ओडिशा में कांग्रेस पर बरसे सुधांशु त्रिवेदी, 13 करोड़ मतदाताओं के दावों पर राहुल गांधी को दिया जवाब भुवनेश्वर में भाजपा सांसद सुधांशु त्रिवेदी ने 13 करोड़ मतदाताओं के आंकड़ों पर कांग्रेस और राहुल गांधी पर तीखा पलटवार किया। उन्होंने भारत की आर्थिक प्रगति, विश्व बैंक की गरीबी रिपोर्ट और नक्सलवाद के खात्मे का हवाला देते हुए विपक्षी दावों को खारिज किया। ओडिशा की राजधानी भुवनेश्वर में 2 नवंबर को आयोजित एक प्रेस वार्ता के दौरान भारतीय जनता पार्टी के सांसद सुधांशु त्रिवेदी ने विपक्षी दल कांग्रेस और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी पर कड़ा राजनीतिक हमला बोला। उन्होंने मौजूदा अंतरराष्ट्रीय परिदृश्य का उल्लेख करते हुए स्पष्ट किया कि संपूर्ण विश्व इस समय उथल-पुथल तथा अनिश्चितता के दौर का सामना कर रहा है। ऐसे चुनौतीपूर्ण वैश्विक माहौल के बावजूद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली भाजपा नीत एनडीए सरकार के अंतर्गत भारत निरंतर सुदृढ़ता के साथ विकास पथ पर अग्रसर है। भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूती और विश्व बैंक की रिपोर्ट भाजपा सांसद ने रेखांकित किया कि प्रमुख वैश्विक अर्थव्यवस्थाओं के बीच भारत सबसे तीव्र गति से विकसित होने वाली इकॉनमी के रूप में अपनी विशिष्ट पहचान बना चुका है। उन्होंने बताया कि ठीक दो दिन पहले विश्व बैंक ने अपनी 2025 रिपोर्ट में गरीबी उन्मूलन के क्षेत्र में भारत द्वारा हासिल की गई ऐतिहासिक सफलता की भूरि-भूरि प्रशंसा की है। इस अध्ययन में पिछले 12 से 13 वर्षों के दौरान दर्ज की गई उल्लेखनीय प्रगति को सार्वजनिक किया गया है। विश्व बैंक के आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2011-12 के दौरान देश की 27 प्रतिशत आबादी गरीबी रेखा के नीचे जीवन यापन कर रही थी, जो घटकर अब मात्र 2.5 प्रतिशत के स्तर पर सीमित रह गई है। इसके साथ ही देश रक्षा उत्पादन, एआई और आधुनिक तकनीकों के विकास में अभूतपूर्व प्रगति दर्ज कर रहा है। सुधांशु त्रिवेदी ने कहा कि देश की यह चौतरफा उन्नति अनेक वैश्विक और आंतरिक ताकतों को रास नहीं आ रही है, और दुर्भाग्यवश विपक्ष ऐसी ही ताकतों के हाथों में एक खिलौने की भांति व्यवहार कर रहा है। देश आत्मगौरव के साथ आगे बढ़ रहा है, जबकि विपक्ष का आचरण प्रगति के विरुद्ध दिखाई देता है। चुनावी आंकड़ों और 13 करोड़ वोटरों का ब्योरा राहुल गांधी द्वारा चुनावी संदर्भ में उठाए जा रहे 13 करोड़ मतदाताओं के मुद्दे पर भाजपा सांसद ने विस्तार से आंकड़ों का विश्लेषण प्रस्तुत किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि जिन 13 करोड़ लोगों का जिक्र विपक्ष कर रहा है, उनके वास्तविक विवरण को जानबूझकर नजरअंदाज किया जा रहा है। सुधांशु त्रिवेदी के अनुसार इस सूची में 2 करोड़ 80 लाख लोग ऐसे हैं जिनकी मृत्यु हो चुकी है। इसके अलावा 12 करोड़ लोग अपने मूल स्थान से अन्यत्र शिफ्ट हो