फसलों को मौसम की मार से बचाएगा शेडनेट हाउस, सरकार दे रही है 70 फीसदी तक सब्सिडी; जानें आवेदन का तरीका राज्य सरकार किसानों को शेडनेट हाउस के निर्माण पर 70 प्रतिशत तक का वित्तीय अनुदान दे रही है, जिससे सुरक्षित खेती को बढ़ावा मिलेगा और फसल की पैदावार बढ़ेगी। खुले आसमान के नीचे पारंपरिक खेती करने वाले किसानों के लिए अत्यधिक गर्मी, तेज लू, ओलावृष्टि और बेमौसम बारिश हमेशा से एक बड़ी आफत रही है। इस तरह की प्राकृतिक चुनौतियों से निपटने के लिए संरक्षित खेती यानी प्रोटेक्टेड कल्टीवेशन एक वरदान साबित हो रहा है। शेडनेट हाउस तकनीक को अपनाकर किसान न केवल सालभर विभिन्न प्रकार की सब्जियों, फूलों और पौधशाला का बेहतर उत्पादन ले सकते हैं, बल्कि अपनी आमदनी को भी बढ़ा सकते हैं। आधुनिक खेती की इस तकनीक को बढ़ावा देने के लिए राज्य सरकार भी किसानों की मदद के लिए आगे आई है और शेडनेट हाउस के निर्माण पर 70 प्रतिशत तक की भारी सब्सिडी दे रही है। सब्सिडी का गणित और वित्तीय सहायता की सीमा शेडनेट हाउस लगाने के लिए सरकार द्वारा दी जाने वाली सब्सिडी की गणना एक विशेष आधार पर की जाती है। इसके तहत विभाग द्वारा तय की गई इकाई लागत या विभाग से मान्यता प्राप्त फर्म की ओर से दी गई दरों में से जो भी राशि कम होगी, उसी के आधार पर अनुदान तय किया जाता है। इस योजना के अंतर्गत एक किसान को अधिकतम 4000 वर्गमीटर क्षेत्र तक के शेडनेट हाउस के निर्माण पर सब्सिडी दी जा सकती है। श्रेणी के आधार पर सब्सिडी की दरें अलग-अलग तय की गई हैं। सामान्य वर्ग के किसानों के लिए सरकार 50 प्रतिशत तक की सब्सिडी देती है। वहीं अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति वर्ग से आने वाले किसानों को सरकार की ओर से 70 प्रतिशत तक की बड़ी वित्तीय सहायता दी जाती है। इसके अतिरिक्त, राज्य के सभी लघु और सीमांत किसानों के साथ-साथ अधिसूचित जनजाति क्षेत्र के किसानों को प्रोत्साहन देने के लिए 25 प्रतिशत की अतिरिक्त सब्सिडी का लाभ भी दिया जाता है। शेडनेट हाउस तकनीक के बड़े फायदे और फसलें कृषि विशेषज्ञ दिनेश जाखड़ के अनुसार, शेडनेट हाउस खेती के लिए एक नियंत्रित वातावरण तैयार करता है। इस ढांचे के भीतर धूप की तीव्रता और तापमान को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है, जिससे फसलों पर बाहर के खराब मौसम का कोई बुरा प्रभाव नहीं पड़ता। अनुकूल माहौल मिलने के कारण पौधों का विकास तेजी से और बेहतर तरीके से होता है, जिससे कुल उत्पादन में भारी बढ़ोतरी दर्ज की जाती है। सिर्फ पैदावार ही नहीं, बल्कि इस तकनीक से उगाई गई फसलों की गुणवत्ता भी बहुत शानदार होती है। शेडनेट हाउस तकनीक उन किसानों के लिए सबसे ज्यादा फायदेमंद है जो टमाटर, शिमला मिर्च, खीरा, धनिया और अन्य पत्तेदार