# ऑनलाइन पत्रिका सौत अल हिंद के जरिए युवाओं को भड़काने वाले चार आतंकियों को मिली कैद

> प्रतिबंधित आतंकी संगठन आईएसआईएस की भारत केंद्रित डिजिटल पत्रिका चलाकर युवाओं को बरगलाने के जुर्म में विशेष अदालत ने चार मुजरिमों को कारावास और जुर्माने की सजा दी है।

**Type:** article · **Category:** भारत · **Published:** 2026-09-29 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/national/nalaina-patrika-sawt-al-hind-ke-jarie-yuvaon-ko-bharakane-vale-chara-atnkiyon-ko-mili-kaida-40008 · **Language:** Hindi
**Tags:** एनआईए कोर्ट, इस्लामिक स्टेट, वॉइस ऑफ हिंद, राउज एवेन्यू कोर्ट, यूएपीए, आतंकी साजिश

प्रतिबंधित आतंकी संगठन इस्लामिक स्टेट से जुड़े एक बड़े दुष्प्रचार नेटवर्क पर कानून का शिकंजा कस गया है। देश के युवाओं में जहर घोलने और उन्हें हिंसक गतिविधियों की तरफ धकेलने की साजिश रचने वाले चार मुजरिमों को विशेष अदालत ने कठोर कारावास की सजा सुनाई है। राउज एवेन्यू जिला अदालत परिसर में स्थित राष्ट्रीय जांच एजेंसी की स्पेशल कोर्ट संख्या 01 ने सोमवार को यह अहम फैसला दिया। अदालत ने उमर निसार उर्फ कासिम खुरासानी, रमीज अहमद लोन और तनवीर अहमद भट को छह-छह वर्ष के सश्रम कारावास का हुक्म सुनाया, जबकि इसी गिरोह के चौथे साथी अफशान परवेज जराबी को पांच साल की सख्त कैद भुगतने का आदेश दिया गया है।

विशेष अदालत ने कैद के साथ ही चारों मुजरिमों पर नकद जुर्माना भी लगाया है। अदालत के आदेश के मुताबिक उमर निसार को 36 हजार रुपये, रमीज अहमद लोन को 31 हजार रुपये, तनवीर अहमद भट को 23 हजार रुपये और अफशान परवेज जराबी को 9 हजार रुपये का जुर्माना भरना होगा। पीठ ने स्पष्ट किया कि सभी दोषियों की सजाएं एक साथ चलेंगी। इस फैसले से पहले अदालत ने 17 सितंबर को सुनवाई के दौरान चारों आरोपियों को आपराधिक साजिश, गैरकानूनी गतिविधियां रोकथाम अधिनियम यानी यूएपीए और भारतीय दंड संहिता की संबंधित धाराओं में मुजरिम करार दे दिया था।

## डिजिटल पत्रिका से चल रही थी भर्ती और ब्रेनवॉश की साजिश
जांच एजेंसी की पड़ताल में खुलासा हुआ कि यह पूरा नेटवर्क इस्लामिक स्टेट की सोची-समझी योजना के तहत काम कर रहा था। साजिश का मुख्य मकसद भारतीय नौजवानों को ऑनलाइन कट्टरपंथी विचारधारा की ओर खींचना और उन्हें आतंकी तंजीम में भर्ती करना था। इसके लिए गिरोह ने एक व्यापक इंटरनेट अभियान छेड़ा हुआ था। नेटवर्क से जुड़े गुर्गे फर्जी डिजिटल पहचान का सहारा लेकर सोशल मीडिया पर सक्रिय रहते थे और चरमपंथी सामग्री परोसते थे। जांच में यह भी सामने आया कि यह गिरोह केवल भड़काऊ बातें फैलाने तक सीमित नहीं था, बल्कि जमीनी स्तर पर आतंकी वारदातों को अंजाम देने के लिए जरूरी रकम का बंदोबस्त भी कर रहा था।

