पहाड़ों की भारी बारिश से हिमाचल प्रदेश में तबाही, किन्नौर में हाईवे ठप और 11 अगस्त तक यलो अलर्ट हिमाचल प्रदेश में मूसलाधार बारिश और भूस्खलन के कारण किन्नौर, शिमला और मनाली में यातायात ठप हो गया है। मौसम विभाग ने 11 अगस्त तक राज्य में भारी वर्षा का यलो अलर्ट जारी रखा है। हिमाचल प्रदेश के पहाड़ी क्षेत्रों में लगातार हो रही मूसलाधार वर्षा से जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ है। मौसम विज्ञान केंद्र शिमला ने आगामी 11 अगस्त तक राज्य के विभिन्न हिस्सों में तेज बारिश की चेतावनी जारी करते हुए यलो अलर्ट बरकरार रखा है। गुरुवार को किन्नौर जिले के निगुलसरी स्थान पर चट्टानें और भारी पत्थर अचानक गिरने से राष्ट्रीय राजमार्ग पर वाहनों की आवाजाही पूरी तरह ठप हो गई। पिछले 3 वर्षों से निगुलसरी का यह संवेदनशील क्षेत्र स्थानीय निवासियों और प्रशासन के लिए गंभीर समस्या बना हुआ है। कई प्रमुख शहरों में भूस्खलन और यातायात जाम राजधानी शिमला के चमियाना अस्पताल मार्ग पर पहाड़ी का हिस्सा खिसकने से मलबा सड़क पर आ गिरा। इसके बाद प्रशासनिक दल ने भारी मशीनों की मदद से मिट्टी और चट्टानें हटाकर मार्ग को आवागमन के लिए दोबारा सुचारू बनाया। वहीं पर्यटन स्थल मनाली के वशिष्ठ चौक के पास स्थानीय नाला उफान पर आने से भारी मात्रा में कीचड़ और मलबा मुख्य सड़क पर जमा हो गया। मलबे के कारण हाईवे पर गाड़ियों की लंबी कतारें लग गईं और भीषण जाम की स्थिति उत्पन्न हो गई। वर्तमान में बीआरओ (BRO) की टीम सड़क की सफाई और बहाली के कार्य में लगी हुई है। राज्य भर में सड़कों, बिजली और पानी के संकट का ब्योरा राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र (एसईओसी) द्वारा जारी आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, बुधवार शाम तक पूरे प्रदेश में कुल 112 सड़कें यातायात के लिए बंद हो चुकी थीं। इसके अलावा 61 पेयजल योजनाएं बारिश के कारण प्रभावित हुईं और 189 विद्युत ट्रांसफार्मर बंद होने से बिजली आपूर्ति बाधित रही। जिलों के आधार पर बंद सड़कों की स्थिति इस प्रकार है • मंडी जिला: सर्वाधिक 37 सड़कें अवरुद्ध। • कुल्लू जिला: 34 सड़कें यातायात के लिए बंद। • सिरमौर जिला: 29 सड़कें बाधित। • कांगड़ा जिला: 8 सड़कों पर आवागमन बंद। • शिमला जिला: 4 मार्ग बंद। • ऊना जिला: 2 सड़कें बंद। • चंबा जिला: 1 सड़क पर यातायात रुका। पेयजल आपूर्ति की बहाली और बुनियादी ढांचे को नुकसान धर्मशाला ज़ोन के मुख्य अभियंता दीपक गर्ग ने क्षेत्र की स्थिति पर जानकारी देते हुए स्पष्ट किया कि कांगड़ा-चंबा ज़ोन में कुल 1,643 पेयजल योजनाएं संचालित हैं। इनमें से लगभग 820 पेयजल योजनाएं मानसून की वर्षा के चलते समय-समय पर प्रभावित हुई थीं। वर्तमान में जल शक्ति विभाग ने सभी योजनाओं को पुनः चालू कर दिया है, जिसमें से करीब 90 प्रतिशत योजनाओं को स्थायी रूप से ठीक किया गया है और शेष 10 प्रतिशत को वैकल्पिक प्रबंधों के जरिए अस्थायी रूप से चालू रखा गया है। इंजीनियरिंग विभाग के आकलन के अनुसार, इस मानसून सीजन में कांगड़ा और चंबा ज़ोन में लगभग 67 करोड़ रुपये की कुल संपत्ति का नुकसान दर्ज किया गया है। इसमें से चंबा जिले को लगभग 27 करोड़ रुपये और कांगड़ा जिले को करीब 40 करोड़ रुपये