# नागपुर की एक कविता और दिल्ली से राहुल गांधी के नाम आखिरी तार, यूं थमी 163 साल पुरानी टेलीग्राम सेवा

> 14 जुलाई 2013 की रात भारत में टेलीग्राम सेवा हमेशा के लिए बंद हो गई थी. नागपुर से आखिरी आधिकारिक तार कविता वाघमारे ने अपनी मां के नाम भेजा था, जबकि दिल्ली से आखिरी तार राहुल गांधी के नाम गया था.

**Type:** article · **Category:** भारत · **Published:** 2026-07-15 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/national/nagpur-ki-eka-kavita-aura-delhi-se-rahul-gandhi-ke-nama-akhiri-tara-yun-thami-163-sala-purani-teligrama-seva-7869 · **Language:** Hindi
**Tags:** टेलीग्राम सेवा, बीएसएनएल, राहुल गांधी, भारतीय डाक तार विभाग, टेलीग्राफ इतिहास, कविता वाघमारे, नागपुर

14 जुलाई 2013 की रात ठीक 11 बजकर 55 मिनट पर भारत में टेलीग्राम की घंटी हमेशा के लिए खामोश हो गई. इसी के साथ वह 163 साल पुरानी सेवा हमेशा के लिए बंद हो गई, जिसने कभी पूरे देश को आपस में जोड़ने का काम किया था.

## कोलकाता से डायमंड हार्बर तक, एक प्रयोग से हुई शुरुआत
भारत में टेलीग्राफ यानी तार सेवा की नींव 5 नवंबर 1850 को एक प्रयोग के तौर पर रखी गई थी. इस प्रयोग के तहत कोलकाता और डायमंड हार्बर के बीच पहला संदेश भेजा गया. दोनों जगहों के बीच की दूरी करीब 30 मील थी. यह प्रयोग पूरी तरह कामयाब रहा और इसी सफलता ने भारत में एक नई और आधुनिक संचार व्यवस्था की नींव रखी, जिसने आगे चलकर पूरे देश को आपस में जोड़ने का काम किया.

## 1854 में आम आदमी तक पहुंची तार सेवा
शुरुआत में तार सेवा सिर्फ सरकार और सेना तक सीमित थी, लेकिन 1854 में इसे आम जनता के लिए भी खोल दिया गया. इसके बाद हर आम नागरिक अपने निजी संदेश भेजने के लिए इस सुविधा का इस्तेमाल कर सकता था. धीरे-धीरे बड़े शहरों के साथ-साथ छोटे कस्बों में भी तार घर खुलने लगे और यह नेटवर्क लगातार फैलता गया. जल्द ही तार भेजना और पाना लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी का इतना जरूरी हिस्सा बन गया कि किसी भी बड़ी खबर के लिए सबसे पहले तार घर का ही रुख किया जाता था.

## लॉर्ड डलहौजी के दौर में बिछीं 4 हजार मील लंबी लाइनें
लॉर्ड डलहौजी के कार्यकाल में सर विलियम ओ शॉघनेसी ने करीब 4 हजार मील लंबी तार लाइनें बिछवाईं. इन लाइनों की मदद से कलकत्ता, मुंबई, मद्रास और पेशावर जैसे बड़े शहर आपस में जुड़ गए. इससे पहले किसी खबर को एक जगह से दूसरी जगह पहुंचने में कई दिन या हफ्तों का समय लग जाता था, लेकिन अब वही खबर कुछ ही घंटों में मंजिल तक पहुंचने लगी. इसका सीधा असर प्रशासन, व्यापार और सरकारी कामकाज पर पड़ा और देश का पूरा संचार तंत्र हमेशा के लिए बदल गया.

