# पैदल सड़क पार करते समय टक्कर लगने पर कानूनन किसकी तय होती है जवाबदेही

> सड़क हादसों में पैदल यात्रियों और वाहन चालकों के कानूनी दायित्व तय करने के लिए भारतीय न्याय संहिता और मोटर वाहन नियमों के तहत जांच की जाती है।

**Type:** article · **Category:** भारत · **Published:** 2026-09-25 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/national/paidala-saraka-para-karate-samaya-takkara-lagane-para-kanunana-kisaki-taya-hoti-hai-javabadehi-38303 · **Language:** Hindi
**Tags:** सड़क सुरक्षा नियम, मोटर व्हीकल्स एक्ट, BNS धारा 106, जेब्रा क्रॉसिंग नियम, सड़क दुर्घटना मुआवजा, ट्रैफिक नियम भारत

देश की व्यस्त सड़कों पर पैदल चलने वालों के साथ होने वाली दुर्घटनाएं निरंतर गंभीर चिंता का विषय बनी रहती हैं। हाल ही में राजधानी दिल्ली के खजूरी फ्लाईओवर के नजदीक 55 साल की एक महिला जब सड़क पार कर रही थीं, तब वह दुर्भाग्यपूर्ण हादसे का शिकार हो गईं। सामने आई जानकारी के अनुसार पहले उन्हें एक तेज रफ्तार मोटरसाइकिल ने टक्कर मारी और संतुलन बिगड़ने पर वह पीछे से आ रहे एक ट्रक की चपेट में आ गईं, जिससे मौके पर ही उनकी जान चली गई। इस दुखद प्रसंग ने एक बार फिर उस पेचीदा कानूनी सवाल को केंद्र में ला खड़ा किया है कि जब भी सड़क पार करते वक्त कोई पैदल राहगीर वाहन की चपेट में आता है, तो कानून की नजर में मूल गलती किसकी मानी जाएगी। क्या हर परिस्थिति में वाहन चालक ही जिम्मेदार होता है, या फिर पैदल यात्री की लापरवाही भी कानूनी रूप से जवाबदेही तय करने में देखी जाती है।

## सड़क पर पैदल चलने वालों की सुरक्षा को लेकर तय नियम
भारत में वर्ष 2017 में लागू किए गए मोटर व्हीकल्स (ड्राइविंग) रेगुलेशन्स में पैदल यात्रियों को यातायात व्यवस्था का एक अनिवार्य और संवेदनशील अंग घोषित किया गया है। इन विधिक प्रावधानों के अंतर्गत किसी भी चार पहिया अथवा दो पहिया वाहन को चलाने वाले व्यक्ति तथा उसमें सवार अन्य लोगों पर यह स्पष्ट दायित्व सौंपा गया है कि वे सड़क पर मौजूद पैदल यात्रियों, साइकिल चालकों, नन्हे बच्चों, वरिष्ठ नागरिकों एवं दिव्यांगजनों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दें। नियम स्पष्ट करते हैं कि यदि कोई ऐसा स्थान आता है जहां लोग सड़क पार कर रहे हों और वहां कोई इलेक्ट्रॉनिक ट्रैफिक सिग्नल स्थापित न हो, तो वहां पहुंचते ही चालक को अपने वाहन की गति धीमी कर लेनी चाहिए। इसके साथ ही यदि परिस्थिति मांग करे तो वाहन को पूरी तरह रोककर सड़क पार कर रहे नागरिक को पहले सुरक्षित निकलने का अवसर देना अनिवार्य है। इसके अलावा सड़कों के किनारे पैदल चलने के उद्देश्य से बनाए गए फुटपाथ अथवा साइकिल चलाने के लिए निर्धारित विशेष पथ पर कोई भी मोटर वाहन नहीं चलाया जा सकता, जब तक कि मौके पर तैनात ट्रैफिक पुलिस अधिकारी द्वारा विशेष निर्देश न दिया गया हो या सिग्नल से इसकी स्पष्ट अनुमति न मिले।

