न्यायिक प्रक्रिया से ही सामने रखे जाएं मुद्दे, मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने विपक्षी नेताओं को दिया स्पष्ट जवाब मतदाता सूची में गड़बड़ियों को लेकर विपक्षी नेताओं द्वारा मांगी गई मुलाकात पर मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कानूनी प्रक्रिया का पालन करने का सुझाव देते हुए स्पष्ट कारण बताए हैं. देश की सर्वोच्च अदालत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी की मुलाकात की अर्जी को अस्वीकार करने के पीछे ठोस कानूनी आधार स्पष्ट किए हैं. मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि उन्होंने विपक्ष के आग्रह को नामंजूर करने के पीछे के सभी तर्कसंगत कारण साझा कर दिए हैं. उन्होंने इस बात पर विशेष बल दिया कि शीर्ष अदालत देश के प्रत्येक नागरिक के लिए समान रूप से खुली है और यह आम जनता की सेवा के लिए स्थापित एक स्वतंत्र संस्था है. सर्वोच्च अदालत सभी नागरिकों के लिए खुली संस्था मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने इस बात को रेखांकित किया कि आम जनता के लिए न्यायपालिका तक पहुंच हमेशा सुलभ रहती है. उन्होंने स्पष्ट किया कि नागरिकों के अधिकारों की रक्षा करना ही इस संस्था का मूल दायित्व है. उनके अनुसार, जब भी कोई नागरिक या समूह अपनी समस्याओं को लेकर न्याय की गुहार लगाता है, तो उसके लिए एक पारदर्शी और तय व्यवस्था पहले से मौजूद है. विपक्षी दल मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों और विशेष गहन संशोधन प्रक्रिया को लेकर गंभीर सवाल उठा रहे थे. इसी सिलसिले में विपक्ष के नेता राहुल गांधी और अन्य विपक्षी दलों के प्रतिनिधियों ने एक औपचारिक ज्ञापन सौंपने के उद्देश्य से मुख्य न्यायाधीश से मिलने का समय मांगा था. इस अनुरोध का निपटारा करते हुए मुख्य न्यायाधीश ने नेताओं को अवगत कराया कि जिन मुद्दों पर वे बात करना चाहते हैं, वे पहले से ही अदालत के विचाराधीन हैं या फिर उन्हें निर्धारित न्यायिक माध्यमों से ही अदालत के पटल पर रखा जाना चाहिए. उन्होंने नेताओं को सुझाव दिया कि प्रशासनिक स्तर पर बैठक करने के बजाय विधिवत याचिका दाखिल कर कानूनी प्रक्रिया अपनाना ही सही मार्ग है. विपक्षी दलों की मांगें और चुनाव आयोग का रुख विपक्षी गठबंधन ने मतदाता सूची में कथित अनियमितताओं को खत्म करने और विशेष गहन संशोधन की कवायद को तत्काल रोकने की पुरजोर मांग की है. इसके साथ ही विपक्षी नेताओं ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग भी उठाई है. अपनी इन मांगों के समर्थन में विपक्षी दलों ने सर्वोच्च अदालत तक एक विरोध मार्च निकालने का फैसला भी किया. यह पूरा राजनीतिक घटनाक्रम युवा केंद्रित राजनीतिक आंदोलन कॉकरोच जनता पार्टी के विरोध प्रदर्शनों के बीच सामने आया है. यह संगठन मतदाता सूची के संशोधन में कथित खामियों को लेकर निर्वाचन आयोग के खिलाफ लगातार आवाज उठा रहा है. विरोध प्रदर्शनों की घोषणा के बाद राजधानी दिल्ली में सुरक्षा के कड़े प्रबंध किए गए हैं. कई संवेदनशील इलाकों में बैरिकेडिंग लगाई गई और कई प्रदर्शनकारियों को पुलिस ने हिरासत में लिया. राहुल गांधी ने प्रशासन पर बल प्रयोग करने का आरोप लगाया और दावा किया कि विपक्षी कार्यकर्ताओं के खिलाफ हिंसा की गई, जिसमें सत्ता पक्ष से जुड़े लोग शामिल थे. दूसरी तरफ, निर्वाचन आयोग ने किसी भी प्रकार के राजनीतिक पक्षपात के आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है. आयोग का कहना है कि पूरी प्रक्रिया निष्पक्ष है और यदि किसी वास्तविक मतदाता का नाम गलती से कट गया है, तो वह पुनः नामांकन कराने के लिए स्वतंत्र है. भारतीय जनता पार्टी ने भी विपक्ष के दावों को बेबुनियाद बताते हुए कहा है कि विरोधी दल स्थापित और वैध चुनावी प्रक्रियाओं की विश्वसनीयता पर अनावश्यक सवाल खड़े कर रहे हैं. कानूनी दिग्गजों की प्रतिक्रिया और प्रक्रियात्मक नियम विपक्ष द्वारा मुख्य न्यायाधीश से व्यक्तिगत समय मांगने और अदालत परिसर की ओर मार्च निकालने के कदम पर कानूनी विशेषज्ञों ने भी अपनी राय रखी है. पूर्व सॉलिसिटर जनरल हरीश साल्वे ने इस रवैये पर कड़ी आपत्ति दर्ज कराई है. उन्होंने कहा कि जिम्मेदार राजनीतिक नेताओं और अनुभवी वकीलों को यह भलीभांति पता होना चाहिए कि किसी भी मामले की सुनवाई के लिए