न्यायमूर्ति सुनीता अग्रवाल और न्यायमूर्ति अपरेश कुमार सिंह की नियुक्ति पर बोले सीजेआई सूर्यकांत, शीर्ष अदालत में काम की रफ्तार अब टी20 मुकाबले जैसी प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत ने सुप्रीम कोर्ट के दो नए जजों के चयन का बचाव करते हुए कहा कि शीर्ष अदालत का काम अब टी20 मैच की तरह तेज रफ्तार हो चुका है। सर्वोच्च न्यायालय में हाल ही में शामिल हुए दो नए सदस्यों के चयन प्रक्रिया पर प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत ने अपने विचार साझा किए हैं। 3 नवंबर को आयोजित एक विशेष कार्यक्रम में बोलते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि न्यायमूर्ति सुनीता अग्रवाल और न्यायमूर्ति अपरेश कुमार सिंह को सुप्रीम कोर्ट में पदोन्नत करने का कॉलेजियम का निर्णय पूरी तरह से उनकी लगन, निष्पक्षता और योग्यता पर आधारित था। प्रधान न्यायाधीश ने इस बात पर जोर दिया कि न्यायिक प्रणाली की वास्तविक साख केवल संवैधानिक शक्तियों में नहीं, बल्कि जनमानस के अटूट भरोसे में निहित होती है। न्यायिक विश्वास और फैसलों की गुणवत्ता प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत ने संस्थागत साख के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि न्यायपालिका पर जनता का भरोसा केवल निर्णयों की गुणवत्ता से ही नहीं बनता। इसके लिए पूरी अदालती प्रक्रिया का निष्पक्ष होना, वादियों के साथ गरिमापूर्ण व्यवहार और यह पक्का भरोसा होना जरूरी है कि अदालत में आने वाले प्रत्येक नागरिक की बात बिना किसी दुर्भावना या पक्षपात के सुनी जाएगी। उन्होंने इस बात को दोहराया कि इस जनविश्वास को बचाए रखना एक निरंतर चलने वाली संस्थागत जिम्मेदारी है। न्यायिक प्रणाली से जुड़े हर एक व्यक्ति को इस प्रतिबद्धता का पालन हर हाल में करना होता है। सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन के अभिनंदन समारोह में संबोधन सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन द्वारा नए पदोन्नत न्यायाधीशों के सम्मान में एक विशेष अभिनंदन समारोह आयोजित किया गया था। इस मंच से प्रधान न्यायाधीश ने बताया कि देश के विभिन्न उच्च न्यायालयों में अलग-अलग पदों पर सेवा दे चुके दोनों नए न्यायाधीशों का लंबा कार्यानुभव शीर्ष अदालत के लिए बेहद मूल्यवान साबित होगा। उन्होंने बताया कि जब भी शीर्ष अदालत की टीम के लिए नए सदस्यों का चुनाव किया जाता है, तो कई ठोस और निष्पक्ष पैमानों को परखा जाता है। टीम भावना और काम की गति सर्वोच्च न्यायालय के कार्य के बदलते स्वरूप की तुलना करते हुए प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत ने एक अहम पहलू सामने रखा। उन्होंने कहा, सुप्रीम कोर्ट अब वस्तुतः एक टी-20 मैच खेल रहा है। उन्होंने बताया कि चयन प्रक्रिया में कम से कम वे स्वयं हमेशा इस बात पर विशेष ध्यान देते हैं कि कोई व्यक्ति एक टीम के सदस्य के रूप में कैसा प्रदर्शन करता है। उच्च न्यायालयों के इन दोनों मुख्य न्यायाधीशों को चुनते वक्त भी इस सामूहिक कार्यशैली और तेज गति से काम करने की क्षमता को प्रमुखता से देखा गया था। कॉलेजियम के फैसले पर पूरा भरोसा प्रधान न्यायाधीश ने कहा कि उन्हें इस बात की बेहद खुशी है कि दोनों उत्कृष्ट मुख्य न्यायाधीश अब सर्वोच्च पीठ की शोभा बढ़ा रहे हैं। उन्होंने भरोसा जताया कि दोनों न्यायाधीश अपने शानदार काम से अपनी योग्यता साबित करेंगे। उनके अनुसार, आने वाले समय में उनका प्रदर्शन यह स्पष्ट कर देगा कि सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम का उन्हें शीर्ष अदालत में लाने का निर्णय हर दृष्टिकोण से कितना उचित और सटीक था। इसका आप पर असर सर्वोच्च न्यायालय में न्यायाधीशों की कार्यक्षमता और टीमवर्क पर जोर देने से न्यायिक प्रक्रियाओं में तेजी आने की उम्मीद है। • भारत में: शीर्ष अदालत में मुकदमों की सुनवाई की गति बढ़ने से आम वादियों को राहत मिलेगी। मामलों के तेजी से निपटारे से न्यायिक व्यवस्था पर जनता का भरोसा मजबूत होता है। • अदालती व्यवस्था पर: उच्च न्यायालयों से अनुभवी मुख्य न्यायाधीशों के आने से न्यायिक फैसलों की गुणवत्ता बेहतर होगी। इससे सभी वर्गों के वादियों को बिना पूर्वाग्रह और समय पर निष्पक्ष सुनवाई मिलने की गारंटी मिलती है। • वादकारियों के लिए: अदालत में काम का माहौल टी20 मैच की तरह गतिशील होने से मुकदमों की पेंडेंसी घटेगी। आम लोगों को अपनी अर्जियों पर त्वरित और पारदर्शी न्याय मिलने में मदद मिलेगी। • न्यायिक जवाबदेही पर: कॉलेजियम द्वारा योग्यता और टीम प्रदर्शन को वरीयता देने से न्यायिक प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ेगी। इससे अदालती प्रणाली में जनता का संस्थागत विश्वास और गहरा होगा। ऐसा क्यों हुआ प्रधान न्यायाधीश ने सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन के अभिनंदन कार्यक्रम में दो नए जजों की नियुक्ति के कॉलेजियम के फैसले के पीछे के तर्क स्पष्ट किए। • नियुक्ति का आधार: न्यायमूर्ति सुनीता अग्रवाल और न्यायमूर्ति अपरेश कुमार सिंह की पदोन्नति उनकी कठोर मेहनत, योग्यता और उच्च न्यायालयों में दी गई लंबी सेवाओं के मूल्यांकन पर आधारित थी। कॉलेजियम ने उनके पिछले ट्रैक रिकॉर्ड को निर्णायक माना। • बदलता अदालती परिवेश: शीर्ष अदालत में मुकदमों का दबाव और कार्य की गति काफी तेज हो चुकी है, जिसे सीजेआई ने टी20 प्रारूप जैसा बताया। ऐसे में एक मजबूत टीम सदस्य के रूप में प्रभावी काम करने की क्षमता को चयन का मुख्य पैमाना बनाया गया। • जनविश्वास की रक्षा: न्यायपालिका की साख फैसलों की निष्पक्षता और सभी वादियों को बिना पक्षपात सुनने से बनी रहती है। कॉलेजियम का उद्देश्य ऐसे सक्षम जजों को जोड़ना था जो इस संस्थागत जिम्मेदारी को पूरी तरह निभा सकें। सवाल-जवाब 1. सीजेआई सूर्यकांत ने किन दो जजों की नियुक्ति का बचाव किया? उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में नवनियुक्त न्यायमूर्ति सुनीता अग्रवाल और न्यायमूर्ति अपरेश कुमार सिंह की पदोन्नति का बचाव किया। 2. सीजेआई ने सुप्रीम कोर्ट के काम की तुलना किससे की? उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के तेज रफ्तार कार्य की तुलना टी20 क्रिकेट मैच से की। 3. यह संबोधन किस अवसर पर और किस तारीख को दिया गया? यह संबोधन 3 नवंबर को सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन द्वारा आयोजित अभिनंदन समारोह में दिया गया। 4. सीजेआई के अनुसार सुप्रीम कोर्ट की असली ताकत क्या है? प्रधान न्यायाधीश के अनुसार सुप्रीम कोर्ट की ताकत केवल संवैधानिक अधिकार में नहीं, बल्कि जनता के बीच उसके प्रति विश्वास में है। 5. कॉलेजियम ने दोनों जजों के चयन में किन बातों को ध्यान में रखा? कॉलेजियम ने उनकी कड़ी मेहनत, योग्यता, उच्च न्यायालयों का अनुभव और एक टीम के सदस्य के रूप में प्रदर्शन करने की क्षमता को ध्यान में रखा। https://trendkia.com/national/nyayamurti-sunita-agarwal-aura-nyayamurti-aparesh-kumar-singh-ki-niyukti-para-bole-cji-surya-kant-shirsha-adalata-men-kama-ki-raph-56664 TrendKia — Har trend, sabse pehle.