की क्षति पहुंची है। चंबा में सबसे अधिक प्रभावित क्षेत्रों में सुल्तानपुर, उदयपुर और ओबरी बाग शामिल हैं। इसके अतिरिक्त धर्मशाला की गज पेयजल योजना, जयसिंहपुर और थुरल की ब्यास नदी पर आधारित योजनाएं तथा भरमौर क्षेत्र की लगभग 10 पेयजल योजनाएं प्रभावित हुई थीं, जिन्हें अब पूर्ण रूप से बहाल कर दिया गया है। विभिन्न जिलों में 24 घंटे के भीतर बारिश और तापमान के आंकड़े मंगलवार शाम से बुधवार शाम के 24 घंटों के दौरान हिमाचल प्रदेश के कई इलाकों में मूसलाधार वर्षा दर्ज की गई। मौसम विभाग द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार जट्टन बैराज क्षेत्र में सबसे ज्यादा 135.4 मिमी वर्षा दर्ज की गई। इसके अलावा राज्य के अन्य प्रमुख स्थानों पर वर्षा का विवरण इस प्रकार रहा • रायपुर मैदान: 124.2 मिमी • नैना देवी: 110.6 मिमी • नाहन: 101.2 मिमी (एक अन्य केंद्र पर 64.8 मिमी) • देहरा गोपीपुर: 97.2 मिमी • नादौन: 90 मिमी • कांगड़ा और घमरूर: 76.2 मिमी प्रत्येक • मुरारी देवी: 66.6 मिमी • धर्मशाला: 60.1 मिमी • नेरी: 58.5 मिमी • ऊना: 52 मिमी • पांवटा साहिब: 50.2 मिमी कांगड़ा जिले में बारिश के साथ तेज गरज और बिजली चमकने की घटनाएं देखी गईं। तापमान की बात करें तो जनजातीय क्षेत्र कुकुमसेरी में सबसे कम न्यूनतम तापमान 13.2 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया, जबकि मैदानी क्षेत्र ऊना में अधिकतम तापमान 34.2 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। इसका आप पर असर • भारत में: पहाड़ी क्षेत्रों की यात्रा करने वाले पर्यटकों और व्यवसायिक ट्रांसपोर्टरों को हिमाचल के प्रभावित मार्गों पर भूस्खलन और लंबे जाम की समस्या झेलनी पड़ सकती है। • हिमाचल प्रदेश में: शिमला, मनाली और किन्नौर के निवासियों के लिए मुख्य राजमार्गों के बंद होने और पेयजल योजनाओं में व्यवधान से दैनिक जीवन और आवाजाही प्रभावित होगी। सवाल-जवाब 1. निगुलसरी में राष्ट्रीय राजमार्ग क्यों बंद हुआ? किन्नौर जिले के निगुलसरी में पहाड़ी से अचानक पत्थरों की बरसात और चट्टानें गिरने के कारण राष्ट्रीय राजमार्ग पर आवाजाही पूरी तरह बाधित हो गई। 2. मौसम विभाग ने हिमाचल प्रदेश के लिए क्या चेतावनी दी है? मौसम विज्ञान केंद्र शिमला ने राज्य के विभिन्न क्षेत्रों में भारी वर्षा को लेकर 11 अगस्त तक यलो अलर्ट जारी किया है। 3. प्रदेश में कितनी सड़कें और जल योजनाएं प्रभावित हुई हैं? राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र (एसईओसी) के अनुसार 112 सड़कें बंद हुईं, 61 पेयजल योजनाएं बाधित हुईं और 189 विद्युत ट्रांसफार्मर बंद हुए। 4. कांगड़ा और चंबा ज़ोन में मानसून से कितना आर्थिक नुकसान हुआ है? कांगड़ा और चंबा ज़ोन में कुल 67 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है, जिसमें चंबा में 27 करोड़ और कांगड़ा में 40 करोड़ रुपये की क्षति शामिल है। 5. पिछले 24 घंटों में सबसे अधिक बारिश कहाँ दर्ज की गई? राज्य में सबसे अधिक 135.4 मिमी बारिश जट्टन बैराज क्षेत्र में दर्ज की गई। https://trendkia.com/national/paharom-ki-bhari-barish-se-himachal-pradesh-mem-tabahi-kinnaur-mem-highway-thap-aur-11-august-tak-yellow-alert-14260 TrendKia — Har trend, sabse pehle.