न्हावा शेवा पोर्ट पर बिना अलर्ट वाले कंटेनर को सीआईएसएफ जवान ने रोका, निकलीं 246 वॉशिंग मशीनें न्हावा शेवा पोर्ट पर एक कंटेनर को लेकर न कोई अलर्ट था और न कोई सिग्नल, फिर भी सीआईएसएफ के एक जवान को शक हुआ और तलाशी में करीब 71 लाख 40 हजार रुपये की 246 वॉशिंग मशीनें बरामद हुईं। न्हावा शेवा पोर्ट के यार्ड से गुजर रहे एक कंटेनर पर न कोई सिस्टम अलर्ट बजा था, न किसी वॉचलिस्ट में उसका नाम था, फिर भी जवाहरलाल नेहरू पोर्ट अथॉरिटी में तैनात सीआईएसएफ के एक जवान ने सिर्फ अपने शक के दम पर उसे रोक लिया। यही शक आगे चलकर करीब 71 लाख 40 हजार रुपये के एक बड़े खेल का पर्दाफाश कर गया। बिना किसी चेतावनी के गुजर रहा था कंटेनर न्हावा शेवा टर्मिनल पर हर रोज करोड़ों रुपये का माल आता-जाता है, और इसमें से सारा कारोबार कानूनी रास्तों से नहीं होता। यहां तैनात सीआईएसएफ के जवान लगातार उन कंटेनरों पर नजर रखते हैं, जिनके जरिए सामान को गलत तरीके से पोर्ट से बाहर भेजने की कोशिश हो सकती है। उस दिन जिस कंटेनर पर शक हुआ, उसके लिए न तो कोई अलर्ट जारी हुआ था और न ही कोई सिग्नल मिला था। लेकिन कंटेनर की हरकत और उसके आसपास मंडरा रहे कुछ लोगों का रवैया देखकर तैनात जवान को कुछ गड़बड़ होने का अंदेशा हुआ। उस वक्त उसके पास कोई पक्का सबूत नहीं था, बस मन में बार-बार यही खटक रहा था कि यहां कुछ ठीक नहीं है। मिनटों में घेर लिया गया कंटेनर कंटेनर को यूं ही जाने देने के बजाय जवान ने तुरंत अपने साथी जवानों को सतर्क किया और दोनों ने मिलकर बीच रास्ते में ही कंटेनर को रोक दिया। देखते ही देखते सीआईएसएफ के जवानों ने कंटेनर के चारों ओर घेरा बना लिया और कड़ी निगरानी में उसे सीधे सीएफए यार्ड ले जाया गया। इसकी सूचना ऊपर तक पहुंचाई गई और मौके पर कस्टम्स की एक स्पेशल टीम को भी बुला लिया गया। एक्स-रे स्कैन में सामने आया झोल कस्टम्स अधिकारियों की मौजूदगी में सील खोलने से पहले कंटेनर को हाई-पावर एक्स-रे स्कैनर से गुजारा गया। स्कैनिंग में जो तस्वीर उभरी, वह दस्तावेजों में दर्ज माल के ब्योरे से मेल नहीं खा रही थी। यही अंतर पूरी तलाशी के लिए काफी था। इसके बाद कंटेनर की सील तोड़ी गई, कटर की मदद ली गई और लोहे के भारी दरवाजों को जबरदस्ती खोला गया। 246 वॉशिंग मशीनें निकलीं बाहर इसके बाद शुरू हुआ पूरी तरह का सर्च ऑपरेशन, जिसमें सीआईएसएफ के जवान और कस्टम्स अधिकारी मिलकर एक-एक सामान बाहर निकालने में जुट गए। गिनती पूरी होने तक सामने ब्रांड-न्यू फ्रंट-लोड वॉशिंग मशीनों की कतार लग चुकी थी, कुल 246 मशीनें, जिनमें से 147 मशीनें 6 किलो क्षमता की और 99 मशीनें 8 किलो क्षमता की थीं। इन सभी की कुल कीमत करीब 71 लाख 40 हजार रुपये आंकी गई, यानी एक अकेले कंटेनर से इतना बड़ा माल निकलना ड्यूटी पर मौजूद किसी के लिए भी हैरानी की बात थी। अंदर कुछ छिपा तो नहीं, हर पुर्जा हुआ चेक एक्स-रे में मिले फर्क को देखते हुए अधिकारी सिर्फ मशीनें गिनकर