया गया और नगीना से सांसद चंद्रशेखर आजाद तथा संविधान निर्माता डॉ. भीमराव आंबेडकर के प्रति अत्यंत आपत्तिजनक और भ्रामक बातें कही गईं। इसके अलावा, एफआईआर में महिलाओं के विरुद्ध अनुचित भाषा का प्रयोग करने और उन्हें धमकाने के गंभीर आरोप भी शामिल किए गए हैं। पुलिस शिकायत में स्पष्ट किया गया कि अजीत भारती अपने एक दर्शक द्वारा पूछे गए सवाल का उत्तर दे रहे थे। उस दर्शक ने कथित तौर पर सुझाव दिया था कि यदि कोई अपनी बहन का विवाह चंद्रशेखर आजाद से करा दे, तो इससे जातिगत आरक्षण समाप्त करने के आंदोलन को गति मिल सकती है। इसी सवाल का जवाब देते हुए अजीत भारती ने विवाह और योग्यता को जातिगत दृष्टिकोण से जोड़ते हुए विवादित टिप्पणियां की थीं।

 

## अदालत का स्पष्टीकरण और मामले का भावी परिदृश्य

अग्रिम जमानत याचिका को खारिज करने के साथ ही पटियाला हाउस कोर्ट ने अपने आदेश में एक अत्यंत महत्वपूर्ण कानूनी स्पष्टीकरण भी जोड़ा है। अदालत ने साफ किया है कि अग्रिम जमानत के चरण पर की गई ये सभी टिप्पणियां केवल प्रथम दृष्टया मूल्यांकन पर आधारित हैं और इन्हें आरोपी के दोष सिद्ध होने का अंतिम निष्कर्ष नहीं माना जाना चाहिए। कोर्ट ने रेखांकित किया कि उसने मामले के मुख्य गुण-दोष, आरोपों की अंतिम सत्यता, आरोपी के संभावित दोष या पूरे वीडियो की विस्तृत संदर्भगत रिकॉर्डिंग पर कोई अंतिम या बाध्यकारी राय व्यक्त नहीं की है। अदालत का यह स्पष्टीकरण दर्शाता है कि मामले की भावी अदालती सुनवाई, पुलिस जांच और साक्ष्यों के परीक्षण के दौरान आरोपी को अपना पक्ष रखने का पूर्ण अवसर प्राप्त रहेगा। फिलहाल, कोर्ट द्वारा अग्रिम जमानत याचिका खारिज किए जाने से आरोपी अजीत भारती के सामने कानूनी चुनौतियां बढ़ गई हैं।

## इसका आप पर असर
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर वीडियो बनाने, टिप्पणी करने और डिजिटल सामग्री साझा करने वाले यूट्यूबर तथा आम उपयोगकर्ताओं के लिए यह कानूनी आदेश अत्यंत महत्वपूर्ण प्रभाव डालता है।

- **डिजिटल सामग्री निर्माताओं के लिए:** इंटरनेट और यूट्यूब पर वक्तव्य देते समय कानूनी सीमाओं और जातिगत संवेदनशीलताओं का विशेष ध्यान रखना आवश्यक हो गया है। यदि कोई व्यक्ति अपने वीडियो में जातिगत भेदभाव या अपमानजनक भाषा का प्रयोग करता है, तो उसे त्वरित कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है।

- **अग्रिम जमानत के नियमों के मामले में:** एससी/एसटी एक्ट के तहत प्रथम दृष्टया मामला दर्ज होने पर आरोपी को बिना पूर्व जमानत के पुलिस हिरासत में जाना पड़ सकता है। इसका अर्थ यह है कि इस प्रकार के गंभीर मामलों में गिरफ्तारी से पहले कानूनी सुरक्षा मिलना अत्यंत कठिन हो जाता है।

- **ऑनलाइन अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर:** विचार व्यक्त करने की स्वतंत्रता का प्रयोग करते समय किसी समुदाय की गरिमा को आहत करने वाले बयानों से बचना अनिवार्य है। उपयोगकर्ताओं को सलाह दी जाती है कि वे डिजिटल मंचों पर नफरत फैलाने वाली या जातिसूचक भाषा का उपयोग कदापि न करें।