पूछताछ और छानबीन में साफ हुआ कि आरोपी इस्लामिक स्टेट की भारत पर केंद्रित खास पत्रिका 'सौत-अल-हिंद', जिसे आम तौर पर 'वॉइस ऑफ हिंद' भी कहा जाता है, के निर्माण और वितरण का पूरा काम संभाल रहे थे। सामग्री जुटाने से लेकर उसका संपादन करने, डिजिटल पन्नों को अंतिम रूप देने और इंटरनेट पर अलग-अलग मंचों पर साझा करने का जिम्मा इसी मॉड्यूल के पास था। इनका अंतिम लक्ष्य भारतीय युवकों को इस हद तक उकसाना था कि वे भारत से निकलकर सीरिया, इराक और अफगानिस्तान जैसे हिंसक संघर्ष वाले देशों में जाकर इस्लामिक स्टेट के लड़ाके बन जाएं।

## हर मुजरिम का तय था अलग काम
अदालत में पेश किए गए सबूतों के आधार पर चारों की अलग-अलग जिम्मेदारियां साबित हुईं। उमर निसार उर्फ कासिम खुरासानी इस सिंडिकेट का अहम मोहरा था, जो 'वॉइस ऑफ हिंद' पत्रिका, टेलीग्राम चैनलों और दूसरे इंटरनेट माध्यमों से भड़काऊ सामग्री फैलाकर युवाओं को संगठन से जोड़ने और उनकी भर्ती का जिम्मा संभालता था। वहीं रमीज अहमद लोन और तनवीर अहमद भट का काम चरमपंथी सोच को जनमानस में पहुंचाना और युवाओं को संगठन में शामिल होने के लिए मनोवैज्ञानिक तौर पर तैयार करना था। चौथे दोषी अफशान परवेज जराबी की भूमिका मुख्य रूप से टेलीग्राम चैनलों पर पत्रिका के लेखों को पोस्ट करने, उन्हें बड़े पैमाने पर फैलाने और संगठन के एजेंडे को हवा देने की थी।

## तलाशी में मिले भड़काऊ पोस्टर, ऑडियो और हथियारों की चैट
जांच के दौरान एजेंसी ने आरोपियों के ठिकानों पर की गई छापेमारी में डिजिटल उपकरणों और दस्तावेजों का बड़ा जखीरा बरामद किया था। जब्त सामान में 'वॉइस ऑफ हिंद' पत्रिका की पीडीएफ फाइलें, मुठभेड़ों में ढेर किए गए आतंकियों की तस्वीरें और पोस्टर, चरमपंथी साहित्य और प्रतिबंधित संगठन के वेब लिंक शामिल थे। इसके अलावा इस्लामिक स्टेट के झंडे छपी टी-शर्ट, संगठन के बैनर, हथियार और गोला-बारूद खरीदने से जुड़ी बातचीत के चैट रिकॉर्ड और ऑडियो फाइलें भी बरामद हुई थीं। बरामद दस्तावेजों में मनोवैज्ञानिक युद्ध और मीडिया प्रचार से जुड़े अहम दस्तावेज भी शामिल थे।

एजेंसी ने इस पूरे षड्यंत्र का पर्दाफाश करते हुए अदालत में कुल आठ आरोपियों के खिलाफ मुख्य आरोपपत्र और चार पूरक आरोपपत्र दाखिल किए थे। इन दस्तावेजों में विस्तार से बताया गया कि कैसे इस मॉड्यूल ने देश की सुरक्षा को खतरे में डालने के लिए इंटरनेट को जरिया बनाया। मामले में इन चार दोषियों को सजा सुना दी गई है, जबकि आरोपपत्र में नामजद बाकी आरोपियों के खिलाफ अदालत में न्यायिक प्रक्रिया और मुकदमा जारी है।

## इसका आप पर असर
यह न्यायिक फैसला देश में इंटरनेट के जरिए युवाओं को भड़काने वाले संगठित आतंकी तंत्र पर बड़ी कानूनी चोट है।

