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  "type": "article",
  "title": "पशुपालक किसानों के लिए मौका, बायोगैस संयंत्र स्थापना पर सरकार दे रही 21 हजार रुपये तक अनुदान",
  "summary": "जैविक खेती प्रोत्साहन योजना के अंतर्गत पशुधन रखने वाले किसान 30 सितंबर तक डीबीटी पोर्टल पर गोबर गैस संयंत्र के लिए 50 फीसदी सब्सिडी हेतु आवेदन कर सकते हैं।",
  "content": "ग्रामीण इलाकों में पशुपालन से जुड़े परिवारों के लिए रसोई ईंधन के मासिक खर्च में राहत पाने का नया अवसर सामने आया है। कृषि विभाग की जैविक खेती प्रोत्साहन योजना के तहत किसानों को अपने घरों में बायोगैस संयंत्र लगाने के लिए वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई जा रही है। घर में गाय, भैंस या अन्य दुधारू मवेशी रखने वाले परिवार इस व्यवस्था को अपनाकर रसोई गैस सिलेंडरों पर हर महीने खर्च होने वाले 1,000 से 2,000 रुपये तक की बचत कर सकते हैं। इस पहल का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में स्वच्छ ऊर्जा के उपयोग को बढ़ावा देना और खेती की लागत में कमी लाना है। इसके लिए विभागीय स्तर पर डिजिटल माध्यम से पंजीयन की प्रक्रिया औपचारिक रूप से जारी कर दी गई है।\n\nसब्सिडी का गणित और संयंत्र की क्षमता\nकृषि विभाग के तय मानकों के अनुसार, दो घन मीटर की क्षमता वाले गोबर गैस प्लांट की स्थापना पर कुल लागत का 50 प्रतिशत अथवा अधिकतम 21,000 रुपये तक की राशि अनुदान के रूप में दी जा रही है। संयंत्र लग जाने के उपरांत किसान दैनिक भोजन पकाने के लिए इस गैस का सीधा उपयोग कर सकेंगे। रसोई गैस पर होने वाली बचत प्रत्यक्ष तौर पर परिवार की कुल खपत और संयंत्र से प्रतिदिन उत्पन्न होने वाली गैस की मात्रा पर निर्भर करेगी। जो किसान इस सरकारी सहायता का लाभ लेना चाहते हैं, वे कृषि विभाग के डीबीटी पोर्टल पर जाकर ऑनलाइन आवेदन जमा कर सकते हैं। इस योजना में सम्मिलित होने के लिए अंतिम समय-सीमा 30 सितंबर 2026 निर्धारित है।\n\nरसोई ईंधन के साथ बिजली उत्पादन और जैविक खाद का दोहरा लाभ\nबायोगैस संयंत्र की उपयोगिता सिर्फ चूल्हा जलाने तक ही सीमित नहीं रहती। यदि तकनीकी रूप से समुचित व्यवस्था की जाए, तो इस गैस की सहायता से घरेलू स्तर पर बिजली भी तैयार की जा सकती है। इसके अतिरिक्त, गैस बनने के बाद संयंत्र से बाहर आने वाली स्लरी किसानों के लिए एक बहुमूल्य प्राकृतिक संसाधन सिद्ध होती है। किसान इस अवशिष्ट स्लरी का उपयोग सीधे फसलों में तरल जैविक खाद के रूप में कर सकते हैं या फिर इससे उच्च गुणवत्ता वाला वर्मी कंपोस्ट खाद तैयार किया जा सकता है। इससे न केवल खेतों की उर्वरा शक्ति में निरंतर सुधार आता है, बल्कि बाजार से खरीदी जाने वाली महंगी रासायनिक खादों पर होने वाले भारी खर्च में भी बड़ी कटौती होती है।