ऑनलाइन गेमिंग और सट्टेबाजी गिरोह पर शिकंजा, मनी लॉन्ड्रिंग मामले में सागर दास गिरफ्तार प्रवर्तन निदेशालय ने अवैध सट्टेबाजी और साइबर जालसाजी के जरिये सैकड़ों करोड़ रुपये ठिकाने लगाने के आरोप में सागर दास को पकड़ा है. मुंबई की विशेष अदालत ने आरोपी को तीन दिन की एजेंसी हिरासत में भेज दिया है. अवैध ऑनलाइन गेमिंग, सट्टेबाजी और डिजिटल जालसाजी के एक बड़े नेटवर्क पर कानूनी शिकंजा कसते हुए प्रवर्तन निदेशालय की मुंबई जोनल शाखा ने सागर दास नाम के व्यक्ति को अपनी हिरासत में ले लिया है. आरोपी पर ऑल पैनल एक्सचेंज और उससे जुड़े विभिन्न डिजिटल मंचों के जरिये गैरकानूनी कामकाज संभालने के साथ ही आम लोगों से ठगी गई भारी-भरकम रकम को इधर-उधर स्थानांतरित करने के गंभीर आरोप लगे हैं. गिरफ्तारी के तुरंत बाद जांच एजेंसी ने उसे मुंबई स्थित विशेष पीएमएलए अदालत के समक्ष पेश किया, जहां न्यायाधीश ने मामले की तह तक जाने के लिए आरोपी को तीन दिन की रिमांड पर सौंपने का आदेश दिया. तीन प्राथमिकियों से खुली थी धोखाधड़ी की परतें जांच एजेंसी ने शनिवार को सार्वजनिक जानकारी साझा करते हुए स्पष्ट किया कि दास की यह धरपकड़ 27 अक्टूबर को धन शोधन निवारण अधिनियम के कड़े प्रावधानों के तहत अमल में लाई गई थी. इस पूरे मामले की जड़ें उन तीन अलग-अलग पुलिस प्राथमिकियों से जुड़ी हैं, जो ऑनलाइन गेमिंग, सट्टेबाजी और साइबर ठगी की शिकायतों पर दर्ज की गई थीं. इन मामलों में कई पीड़ितों ने शिकायत दर्ज कराई थी कि धोखेबाजों ने उन्हें बहला-फुसलाकर करोड़ों रुपये का भारी वित्तीय नुकसान पहुंचाया है. इसके बाद जब एजेंसी ने वित्तीय लेनदेन की पड़ताल शुरू की, तो कई फर्जी और बेनामी खातों की एक जटिल श्रृंखला सामने आई. म्यूल खातों और सहकारी संस्थाओं का मकड़जाल अवैध गतिविधियों से जुटाए गए पैसों को सफेद करने के लिए आरोपियों ने बेहद शातिर तरीका अपनाया था. ठगी का यह सारा धन सबसे पहले कई म्यूल खातों में भेजा गया, ताकि असली लाभार्थियों की पहचान छिपाई जा सके. इसके बाद रकम को हैदराबाद में स्थित जुबली हिल्स मर्केंटाइल कोऑपरेटिव बैंक के जरिए घुमाते हुए कई मुखौटा कंपनियों में भेजा गया. जांच में यह भी सामने आया कि इन शेल कंपनियों से भारी भरकम पूंजी बेंगलुरु की नगरभावी क्रेडिट कोऑपरेटिव सोसाइटी के नोडल खाते में अंतरित कर दी गई थी, ताकि धन के स्रोत को पूरी तरह से उलझाया जा सके. फर्जी दस्तावेजों से खोला गया था क्रिप्टो खाता पड़ताल के दौरान यह चौंकाने वाला तथ्य भी उजागर हुआ कि दास ने नगरभावी क्रेडिट कोऑपरेटिव सोसाइटी के केवाईसी विवरणों और कूटरचित कागजातों का दुरुपयोग करते हुए एक क्रिप्टोकरंसी खाता तैयार किया था. जांचकर्ताओं का आरोप है कि आरोपी ने इस सहकारी संस्था के बैंक खाते के जरिए सैकड़ों करोड़ रुपये के अवैध लेन-देन किए. इस विशालकाय