## पेडेस्ट्रियन या जेब्रा क्रॉसिंग पर चालकों का विधिक कर्तव्य
सड़कों पर सफेद धारियों से चिह्नित जेब्रा क्रॉसिंग या पेडेस्ट्रियन क्रॉसिंग का निर्माण राहगीरों को सुरक्षित तरीके से रास्ता पार कराने के लिए किया जाता है। मोटर वाहन नियमों के अनुसार जब भी कोई वाहन चालक ऐसी क्रॉसिंग के समीप पहुंचता है, तो उसे असाधारण सतर्कता बरतनी होती है। यदि चौराहे पर ट्रैफिक सिग्नल लगा हो, तो वाहन को हमेशा निर्धारित स्टॉप लाइन और जेब्रा क्रॉसिंग से पहले ही रोकना आवश्यक है। सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि यदि सिग्नल पर हरी बत्ती जल चुकी हो और वाहन चलने की स्थिति में आ गए हों, लेकिन कोई पैदल व्यक्ति पहले से ही उस क्रॉसिंग या चौराहे के भीतर कदम रख चुका हो, तो वाहन चालक को अपनी गाड़ी आगे बढ़ाने के बजाय उस राहगीर को रास्ता पार करने की प्राथमिकता देनी होगी। कानूनी जांच के दौरान अदालतें यह बारीक पड़ताल करती हैं कि टक्कर के ठीक पहले पैदल यात्री की भौतिक स्थिति कहां थी और वाहन किस दिशा व ढंग से नियंत्रित किया जा रहा था।

## गलत जगह से सड़क पार करने पर कैसे तय होता है कसूर
आम तौर पर यह धारणा रहती है कि गलत जगह से बिना क्रॉसिंग के सड़क पार करने वाले व्यक्ति की ही सारी गलती मान ली जाएगी, परंतु न्यायिक प्रक्रिया में सिर्फ इसी एक पहलू के आधार पर अंतिम फैसला नहीं होता। किसी भी दुर्घटना के पश्चात पुलिस और न्यायिक जांच के दौरान कई परस्पर जुड़े तथ्यों का विश्लेषण किया जाता है। इसमें देखा जाता है कि जिस स्थान पर हादसा हुआ वहां कोई वैकल्पिक फुटब्रिज, सबवे या ट्रैफिक सिग्नल मौजूद था अथवा नहीं, वाहन की वास्तविक गति कितनी तेज थी, और क्या चालक के पास ब्रेक लगाकर या स्टेयरिंग मोड़कर वाहन को संभालने का यथेष्ट समय था। कानून के व्यावहारिक सिद्धांतों के तहत यदि जांच में यह प्रमाणित होता है कि केवल चालक ही नहीं बल्कि पीड़ित राहगीर ने भी अनुचित स्थान से अचानक दौड़कर असावधानी बरती थी, तो अदालत दोनों पक्षों के आचरण का समग्र मूल्यांकन कर आनुपातिक दायित्व तय करती है। अतः किसी भी घटना के घटित होते ही बिना जांच यह मान लेना गलत है कि सारा दोष केवल चालक का है या केवल पैदल यात्री का।

## लापरवाही साबित होने पर चालक के विरुद्ध कठोर कानूनी धाराएं
यदि जांच एजेंसियों की पड़ताल में यह तथ्य पुष्ट हो जाता है कि वाहन चालक ने तेज रफ्तार, उतावलेपन अथवा खतरनाक अंदाज में गाड़ी चलाई जिससे किसी व्यक्ति का जीवन संकट में पड़ा या उसे शारीरिक चोट पहुंची, तो उसके खिलाफ BNS की धारा 281 के अंतर्गत अभियोग दर्ज किया जाता है। इस धारा में सार्वजनिक मार्ग पर उतावलेपन से गाड़ी चलाने को दंडनीय अपराध की श्रेणी में रखा गया है। वहीं यदि चालक के ऐसे घोर उपेक्षापूर्ण कृत्य के परिणामस्वरूप किसी व्यक्ति की मृत्यु हो जाती है और वह अपराध गैर-इरादतन हत्या के दायरे में नहीं आता, तो BNS की धारा 106(1) के कड़े प्रावधान लागू होते हैं। BNS की धारा 106(1) के तहत दोषी पाए जाने वाले वाहन चालक को अधिकतम 5 साल तक के कारावास की सजा और आर्थिक जुर्माने से दंडित किया जा सकता है।