सब्जियों की खेती करते हैं। इसके अलावा फूलों की खेती करने वाले और नर्सरी यानी पौध तैयार करने वाले किसानों के लिए भी यह तकनीक अत्यंत लाभकारी साबित होती है। बेहतर गुणवत्ता होने के कारण किसानों को अपनी उपज का बाजार में बहुत अच्छा दाम मिलने की उम्मीद बढ़ जाती है। योजना का लाभ लेने के लिए जरूरी पात्रता इस सरकारी सब्सिडी योजना का लाभ उठाने के लिए किसानों को कुछ बुनियादी पात्रता शर्तों को पूरा करना होगा। सबसे पहली शर्त यह है कि आवेदन करने वाले किसान के पास स्वयं के नाम पर कृषि योग्य भूमि का मालिकाना हक होना अनिवार्य है। इसके साथ ही, खेत में सिंचाई का एक स्थायी और विश्वसनीय स्रोत होना भी बेहद जरूरी है। चूंकि शेडनेट हाउस के भीतर फसलों को नियमित और नियंत्रित सिंचाई की आवश्यकता होती है, इसलिए पानी का पुख्ता प्रबंध होना आवश्यक है। पात्र किसान अपनी योग्यता की पुष्टि करने के बाद कृषि विभाग द्वारा अनुमोदित किसी अधिकृत फर्म के माध्यम से अपने शेडनेट हाउस की पूरी कार्ययोजना तैयार करवा सकते हैं। विभाग से स्वीकृत फर्म के जरिए काम कराने का फायदा यह होता है कि पूरी प्रक्रिया सरकारी मानकों के अनुसार पूरी होती है और सब्सिडी मिलने में किसी भी तरह की प्रशासनिक अड़चन का सामना नहीं करना पड़ता। आवेदन की पूरी प्रक्रिया और आवश्यक दस्तावेज शेडनेट हाउस सब्सिडी योजना का लाभ लेने के इच्छुक किसान अपने नजदीकी ई-मित्र केंद्र पर जाकर बहुत आसानी से ऑनलाइन आवेदन दर्ज करा सकते हैं। आवेदन प्रक्रिया को सफलतापूर्वक पूरा करने के लिए कुछ महत्वपूर्ण दस्तावेजों की आवश्यकता होती है जिन्हें पोर्टल पर अपलोड करना पड़ता है। इन जरूरी दस्तावेजों में किसान का आधार कार्ड या जनाधार कार्ड शामिल है। इसके अलावा, जमीन की मल्कियत साबित करने के लिए छह महीने से अधिक पुरानी न होने वाली जमाबंदी की नकल की आवश्यकता होती है। खेत की मिट्टी और पानी की आधिकारिक जांच रिपोर्ट भी लगानी जरूरी है ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि वहां कौन सी फसलें बेहतर तरीके से उगाई जा सकती हैं। इसके साथ ही कृषि विभाग से मान्यता प्राप्त फर्म द्वारा दिया गया कोटेशन, सिंचाई के स्थायी स्रोत का प्रमाण पत्र और यदि किसान लघु, सीमांत, अनुसूचित जाति या अनुसूचित जनजाति वर्ग से आते हैं, तो उनका संबंधित श्रेणी का वैध प्रमाण पत्र अपलोड करना होगा। अधिक मुनाफे के लिए कृषि विशेषज्ञ की सलाह कृषि विशेषज्ञ दिनेश जाखड़ ने किसानों को महत्वपूर्ण सुझाव देते हुए कहा है कि शेडनेट हाउस की स्थापना करने से पहले अपनी जमीन की स्थिति, स्थानीय बाजार की मांग और उगाई जाने वाली फसलों का सही ढंग से आकलन जरूर कर लेना चाहिए। किसानों के लिए सबसे समझदारी भरा कदम यह होगा कि वे स्थानीय मंडियों या नजदीकी