संतुष्ट नहीं हुए। हर मशीन के ड्रम और पुर्जों की बारीकी से जांच की गई, ताकि यह पक्का हो सके कि कहीं अंदर कोई नशीला पदार्थ, हथियार या तस्करी का कोई और सामान तो नहीं छिपाया गया। राहत की बात रही कि किसी भी मशीन के अंदर से कोई कंसील्ड चीज बरामद नहीं हुई। पोर्ट सिक्योरिटी में सीआईएसएफ की नई भूमिका यह मामला ऐसे वक्त सामने आया है जब सीआईएसएफ को इंटरनेशनल शिप एंड पोर्ट फैसिलिटी सिक्योरिटी यानी ISPS कोड के तहत देशभर की पोर्ट फैसिलिटीज के लिए रिकग्नाइज्ड सिक्योरिटी ऑर्गेनाइजेशन यानी RSO का दर्जा मिले ज्यादा वक्त नहीं हुआ है। यह अधिकार सीआईएसएफ को 6 मई 2026 को दिया गया था। फिलहाल सीआईएसएफ देश के 13 बड़े बंदरगाहों की सुरक्षा संभाल रही है और जवाहरलाल नेहरू पोर्ट अथॉरिटी भी इन्हीं में शामिल है। इसका आप पर असर यह मामला सीधे आम आदमी की जेब से नहीं जुड़ा है, लेकिन इससे पोर्ट पर होने वाली सख्ती और तस्करी पकड़ने के तरीके पर असर पड़ सकता है। • भारत में: सीआईएसएफ को अब देश के 13 बड़े बंदरगाहों की सुरक्षा जिम्मेदारी मिली है, यानी आने वाले वक्त में इम्पोर्ट-एक्सपोर्ट करने वाले कारोबारियों को दस्तावेजों और घोषित माल के मिलान पर पहले से ज्यादा सख्त जांच का सामना करना पड़ सकता है। जो कंपनियां गलत घोषणा या अंडर-इनवॉइसिंग का सहारा लेती हैं, उनके पकड़े जाने का खतरा अब पहले से ज्यादा बढ़ गया है। • न्हावा शेवा और आसपास के इलाकों में: जवाहरलाल नेहरू पोर्ट अथॉरिटी से जुड़े ट्रांसपोर्टर्स, क्लियरिंग एजेंट्स और कस्टम्स से डील करने वाले कारोबारियों को कंटेनर की जांच में पहले से ज्यादा समय और सतर्कता का सामना करना पड़ सकता है। जिनका माल पूरी तरह वैध है, उनके लिए भी एक्स-रे स्कैनिंग और अतिरिक्त जांच के चलते डिलीवरी में मामूली देरी हो सकती है। सवाल-जवाब 1. यह घटना कहां हुई? जवाहरलाल नेहरू पोर्ट अथॉरिटी के न्हावा शेवा पोर्ट पर। 2. कंटेनर में क्या मिला? 246 ब्रांड-न्यू फ्रंट-लोड वॉशिंग मशीनें, जिनमें 147 मशीनें 6 किलो और 99 मशीनें 8 किलो क्षमता की थीं। 3. बरामद माल की कीमत कितनी आंकी गई? करीब 71 लाख 40 हजार रुपये। 4. कंटेनर पर शक क्यों हुआ? कोई अलर्ट या सिग्नल न होने के बावजूद कंटेनर की हरकत और आसपास के लोगों के रवैये को देखकर सीआईएसएफ जवान को शक हुआ। 5. क्या मशीनों के अंदर कुछ और छिपा हुआ पाया गया? नहीं, जांच में कोई नशीला पदार्थ, हथियार या तस्करी का अन्य सामान नहीं मिला। 6. सीआईएसएफ को पोर्ट सुरक्षा की जिम्मेदारी कब मिली? 6 मई 2026 को, ISPS कोड के तहत RSO का दर्जा मिलने पर। 7. सीआईएसएफ फिलहाल कितने बंदरगाहों की सुरक्षा संभाल रही है? देश के 13 बड़े बंदरगाहों की, जिसमें जवाहरलाल नेहरू पोर्ट अथॉरिटी भी शामिल है। https://trendkia.com/national/nhava-sheva-porta-para-bina-alarta-vale-kntenara-ko-cisf-javana-ne-roka-nikalin-246-voshinga-mashinen-28593 TrendKia — Har trend, sabse pehle.