## हादसा होने के तत्काल बाद चालक के कानूनी दायित्व
सड़क पर किसी व्यक्ति को टक्कर लगने अथवा वाहन से क्षति पहुंचने की दशा में मोटर व्हीकल्स एक्ट की धारा 134 के तहत चालक या वाहन के प्रभारी पर अत्यंत महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां डाली गई हैं। ऐसे समय चालक का यह विधिक कर्तव्य है कि वह घायल व्यक्ति को अविलंब प्राथमिक उपचार दिलाने के समुचित प्रबंध करे और यदि आवश्यक हो तो उसे तुरंत निकटतम अस्पताल या चिकित्सक के पास पहुंचाए। इसके अतिरिक्त, घटना की सूचना और मांगी गई समस्त जानकारियां चालक को बिना विलंब किए और अधिकतम 24 घंटे की निर्धारित समयसीमा के भीतर संबंधित निकटतम पुलिस थाने में दर्ज करानी होती हैं। इन कर्तव्यों की अनदेखी करना अपने आप में कानून का उल्लंघन माना जाता है।

## पीड़ित एवं परिजनों के लिए वित्तीय मुआवजे के प्रावधान
मोटर व्हीकल्स एक्ट में सड़क दुर्घटनाओं के पीड़ितों अथवा उनके आश्रितों को त्वरित आर्थिक राहत प्रदान करने के लिए व्यापक क्षतिपूर्ति तंत्र तैयार किया गया है। कानून की धारा 164 के अंतर्गत यदि किसी वाहन के उपयोग से हुई दुर्घटना में किसी व्यक्ति की मौत हो जाती है, तो उसके वैध उत्तराधिकारियों को 5 लाख रुपये की एकमुश्त राहत राशि दिए जाने का प्रावधान है, जबकि गंभीर रूप से घायल होने की स्थिति में पीड़ित को 2.5 लाख रुपये का मुआवजा दिया जाता है। इस विशेष धारा की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि क्लेम करने वाले पक्ष को वाहन मालिक अथवा चालक की कोई कानूनी गलती या उपेक्षा साबित करने की आवश्यकता नहीं होती। इसके अतिरिक्त अधिक राशि की क्षतिपूर्ति हेतु मोटर दुर्घटना दावा न्यायाधिकरण अर्थात MACT की शरण ली जा सकती है, जिसकी स्थापना का अधिकार मोटर व्हीकल्स एक्ट की धारा 165 के अंतर्गत सक्षम अधिकारियों को प्रदान किया गया है।

## सड़क हादसों में अंतिम जवाबदेही का समग्र निष्कर्ष
तमाम वैधानिक धाराओं और अदालती नजीरों के अध्ययन से यह साफ हो जाता है कि पैदल यात्री और वाहन के बीच होने वाले हादसे में पहले से किसी एक पक्ष को दोषी करार नहीं दिया जा सकता। भारतीय न्याय व्यवस्था घटना की वास्तविक परिस्थितियों, दोनों पक्षों की तात्कालिक प्रतिक्रियाओं और मौके के भौतिक साक्ष्यों के संतुलन पर न्याय तय करती है। जहां राहगीरों से यह अपेक्षा की जाती है कि वे निर्धारित नियमों का पालन करते हुए सतर्कता से सड़क पार करें, वहीं मोटर वाहनों के चालकों पर अन्य कमजोर सड़क उपयोगकर्ताओं की जिंदगी की हिफाजत करने का बेहद ऊंचा कानूनी दायित्व बना रहता है।

## इसका आप पर असर
सड़क पर पैदल चलने वालों और वाहन चलाने वालों दोनों के लिए यह कानूनी जानकारी उनके अधिकारों, दायित्वों और मुआवजे की सुरक्षा सुनिश्चित करती है।

- **पैदल यात्रियों के अधिकार:** जेब्रा क्रॉसिंग पर सिग्नल हरा होने पर भी पहले से पार कर रहे पैदल यात्री को रास्ता पाने का विधिक अधिकार है। यदि आप सड़क पार कर रहे हैं तो चालक को गति धीमी कर आपको रास्ता देना होगा।
- **चालकों की जिम्मेदारी:** बिना सिग्नल वाली जगह पर सड़क पार कर रहे लोगों को देखकर गाड़ी रोकना चालक का कानूनी कर्तव्य है। फुटपाथ या साइकिल लेन पर वाहन चलाने पर भारी कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है।
- **आपराधिक दंड का प्रावधान:** लापरवाही से गाड़ी चलाकर किसी की जान लेने पर BNS की धारा 106(1) के तहत 5 साल तक की जेल हो सकती है। चालकों को किसी भी स्थिति में सार्वजनिक रास्तों पर तेज और खतरनाक ड्राइविंग से बचना होगा।
- **हादसे के बाद मदद:** दुर्घटना होने पर घायल को तुरंत नजदीकी अस्पताल ले जाना और 24 घंटे में थाने को सूचित करना चालक के लिए अनिवार्य है। मदद न करने पर मोटर व्हीकल्स एक्ट की धारा 134 के तहत अतिरिक्त कानूनी संकट हो सकता है।
- **त्वरित मुआवजा प्रक्रिया:** धारा 164 के तहत मौत पर 5 लाख रुपये और गंभीर चोट पर 2.5 लाख रुपये पाने के लिए चालक की गलती साबित करना जरूरी नहीं है। पीड़ित परिवार मोटर दुर्घटना दावा न्यायाधिकरण (MACT) में भी आवेदन कर उचित मुआवजा प्राप्त कर सकते हैं।

