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  "type": "article",
  "title": "नोएडा से राजधानी जाने वाले मुसाफिरों पर क्यों भारी पड़ रहा डीएनडी एक्सप्रेसवे का यह संकरा मोड़",
  "summary": "क्षमता से तीन गुना अधिक गाड़ियों की आवाजाही और आगे जाकर अचानक घटती लेनों के चलते दिल्ली-नोएडा मार्ग पर हर दिन भारी ट्रैफिक जाम की समस्या खड़ी हो रही है।",
  "content": "नोएडा और देश की राजधानी के बीच रोजाना सफर करने वाले लाखों कामकाजी लोगों के लिए सफर का अनुभव अक्सर परेशानी भरा साबित हो रहा है। सीमा से जुड़े दोनों शहरों के बीच आवागमन के लिए विस्तृत सड़क नेटवर्क तैयार किया गया था, मगर एक विशिष्ट दो किलोमीटर का गलियारा यात्रियों के समय और ईंधन दोनों को भारी नुकसान पहुंचा रहा है। चौड़ी खुली सड़क पर तेज गति से दौड़ती गाड़ियां जैसे ही एक खास मोड़ पर पहुंचती हैं, वहां मार्ग का स्वरूप सिकुड़ जाता है। गति की यही अचानक रुकावट पूरे मार्ग पर वाहनों की बेहद लंबी कतारों की वजह बन जाती है।\n\nक्षमता से तीन गुना अधिक गाड़ियों का निरंतर दबाव\nइस पूरे मार्ग के बुनियादी ढांचे को जब तैयार किया गया था, तब इसका प्रारूप रोजाना केवल 1.50 लाख वाहनों के सुरक्षित और सुगम आवागमन को ध्यान में रखकर गढ़ा गया था। इसके विपरीत, वर्तमान समय में नोएडा ट्रैफिक पुलिस के आंकड़ों के मुताबिक इस स्ट्रेच से हर दिन करीब 4.50 लाख वाहन गुजरते हैं। इसके अलावा सीमावर्ती इलाकों की बात करें तो चिल्ला बॉर्डर पर प्रतिदिन लगभग 3.50 लाख तथा डीएनडी बॉर्डर पर करीब 4 लाख वाहनों की भारी आवाजाही दर्ज की जा रही है। शहर के रिहायशी और व्यावसायिक विस्तार ने इस दबाव को कई गुना बढ़ा दिया है। खासतौर पर सेक्टर 105, 108, 110, 128, 132, 134, 135 और 150 जैसे नए रिहायशी और कॉरपोरेट हब बनने के बाद निजी वाहनों और कैब की तादाद अप्रत्याशित रूप से बढ़ चुकी है।\n\nचौड़ी सड़क का अचानक संकरी गलियों में तब्दील होना\nशुरुआती सफर के दौरान ज्यादातर हिस्सों में चार लेन की मुख्य सड़क के साथ-साथ दोनों किनारों पर सर्विस लेन होने के कारण गाड़ियां सामान्य गति से आगे बढ़ती रहती हैं। आगे चलकर जब सेक्टर 37 तथा कालिंदी कुंज से आने वाला वाहनों का प्रवाह इसमें शामिल होता है, तो सड़क का विस्तार छह लेन तक हो जाता है। वास्तविक संकट इसके तुरंत बाद उत्पन्न होता है, जहां सड़क की चौड़ाई अचानक घटने लगती है। राष्ट्रीय दलित प्रेरणा स्थल के गेट नंबर 2 के नजदीक पहुंचते ही छह लेन वाला यह रास्ता सिमटकर चार लेन का रह जाता है। इसके कुछ ही फासले पर जब गाड़ियां फिल्म सिटी फ्लाईओवर के करीब पहुंचती हैं, तो यह और संकरा होकर केवल तीन लेन में तब्दील हो जाता है।