पाली में डीएपी खाद के संकट से जूझ रहे किसान, सहकारी समिति पर कतारों के बावजूद लौटना पड़ रहा खाली हाथ पाली में बुवाई के वक्त डीएपी खाद की भारी किल्लत के चलते किसान क्रय-विक्रय सहकारी समिति के चक्कर काटने को मजबूर हैं। तड़के से लाइनों में लगने के बावजूद स्टॉक खत्म होने से किसानों में नाराजगी बढ़ रही है। जिले भर के ग्रामीण क्षेत्रों में फसलों की बुवाई का दौर शुरू हो चुका है, लेकिन ठीक इसी महत्वपूर्ण पड़ाव पर किसानों के सामने रासायनिक खाद की गंभीर समस्या खड़ी हो गई है। पाली शहर स्थित क्रय-विक्रय सहकारी समिति के बाहर खाद का एक-एक कट्टा हासिल करने की आस में अन्नदाता पिछले दो-तीन दिनों से लगातार चक्कर काट रहे हैं। दूरदराज के ग्रामीण इलाकों से किराया खर्च कर और खेती का जरूरी काम छोड़कर जिला मुख्यालय पहुंच रहे किसानों को दिनभर इंतजार के बाद खाली हाथ ही लौटना पड़ रहा है। लगातार प्रयास करने के बावजूद खाद न मिलने की वजह से किसानों का समय और धन दोनों व्यर्थ हो रहा है, जिससे उनकी परेशानी लगातार बढ़ती जा रही है। बुवाई के मुख्य समय पर दोहराए गए पिछले साल जैसे हालात जिले में खेतों को तैयार करने और बुवाई करने के ऐन वक्त पर डीएपी की अनुपलब्धता ने काश्तकारों की पेशानी पर बल ला दिए हैं। किसानों के अनुसार बीते वर्ष भी इसी बुवाई सत्र के दौरान खाद की ऐसी ही भारी किल्लत पैदा हुई थी, जिससे फसलों की समय पर बुवाई में गंभीर रुकावट आई थी। इस साल भी प्रशासन की ओर से अग्रिम प्रबंधन न किए जाने के कारण दोबारा वही पुरानी अव्यवस्था दोहराई जा रही है। लगातार दूसरे साल बुवाई के वक्त खाद की कमी का सामना करने से किसानों के चेहरों पर जहां फसल पिछड़ने की चिंता दिख रही है, वहीं तंत्र की लचर कार्यप्रणाली को लेकर आक्रोश भी साफ नजर आ रहा है। तड़के छह बजे से कतारों में खड़े होने पर भी मिल रही मायूसी खाद प्राप्त करने की उम्मीद में किसान भोर होते ही अपने घरों से निकल पड़ते हैं। नई सब्जी मंडी परिसर में संचालित क्रय-विक्रय सहकारी समिति के केंद्र पर रोजाना सुबह से ही दर्जनों की तादाद में किसान जुटना शुरू हो जाते हैं। सुबह छह बजे से लंबी कतारों में खड़े रहने के बाद जब वितरण की बारी आती है, तो कागजों पर नाम दर्ज करने के बाद कर्मचारियों द्वारा स्टॉक समाप्त होने की बात कहकर उन्हें लौटा दिया जाता है। सुदूर गांवों से पाली आने-जाने में किसानों का न सिर्फ भारी किराया खर्च हो रहा है, बल्कि लगातार चक्कर लगाने के बाद भी हाथ कुछ नहीं लग रहा है। परिजनों और बच्चों को छोड़कर जुटीं महिलाएं, व्यवस्था पर फूटा गुस्सा खाद वितरण की बिगड़ी व्यवस्था से महिला किसानों की मुश्किलें भी बढ़ गई हैं। मंडिया गांव निवासी मंजू का कहना है कि वे अपने नन्हे बच्चों को घर पर अकेला छोड़कर सुबह छह बजे ही सहकारी समिति की कतार में लग गई थीं, लेकिन कई दिनों से लगातार आने के बाद भी उन्हें खाद का एक भी कट्टा नहीं मिल सका। इसी प्रकार मानपुरा भाकरी गांव के भीमाराम कीर और मंडिया गांव के दीपाराम ने अपनी व्यथा साझा करते हुए बताया कि वे पिछले कई दिनों से लगातार समिति के चक्कर लगा रहे हैं। हर रोज कतार में खड़े होकर रजिस्टर में नाम तो दर्ज करवा दिया जाता है, लेकिन शाम ढलते ही खाद खत्म होने की सूचना देकर घर भेज दिया जाता है। आधार कार्ड पर पांच कट्टों का नियम, नई आपूर्ति आने पर ही बंटेगी खाद सहकारी समिति के कर्मचारियों ने बताया कि वर्तमान में डीएपी खाद का पूरा भंडार समाप्त हो चुका है। विभाग की ओर से उच्च अधिकारियों को खाद की अतिरिक्त रैक और नई आपूर्ति के लिए मांग पत्र भेजा जा चुका है। कर्मचारियों के अनुसार खाद की कालाबाजारी रोकने और सभी जरूरतमंद काश्तकारों तक निष्पक्ष वितरण सुनिश्चित करने के मकसद से प्रति आधार कार्ड पर अधिकतम पांच कट्टे देने की सीमा निर्धारित की गई है। जैसे ही जिले को नई खेप प्राप्त होगी, कतारबद्ध किसानों को खाद का वितरण पुनः