\n\nगया जिले में लक्ष्य और तकनीकी शर्तें\nवित्तीय वर्ष 2026-27 के दौरान गया जिले में कुल 10 बायोगैस संयंत्रों की स्थापना का प्रशासनिक लक्ष्य रखा गया है। जिला कृषि पदाधिकारी संजीव कुमार ने बताया कि संयंत्र निर्माण के लिए दीनबंधु मॉडल को प्राथमिकता दी जा रही है, जिसके निर्माण हेतु परिसर में कम से कम 10×12 वर्ग फीट खुली जमीन की उपलब्धता अनिवार्य है। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार की ओर से प्रत्येक संयंत्र इकाई पर 21,000 रुपये की अधिकतम सब्सिडी सीधे दी जाती है। इसके साथ ही तकनीकी सहायता व निर्माण कार्य से जुड़े सर्विस प्रोवाइडर को 1,500 रुपये का भुगतान किया जाता है। इस प्रकार एक इकाई की स्थापना पर मिलने वाला कुल सरकारी सहयोग 22,500 रुपये तक पहुंच जाता है।\n\nस्वीकृति की स्थिति और आवेदन का तरीका\nसंजीव कुमार के अनुसार, योजना को लेकर किसानों में खासा उत्साह देखा गया है और जिले में अब तक 114 किसान अपना आवेदन दर्ज करा चुके हैं। प्राप्त आवेदनों की प्राथमिक जांच के बाद तीन किसानों के बायोगैस संयंत्र स्थापित करने के प्रस्तावों को विधिवत मंजूरी भी प्रदान की जा चुकी है। जिन परिवारों के पास पर्याप्त संख्या में गाय, भैंस अथवा अन्य पशुधन उपलब्ध है, वे ताजा गोबर की नियमित आपूर्ति कर संयंत्र को सुचारू रख सकते हैं। इच्छुक कृषकों को सलाह दी गई है कि वे 30 सितंबर 2026 से पूर्व डीबीटी पोर्टल पर अपना फॉर्म सबमिट करें। आवेदन करने से पहले किसान अपनी पात्रता, आवश्यक भू-अभिलेख और अनुदान संबंधी सभी दिशा-निर्देशों की भली-भांति जांच अवश्य कर लें।\n\nइसका आप पर असर\nयह योजना मवेशी पालक किसानों के मासिक रसोई खर्च और रासायनिक उर्वरक की लागत को घटाकर सीधा आर्थिक लाभ प्रदान करती है।\n\n• भारत में: पशुपालक ग्रामीण परिवार बायोगैस अपनाकर रसोई गैस सिलेंडर पर हर महीने होने वाले 1,000 से 2,000 रुपये के खर्च को कम कर सकते हैं। संयंत्र की अवशेष स्लरी से जैविक खाद बनाकर खेतों की उर्वरता सुधारी जा सकती है, जिससे बाजार से खरीदे जाने वाले रसायनों पर निर्भरता घटती है।\n• गया में: जिले के किसानों के लिए वित्तीय वर्ष 2026-27 में 10 संयंत्र लगाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है, जिसके तहत 21,000 रुपये तक सब्सिडी और 1,500 रुपये सेवा प्रदाता सहायता उपलब्ध है। इच्छुक किसान 30 सितंबर 2026 से पहले कृषि विभाग के डीबीटी पोर्टल पर आवेदन करके इस योजना में शामिल हो सकते हैं।\n• आवश्यक संसाधन: संयंत्र लगाने के लिए परिवार के पास गाय, भैंस या अन्य पशुधन और न्यूनतम 10×12 वर्ग फीट खुली जमीन होना अनिवार्य है। यह ताजा गोबर की निरंतर उपलब्धता सुनिश्चित कर प्रतिदिन खाना पकाने के लिए पर्याप्त गैस उत्पादन करने में मदद करता है।\n• आवेदन की समय-सीमा: योजना में भाग लेने के लिए डीबीटी पोर्टल पर डिजिटल आवेदन प्रक्रिया चालू है और इसकी अंतिम तिथि 30 सितंबर 2026 रखी गई है। स्वीकृति से पहले किसानों को अपने आवश्यक दस्तावेज और पात्रता शर्तों की आधिकारिक जांच पूरी करनी होगी।