ऑपरेशन फायरवॉल 2026: पाकिस्तान से जुड़े जासूसी रैकेट का भंडाफोड़, नौसेना के 13 जवान जांच के घेरे में सुरक्षा एजेंसियों ने ऑपरेशन फायरवॉल 2026 के तहत 10 राज्यों में छापेमारी कर पाकिस्तान से जुड़े जासूसी तंत्र का खुलासा किया है। विशाखापट्टनम स्थित नौसेना अड्डे के एक कर्मी और चालक सहित दो लोग गिरफ्तार किए गए हैं, जबकि 13 नौसैनिकों समेत 18 संदिग्ध जांच के दायरे में हैं। भारतीय सुरक्षा एजेंसियों ने देश की समुद्री सुरक्षा में सेंध लगाने की एक बड़ी विदेशी साजिश को नाकाम करते हुए 'ऑपरेशन फायरवॉल 2026' के तहत व्यापक कार्रवाई की है। पाकिस्तान की खुफिया एजेंसियों के इशारे पर चलाए जा रहे जासूसी नेटवर्क का पर्दाफाश करते हुए जांच अधिकारियों ने 10 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में एक साथ दबिश दी। इस कार्रवाई के दौरान विशाखापट्टनम से नौसेना के एक कर्मी और एक चालक को गिरफ्तार किया गया है, जिन पर संवेदनशील रक्षा जानकारियां सरहद पार साझा करने का आरोप है। विशाखापट्टनम और पूर्वी नौसेना कमान था मुख्य निशाना जांच में सामने आया है कि पाकिस्तानी खुफिया तंत्र मुख्य रूप से विशाखापट्टनम स्थित पूर्वी नौसेना कमान से जुड़े गोपनीय रक्षा विवरण हासिल करने की फिराक में था। काउंटर इंटेलिजेंस सेल और आंध्र प्रदेश पुलिस की संयुक्त निगरानी के बाद इस पूरे नेटवर्क की कड़ियां खोली गईं। सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार, कुल 18 संदिग्धों की पहचान की गई है, जिनमें से 13 भारतीय नौसेना के जवान और अधिकारी शामिल हैं। यह गिरोह सोशल मीडिया पर हनीट्रैप और अन्य माध्यमों से जवानों को फांसकर सामरिक दस्तावेज और ठिकाने की जानकारियां जुटाने की कोशिश कर रहा था। 10 राज्यों में काउंटर इंटेलिजेंस का समन्वित सर्च ऑपरेशन मामले की गंभीरता को देखते हुए काउंटर इंटेलिजेंस सेल ने देश के 10 अलग-अलग राज्यों में समन्वित छापेमारी अभियान चलाया। इस दौरान संदिग्धों के डिजिटल उपकरण, मोबाइल फोन और वित्तीय लेन-देन के रिकॉर्ड खंगाले जा रहे हैं। अधिकारियों का मुख्य ध्यान इस बात पर है कि किन संवेदनशील क्षेत्रों की जानकारी लीक हुई है और क्या इस जासूसी के बदले हवाला अथवा ऑनलाइन खातों से रकम भेजी गई थी। सख्त निगरानी और विस्तृत जांच जारी गिरफ्तार किए गए दोनों आरोपियों से गहन पूछताछ की जा रही है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि पाकिस्तानी हैंडलर्स के सीधे संपर्क में कौन-कौन लोग थे। संदेह के दायरे में आए सभी 13 नौसैनिकों की गतिविधियों की भी आंतरिक समीक्षा की जा रही है। रक्षा प्रतिष्ठानों ने अपने सभी केंद्रों पर सोशल मीडिया दिशा-निर्देशों और सुरक्षा प्रोटोकॉल को और अधिक सख्त कर दिया है ताकि भविष्य में ऐसी किसी भी सेंधमारी को रोका जा सके। इसका आप पर असर इस कार्रवाई से रक्षा प्रतिष्ठानों में सुरक्षा प्रोटोकॉल और डिजिटल निगरानी व्यवस्था को तुरंत प्रभाव से कड़ा किया गया है। • राष्ट्रीय स्तर पर: सैन्य और रणनीतिक प्रतिष्ठानों में कार्यरत कर्मियों के सोशल मीडिया उपयोग और बाहरी संपर्कों की निगरानी सख्त कर