शुरू कर दिया जाएगा। मांग पूरी न होने पर किसानों ने दी बड़े आंदोलन की चेतावनी अन्नदाताओं का साफ कहना है कि बुवाई का अनुकूल समय सीमित होता है और यदि समय रहते खेतों में डीएपी नहीं डाली गई तो उत्पादन पर भारी प्रतिकूल असर पड़ेगा। किसानों ने रोष जताते हुए कहा कि प्रशासन ने समय रहते खाद के भंडारण की पुख्ता व्यवस्था नहीं की, जिसका खामियाजा अब ग्रामीण भुगत रहे हैं। काश्तकारों ने चेतावनी दी है कि यदि प्रशासन ने तुरंत खाद की पर्याप्त खेप मंगाकर पारदर्शी वितरण शुरू नहीं कराया, तो वे सड़कों पर उतरकर व्यापक आंदोलन करने को बाध्य होंगे। इसका आप पर असर पाली में बुवाई के नाजुक दौर में डीएपी खाद न मिलने से फसल की समयबद्धता और किसानों की उत्पादन लागत दोनों प्रभावित हो रही हैं। • पाली में: बुवाई के समय खाद न मिलने से किसानों के खेतों में बुवाई पिछड़ सकती है, जिससे आगामी फसल के उत्पादन और गुणवत्ता पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। लगातार पाली शहर के चक्कर लगाने और किराया खर्च करने से किसानों की खेती की प्रारंभिक लागत बढ़ रही है। • भारत में: प्रमुख रबी और खरीफ बुवाई सत्रों के दौरान समय पर उर्वरक प्रबंधन न होने से ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर सीधा दबाव पड़ता है। सुचारू आपूर्ति बहाल न होने पर कृषि उपजों के उत्पादन चक्र में देरी का जोखिम बढ़ जाता है। • वितरण का नया नियम: प्रशासन ने कालाबाजारी पर रोक लगाने के लिए प्रति आधार कार्ड अधिकतम पांच कट्टे देने की सीमा तय की है। नई खेप आते ही किसानों को अपने वैध आधार कार्ड के साथ सहकारी केंद्र पर उपस्थित होना होगा। • आंदोलन की चेतावनी: यदि अगले कुछ दिनों में अतिरिक्त सप्लाई नहीं पहुंची तो किसान संगठित होकर आंदोलन कर सकते हैं, जिससे स्थानीय प्रशासनिक व्यवस्था और आवागमन प्रभावित हो सकता है। ऐसा क्यों हुआ सहकारी केंद्रों पर मौजूद डीएपी का पिछला स्टॉक पूरी तरह समाप्त हो चुका है, जबकि बुवाई सीजन शुरू होते ही मांग में अचानक कई गुना वृद्धि हो गई है। • मांग और आपूर्ति में असंतुलन: बुवाई का सही समय होने के कारण जिले भर के सभी क्षेत्रों में एक साथ डीएपी की भारी मांग निकल आई है। समिति के पास उपलब्ध सीमित स्टॉक शुरुआती दिनों में ही खत्म हो गया और उच्च स्तर से समय पर नई आपूर्ति नहीं पहुंच सकी। • अग्रिम भंडारण का अभाव: पिछले साल भी इसी समय खाद की किल्लत देखी गई थी, फिर भी इस बार सीजन से पूर्व पर्याप्त बफर स्टॉक का इंतजाम नहीं किया गया। उचित योजना के अभाव में हर साल बुवाई के वक्त यह संकट दोहराया जा रहा है। • उच्च स्तर पर लंबित आवंटन: स्थानीय सहकारी समिति के अनुसार अतिरिक्त स्टॉक की मांग उच्चाधिकारियों को भेजी जा चुकी है। अब पूरा वितरण राज्य और क्षेत्रीय स्तर से नई रैक या मालवाहक आपूर्ति प्राप्त होने पर ही निर्भर है। सवाल-जवाब 1. पाली में किसान किस समस्या को लेकर परेशान हैं? फसल बुवाई के समय किसानों को डीएपी खाद नहीं मिल पा रही है और वे दो-तीन दिनों से सहकारी समिति के चक्कर काट रहे हैं। 2. किसानों को खाद के लिए सुबह कितने बजे से कतार में लगना पड़ रहा है? खाद लेने के लिए किसान सुबह छह बजे से ही क्रय-विक्रय सहकारी समिति के बाहर कतारों में खड़े हो रहे हैं। 3. पाली में खाद वितरण के लिए क्या सीमा तय की गई है? कालाबाजारी रोकने और सभी तक खाद पहुंचाने के लिए एक आधार कार्ड पर अधिकतम पांच कट्टे देने का नियम बनाया गया है। 4. खाद न मिलने पर किसानों ने क्या चेतावनी दी है? किसानों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही पर्याप्त मात्रा में खाद की आपूर्ति नहीं की गई, तो वे आंदोलन करने को मजबूर होंगे। https://trendkia.com/national/pali-men-diepi-khada-ke-snkata-se-jujha-rahe-kisana-sahakari-samiti-para-kataron-ke-bavajuda-lautana-para-raha-khali-hatha-36511 TrendKia — Har trend, sabse pehle.