\n\nऐसा क्यों हुआ\nकृषि विभाग ने पर्यावरण अनुकूल ऊर्जा को बढ़ावा देने और रासायनिक उर्वरकों पर किसानों की निर्भरता कम करने के उद्देश्य से यह पहल शुरू की है।\n\n• जैविक खेती को प्रोत्साहन: रासायनिक खादों की बढ़ती लागत और भूमि की घटती उर्वरता को देखते हुए सरकार जैविक और प्राकृतिक खेती के विकल्पों पर जोर दे रही है। बायोगैस संयंत्र से निकलने वाली स्लरी सीधे खेतों में खाद और वर्मी कंपोस्ट बनाने के लिए एक प्रभावी जैविक विकल्प बनती है।\n• घरेलू ईंधन लागत में राहत: ग्रामीण परिवारों में एलपीजी सिलेंडरों पर हर महीने 1,000 से 2,000 रुपये खर्च होते हैं, जो छोटे किसानों के बजट पर भारी पड़ते हैं। घरेलू स्तर पर उपलब्ध पशुधन के गोबर का सदुपयोग कर किसानों को आत्मनिर्भर रसोई गैस उपलब्ध कराना इसका सीधा उद्देश्य है।\n• प्रशासनिक योजना और बजट आवंटन: वित्तीय वर्ष 2026-27 के अंतर्गत निर्धारित लक्ष्यों के अनुसार प्रत्येक पात्र संयंत्र पर 50 प्रतिशत तक अनुदान दिया जा रहा है। इसी क्रम में गया जिले में 10 संयंत्रों का कोटा तय कर डीबीटी पोर्टल के जरिए पारदर्शी चयन प्रक्रिया अपनाई गई है।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. गोबर गैस संयंत्र लगाने के लिए सरकार कितनी सब्सिडी दे रही है?\nयोजना के तहत दो घन मीटर क्षमता वाले संयंत्र की स्थापना पर लागत का 50 प्रतिशत या अधिकतम 21,000 रुपये तक का अनुदान दिया जाता है।\n\n2. बायोगैस संयंत्र के लिए ऑनलाइन आवेदन की अंतिम तारीख क्या है?\nइच्छुक किसान कृषि विभाग के डीबीटी पोर्टल पर 30 सितंबर 2026 तक ऑनलाइन आवेदन जमा कर सकते हैं।\n\n3. दीनबंधु मॉडल के बायोगैस प्लांट के लिए कितनी जमीन की जरूरत होती है?\nजिला कृषि पदाधिकारी के अनुसार दीनबंधु मॉडल संयंत्र की स्थापना के लिए कम से कम 10×12 वर्ग फीट जमीन की आवश्यकता होती है।\n\n4. वित्तीय वर्ष 2026-27 में गया जिले में कितने संयंत्र लगाने का लक्ष्य है?\nगया जिले में इस वित्तीय वर्ष के दौरान कुल 10 गोबर गैस संयंत्र स्थापित करने का प्रशासनिक लक्ष्य रखा गया है।\n\n5. गया जिले में अब तक कितने किसानों ने आवेदन किया है और कितनों को मंजूरी मिली है?\nजिले में अब तक कुल 114 किसानों ने आवेदन जमा किया है, जिनमें से तीन किसानों को संयंत्र स्थापित करने की स्वीकृति मिल चुकी है।\n\n6. संयंत्र से निकलने वाली स्लरी का उपयोग किस काम में किया जा सकता है?\nकिसान इस स्लरी को सीधे खेतों में जैविक खाद के रूप में डाल सकते हैं और इसका उपयोग वर्मी कंपोस्ट तैयार करने में भी कर सकते हैं।",
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  "category": "भारत",
  "publishedAt": "2026-09-21",
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    "बायोगैस संयंत्र",
    "कृषि विभाग",
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