पहाड़ी बारिश से उफनाई शारदा नदी, गोला के रूरा सुल्तानपुर गांव में कटान से सैकड़ों बीघा खेत लील रही तेज़ धार लखीमपुर खीरी जिले में पहाड़ों पर हो रही मूसलाधार बारिश के बाद शारदा नदी का रौद्र रूप देखने को मिल रहा है। गोला तहसील के रूरा सुल्तानपुर गांव के पास वीर बाबा स्थान पर शारदा नदी का तेज कटान जारी है, जिससे किसानों की फसलें और खेत पानी में समा रहे हैं। उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी जिले में पहाड़ों पर जारी अनवरत बारिश का घातक प्रभाव अब निचले और मैदानी इलाकों में तबाही के रूप में सामने आ रहा है। उफान पर आई शारदा नदी ने अपना विकराल रूप दिखा दिया है, जिसके कारण तटवर्ती इलाकों में भीषण कटान शुरू हो गया है। सबसे गंभीर स्थिति गोला तहसील क्षेत्र के रूरा सुल्तानपुर गांव की है, जहाँ नदी की तेज धार किसानों की उपजाऊ जमीन और मेहनत से तैयार फसलों को लगातार अपने आगोश में ले रही है। नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ने के साथ ही किनारे की जमीन भरभराकर पानी में विलीन हो रही है, जिससे पूरे ग्रामीण इलाके में डर और अनिश्चितता का माहौल बन गया है। गोला तहसील के रूरा सुल्तानपुर में कटान का तांडव लखीमपुर खीरी जिले की कुल पांच तहसीलें बाढ़ के संवेदनशील क्षेत्र में आती हैं। इस समय गोला तहसील के अंतर्गत आने वाले रूरा सुल्तानपुर गांव के उत्तर दिशा में स्थित प्रसिद्ध वीर बाबा स्थान के समीप शारदा नदी सबसे ज्यादा कहर बरपा रही है। नदी का प्रवाह इतना प्रचंड है कि तटवर्ती खेतों की मिट्टी तेजी से कटकर धारा में बह रही है। जिन जमीनों पर कल तक लहलहाती फसलें खड़ी थीं, वे देखते ही देखते नदी का हिस्सा बनती जा रही हैं। स्थानीय ग्रामीणों और किसानों के लिए यह केवल भूमि का नुकसान नहीं है, बल्कि उनके पूरे परिवार के भरण-पोषण और आजीविका पर आया गहरा संकट है। धान और गन्ने की लहलहाती फसलें नदी में जलमग्न शारदा नदी के इस भीषण कटाव के कारण किसानों द्वारा खून-पसीने से सींचे गए खेत पूरी तरह तबाह हो रहे हैं। मुख्य रूप से धान और गन्ने की फसलों को भारी नुकसान पहुंचा है। नदी के बहाव के आगे मजबूत तटबंध और पेड़ तक नहीं टिक पा रहे हैं। खेतों में खड़ी फसलें लगातार पानी में समा रही हैं, जिससे किसानों के सामने रोजी-रोटी का गंभीर प्रश्न खड़ा हो गया है। अगर कटान इसी रफ्तार से जारी रहता है, तो आने वाले दिनों में न केवल सैंकड़ों एकड़ कृषि योग्य भूमि का नामोनिशान मिट जाएगा, बल्कि पूरे गांव का नक्शा भी बदल सकता है। ग्रामीणों की आपबीती: आधे घंटे में बह जाती है तीन बीघा जमीन प्रभावित इलाके में स्थिति का जायजा लेने के दौरान रूरा सुल्तानपुर के निवासी और किसान नीरज ने अपनी पीड़ा साझा की। उन्होंने बताया कि पिछले एक सप्ताह से वीर बाबा स्थान के आसपास शारदा नदी बेहद तेजी से कटान कर रही है। स्थिति इतनी खतरनाक है कि महज आधे घंटे के भीतर ही नदी लगभग दो से तीन बीघा जमीन को अपने आगोश में समा लेती है। किसान नीरज का कहना है कि यदि प्रशासन ने समय रहते इस तीव्र कटान को रोकने के ठोस इंतजाम नहीं किए, तो बहुत जल्द पूरे रूरा सुल्तानपुर गांव का अस्तित्व ही समाप्त हो जाएगा। इस बीच, बढ़ते खतरे को देखते हुए स्थानीय प्रशासन द्वारा निचले हिस्सों में रहने वाले ग्रामीणों से लगातार सुरक्षित और ऊंचे स्थानों पर चले जाने की अपील की जा रही है। वर्षों की पूंजी और 7 एकड़ की फसल गँवा चुके किसान एक अन्य स्थानीय किसान जगदीश ने नदी के प्रकोप की खौफनाक दास्तान बयां की। जगदीश के अनुसार, उनकी 7 एकड़ जमीन पर गन्ने की बेहतरीन फसल लगी हुई थी। लेकिन शारदा नदी के अनवरत कटान के कारण उनकी पूरी की पूरी खेती नदी में समा गई। अब उनकी 7 एकड़ जमीन में से केवल एक बीघा गन्ने की फसल ही किसी तरह बची रह गई है, जबकि बाकी सारी ज़मीन और फसल जलमग्न हो चुकी है। यही नहीं, नदी किनारे खड़े विशालकाय पेड़ भी कटान की चपेट में आकर धारा में