स्थापित न्यायिक प्रक्रियाओं का पालन करना आवश्यक होता है. हरीश साल्वे ने सवाल उठाया कि मुख्य न्यायाधीश व्यक्तिगत रूप से हर प्रशासनिक मुलाकात में कानूनी मामलों की सुनवाई नहीं करते हैं. अदालत के नियम अनुसार सभी मामले निर्धारित पीठों को सौंपे जाते हैं और वे पीठें ही कानूनी साक्ष्यों के आधार पर निर्णय देती हैं. उन्होंने जोर देकर कहा कि राहत की उम्मीद रखने वाले राजनीतिक दलों को नियमों के तहत याचिका दायर करनी चाहिए, न कि मुख्य न्यायाधीश के समक्ष सीधे राजनीतिक ज्ञापन सौंपने का दबाव बनाना चाहिए. इसका आप पर असर इस घटनाक्रम का सीधा असर चुनावी प्रक्रिया की विश्वसनीयता और राजधानी में आम नागरिकों की दिनचर्या पर पड़ता है. • मतदाताओं के लिए: यदि किसी नागरिक का नाम मतदाता सूची से हट गया है तो वह निर्वाचन आयोग की आधिकारिक व्यवस्था के तहत दोबारा पंजीकरण करा सकता है. आयोग ने स्पष्ट किया है कि वैध दस्तावेजों के साथ छूटे हुए नाम फिर से जोड़े जा सकते हैं. • दिल्ली में यात्रियों के लिए: संसद मार्ग और मध्य दिल्ली के इलाकों में सुरक्षा बंदोबस्त और बैरिकेडिंग से यातायात प्रभावित हो सकता है. विरोध प्रदर्शनों के दौरान आवागमन करने वाले लोगों को वैकल्पिक मार्गों का उपयोग करने की सलाह दी जाती है. • राजनीतिक प्रक्रिया पर: चुनावी शिकायतों के समाधान के लिए अब अदालती याचिकाओं का सहारा लेना अनिवार्य हो गया है. विपक्षी दलों को प्रशासनिक ज्ञापनों के बजाय अपनी दलीलें औपचारिक पीठ के समक्ष रखनी होंगी. • कानूनी व्यवस्था पर: सर्वोच्च अदालत के इस कदम से स्पष्ट संदेश गया है कि न्यायिक प्रक्रिया के बाहर किसी राजनीतिक मांग पर विचार नहीं होगा. सभी पक्षों को स्थापित अदालती नियमों और बेंच आवंटन की व्यवस्था का पालन करना होगा. ऐसा क्यों हुआ यह टकराव मतदाता सूची संशोधन और न्यायिक प्रोटोकॉल की सीमाओं को लेकर पैदा हुआ है. विपक्षी दलों ने चुनावी आंकड़ों में हेरफेर का आरोप लगाते हुए अदालत का रुख करने का प्रयास किया था. • मतदाता सूची पर विवाद: विपक्षी दलों ने आरोप लगाया कि विशेष गहन संशोधन के दौरान मतदाताओं के नाम बड़े पैमाने पर हटाए गए हैं. विपक्ष ने इसे चुनावी निष्पक्षता पर हमला बताते हुए मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग की. • बैठक की मांग और न्यायिक प्रोटोकॉल: राहुल गांधी ने ज्ञापन सौंपने के लिए समय मांगा था, लेकिन मुख्य न्यायाधीश ने इसे ठुकरा दिया. अदालत के अनुसार जो मामले कानूनी प्रकृति के हैं, उन्हें प्रशासनिक मुलाकातों के बजाय न्यायिक याचिकाओं के जरिए सुना जाना चाहिए. • युवा संगठनों का विरोध प्रदर्शन: कॉकरोच जनता पार्टी के नेतृत्व में शुरू हुए प्रदर्शनों ने इस विवाद को सड़क तक पहुंचा दिया. इसके बाद मुख्य विपक्षी गठबंधन ने भी अदालत परिसर तक मार्च निकालने का निर्णय लिया. • आयोग और सत्ता पक्ष का स्पष्टीकरण: निर्वाचन आयोग ने पक्षपात के दावों को खारिज करते हुए प्रक्रिया को पारदर्शी बताया है. सत्ता पक्ष ने भी कहा कि नियमित प्रशासनिक प्रक्रियाओं पर अविश्वास जताना अनुचित है. सवाल-जवाब 1. मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने राहुल गांधी से मिलने से क्यों मना किया? मुख्य न्यायाधीश ने बताया कि उठाए गए मुद्दे न्यायिक प्रक्रिया से जुड़े हैं, इसलिए नेताओं को प्रशासनिक बैठक के बजाय याचिका दाखिल कर अदालत का दरवाजा खटखटाना चाहिए. 2. विपक्षी दलों की मुख्य मांगें क्या हैं? विपक्ष ने कथित वोट चोरी रोकने, विशेष गहन संशोधन प्रक्रिया को स्थगित करने और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की है. 3. हरीश साल्वे ने विपक्ष के कदम पर क्या टिप्पणी की? पूर्व सॉलिसिटर जनरल हरीश साल्वे ने इसे मूर्खतापूर्ण बताते हुए कहा कि स्थापित कानूनी प्रक्रिया को छोड़कर मुख्य न्यायाधीश से व्यक्तिगत मुलाकात मांगना पूरी तरह गलत है. 4. निर्वाचन आयोग का इस पूरे मामले पर क्या कहना है? आयोग ने किसी भी राजनीतिक दल के प्रति पक्षपात से इनकार किया है और कहा है कि जिनका नाम गलत तरीके से कटा है, वे दोबारा नामांकन करा सकते हैं. https://trendkia.com/national/nyayika-prakriya-se-hi-samane-rakhe-jaen-mudde-mukhya-nyayadhisha-surya-kant-ne-vipakshi-netaon-ko-diya-spashta-javaba-46918 TrendKia — Har trend, sabse pehle.