\n\nसड़क संगम पर लेनों का अत्यधिक दबाव\nफिल्म सिटी फ्लाईओवर के पास केवल तीन लेन शेष रह जाने की इस विकट स्थिति के बीच एक और बड़ा व्यवधान जुड़ जाता है। इसी संकरे स्थान पर सेक्टर 62-18 एलिवेटेड रोड से नीचे उतरने वाला तीन लेन का अतिरिक्त ट्रैफिक भी सीधे मुख्य मार्ग में समाहित होने लगता है। दो अलग-अलग दिशाओं से आने वाला भारी ट्रैफिक जब एक ही संकरे मुहाने पर मिलता है, तो वहां आगे बढ़ने के लिए जगह ही खत्म हो जाती है। इसके चलते फिल्म सिटी फ्लाईओवर से पीछे की तरफ सेक्टर 126 स्थित एमिटी यूनिवर्सिटी तक लगभग चार किलोमीटर लंबी वाहनों की कतार लग जाना आम दिनचर्या का हिस्सा बन चुका है। बरसात के मौसम में यह धीमी गति कई बार पूरी तरह ठप पड़ जाती है और जाम कई किलोमीटर दूर तक फैल जाता है।\n\nअवैध पार्किंग और निगरानी के सीमित परिणाम\nस्थिति को काबू में रखने के लिए यातायात पुलिस अतिरिक्त कर्मियों की तैनाती करती है और रुक-रुक कर गाड़ियों को निकालने वाली व्यवस्था अपनाती है। इसके अतिरिक्त फिल्म सिटी फ्लाईओवर पर बैरिकेडिंग के कारण दो लेन बंद रहती हैं। राष्ट्रीय दलित प्रेरणा स्थल के टिकट काउंटर के निकट खड़े होने वाले अनाधिकृत वाहन और चालकों द्वारा लेन अनुशासन का पालन न करना स्थिति को और अधिक उलझा देता है। व्यवस्था सुधारने के उद्देश्य से फरवरी 2025 से लेन नियमों के उल्लंघन पर चालान काटने की कार्रवाई भी शुरू की गई है, मगर भौतिक जगह की भारी कमी के सामने ये प्रशासनिक कदम नाकाफी साबित हो रहे हैं।\n\nअधूरी परियोजनाएं और राहत की भावी उम्मीदें\nजाम से निजात दिलाने के लिए पहले भी कई विकल्पों पर विचार किया गया था। जून 2025 में नोएडा प्राधिकरण की ओर से सेक्टर 95 से डीएनडी तक 600 मीटर नई सड़क निर्माण का प्रस्ताव तैयार किया गया था, परंतु वन विभाग से अनापत्ति प्रमाण पत्र न मिलने के चलते उसे रद्द करना पड़ा। वर्तमान में यातायात विश्लेषक छह लेन वाली चिल्ला एलिवेटेड रोड परियोजना को ही स्थायी समाधान मान रहे हैं। 893 करोड़ रुपये की लागत वाली यह अहम परियोजना वर्ष 2019 में आरंभ की गई थी, लेकिन गैस पाइपलाइन विस्थापन तथा महामारी के दौर जैसी बाधाओं के चलते इसका कार्य लंबा खिंच गया। मौजूदा समय में इस परियोजना का 47 प्रतिशत निर्माण कार्य संपन्न हो चुका है और इसे पूरा करने की नई समयसीमा जुलाई 2027 निर्धारित की गई है। इस एलिवेटेड सड़क के संचालन में आने के बाद ही मुख्य कैरिजवे पर गाड़ियों का बोझ कम होने की ठोस आशा है।\n\nइसका आप पर असर\nनोएडा से दिल्ली की तरफ जाने वाले दैनिक यात्रियों को इस दो किलोमीटर के गलियारे में भीषण देरी का सामना करना पड़ रहा है।\n\n• राष्ट्रीय स्तर पर: अंतरराज्यीय सीमाओं पर बुनियादी ढांचे की कमी और अत्यधिक वाहनों का दबाव राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र के आर्थिक कामकाज और ईंधन खपत को सीधे प्रभावित करता है। इससे प्रतिदिन हजारों कार्य घंटों का नुकसान होता है।\n• नोएडा और दिल्ली में: सुबह और शाम के पीक आवर्स के दौरान फिल्म सिटी से एमिटी यूनिवर्सिटी तक रोजाना चार किलोमीटर तक लंबा जाम लग रहा है। इस रास्ते से गुजरने वाले मुसाफिरों को यात्रा समय में कम से कम 30 से 45 मिनट का अतिरिक्त मार्जिन लेकर चलना चाहिए।