राशि का एक प्रमुख हिस्सा उन मासूम लोगों से लूटा गया था, जो ऑनलाइन गेमिंग तथा सट्टेबाजी के डिजिटल जाल में फंसकर साइबर अपराध के शिकार बने थे. देशभर में छापेमारी और नौ करोड़ रुपये फ्रीज इस गिरोह के वित्तीय साम्राज्य को ध्वस्त करने के लिए एजेंसी ने देश के विभिन्न राज्यों में बड़े पैमाने पर तलाशी अभियान चलाया था. इसके तहत मुंबई, पुणे, बेंगलुरु, हैदराबाद के अलावा गुजरात के सूरत और मेहसाणा में संदिग्ध ठिकानों पर दबिश दी गई थी. इन छापों में जांच दल ने कई आपत्तिजनक दस्तावेज और डिजिटल सुराग जब्त किए, साथ ही विभिन्न बैंक खातों में जमा करीब नौ करोड़ रुपये की नकदी को तुरंत प्रभाव से फ्रीज करवा दिया. इसी नेटवर्क से जुड़े तार खंगालते हुए जांच दल ने पहले एडसम फिनटेक प्राइवेट लिमिटेड के मुख्य कार्यकारी अधिकारी राम यू. रामधानी को भी गिरफ्तार किया था. जांच एजेंसी ने साफ किया है कि अवैध नेटवर्क को जड़ से खत्म करने के लिए तफ्तीश लगातार आगे बढ़ाई जा रही है. इसका आप पर असर यह मामला रेखांकित करता है कि अवैध ऑनलाइन गेमिंग और सट्टेबाजी के मंच किस तरह लोगों को भारी वित्तीय जोखिम और कानूनी उलझनों में डालते हैं. • भारत में: डिजिटल सट्टेबाजी और गेमिंग ऐप्स पर दांव लगाने वाले सामान्य इंटरनेट यूजर्स को भारी वित्तीय नुकसान और साइबर ठगी का सीधा खतरा रहता है. नागरिकों को अपंजीकृत गेमिंग प्लेटफॉर्म्स और अज्ञात टेलीग्राम या सोशल मीडिया लिंक्स से पूरी तरह दूरी बनाए रखनी चाहिए. • खाताधारकों के लिए: म्यूल खातों और फर्जी दस्तावेजों के जरिए लेन-देन होने से अनजान लोगों के बैंक खाते भी जांच के दायरे में आ सकते हैं. अपने बैंक खाते, आधार और पैन कार्ड से जुड़े दस्तावेज कभी किसी तीसरे व्यक्ति या अनधिकृत ऐप के साथ साझा न करें. • निवेशकों के लिए: अवैध चैनलों और अनियंत्रित क्रिप्टो खातों के माध्यम से धन शोधन करने वाले सिंडिकेट्स पर जांच एजेंसियों का कड़ा रुख जारी है. किसी भी वित्तीय लेन-देन या निवेश के लिए केवल सेबी और आरबीआई द्वारा मान्यता प्राप्त अधिकृत संस्थाओं का ही उपयोग करें. • सहकारी संस्थाओं के लिए: क्रेडिट और मर्केंटाइल सहकारी बैंकों में सुरक्षा प्रोटोकॉल और नोडल खातों की निगरानी और कड़ी की जा सकती है. खाताधारकों को नियमित रूप से अपनी पासबुक और बैंक विवरणों में होने वाली अवांछित गतिविधियों पर नजर रखनी चाहिए. ऐसा क्यों हुआ यह कानूनी कार्रवाई साइबर ठगी, अवैध ऑनलाइन सट्टेबाजी और हवाला-शैली में धन शोधन करने वाले एक संगठित सिंडिकेट के भंडाफोड़ के बाद की गई है. • प्रत्यक्ष कारण: ऑल पैनल एक्सचेंज और संबंधित डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के जरिए आम नागरिकों से करोड़ों रुपये ठगे जाने की शिकायतों पर दर्ज तीन पुलिस प्राथमिकियों के आधार पर यह जांच शुरू हुई थी. जांच में पाया गया कि अपराध की कमाई को छिपाने के लिए अवैध बैंकिंग और क्रिप्टो माध्यमों का इस्तेमाल किया गया. • सिंडिकेट की कार्यप्रणाली: आरोपियों ने सीधे पैसे अपने पास मंगाने के बजाय पहले म्यूल बैंक खातों, फिर हैदराबाद के जुबली हिल्स मर्केंटाइल बैंक और कई शेल कंपनियों के जरिए फंड डायवर्ट किया. अंत में बेंगलुरु की एक क्रेडिट सहकारी संस्था के नोडल खाते और फर्जी दस्तावेजों से बने क्रिप्टो खाते के जरिए सैकड़ों करोड़ रुपये घुमाए गए. • पिछली कार्रवाइयां: जांच एजेंसी ने इससे पूर्व एडसम फिनटेक प्राइवेट लिमिटेड के सीईओ राम यू. रामधानी को पकड़ा था और कई राज्यों में व्यापक छापेमारी की थी. उन छापों में महत्वपूर्ण सबूतों के साथ नौ करोड़ रुपये के बैंक बैलेंस फ्रीज किए गए थे. • आगे की दिशा: विशेष अदालत द्वारा तीन दिन की हिरासत मिलने के बाद जांच दल अब आरोपी से पूछताछ कर पूरे सिंडिकेट के अन्य मास्टरमाइंड्स और अवैध संपत्तियों का ब्योरा जुटाएगा. मामले में आगे अन्य सहयोगियों की गिरफ्तारियां और अतिरिक्त जब्ती संभव है. सवाल-जवाब 1. प्रवर्तन निदेशालय ने किसे और क्यों गिरफ्तार किया है? एजेंसी ने सागर दास को ऑनलाइन गेमिंग, सट्टेबाजी और साइबर ठगी से जुड़े मामलों में सैकड़ों करोड़ रुपये की मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप में गिरफ्तार किया है. 2. आरोपी को कब गिरफ्तार किया गया और अदालत ने क्या आदेश दिया? दास को 27 अक्टूबर को पीएमएलए के तहत गिरफ्तार किया गया था और मुंबई की विशेष अदालत ने उसे तीन दिन की एजेंसी हिरासत में भेज दिया है. 3. धोखाधड़ी में किन प्लेटफॉर्म्स और कंपनियों के नाम सामने आए हैं? मामले में ऑल पैनल एक्सचेंज और उससे जुड़े ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स, कई शेल कंपनियों तथा एडसम फिनटेक प्राइवेट लिमिटेड का नाम सामने आया है. 4. रकम को ठिकाने लगाने के लिए किन वित्तीय संस्थानों का दुरुपयोग किया गया? हैदराबाद स्थित जुबली हिल्स मर्केंटाइल कोऑपरेटिव बैंक और बेंगलुरु की नगरभावी क्रेडिट कोऑपरेटिव सोसाइटी के खातों का इस्तेमाल रकम डायवर्ट करने के लिए किया गया. 5. क्रिप्टोकरंसी का इस्तेमाल इस मामले में कैसे किया गया? आरोपी ने नगरभावी क्रेडिट कोऑपरेटिव सोसाइटी के केवाईसी विवरण और जाली दस्तावेजों का सहारा लेकर एक क्रिप्टोकरंसी खाता खोला था, जिसके माध्यम से लेन-देन किए गए. 6. छापेमारी के दौरान जांच दल ने क्या बरामद और फ्रीज किया? देशभर के विभिन्न शहरों में तलाशी के दौरान आपत्तिजनक दस्तावेज बरामद किए गए और विभिन्न बैंक खातों में जमा करीब नौ करोड़ रुपये फ्रीज किए गए. https://trendkia.com/national/nalaina-geminga-aura-sattebaji-giroha-para-shiknja-mani-londringa-mamale-men-sagar-das-giraphtara-53830 TrendKia — Har trend, sabse pehle.