दी गई है। सभी संवेदनशील ठिकानों पर साइबर सुरक्षा ऑडिट के कड़े मानक तुरंत लागू किए जा रहे हैं। • विशाखापट्टनम में: नौसेना अड्डे और पूर्वी नौसेना कमान के आसपास सहायक कर्मियों, अनुबंधित कर्मचारियों और ड्राइवरों के पुलिस सत्यापन की प्रक्रिया फिर से शुरू की गई है। बेस क्षेत्र में अनधिकृत डिजिटल उपकरणों और अजनबियों की आवाजाही पर कड़ी पाबंदी लगा दी गई है। • सुरक्षा कर्मियों के लिए: अज्ञात ऑनलाइन प्रोफाइलों और संदिग्ध संपर्कों की पहचान के लिए विशेष जागरूकता सत्र आयोजित किए जा रहे हैं। किसी भी संदेहास्पद संवाद की सूचना तुरंत आंतरिक सुरक्षा इकाई को देने का सख्त निर्देश दिया गया है। • आम नागरिकों के लिए: सैन्य क्षेत्रों के आसपास संदिग्ध गतिविधियों या संवेदनशील ठिकानों की तस्वीरें लेने वालों पर नजर रखने की अपील की गई है। किसी भी अवांछित गतिविधि की सूचना सीधे स्थानीय सुरक्षा सेल को दी जा सकती है। ऐसा क्यों हुआ यह जांच विदेशी खुफिया एजेंसियों द्वारा भारतीय रक्षा प्रतिष्ठानों की गोपनीय सूचनाएं चुराने के निरंतर प्रयासों के सामने आने के बाद शुरू की गई। • हनीट्रैप और सोशल मीडिया का इस्तेमाल: पाकिस्तानी खुफिया हैंडलर्स ने फर्जी सोशल मीडिया प्रोफाइलों के जरिए जवानों से संपर्क साधकर संवेदनशील जानकारी निकालने का प्रयास किया। यह रणनीति कर्मियों को भावनात्मक और डिजिटल जाल में फंसाने के उद्देश्य से रची गई थी। • पूर्वी नौसेना कमान पर ध्यान: विशाखापट्टनम भारत की रणनीतिक समुद्री सुरक्षा और नौसैनिक गतिविधियों का प्रमुख केंद्र है। इस कमान से जुड़ी गतिविधियों और युद्धपोतों की आवाजाही की जानकारी हासिल करना विदेशी एजेंसियों का मुख्य लक्ष्य था। • काउंटर इंटेलिजेंस की निगरानी: सुरक्षा एजेंसियों ने संदिग्ध ऑनलाइन गतिविधियों और असामान्य डेटा आदान-प्रदान को ट्रैक करते हुए इस पूरे नेटवर्क की पहचान की। डिजिटल सुराग मिलने के बाद विभिन्न राज्यों में स्थित संदिग्धों पर एक साथ कार्रवाई की गई। सवाल-जवाब 1. ऑपरेशन फायरवॉल 2026 क्या है? यह पाकिस्तान से जुड़े जासूसी नेटवर्क का भंडाफोड़ करने के लिए सुरक्षा एजेंसियों द्वारा 10 राज्यों में चलाया गया एक संयुक्त अभियान है। 2. इस मामले में अब तक कितने लोगों को गिरफ्तार किया गया है? विशाखापट्टनम नौसेना बेस के एक कर्मी और एक चालक सहित दो लोगों को गिरफ्तार किया गया है। 3. जांच के दायरे में कुल कितने लोग हैं? कुल 18 लोग संदेह के घेरे में हैं, जिनमें भारतीय नौसेना के 13 जवान और अधिकारी शामिल हैं। 4. जासूसी नेटवर्क का मुख्य निशाना क्या था? इस नेटवर्क का मुख्य निशाना विशाखापट्टनम स्थित पूर्वी नौसेना कमान की संवेदनशील और गोपनीय जानकारियां जुटाना था। 5. छापेमारी कितने राज्यों में की गई है? काउंटर इंटेलिजेंस टीमों ने देश के 10 अलग-अलग राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में एक साथ छापेमारी की है। https://trendkia.com/national/operation-firewall-2026-pakistan-se-jure-jasusi-raiketa-ka-bhndaphora-navy-ke-13-javana-jancha-ke-ghere-men-44246 TrendKia — Har trend, sabse pehle.