विलीन हो चुके हैं। इस तबाही ने ग्रामीणों की कठिनाइयों को कई गुना बढ़ा दिया है, और वे अपनी आंखों के सामने अपनी जिंदगी भर की कमाई को नदी में बहते देखने को मजबूर हैं। इसका आप पर असर शारदा नदी के इस भीषण कटान और बाढ़ के खतरे का प्रभाव केवल रूरा सुल्तानपुर तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका व्यापक असर क्षेत्र के किसानों और स्थानीय अर्थव्यवस्था पर पड़ रहा है। • भारत में: पहाड़ी क्षेत्रों में अत्यधिक वर्षा और नदियों के कटान से देश की कृषि आपूर्ति श्रृंखला प्रभावित होती है, जिससे खाद्यान्न और चीनी के उत्पादन तथा कीमतों पर असर पड़ सकता है। मानसून के दौरान आपदा प्रबंधन और तटबंध सुरक्षा की नई चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। • लखीमपुर खीरी (उत्तर प्रदेश) में: गोला तहसील और आसपास की पांच बाढ़ प्रभावित तहसीलों के किसानों की सैकड़ों एकड़ कृषि भूमि जलमग्न होने से स्थानीय स्तर पर गन्ने और धान की पैदावार घटेगी। प्रभावित परिवारों को अपने घर छोड़कर सुरक्षित स्थानों पर शरण लेनी पड़ रही है, जिससे पुनर्वास और वित्तीय संकट गहरा गया है। • किसानों के लिए: 7 एकड़ में लगी फसलें नष्ट होने और जमीन कटने से किसानों की आजीविका और जमा पूंजी खत्म हो गई है, जिससे उन्हें कर्ज और पुनः खेती शुरू करने में भारी कठिनाई होगी। • सुरक्षा और प्रशासन के लिए: तटवर्ती गांवों को बचाने के लिए त्वरित कटान-रोधी कार्य करने और निचले इलाकों में रह रहे लोगों को सुरक्षित निकालने के लिए राहत शिविर बनाने की तत्काल आवश्यकता है। ऐसा क्यों हुआ लखीमपुर खीरी जिले में शारदा नदी के अचानक उग्र रूप लेने और तेजी से कटान करने के पीछे मुख्य भौगोलिक और मौसमी कारण जिम्मेदार हैं। • पहाड़ी इलाकों में मूसलाधार बारिश: उपरी पहाड़ी क्षेत्रों में लगातार हो रही भारी बारिश के कारण नदियों में जलस्तर अचानक बढ़ जाता है। यही अतिरिक्त पानी मैदानी इलाकों में शारदा नदी के तेज बहाव और उफान का मुख्य कारण बना है। • नदी की तेज धार और तटबंध की कमजोरी: जलस्तर बढ़ने के साथ ही नदी का वेग अत्यंत तीव्र हो जाता है, जो किनारे की रेतीली और मुलायम मिट्टी को तेजी से काटता है, जिससे खेत के बड़े-बड़े टुकड़े नदी में विलीन हो जाते हैं। • तटवर्ती गांवों का भौगोलिक स्थान: रूरा सुल्तानपुर गांव के उत्तर में स्थित वीर बाबा स्थान शारदा नदी के सीधे प्रवाह क्षेत्र के समीप है, जिससे यहाँ नदी की धार का सीधा दबाव पड़ता है। सवाल-जवाब 1. लखीमपुर खीरी में शारदा नदी के कटान से कौन सा गांव सबसे ज्यादा प्रभावित है? गोला तहसील के अंतर्गत आने वाला रूरा सुल्तानपुर गांव शारदा नदी के कटान से सबसे ज्यादा प्रभावित है। 2. रूरा सुल्तानपुर गांव में कटान किस स्थान के पास हो रहा है? यह कटान रूरा सुल्तानपुर गांव के उत्तर दिशा में स्थित वीर बाबा स्थान के पास तेजी से हो रहा है। 3. किसान नीरज के अनुसार नदी के कटान की रफ्तार कितनी तेज है? किसान नीरज के अनुसार केवल आधा घंटे के भीतर शारदा नदी लगभग दो से तीन बीघा जमीन अपने आगोश में समा लेती है। 4. किसान जगदीश को इस कटान से कितना नुकसान हुआ है? किसान जगदीश की 7 एकड़ जमीन पर लगी गन्ने की फसल में से केवल एक बीघा फसल बची है, बाकी पूरी फसल नदी में समा गई है। 5. लखीमपुर खीरी जिले में कितनी तहसीलें बाढ़ प्रभावित क्षेत्र में आती हैं? लखीमपुर खीरी जनपद की कुल पांच तहसीलें बाढ़ प्रभावित क्षेत्र के अंतर्गत आती हैं। 6. प्रशासन द्वारा प्रभावित ग्रामीणों के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं? प्रशासन द्वारा लगातार अपील की जा रही है कि लोग निचले इलाकों को छोड़कर ऊंचे और सुरक्षित स्थानों पर चले जाएं। https://trendkia.com/national/pahari-barisha-se-uphanai-sharda-river-gola-ke-rura-sultanpur-ganva-men-katana-se-saikaron-bigha-kheta-lila-rahi-teza-dhara-30069 TrendKia — Har trend, sabse pehle.