- **भारत में:** सुरक्षा और खुफिया तंत्र अब सोशल मीडिया पर छिपे संदिग्ध खातों और प्रतिबंधित ऑनलाइन पत्रिकाओं पर निगरानी और सख्त करेगा। आम इंटरनेट उपभोक्ताओं और अभिभावकों को अपने आसपास संदिग्ध डिजिटल गतिविधियों व चरमपंथी लिंक के प्रति सतर्क रहने की आवश्यकता होगी।
- **नई दिल्ली में:** राष्ट्रीय राजधानी की विशेष अदालत से आया यह फैसला ऑनलाइन चरमपंथ के मामलों में कानूनी मिसाल कायम करेगा। शहर की अदालतों में लंबित इसी सिंडिकेट के बाकी आरोपियों के खिलाफ मुकदमों की सुनवाई में भी तेजी देखने को मिलेगी।

## ऐसा क्यों हुआ
यह घटनाक्रम इसलिए सामने आया क्योंकि प्रतिबंधित संगठन इस्लामिक स्टेट ने भारत में युवाओं की भर्ती के लिए इंटरनेट और अपनी विशेष प्रचार पत्रिका को हथियार बनाया था। सुरक्षा एजेंसियों की समय पर कार्रवाई ने इस डिजिटल सिंडिकेट को बेनकाब कर दिया।

- **सीधा कारण:** आरोपियों ने युवाओं का ब्रेनवॉश करने के लिए 'सौत-अल-हिंद' पत्रिका प्रकाशित की और सोशल मीडिया पर कट्टरपंथी सामग्री फैलाई। जांच एजेंसी ने डिजिटल सबूत और हथियारों की चैट जब्त कर अदालत में पुख्ता आरोप साबित किए।
- **इंटरनेट का दुरुपयोग:** आरोपियों ने असली पहचान छिपाकर फर्जी ऑनलाइन प्रोफाइल और टेलीग्राम जैसे एन्क्रिप्टेड माध्यमों से युवाओं को सीरिया, इराक और अफगानिस्तान भेजने का प्रयास किया। साथ ही जमीनी गतिविधियों के लिए वित्तीय संसाधन जुटाने की कोशिश भी की गई।
- **आगे की कार्रवाई:** अदालत ने चार प्रमुख दोषियों को सजा और जुर्माना सुनाकर स्पष्ट संदेश दिया है। मामले में नामजद बाकी चार आरोपियों के खिलाफ विशेष अदालत में कानूनी मुकदमा आगे जारी रहेगा।

## सवाल-जवाब

### 1. विशेष अदालत ने किन-किन दोषियों को सजा सुनाई है?
अदालत ने उमर निसार उर्फ कासिम खुरासानी, रमीज अहमद लोन और तनवीर अहमद भट को छह-छह साल की तथा अफशान परवेज जराबी को पांच साल की कठोर कैद की सजा सुनाई है।

### 2. मुजरिमों पर कितना जुर्माना लगाया गया है?
अदालत ने उमर निसार पर 36 हजार रुपये, रमीज लोन पर 31 हजार रुपये, तनवीर भट पर 23 हजार रुपये और अफशान जराबी पर 9 हजार रुपये का जुर्माना तय किया है।

### 3. आरोपी किस तरह की सामग्री इंटरनेट पर फैला रहे थे?
वे 'वॉइस ऑफ हिंद' पत्रिका की पीडीएफ फाइलें, मारे गए आतंकियों के पोस्टर, भड़काऊ साहित्य और हथियार खरीदने से संबंधित संदेश प्रसारित कर रहे थे।

### 4. इस मामले में कुल कितने लोगों पर आरोपपत्र दाखिल हुआ था?
जांच एजेंसी ने मामले में कुल आठ आरोपियों के खिलाफ आरोपपत्र और चार पूरक आरोपपत्र दाखिल किए थे, जिनमें से चार को सजा सुनाई गई है।

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