चुके हैं, जिनमें से 6 करोड़ लोग नए पते पर पंजीकृत मतदाता बन चुके हैं और शेष 6 करोड़ मतदाताओं की प्रक्रिया अभी बाकी है। उन्होंने आगे बताया कि इस पूरी गणना में 1 करोड़ डुप्लीकेट मतदाता शामिल हैं, जिनके नाम दो अलग-अलग मतदान केंद्रों पर दर्ज थे। साथ ही 3 करोड़ मतदाता पूरी तरह से लापता श्रेणी में दर्ज हैं। इन स्पष्ट प्रशासनिक और तकनीकी आंकड़ों के बावजूद तथ्यों को तोड़-मरोड़कर जनता के बीच प्रस्तुत करने का प्रयास किया जा रहा है। विपक्ष का सिकुड़ता जनाधार और वैचारिक हमला देश के लोकतांत्रिक ढांचे पर चर्चा करते हुए भाजपा सांसद ने कहा कि वर्तमान समय में कांग्रेस पार्टी और नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी स्वयं लोकतंत्र के लिए खतरा बन चुके हैं। उन्होंने विपक्षी दलों के लंबे चुनावी निर्वासन का ब्योरा देते हुए याद दिलाया कि ओडिशा में कांग्रेस पिछले 25 वर्षों से सत्ता से गायब है। इसी प्रकार 1995 से गुजरात में, 1990 से उत्तर प्रदेश और बिहार में, 1977 से पश्चिम बंगाल में और 1967 से तमिलनाडु से कांग्रेस पूर्णतः सत्ता से बाहर चल रही है। पूर्वोत्तर के राज्यों त्रिपुरा, नागालैंड और सिक्किम में भी पार्टी बीते 30 वर्षों से राजनीतिक पटल से नदारद है। सुधांशु त्रिवेदी ने गैर-भाजपा शासित राज्यों के विरोधाभास को भी उजागर किया। उन्होंने कहा कि केरल में कांग्रेस समर्थित व्यवस्था है, जहां के गृह मंत्री यह स्वीकार कर चुके हैं कि एसआईआर से उन्हें सीधा लाभ प्राप्त हुआ है। ऐसे में कांग्रेस नेतृत्व को यह स्पष्ट करना चाहिए कि केरल और कर्नाटक में मौजूद उनकी अपनी राज्य सरकारें सच बोल रही हैं या फिर केंद्र में बैठे नेता सच कह रहे हैं। भौगोलिक और वैचारिक नक्सलवाद पर अपनी बात रखते हुए उन्होंने कहा कि ओडिशा, छत्तीसगढ़, झारखंड और आंध्र प्रदेश के सीमावर्ती क्षेत्रों में जो गंभीर नक्सल समस्या वर्षों से मौजूद थी, सुरक्षा पहलों से उससे काफी हद तक मुक्ति मिल चुकी है। उन्होंने आरोप लगाया कि जमीनी स्तर पर परास्त होने के बाद यही तत्व दिमागी नक्सली का रूप धारण कर देश की राजधानी दिल्ली में अपना डेरा जमाए हुए हैं। इसका आप पर असर इस राजनीतिक बयानबाजी और मतदाता आंकड़ों के स्पष्टीकरण से आम नागरिकों और वोटरों के लिए चुनावी सूचियों की पारदर्शिता और नागरिक प्रक्रियाओं का महत्व स्पष्ट होता है। • राष्ट्रीय स्तर पर: मतदाता सूची में नाम दोहराव, पते में बदलाव और मृत मतदाताओं के नाम हटाने की प्रक्रिया हर नागरिक के वोटिंग अधिकार को प्रभावित करती है। यदि आपका पता बदला है, तो अपने नए मतदान केंद्र पर समय रहते फॉर्म भरकर नाम स्थानांतरित करवाना सुनिश्चित करें ताकि मतदान के दिन परेशानी न हो। • ओडिशा में: भुवनेश्वर में हुई इस राजनीतिक वार्ता से राज्य की प्रशासनिक मशीनरी और स्थानीय निकाय स्तर पर मतदाता सूची सत्यापन अभियानों पर राजनीतिक नजर बनी रहेगी। स्थानीय नागरिकों को अपने क्षेत्र के बूथ लेवल अधिकारियों के माध्यम से वोटर रिकॉर्ड की शुद्धता अवश्य जांच लेनी चाहिए। • आर्थिक संदर्भ में: विश्व बैंक की रिपोर्ट में गरीबी 27 प्रतिशत से घटकर 2.5 प्रतिशत होने का दावा कल्याणकारी नीतियों की प्रभावशीलता को दर्शाता है। इससे आने वाले समय में सरकारी सब्सिडी और विकास योजनाओं के प्राथमिक लाभार्थियों की पहचान अधिक सुव्यवस्थित हो सकती है। • नागरिक जागरूकता: 13 करोड़ मतदाताओं के संदर्भ में आए आंकड़ों से स्पष्ट होता है कि देश भर में प्रवास करने वाले लोगों को अपने मताधिकार का उपयोग करने के लिए खुद आगे आकर पंजीकरण अद्यतन कराना आवश्यक है। ऐसा क्यों हुआ यह राजनीतिक टकराव चुनावी प्रक्रिया की विश्वसनीयता और मतदाता सूची के आंकड़ों को लेकर सत्ता पक्ष तथा विपक्ष के बीच चल रहे सार्वजनिक मतभेदों के कारण उत्पन्न हुआ। • मतदाता सूची के दावों पर विवाद: विपक्ष द्वारा 13 करोड़ मतदाताओं को लेकर सवाल उठाए गए थे, जिसके उत्तर में सत्ता पक्ष ने मृत, स्थानांतरित, डुप्लीकेट और लापता श्रेणियों का प्रशासनिक विवरण पेश किया। • आर्थिक आंकड़ों की प्रस्तुति: विश्व बैंक द्वारा जारी 2025 रिपोर्ट में भारत में गरीबी 27 प्रतिशत से घटकर 2.5 प्रतिशत होने का उल्लेख आने के बाद सरकार ने इसे अपनी नीतियों की पुष्टि के रूप में पेश किया। • चुनावी समीकरण और क्षेत्रीय पकड़: ओडिशा, गुजरात, बंगाल और बिहार जैसे राज्यों में विपक्ष के लंबे समय से सत्ता से बाहर रहने का हवाला देकर उसके चुनावी बयानों की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े किए गए। सवाल-जवाब 1. सुधांशु त्रिवेदी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कहां और कब की? भाजपा सांसद सुधांशु त्रिवेदी ने 2 नवंबर को ओडिशा की राजधानी भुवनेश्वर में यह प्रेस कॉन्फ्रेंस की। 2. विश्व बैंक की रिपोर्ट में भारत की गरीबी को लेकर क्या आंकड़े सामने आए हैं? विश्व बैंक की 2025 रिपोर्ट के अनुसार 2011-12 में भारत में गरीबी रेखा के नीचे 27 प्रतिशत लोग थे, जो अब घटकर 2.5 प्रतिशत रह गए हैं। 3. 13 करोड़ मतदाताओं के आंकड़े पर भाजपा सांसद ने क्या स्पष्टीकरण दिया? उन्होंने बताया कि इस आंकड़े में 2.8 करोड़ मृत, 12 करोड़ स्थानांतरित, 1 करोड़ डुप्लीकेट और 3 करोड़ लापता मतदाताओं का प्रशासनिक ब्योरा शामिल है। 4. स्थानांतरित हुए 12 करोड़ मतदाताओं में से कितनों ने नया पंजीकरण कराया है? सुधांशु त्रिवेदी के अनुसार 12 करोड़ में से 6 करोड़ लोग दूसरी जगह मतदाता बन चुके हैं, जबकि 6 करोड़ लोगों की प्रक्रिया शेष है। 5. ओडिशा में कांग्रेस कितने वर्षों से सत्ता से बाहर है? प्रेस कॉन्फ्रेंस में दिए गए बयान के अनुसार कांग्रेस ओडिशा में पिछले 25 वर्षों से सत्ता से बाहर है। https://trendkia.com/national/odisha-men-congress-para-barase-sudhanshu-trivedi-13-karora-matadataon-ke-davon-para-rahul-gandhi-ko-diya-javaba-55044 TrendKia — Har trend, sabse pehle.