- **कानूनी जवाबदेही के संदर्भ में:** दर्शक के सवाल का उत्तर देते समय भी कही गई विवादित बातों की पूरी जिम्मेदारी सामग्री निर्माता पर ही होती है। कानूनी कार्यवाही के दौरान किसी बयान को केवल काल्पनिक संदर्भ बताकर राहत पाना आसान नहीं होगा।

## ऐसा क्यों हुआ
पटियाला हाउस कोर्ट द्वारा अग्रिम जमानत याचिका खारिज किए जाने के पीछे मुख्य कारण आरोपी के वीडियो में इस्तेमाल की गई विवादित भाषा और एससी/एसटी एक्ट के कड़े वैधानिक प्रावधान हैं।

- **विवादित वीडियो और शिकायत:** अजीत भारती ने अपने यूट्यूब चैनल पर प्रसारित वीडियो में नगीना सांसद चंद्रशेखर आजाद और अंतरजातीय विवाह के संदर्भ में 'काबिलियत' से जुड़ी जातिगत टिप्पणी की थी। इस बयान के विरोध में आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) के दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष बालकराम बौद्ध ने एफआईआर दर्ज कराई।

- **अदालत का प्रथम दृष्टया निष्कर्ष:** पटियाला हाउस कोर्ट ने प्राथमिक साक्ष्यों के आधार पर माना कि वीडियो की भाषा में जाति व्यवस्था और उच्च जाति की श्रेष्ठता की सोच स्पष्ट झलकती है। कोर्ट के अनुसार यह टिप्पणी प्रथम दृष्टया अनुसूचित जाति समुदाय का सार्वजनिक अपमान करने के दायरे में आती है।

- **धारा 18 का वैधानिक प्रतिबंध:** एससी/एसटी एक्ट की धारा 3(1)(r) के तहत अपराध का प्रथम दृष्टया मामला बनने के बाद अधिनियम की धारा 18 के तहत अग्रिम जमानत याचिका पर कानूनी रोक लागू हो गई। इसी कारण अदालत ने राहत देने से इनकार कर दिया।

## सवाल-जवाब

### 1. पटियाला हाउस कोर्ट ने किस मामले में अग्रिम जमानत खारिज की?
पटियाला हाउस कोर्ट ने यूट्यूबर अजीत भारती की अग्रिम जमानत याचिका खारिज की है, जो नगीना सांसद चंद्रशेखर आजाद पर एक यूट्यूब वीडियो में की गई कथित जातिगत टिप्पणी से जुड़े मामले में दर्ज एफआईआर से संबंधित है।

### 2. कोर्ट ने अजीत भारती की टिप्पणी के बारे में क्या मुख्य अवलोकन किया?
अदालत ने अवलोकन किया कि वीडियो में इस्तेमाल की गई भाषा जाति व्यवस्था, जाति आधारित शुद्धता की सोच और तथाकथित ऊंची जाति की श्रेष्ठता के भाव को दर्शाती है।

### 3. यह मामला किस एफआईआर और शिकायत से शुरू हुआ?
यह मामला आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) के दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष बालकराम बौद्ध द्वारा अजीत भारती के यूट्यूब वीडियो 'SB79: Reservation Hatao Andolan Nautanki & More | Saptahik Bakaiti' के खिलाफ दर्ज कराई गई एफआईआर से शुरू हुआ।

### 4. बचाव पक्ष की मुख्य दलील क्या थी?
अजीत भारती के वकीलों ने दलील दी कि बातें एक काल्पनिक संदर्भ में कही गई थीं, शिकायतकर्ता मौके पर मौजूद नहीं था, और पूरा मामला समझने के लिए बिना एडिट की गई पूरी रिकॉर्डिंग देखना आवश्यक है।

### 5. अदालत ने अग्रिम जमानत देने से इनकार क्यों किया?
कोर्ट ने पाया कि बयानों में एससी/एसटी एक्ट की धारा 3(1)(r) के तहत अपराध के तत्व प्रथम दृष्टया मौजूद हैं, जिससे धारा 18 के तहत अग्रिम जमानत पर वैधानिक रोक लागू हो गई।

### 6. क्या कोर्ट के इस आदेश से अजीत भारती का दोष सिद्ध हो गया है?
नहीं, अदालत ने स्पष्ट किया है कि अग्रिम जमानत पर की गई टिप्पणियां केवल प्रथम दृष्टया मूल्यांकन हैं और ये दोष सिद्ध करने वाला अंतिम निष्कर्ष नहीं हैं।

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