# निजी कंपनियों में भी लागू हो चाइल्ड केयर लीव और मिले पिताओं को 365 दिन की छुट्टी, राष्ट्रीय महिला आयोग का बड़ा प्रस्ताव

> राष्ट्रीय महिला आयोग ने केंद्र सरकार को 37 सिफारिशों वाली विस्तृत रिपोर्ट सौंपी है, जिसमें निजी क्षेत्र में चाइल्ड केयर लीव लागू करने और 730 दिनों के अवकाश को माता-पिता के बीच बराबर बांटने की वकालत की गई है।

**Type:** article · **Category:** भारत · **Published:** 2026-10-02 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/national/niji-knpaniyon-men-bhi-lagu-ho-chailda-keyara-liva-aura-mile-pitaon-ko-365-dina-ki-chhutti-ncw-ka-bara-prastava-41970 · **Language:** Hindi
**Tags:** राष्ट्रीय महिला आयोग, चाइल्ड केयर लीव, पैटर्निटी लीव, मातृत्व अवकाश, निजी क्षेत्र, क्रेच सुविधा, श्रम कानून, कामकाजी महिलाएं

कामकाजी माता-पिताओं के लिए बच्चों का लालन-पालन आसान बनाने की दिशा में एक बड़ा नीतिगत बदलाव देखने को मिल सकता है। राष्ट्रीय महिला आयोग ने केंद्र सरकार के समक्ष नौ महत्वपूर्ण क्षेत्रों से संबंधित 37 ठोस सिफारिशें प्रस्तुत की हैं। इस विस्तृत मसौदे को कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग, महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के साथ-साथ श्रम एवं रोजगार मंत्रालय को औपचारिक रूप से विचारार्थ भेजा गया है। आयोग का मुख्य उद्देश्य मातृत्व अवकाश और शिशु देखभाल के नियमों को अधिक व्यावहारिक बनाते हुए दोनों अभिभावकों की समान भागीदारी सुनिश्चित करना है।

## चाइल्ड केयर लीव का जेंडर-न्यूट्रल स्वरूप और पिताओं की हिस्सेदारी
शिशु संरक्षण अवकाश को लेकर वर्तमान व्यवस्था में आयोग ने आमूलचूल बदलाव की पैरवी की है। अभी तक यह सुविधा मुख्य रूप से केवल माताओं के इर्द-गिर्द केंद्रित रही है, परंतु आयोग इसे जेंडर-न्यूट्रल रूप में ढालना चाहता है। योजना के अनुसार, निर्धारित 730 दिनों के कुल चाइल्ड केयर लीव को माता और पिता के मध्य 365-365 दिनों में विभाजित करने का सुझाव रखा गया है। यदि दोनों पति-पत्नी किसी एक ही संस्थान में कार्यरत हैं, तो उनके लिए संयुक्त अवकाश पूल तैयार करने की सुविधा दी जा सकती है। इसके अतिरिक्त, नवजात से लेकर दो वर्ष तक के नन्हे बच्चों की परवरिश के लिए माता-पिता के बीच 60 और 40 के अनुपात में साझा देखभाल मॉडल अपनाने का मार्ग सुझाया गया है।

## निजी क्षेत्र और कॉरपोरेट जगत में विस्तार
अब तक बच्चों की देखभाल से जुड़ी यह लंबी छुट्टी मुख्यतः सरकारी प्रतिष्ठानों तक ही सीमित रही है। महिला आयोग ने पहली मर्तबा इसे निजी कंपनियों में भी कानूनी रूप से प्रभावी बनाने का खाका तैयार किया है। कॉरपोरेट ढांचे पर अचानक भारी दबाव न पड़े, इसलिए इसे क्रमिक ढंग से लागू करने का परामर्श दिया गया है। शुरुआत में विशाल औद्योगिक इकाइयों को इस परिधि में लाया जाएगा और तदुपरांत मध्यम व लघु श्रेणी के व्यवसायों को इससे जोड़ा जाएगा। इस व्यवस्था को व्यावहारिक धरातल पर उतारने हेतु सामाजिक सुरक्षा संहिता के प्रावधानों में संशोधन का प्रस्ताव रखा गया है।

## अनिवार्य पेड पैटर्निटी लीव की सिफारिश
शिशु के पालन-पोषण का सारा दायित्व केवल मां के कंधों पर डालने की पुरानी परिपाटी को बदलने पर आयोग ने जोर दिया है। निजी कंपनियों तथा असंगठित कार्यक्षेत्र सहित सभी रोजगार श्रेणियों में सवेतन पैटर्निटी लीव को अनिवार्य बनाने की अनुशंसा की गई है। महिला आयोग का स्पष्ट मानना है कि जीवन के शुरुआती पड़ाव में संतान की सार-संभाल में पिता की भी सक्रिय उपस्थिति रहनी चाहिए, जिससे घर और दफ्तर के बीच संतुलन साधने में आसानी हो।