## डाक और तार विभाग एक हुए, फिर 1985 में अलग
1914 में अंग्रेजी हुकूमत ने डाक विभाग और तार विभाग को मिलाकर 'इंडियन पोस्ट्स एंड टेलीग्राफ्स डिपार्टमेंट' नाम से एक नया विभाग बनाया. इसका मकसद पूरे देश के संचार तंत्र को एक ही व्यवस्था के तहत चलाना था. दोनों विभाग करीब 70 साल तक साथ-साथ काम करते रहे, लेकिन 1985 में इन्हें फिर से अलग-अलग कर दिया गया. उस वक्त तक तार सेवा का सुनहरा दौर धीरे-धीरे ढलान की ओर बढ़ चुका था.

## जब हर साल भेजे जाते थे 6 करोड़ तार
1985-86 का दौर तार सेवा के लिए सबसे शानदार समय माना जाता है. उस दौर में देशभर में करीब 45 हजार तार घर काम कर रहे थे और हर साल तकरीबन 6 करोड़ तार भेजे जाते थे. नौकरी लगने की खुशखबरी हो, शादी का न्योता, किसी अपने के गुजर जाने की दुखद खबर या कोई और जरूरी बात, हर मौके पर लोग तार का ही सहारा लेते थे. गांव-देहात में जब डाकिया साइकिल पर तार लेकर पहुंचता था, तो लोग तुरंत समझ जाते थे कि कोई बड़ी खबर आई है.

## फोन, मोबाइल और इंटरनेट ने बदल दी तस्वीर
1990 के दशक में देश में पहले टेलीफोन का दौर आया, फिर मोबाइल फोन और उसके बाद इंटरनेट ने दस्तक दी. लोगों को अब तुरंत बात करने और चंद सेकंड में मैसेज भेजने की सुविधा मिलने लगी. ईमेल और एसएमएस भी सस्ते और आसान साबित हुए. इसका सीधा असर तार सेवा पर पड़ा और इसका इस्तेमाल तेजी से घटने लगा. एक-एक कर कई तार घर बंद होने लगे और वहां काम करने वाले कर्मचारियों को दूसरे विभागों में भेज दिया गया.

## हर साल 100 करोड़ का घाटा, कमाई सिर्फ 75 लाख
साल 2013 तक हालात यह हो गए थे कि तार सेवा सरकार और बीएसएनएल के लिए भारी घाटे का सौदा बन चुकी थी. इस सेवा को चलाने में हर साल करीब 100 करोड़ रुपये का खर्च आता था, जबकि इससे कमाई सिर्फ लगभग 75 लाख रुपये होती थी. इतना बड़ा नुकसान झेलते हुए इस सेवा को आगे चलाना नामुमकिन हो गया था. यही वजह रही कि 11 जून 2013 को बीएसएनएल ने ऐलान कर दिया कि 14 जुलाई 2013 के बाद देश में तार सेवा हमेशा के लिए बंद कर दी जाएगी.

## आखिरी दिन उमड़ पड़े लोग, भेजे 20 हजार तार
14 जुलाई 2013 को देशभर के तार घरों में माहौल बिल्कुल अलग था. लोग वहां सिर्फ कोई जरूरी संदेश भेजने नहीं, बल्कि इस ऐतिहासिक सेवा को आखिरी बार यादगार बनाने के लिए पहुंचे थे. कई लोगों ने अपने घरवालों, दोस्तों और करीबियों को भावुक संदेश भेजे, तो कुछ लोगों ने नेताओं और मशहूर हस्तियों के नाम भी आखिरी तार लिखवाए. उस एक दिन में पूरे देश में करीब 20 हजार तार भेजे गए, जो आम दिनों के मुकाबले कई गुना ज्यादा थे.

## नागपुर से आया आखिरी तार, कविता वाघमारे ने मां के नाम लिखी कविता
14 जुलाई 2013 की रात ठीक 11 बजकर 55 मिनट पर नागपुर से भारत का आखिरी आधिकारिक तार भेजा गया. यह तार कविता वाघमारे नाम की एक महिला ने अपनी मां के नाम भेजा था. उन्होंने मराठी भाषा में एक भावुक कविता लिखी, जिसमें तार सेवा की विदाई को एक पूरे युग के खत्म होने जैसा बताया गया. यह संदेश हमेशा के लिए इतिहास का हिस्सा बन गया और इसकी एक प्रति आज भी सुरक्षित रखी गई है.