बड़े शहरों में जिन सब्जियों और फूलों की मांग अधिक है, उसी के अनुसार अपनी फसल का चयन करें। ऐसा करने से उन्हें अपनी उपज को बेचने में आसानी होगी और मुनाफा भी कई गुना बढ़ जाएगा। इसके अलावा शेडनेट हाउस के भीतर आधुनिक सिंचाई प्रणालियों जैसे ड्रिप इरिगेशन का उपयोग करना, उन्नत किस्म के प्रमाणित बीजों का चयन करना और फसलों को समय पर सही मात्रा में पोषक तत्व देना बेहद जरूरी है। इन तरीकों को अपनाकर उत्पादन और आय दोनों को बहुत कम समय में दोगुना किया जा सकता है। राजस्थान में बदलते मौसम के मिजाज और खेती की लगातार बढ़ती लागत के बीच शेडनेट हाउस तकनीक किसानों की आर्थिक स्थिति को सुधारने का एक बेहद मजबूत जरिया बन सकती है। सरकारी योजना का समय पर लाभ उठाकर किसान बहुत ही कम व्यक्तिगत निवेश के साथ आधुनिक कृषि क्षेत्र में कदम रख सकते हैं। इसका आप पर असर • भारत में: यह योजना उन किसानों के लिए बेहद मददगार है जो जलवायु परिवर्तन और बेमौसम बारिश के कारण फसलों के नुकसान से परेशान हैं और आधुनिक, सुरक्षित खेती की ओर कदम बढ़ाना चाहते हैं। • राजस्थान में: राजस्थान के किसानों को इस योजना के तहत शेडनेट हाउस लगाने के लिए 70 प्रतिशत तक की भारी वित्तीय मदद मिल रही है, जिससे राज्य में कम पानी और विपरीत मौसम में भी सब्जियों और फूलों का उत्पादन बढ़ाया जा सकेगा। सवाल-जवाब 1. शेडनेट हाउस लगाने पर सरकार कितनी सब्सिडी दे रही है? सामान्य वर्ग के किसानों को 50% और SC/ST वर्ग के किसानों को 70% तक की सब्सिडी मिलती है। इसके अलावा, लघु, सीमांत और अधिसूचित जनजाति क्षेत्र के किसानों को 25% अतिरिक्त सब्सिडी दी जाती है। 2. सब्सिडी के लिए आवेदन करने हेतु अधिकतम क्षेत्रफल की सीमा क्या है? इस योजना के तहत अधिकतम 4000 वर्गमीटर तक के शेडनेट हाउस क्षेत्र के निर्माण पर सब्सिडी दी जाती है। 3. शेडनेट हाउस में कौन सी फसलें उगाई जा सकती हैं? इसमें मुख्य रूप से टमाटर, शिमला मिर्च, खीरा, धनिया, पत्तेदार सब्जियां, फूल और नर्सरी (पौध) तैयार की जा सकती है। 4. आवेदन के समय कौन से प्रमुख दस्तावेज अपलोड करने होंगे? आवेदन के लिए आधार या जनाधार कार्ड, 6 महीने से कम पुरानी जमाबंदी की नकल, मिट्टी-पानी की जांच रिपोर्ट, विभाग से अनुमोदित फर्म का कोटेशन और सिंचाई स्रोत का प्रमाण आवश्यक है। 5. क्या इस योजना के लिए सिंचाई का स्थायी स्रोत होना जरूरी है? हां, शेडनेट हाउस के भीतर फसलों को नियमित और नियंत्रित सिंचाई की आवश्यकता होती है, इसलिए खेत में सिंचाई का स्थायी स्रोत होना अनिवार्य है। https://trendkia.com/national/phasalon-ko-mausama-ki-mara-se-bachaega-shed-net-house-sarakara-de-rahi-hai-70-phisadi-taka-sabsidi-janen-avedana-ka-tarika-10473 TrendKia — Har trend, sabse pehle.