## राष्ट्रीय बाल देखभाल अवसंरचना मिशन और पांच लाख क्रेच सीटें
दफ्तर जाने वाली महिलाओं के समक्ष बच्चों को सुरक्षित माहौल में छोड़ने की चिंता हमेशा बनी रहती है। इस अड़चन को दूर करने के लिए राष्ट्रीय बाल देखभाल अवसंरचना मिशन आरंभ करने की रूपरेखा पेश की गई है। इस मिशन के अंतर्गत वर्ष 2030 तक पूरे देश में 5 लाख आधुनिक क्रेच सीटें तैयार करने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा गया है। इसके लिए कार्यस्थल परिसर में क्रेच, कई दफ्तरों के लिए साझी डे-केयर सुविधाएं तथा राज्य स्तर पर विशेष बाल देखभाल कोष स्थापित करने के विकल्प शामिल किए गए हैं।

## गिग कामगारों और असंगठित क्षेत्र की सुरक्षा
प्लेटफॉर्म आधारित और असंगठित क्षेत्र में कार्य कर रही महिलाओं को आवश्यक मातृत्व सहायता से वंचित रहने की समस्या पर भी ध्यान खींचा गया है। इस अंतर को पाटने के लिए एक समर्पित मातृत्व एवं बाल देखभाल कोष के गठन का प्रस्ताव सामने आया है। इसके साथ ही प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना को सार्वभौमिक स्तर पर लागू करते हुए इसे एक विधिक अधिकार का दर्जा देने की मांग रखी गई है, ताकि प्रत्येक कामकाजी महिला को आर्थिक संबल मिल सके।

## गोद लेने वाली माताओं को राहत और कार्यस्थल पर बेहतर सुविधाएं
जैविक माताओं की भांति ही गोद लेने वाली तथा सरोगेसी से जुड़ी कमीशनिंग माताओं को भी समान अधिकार देने की वकालत की गई है। इनके लिए मिलने वाली 12 हफ्तों की छुट्टी को बढ़ाकर 26 सप्ताह करने का आग्रह किया गया है। वहीं कार्यस्थलों पर स्तनपान कराने वाली माताओं के वर्तमान 15 मिनट के विश्राम समय को बढ़ाकर 30 मिनट करने का प्रस्ताव है। कंपनियों एवं कारखानों में अलग से साफ-सुथरे लैक्टेशन रूम स्थापित करने और इन नियमों का सख्ती से अनुपालन सुनिश्चित कराने की बात कही गई है।

## तीन बच्चों तक लाभ और करियर में समानता
वर्तमान में दो संतानों तक सीमित चाइल्ड केयर लीव के नियम पर भी पुनर्विचार करने की सलाह दी गई है। रिपोर्ट के अनुसार, चरणबद्ध प्रक्रिया अपनाते हुए तीसरे बच्चे के जन्म पर भी इस छुट्टी का लाभ विस्तारित किया जा सकता है। आयोग ने इस बात को रेखांकित किया है कि मातृत्व के कारण किसी भी महिला के करियर की रफ्तार धीमी नहीं पड़नी चाहिए। भर्ती प्रक्रिया, पदोन्नति, वेतन निर्धारण और पेंशन से जुड़े मामलों में मातृत्व अवकाश के आधार पर किसी भी प्रकार के पक्षपात को समाप्त करने तथा कार्यस्थलों की सोच में सकारात्मक परिवर्तन लाने का आह्वान किया गया है।

## इसका आप पर असर
इस प्रस्ताव के कानून बनने से निजी क्षेत्र के करोड़ों कामकाजी अभिभावकों और उनके परिवारों के दैनिक जीवन में सीधा सुधार आएगा।

- **वेतनभोगी पिताओं के लिए:** निजी और असंगठित क्षेत्र में अनिवार्य सवेतन पैटर्निटी अवकाश तथा 365 दिन तक की चाइल्ड केयर लीव का अधिकार मिलेगा। इससे पिता बिना नौकरी या आय गंवाए शुरुआती वर्षों में बच्चे की देखभाल में सक्रिय रूप से हाथ बंटा सकेंगे।
- **कामकाजी माताओं के लिए:** 2030 तक 5 लाख क्रेच सीटें तैयार होने और 30 मिनट के नर्सिंग ब्रेक से दफ्तर वापसी आसान होगी। इससे करियर में बच्चों की वजह से आने वाले ब्रेक या नौकरी छूटने की आशंका में भारी कमी आएगी।
- **गोद लेने वाले परिवारों के लिए:** एडॉप्टिव और कमीशनिंग माताओं की छुट्टी 12 हफ्ते से बढ़कर 26 हफ्ते होने का रास्ता खुलेगा। इससे दत्तक बच्चों की शुरुआती भावनात्मक और शारीरिक देखभाल जैविक संतानों के बराबर समय में हो सकेगी।
- **गिग एवं असंगठित महिला श्रमिकों के लिए:** विशेष मातृत्व कोष और प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना के विधिक अधिकार बनने से बुनियादी वित्तीय सुरक्षा मिलेगी। प्लेटफॉर्म और असंगठित कामगार महिलाएं बिना अपनी आजीविका खोए मातृत्व सहायता पा सकेंगी।