## ऐसा क्यों हुआ
पैदल सड़क हादसों के कानूनी विवाद इसलिए उठते हैं क्योंकि सड़कों पर तेज गति वाले वाहनों और असुरक्षित पैदल राहगीरों के बीच सीधे टकराव की स्थिति बन जाती है। ऐसे मामलों में जवाबदेही तय करने के लिए प्राथमिक साक्ष्यों और नियमों की कसौटी पर पड़ताल की जाती है।

- **हादसे का मुख्य कारण:** दिल्ली के खजूरी फ्लाईओवर के पास 55 वर्षीय महिला सड़क पार करते समय पहले मोटरसाइकिल और फिर ट्रक की चपेट में आ गईं। वाहनों की अनियंत्रित गति और सड़क पार करने के सुरक्षित प्रावधानों का अभाव अक्सर जानलेवा साबित होता है।
- **कानूनी मानकों की जटिलता:** अदालतें केवल यह नहीं देखतीं कि व्यक्ति कहां से सड़क पार कर रहा था, बल्कि चालक के रिएक्शन टाइम और स्पीड का भी मूल्यांकन करती हैं। दोनों पक्षों के तात्कालिक आचरण को देखकर ही आनुपातिक लापरवाही निर्धारित की जाती है।
- **सख्त कानूनों का क्रियान्वयन:** पुराने नियमों की जगह BNS की धारा 281 और 106(1) के तहत कड़ी सजा इसलिए रखी गई है ताकि वाहन चालक सतर्क रहें। मोटर व्हीकल्स एक्ट की धारा 164 के तहत बिना गलती साबित किए मुआवजे का नियम पीड़ितों को फौरी मदद देने के लिए बना है।

## सवाल-जवाब

### 1. सड़क पार करते समय हादसा होने पर क्या हमेशा चालक की ही गलती मानी जाती है?
नहीं, अदालत घटना के सभी तथ्यों, वाहन की गति, मौके पर सिग्नल या क्रॉसिंग की मौजूदगी और दोनों पक्षों की लापरवाही को देखकर ही जिम्मेदारी तय करती है।

### 2. जेब्रा क्रॉसिंग पर सिग्नल हरा होने पर क्या पैदल यात्री को रुकना पड़ेगा?
यदि कोई पैदल यात्री पहले से ही जेब्रा क्रॉसिंग पर सड़क पार कर रहा है, तो सिग्नल हरा होने के बाद भी चालक को रुककर उसे रास्ता देना अनिवार्य है।

### 3. लापरवाही से गाड़ी चलाकर किसी की जान लेने पर चालक को कितनी सजा हो सकती है?
BNS की धारा 106(1) के तहत दोषी पाए जाने पर वाहन चालक को अधिकतम 5 साल तक की जेल और आर्थिक जुर्माने की सजा हो सकती है।

### 4. हादसे के बाद घायल की मदद करने के संबंध में चालक के लिए क्या नियम हैं?
मोटर व्हीकल्स एक्ट की धारा 134 के अनुसार चालक को घायल को तुरंत अस्पताल पहुंचाना और 24 घंटे के भीतर नजदीकी थाने में सूचना देना अनिवार्य है।

### 5. सड़क हादसे में मौत होने पर पीड़ित परिवार को बिना गलती साबित किए कितना मुआवजा मिलता है?
मोटर व्हीकल्स एक्ट की धारा 164 के तहत बिना किसी की गलती साबित किए मृतक के वारिसों को 5 लाख रुपये और गंभीर घायल को 2.5 लाख रुपये मिलते हैं।

### 6. अधिक मुआवजे की मांग के लिए किस फोरम में अपील की जा सकती है?
मोटर व्हीकल्स एक्ट की धारा 165 के अंतर्गत गठित मोटर दुर्घटना दावा न्यायाधिकरण (MACT) में विस्तृत मुआवजे के लिए दावा किया जा सकता है।

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