## दिल्ली में राहुल गांधी के नाम भेजा गया आखिरी तार
उसी रात दिल्ली के सेंट्रल टेलीग्राफ ऑफिस ने रात 11 बजकर 45 मिनट पर अपने काउंटर हमेशा के लिए बंद कर दिए. यहां से भेजा गया आखिरी तार राहुल गांधी के नाम था. इसके साथ ही राजधानी में तार सेवा पूरी तरह खत्म हो गई. इसके कुछ ही मिनट बाद नागपुर से देश का आखिरी आधिकारिक संदेश भेजा गया और भारत में तार सेवा का 163 साल पुराना सफर हमेशा के लिए थम गया.

## आज भी यादों में जिंदा है 'तार आया है' का एहसास
14 जुलाई 2013 की आधी रात के बाद से तार सेवा भारत में सिर्फ एक इतिहास बनकर रह गई. आज पुराने तार के खंभे, जंग खाई तारें और बंद पड़े तार घर उस दौर की याद दिलाते हैं. इस सेवा ने अंग्रेजी हुकूमत से लेकर आजाद भारत तक कई बड़े बदलाव अपनी आंखों से देखे. भले ही आज मोबाइल और इंटरनेट ने इसकी जगह ले ली हो, लेकिन 'तार आया है' सुनते ही जो उत्सुकता और घबराहट लोगों के मन में उठती थी, वह एहसास आज भी बहुतों की यादों में जिंदा है.

## सवाल-जवाब

### 1. भारत में टेलीग्राम सेवा कब हमेशा के लिए बंद हुई थी?
14 जुलाई 2013 की रात बीएसएनएल ने भारत में टेलीग्राम सेवा हमेशा के लिए बंद कर दी थी.

### 2. भारत में तार सेवा की शुरुआत कब हुई थी?
5 नवंबर 1850 को कोलकाता और डायमंड हार्बर के बीच प्रयोग के तौर पर पहला तार भेजा गया था, जिसके साथ भारत में तार सेवा की शुरुआत हुई.

### 3. भारत का आखिरी आधिकारिक तार किसने भेजा था?
नागपुर से रात 11 बजकर 55 मिनट पर कविता वाघमारे नाम की महिला ने अपनी मां के नाम आखिरी आधिकारिक तार भेजा था.

### 4. दिल्ली से आखिरी तार किसके नाम भेजा गया था?
दिल्ली के सेंट्रल टेलीग्राफ ऑफिस से रात 11 बजकर 45 मिनट पर आखिरी तार राहुल गांधी के नाम भेजा गया था.

### 5. तार सेवा को बंद करने का फैसला क्यों लिया गया था?
यह सेवा हर साल करीब 100 करोड़ रुपये के घाटे में चल रही थी जबकि कमाई सिर्फ करीब 75 लाख रुपये होती थी, इसी वजह से 11 जून 2013 को बीएसएनएल ने इसे बंद करने का ऐलान किया था.

### 6. तार सेवा का स्वर्णकाल कब माना जाता है?
1985-86 का दौर तार सेवा का सबसे सुनहरा समय माना जाता है, जब देशभर में करीब 45 हजार तार घर काम कर रहे थे और हर साल करीब 6 करोड़ तार भेजे जाते थे.

### 7. बंद होने के आखिरी दिन कितने तार भेजे गए थे?
14 जुलाई 2013 को पूरे देश में करीब 20 हजार तार भेजे गए थे, जो सामान्य दिनों से कई गुना ज्यादा थे.

### 8. नागपुर से भेजे गए आखिरी तार में क्या लिखा था?
कविता वाघमारे ने अपनी मां के नाम मराठी भाषा में एक भावुक कविता लिखी थी, जिसमें तार सेवा की विदाई को एक युग के अंत जैसा बताया गया था.

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