## ऐसा क्यों हुआ
मौजूदा भारतीय श्रम व्यवस्था में बच्चों की देखभाल का अधिकांश बोझ महिलाओं पर पड़ने और निजी क्षेत्र में पर्याप्त सुरक्षा न होने के कारण यह व्यापक रिपोर्ट तैयार की गई है।

- **शिशु देखभाल का असंतुलित ढांचा:** मौजूदा नियमों में चाइल्ड केयर लीव केवल सरकारी महिला कर्मचारियों तक सीमित थी, जिससे निजी क्षेत्र की माताओं को करियर छोड़ना पड़ता था। इस लैंगिक असमानता को समाप्त करने और पिताओं को जिम्मेदारी में जोड़ने के लिए नियमों को जेंडर-न्यूट्रल बनाने की मांग उठी।
- **निजी क्षेत्र में कानूनी संरक्षण का अभाव:** कॉरपोरेट जगत में सवेतन पैटर्निटी लीव का कोई केंद्रीय अनिवार्य कानून न होने से पुरुष कर्मचारियों को बच्चों के जन्म पर छुट्टियां नहीं मिल पाती थीं। इसे दूर करने के लिए सामाजिक सुरक्षा संहिता में संशोधन का आधार तैयार किया गया।
- **कार्यस्थलों पर बुनियादी ढांचे की कमी:** देश में कामकाजी महिलाओं की बढ़ती संख्या के अनुपात में भरोसेमंद डे-केयर या क्रेच सुविधाओं का भारी अभाव देखा जा रहा था। इसी कमी की भरपाई के लिए 2030 तक पांच लाख सीटें तैयार करने का राष्ट्रीय मिशन प्रस्तावित किया गया।
- **असंगठित एवं गिग क्षेत्र का विस्तार:** डिजिटल प्लेटफॉर्म और असंगठित क्षेत्रों में महिला कामगारों की तादाद तेजी से बढ़ी है, परंतु वे पारंपरिक मातृत्व सुरक्षा लाभों से पूरी तरह बाहर रही हैं। आयोग ने इसी सामाजिक अंतर को पाटने के लिए अलग कल्याणकारी कोष की सिफारिश की है।

## सवाल-जवाब

### 1. राष्ट्रीय महिला आयोग ने चाइल्ड केयर लीव को लेकर क्या मुख्य सुझाव दिया है?
आयोग ने 730 दिनों की कुल चाइल्ड केयर लीव को जेंडर-न्यूट्रल बनाकर माता और पिता दोनों के बीच 365-365 दिनों में समान रूप से बांटने का प्रस्ताव दिया है।

### 2. क्या निजी क्षेत्र के कर्मचारियों को भी अब चाइल्ड केयर लीव मिलेगी?
आयोग ने निजी कंपनियों में भी इसे लागू करने की सिफारिश की है, जिसे बड़े उद्योगों से शुरू करके चरणबद्ध तरीके से मध्यम व छोटे उद्योगों तक बढ़ाया जाएगा।

### 3. पैटर्निटी लीव को लेकर रिपोर्ट में क्या कहा गया है?
निजी और असंगठित क्षेत्र सहित सभी कार्यक्षेत्रों में पिताओं के लिए सवेतन पैटर्निटी लीव अनिवार्य करने की अनुशंसा की गई है।

### 4. क्रेच सुविधाओं के लिए क्या लक्ष्य तय किया गया है?
राष्ट्रीय बाल देखभाल अवसंरचना मिशन के तहत वर्ष 2030 तक पूरे देश में पांच लाख क्रेच सीटें तैयार करने का प्रस्ताव रखा गया है।

### 5. गोद लेने वाली माताओं के लिए मातृत्व अवकाश कितना बढ़ाने की सिफारिश है?
दत्तक और कमीशनिंग माताओं के लिए मौजूदा 12 हफ्तों की छुट्टी को बढ़ाकर जैविक माताओं के समान 26 सप्ताह करने का सुझाव है।

### 6. दफ्तरों में स्तनपान कराने वाली माताओं के लिए क्या बदलाव प्रस्तावित हैं?
नर्सिंग ब्रेक को 15 मिनट से बढ़ाकर 30 मिनट करने और दफ्तरों व कारखानों में अलग लैक्टेशन रूम स्थापित करने की सिफारिश की गई है।

### 7. यह रिपोर्ट किन सरकारी मंत्रालयों और विभागों को भेजी गई है?
यह सिफारिश रिपोर्ट कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (DoPT), महिला एवं बाल विकास मंत्रालय और श्रम एवं रोजगार मंत्रालय को सौंपी गई है।

### 8. क्या तीन बच्चों वाले परिवारों को भी चाइल्ड केयर लीव मिल सकेगी?
आयोग ने मौजूदा दो बच्चों की सीमा पर पुनर्विचार करते हुए इसे चरणबद्ध तरीके से तीसरे बच्चे तक विस्तारित करने का प्रस्ताव दिया है।

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