\n• निजी वाहन चालकों के लिए: फरवरी 2025 से ट्रैफिक पुलिस ने इस स्ट्रेच पर लेन नियमों के उल्लंघन के खिलाफ कड़े चालान काटने शुरू कर दिए हैं। वाहन चालकों को अनियोजित लेन बदलने और दलित प्रेरणा स्थल के पास अवैध पार्किंग करने से बचना चाहिए।\n• दीर्घकालिक राहत: चिल्ला एलिवेटेड रोड के निर्माण के लिए नया लक्ष्य जुलाई 2027 निर्धारित किया गया है, जिसका 47 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है। जब तक यह 893 करोड़ रुपये का गलियारा तैयार नहीं होता, तब तक दैनिक यात्रियों को वैकल्पिक मार्गों या मेट्रो सेवाओं का उपयोग करने की सलाह दी जाती है।\n\nऐसा क्यों हुआ\nयह गंभीर जाम अत्यधिक वाहनों की आवाजाही और आगे जाकर लेन क्षमता के एकाएक सिमट जाने के कारण उत्पन्न होता है।\n\n• बुनियादी ढांचे की सीमाएं: यह मुख्य सड़क मूल रूप से प्रतिदिन 1.50 लाख वाहनों के आवागमन के लिए बनाई गई थी। वर्तमान समय में अकेले इस स्ट्रेच से रोजाना 4.50 लाख से अधिक वाहन गुजर रहे हैं, जो इसकी वहन क्षमता से तीन गुना ज्यादा है।\n• लेनों का अचानक संकरा होना: सेक्टर 37 और कालिंदी कुंज से ट्रैफिक मिलने पर सड़क छह लेन चौड़ी हो जाती है, मगर दलित प्रेरणा स्थल के गेट नंबर 2 पर यह घटकर चार लेन और फिल्म सिटी के पास केवल तीन लेन रह जाती है।\n• अतिरिक्त ट्रैफिक का संगम: ठीक उसी तीन लेन वाले संकरे हिस्से पर सेक्टर 62-18 एलिवेटेड रोड से तीन लेन का अतिरिक्त ट्रैफिक आकर मुख्य धारा में मिल जाता है। एक साथ कई लेन का प्रवाह एक बिंदु पर मिलने से वाहनों का रेला लग जाता है।\n• अवरोध और अनुशासन की कमी: फिल्म सिटी फ्लाईओवर पर बैरिकेडिंग के चलते दो लेन अवरुद्ध रहती हैं, जबकि दलित प्रेरणा स्थल के पास अवैध पार्किंग समस्या को और जटिल बना देती है।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. नोएडा-दिल्ली मार्ग पर सबसे ज्यादा जाम किस हिस्से में लगता है?\nयह जाम फिल्म सिटी फ्लाईओवर से लेकर सेक्टर 126 में एमिटी यूनिवर्सिटी तक करीब चार किलोमीटर लंबे हिस्से में रोजाना लगता है।\n\n2. इस स्ट्रेच पर रोजाना कितने वाहन गुजरते हैं?\nनोएडा ट्रैफिक पुलिस के अनुसार इस स्ट्रेच से प्रतिदिन करीब 4.50 लाख वाहन गुजरते हैं, जबकि यह सिर्फ 1.50 लाख वाहनों के लिए बना था।\n\n3. सड़क पर अचानक लेन घटने का क्या क्रम है?\nछह लेन की सड़क पहले दलित प्रेरणा स्थल के पास चार लेन में और फिर फिल्म सिटी फ्लाईओवर के समीप केवल तीन लेन में सिमट जाती है।\n\n4. सेक्टर 95 से डीएनडी तक सड़क बनाने की योजना क्यों रद्द हुई?\nजून 2025 में प्रस्तावित 600 मीटर लंबी इस सड़क योजना को वन विभाग की अनापत्ति (एनओसी) न मिलने के कारण रद्द कर दिया गया था।\n\n5. चिल्ला एलिवेटेड रोड का निर्माण कब तक पूरा होने की उम्मीद है?\n893 करोड़ रुपये की लागत वाली इस छह लेन परियोजना का 47 प्रतिशत कार्य पूरा हो चुका है और इसका नया लक्ष्य जुलाई 2027 निर्धारित किया गया है।",
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  "category": "भारत",
  "publishedAt": "2026-09-21",
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