पति के दफ्तर तक शिकायत पहुंचाना पत्नियों को पड़ सकता है भारी, सुप्रीम कोर्ट की सख्त नसीहत सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि वैवाहिक विवादों के दौरान पति के नियोक्ता को शिकायत भेजना पत्नी के लिए ही नुकसानदेह साबित हो सकता है, क्योंकि इससे पति की नौकरी जाने पर भरण-पोषण का दावा भी कमजोर पड़ जाएगा. पति-पत्नी के बीच चल रहे विवादों में अब पत्नियां एक नया हथियार आजमा रही हैं, सीधे पति के दफ्तर को चिट्ठी लिखकर शिकायत दर्ज कराना. सुप्रीम कोर्ट ने इस बढ़ते चलन पर कड़ी नाराजगी जताते हुए कहा है कि ऐसा करने से पति की नौकरी छिन सकती है और इसका खामियाजा आखिरकार पत्नी को ही भरण-पोषण के दावे के रूप में भुगतना पड़ सकता है. ट्रांसफर याचिका पर हुई सुनवाई जस्टिस बी.वी. नागरत्ना और जस्टिस आर. महादेवन की पीठ के सामने एक महिला की स्थानांतरण याचिका आई थी. महिला चाहती थी कि उसके पति के एक दोस्त ने असम में उसके खिलाफ जो मानहानि का मुकदमा दर्ज कराया है, उसे उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद स्थानांतरित कर दिया जाए. उसकी दलील थी कि पति से जुड़े बाकी सारे मुकदमे पहले से ही गाजियाबाद की अदालतों में लंबित हैं, इसलिए मानहानि केस को भी वहीं भेज दिया जाना ठीक रहेगा. जस्टिस नागरत्ना की तल्ख टिप्पणी सुनवाई के दौरान जस्टिस बी.वी. नागरत्ना ने कहा कि वैवाहिक विवादों के दौरान कई महिलाएं अपने पतियों के नियोक्ताओं को पत्र लिखने का तरीका अपना रही हैं, जिसकी वजह से पतियों की नौकरियां तक जा रही हैं. पीठ ने साफ शब्दों में कहा, "तलाक मांगना एक बात है, लेकिन किसी जीवनसाथी की रोजी-रोटी छीनना उससे भी बदतर है." पीठ ने आगे कहा कि वैवाहिक विवादों में पति के नियोक्ता को पत्र लिखना पत्नी द्वारा उठाया जाने वाला सबसे गलत कदम है, क्योंकि इससे पति की नौकरी जा सकती है और भविष्य में भरण-पोषण के किसी दावे की कोई ठोस बुनियाद ही नहीं बचती. मानहानि केस के पीछे की कहानी महिला के वकील ने अदालत को बताया कि यह मानहानि का मुकदमा उसके पति के एक करीबी दोस्त और सहकर्मी ने दर्ज कराया है, और ऐसा उसने पति के कहने पर ही किया. वकील के मुताबिक इस मानहानि केस की जड़ में वह प्रतिनिधित्व है जो महिला ने दिल्ली में वायुसेना के अधिकारियों को भेजा था. उस शिकायत में महिला ने आरोप लगाया था कि उसका पति, जो वायुसेना में अधिकारी है, सेवा नियमों की अनदेखी करते हुए अपना अलग से स्वतंत्र व्यवसाय चला रहा है. हेलमेट चोरी के झूठे आरोप का जिक्र महिला के वकील ने अदालत में यह सफाई भी दी कि वायुसेना को शिकायत भेजने का कदम उन्होंने तब उठाया, जब पति ने उनके और उनके भाई के खिलाफ वायुसेना का हेलमेट चुराने की झूठी शिकायत दर्ज करा दी थी. वकील ने कहा कि महिला की मंशा सिर्फ यह पता लगाने की थी कि उसे जो सामान आवंटित किया गया था, उसकी असल स्थिति क्या है, इसके पीछे कोई दुर्भावना नहीं थी. अब मध्यस्थता केंद्र सुलझाएगा विवाद पूरे मामले को सुनने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने इसे आपसी सुलह की गुंजाइश तलाशने के लिए सुप्रीम कोर्ट मध्यस्थता केंद्र भेज दिया है. साथ ही जस्टिस नागरत्ना ने महिला के वकील से यह भी कहा कि वे अपनी मुवक्किल को समझाएं कि वह सभी विवादों को निपटाने और लगाए गए आरोपों को वापस लेने पर विचार करे, ताकि मामला बातचीत से ही सुलझ सके. इसका आप पर असर यह टिप्पणी उन जोड़ों के लिए अहम है जो अभी वैवाहिक विवाद या तलाक की कानूनी प्रक्रिया से गुजर रहे हैं. • विवाद में उलझे परिवारों के लिए: सुप्रीम कोर्ट की यह टिप्पणी साफ संकेत देती है कि पति के नियोक्ता को शिकायत भेजने जैसे कदम अदालत में पत्नी के खिलाफ भी जा सकते हैं. • भरण-पोषण के दावेदारों के लिए: अगर पति की नौकरी चली जाती है, तो भविष्य में मांगा जाने वाला भरण-पोषण भी खतरे में पड़ सकता है, इसलिए ऐसा कदम उठाने से पहले कानूनी सलाह लेना जरूरी है. सवाल-जवाब 1. सुप्रीम कोर्ट ने यह टिप्पणी किस मामले की सुनवाई के दौरान की? जस्टिस बी.वी. नागरत्ना और जस्टिस आर. महादेवन की पीठ ने एक महिला की स्थानांतरण याचिका पर सुनवाई करते हुए यह टिप्पणी की. 2. महिला ने अदालत से क्या मांग की थी? उसने असम में दर्ज मानहानि के मुकदमे को गाजियाबाद स्थानांतरित करने की मांग की, क्योंकि पति से जुड़े बाकी मामले पहले से ही वहां लंबित थे. 3. मानहानि का मुकदमा किसने दर्ज कराया? महिला के पति के करीबी दोस्त और सहकर्मी ने, पति के कहने पर, यह मानहानि केस दर्ज कराया. 4. महिला ने वायुसेना को किस बात की शिकायत भेजी थी? उसने आरोप लगाया था कि उसका वायुसेना अधिकारी पति सेवा नियमों का उल्लंघन कर एक स्वतंत्र व्यवसाय चला रहा है. 5. हेलमेट चोरी के आरोप का इस मामले से क्या संबंध है? पति ने महिला और उसके भाई पर वायुसेना का हेलमेट चुराने का झूठा आरोप लगाया था, जिसके जवाब में महिला ने वायुसेना को शिकायत भेजी थी. 6. सुप्रीम कोर्ट ने मामले में आगे क्या आदेश दिया? कोर्ट ने पूरा विवाद सुप्रीम कोर्ट मध्यस्थता केंद्र भेज दिया है ताकि आपसी सुलह की संभावना तलाशी जा सके. https://trendkia.com/national/pati-ke-daphtara-taka-shikayata-pahunchana-patniyon-ko-para-sakata-hai-bhari-supreme-court-ki-sakhta-nasihata-9443 TrendKia — Har trend, sabse pehle.